भगन्दर का घरेलू उपचार

भगन्दर क्या है? – what is fistula?

भगंदर यानी फिस्टुला (Fistula) मनुष्यों में होने वाला एक गंभीर शारीरिक रोग है। गुदा द्वार- anal में या उसके आस- पास छोटी- छोटी फुंसियां होती हैं फुंसियां कुछ समय बाद ठीक होती हैं लेकिन यह फिर से हो जाती हैं। कुछ समय बाद फुंसियां फिर से होती है लेकिन यह ठीक नहीं नही होती हैं बल्कि यह गुदा के हिस्से पर घाव बना देती हैं जिससे लाल- लाल चित्ते पड़ जाते हैं। यही से खुजली और दर्द का सिलसिला शुरु होता है जो बाद में जाकर भगंदर बन जाता है।

भगन्दर रोग बवासीर- piles के समय पर ठीक न होने पर भी हो जाता है (कुछ केस में ऐसा होता है)। भगंदर (फिस्टुला) में गुदा- anal (मल द्वार) के ठीक बगल में नली (फोड़ा जैसा) बन जाती है और गुदा- anal द्वार के अंदर और बाहर घाव पैदा करता है। यह फोड़ा कुछ दिनों में फूट जाता है और उसमें से मवाद तथा दूषित खून निकलने लगता है। यह फोड़ा कभी-कभी बहुत चौड़ा तथा गहरा होता है। इस फोड़े के कारण रोगी व्यक्ति को गुदा द्वार के आस- पास बहुत तेज दर्द होता है। कभी- कभी यह असहनीय पीड़ा पहुंचाता है।

भगन्दर के प्रकार- Types of fistula

भगन्दर यानी fistula के प्रकार की बात करें तो यह प्रमुख रुप से दो प्रकार के होते हैं।

  • अपूर्ण भगंदर- incomplete fistula
  • पूर्ण भगंदर

अपूर्ण भगंदरपूर्ण भगंदरपूर्ण भगंदर– incomplete fistula- इसमें भगंदर रोग का सिर्फ एक ही मुंह बनता है। पूर्ण भगंदर- इसमें भगंदर रोग का मुंह दो जगहों से बनता है। यह अधिक खतरनाक होता है।

भगन्दर रोग के दुष्प्रभाव- Side effects of fistula

गुदा भाग- anal side के चारों तरफ का स्थान पीला पड़ जाता है। मल द्वार के ठीक बगल में फोड़ा जैसा बन जाता है जिसमे मवाद भर जाता है और मवाद थोड़े- थोड़े समय पर रिसती (बहती) रहती है। भगंदर का ठीक समय पर इलाज न किया जाए तो यह कैंसर की तरफ बढ़ने लगता है. कुछ समय बाद यह अपना मुंह दूसरी तरफ भी बना लेता है। दोमुखी द्वार बन जाने पर अधिक कष्ट देता है। कभी- कभी ऐसी कंडिशन भी बन जाती है कि इसका मुंह जांघ के किसी हिस्से पर उभर आता है यह कंडिशन बहुत खतरनाक होती है क्योंकि इसमें मवाद, खून और दुर्गंध के साथ मल रिसने (बहने) लगता है। भगंदर रोग होने के बाद इंसान को चलने- फिरने, कुर्सी पर या किसी समतल जगह पर बैठने, पीठ के बल लेटने और लैट्रिन करते समय असहनीय पीड़ा होती है।

भगन्दर होने का कारण- Causes of fistula

भगंदर कई कारणों से हो सकता है। भगंदर होने का कोई एक विशेष कारण नहीं होता है। भगंदर होने के कारण में शामिल है:

  • गुदा- anal द्वार (मल द्वार) की ठीक से सफाई न होना।
  • गुदा- anal द्वार पर अधिक खुजला देना।
  • गुदा द्वार (मल द्वार) के बाल साफ न करना।
  • अधिक समय तक साइकिल, बाइक चलाना या ऐसी कोई भी सवारी करना जिसमे बहुत अधिक समय तक बैठे रहना पड़ता हो।
  • लंबे समय से कब्ज की प्राब्लम होना।
  • अधिक मिर्च- मसालेदार चीजें नियमित रुप से खाना।
  • गुदा द्वार पर चोट लगना।
  • किसी जगह पर बहुत अधिक समय तक बैठे रहना
  • गुदा सेक्स करने से भी भगंदर होने की संभावना बनी रहती है

डॉक्टरों द्वारा बताए गए इन कारणों से भगंदर रोग होने की संभावना अधिक रहती है, डॉक्टरों का कहना है की इसके अतिरिक्त भी कुछ कारण हो सकते हैं जिसकी वजह से भगंदर की बीमारी संभव है।

भगन्दर के लक्षण क्या होते हैं?- Fistula symptoms in Hindi

भगंदर रोग लक्षणों की बात करें तो भगंदर के निम्नलिखित लक्षण होते हैं:

  • व्यक्ति को उठते, बैठते और खांसते समय गुदा (anal) में दर्द होना।
  • लैट्रिन करते समय दर्द होना।
  • बदबूदार मल (लैट्रिन) या खून का निकलना
  • कई दिनों तक गुदा के पास दर्द और सूजन होना
  • कभी भी लैट्रिन लग जाना
  • गूदे के पास बहुत जल्दी- जल्दी फुंसी या फोड़ा होना
  • जल्दी थक जाना
  • इन्फेक्शन के कारण अधिक बुखार और ठंड लगना

ध्यान रखें भगंदर के लक्षण फिशर और भगंदर के सामान भी महसूस हो सकते हैं। भगंदर के लक्षण को अन-देखा करना भारी पड़ सकता है। इनमें से कोई भी लक्षण महसूस होने पर तुरंत भगंदर का इलाज शुरु कर देना चाहिए।

भगन्दर का इलाज- bhagandar treatment in hindi

भगंदर के इलाज- bhagandar treatment की बात करें तो भगंदर का इलाज मुख्य रुप से 4 प्रकार से हो सकता है। इन 4 तरीकों में शामिल है – भगन्दर का घरेलू उपचार (Home remedies for Fistula), भगंदर का डॉक्टरी इलाज (medical treatment for fistula), भगंदर का होम्योपैथिक इलाज- fistula treatment in homeopath) और भगंदर का आयुर्वेदिक इलाज- fistula treatment in Ayurveda। आइए समझते हैं की भगन्दर का घरेलू उपचार- Home remedies for Fistula क्या है?

भगन्दर का घरेलू उपचार- Home remedies for Fistula

भगंदर एक ऐसी बीमारी है जिसका ठीक समय पर उपचार न किया जाए तो यह गंभीर समस्या खड़ी कर देती है। इंसान का चलना- फिरना, कही आना- जाना बिल्कुल बंद हो जाता है। काम छूट जाता है। इंसान बिल्कुल चिड़चिड़ा हो जाता है। इन समस्याओं से बेहतर है कि भगंदर को घरेलू उपचार (bhagandar ka gharelu ilaj) के जरिए कम समय में ठीक कर लेना चाहिए।

भगन्दर के घरेलू उपचार में निम्नलिखित इलाज शामिल है:

  • शरीर में फाइबर की मात्रा संतुलित करें- भगंदर में कब्ज हो जाती है। कब्ज दूर करने के लिए फाइबर खाना चाहिए। फाइबर बढ़ाने के लिए शाकाहारी भोजन बेहतर विकल्प है। भगंदर रोग के दौरान मांसाहारी भोजन कम खाना चाहिए।
  • गुनगुने पानी से सिकाई करें- भगंदर होने पर गुदा भाग (anal side) पर गुनगुने पानी से सिकाई करना फ़ायदेमंद रहता है। यह भगंदर के दौरान लाभदायक साबित होता है।
  • नीम की पत्ती का उपयोग- भगंदर भगाने में यह रामबाण औषधि है। नीम की पत्तियों का कई तरह से उपयोग किया जा सकता है:

नीम का लेप – नीम की पत्तियों को उबालकर कर उस पानी से (जिसमे नीम उबाला गया हो) भगंदर को धोना चाहिए। उबली हुई नीम की पत्तियों का पेस्ट बनाकर भगंदर पर लगाने से लाभ मिलता है।

नीम और देशी घी का लेप– यह लेप बहुत कारगर होता है। इसमें नीम की पत्ती, देशी घी और तिल बराबर मात्रा में पीस लेने के बाद उसमे जौ का आटा मिलाकर उसका लेप बनाइए। अब इस लेप को किसी कपड़े में बाँध कर भगंदर के स्थान पर बांधिए। इस विधि द्वारा दर्द से बहुत जल्द आराम मिलता है और भगंदर पूरी तरह से ठीक होने की संभावना बहुत अधिक बढ़ जाती है।

  • अनार के पत्ते का उपयोग- अनार के पत्ते को पानी में उबाल लेने के बाद उस पानी से फिस्टुला धोने से बहुत अधिक लाभ प्राप्त होता है।
  • केला और कपूर का उपयोग- पके केले के बीच में चीरा लगा कर उस चीरे वाली जगह पर कपूर रखकर खाना चाहिए, इससे आराम मिलता है। ध्यान देने वाली बात: इस केले को खाने से एक घंटे पहले और खाने के एक घंटे बाद कुछ नहीं खाना चाहिये।
  • काली मिर्च का उपयोग- लाजवंती और काली मिर्च के उपयोग से राहत मिलती है। काली मिर्च और लाजवंती का उपयोग पीसकर लेप बनाने और उस लेप को फिस्टुला के स्थान पर लगाने में किया जाता है।
  • लहसुन का उपयोग- लहसुन जीवाणु खत्म करने की बेहतरीन दवा है। लहसुन को पीसकर घी में भुन लेना चाहिए और फिर उसे भगंदर पर लगाना चाहिए।
  • त्रिफला का उपयोग- भगंदर में त्रिफला बहुत उपयोगी होता है। त्रिफला क्काथ से धोने के बाद उसपर बिल्ली या कुत्ते की हड्डी का चूर मिलाकर भगंदर पर लगाने से बहुत राहत मिलती है।
  • गूलर और कांच नार का उपयोग- गूलर के फूल और कांच नार की पत्ती को पीसकर गोली बनाइए और दिन में दो बार गरम पानी के साथ लेने पर भगंदर को ठीक होने में टाइम नहीं लगता।
  • मनार के दूध का उपयोग- मनार के दूध में रुई भीगा कर रख ले, अब इस रुई को किसी मिट्टी के दिये या हांडी में सरसों के तेल के साथ जलाएं। जब रुई जलने लगे तब किसी मिट्टी के बर्तन में काजल बना ले। इस काजल को भगंदर पर लगाने से बहुत लाभ मिलता है।
  • हल्दी और मनार का उपयोग- हल्दी में मनार का दूध मिलाकर अच्छी तरह से पिस लेना चाहिए, अब थोड़ा सा सूखने पर उसे भगंदर के स्थान पर लगाने से राहत मिलती है।

भगन्दर के दौरान क्या नहीं खाना चाहिए

  • माँस- भगंदर के दौरान माँस, मछली इत्यादि जैसे भोज्य पदार्थों के सेवन से बचना चाहिए।
  • भगंदर के दौरान अधिक तैलीय यानी जिस खाना में अधिक तेल, रिफाइन इत्यादि का उपयोग किया गया हो उससे बचना चाहिये।
  • भगंदर में अधिक मसालेदार चीजें खाने से परहेज करना चाहिए।

अब तब आपने भगन्दर का घरेलू उपचार हिंदी में-Home remedies for Fistula में अच्छी तरह समझ लिया होगा। अगर आप या आपके कोई परिचित भगंदर की समस्या से पीड़ित हैं तो उन्हें भगंदर के घरेलू उपचार- Home remedies for Fistula बताने और अपनाने के साथ ही साथ डॉक्टर से सलाह लेने के लिए बहुत प्रेरित करें. भगंदर बीमारी में डॉक्टर से सलाह ले लेना उचित होता है क्योंकि परेशानी ज्यादा होने की स्थिति में एक मात्र आपरेशन ही चारा बचता है। आपरेशन से बचने के लिए डॉक्टर से एक बार सलाह ज़रुर लेना चाहिए।

भगन्दर रोग के डॉक्टर के लिए आपको कही भटकने की जरूरत नही है। प्रिस्टिन केयर (Pristyn Care) के पास सभी तरह की भगंदर को जड़ से खत्म करने वाले डॉक्टरों की पूरी टीम उपलब्ध है।

प्रिस्टिन केयर (Pristyn Care) के पास अनुभवी डॉक्टरों की टीम आपकी सेवा के लिए सदैव तत्पर रहती है। यहां पर इलाज के लिए एडमिशन से लेकर इलाज के बाद डिस्चार्ज तक की बेहतरीन सुविधा प्राप्त होती है। प्रिस्टिन केयर (Pristyn Care) द्वारा वर्तमान में कई शहरों में सेवा प्रदान की जा रही है।

प्रिस्टिन केयर (Pristyn Care) से ही क्यों कराएं अपना इलाज

प्रिस्टिन केयर (Pristyn Care) से भगन्दर का इलाज कराने के कई फायदे हैं, जैसे:

  • मरीज़ का ख्याल:- मरीज़ को अपने आप कुछ नही करना पड़ता है। प्रिस्टिन केयर (Pristyn Care) के कर्मचारी मरीज़ की पर्ची बनवाने से लेकर खाने का मैनेजमेंट तक सब काम करते हैं।
  • बेहतरीन इलाज:- प्रिस्टिन केयर (Pristyn Care) में बेहद उम्दा और अनुभवी डॉक्टरों की टीम कार्यरत है जो मरीज़ों को एक एहसास दिलाती है कि अब बीमारी दूर होने वाली है।
  • उच्च टेक्नोलॉजी का उपयोग:- प्रिस्टिन केयर (Pristyn Care) में उच्च टेक्नोलॉजी से बनी मशीनों से इलाज किया जाता है जिससे मरीज़ को दर्द का एहसास तक नही होता।
  • बेहतरीन सुविधा:- बेहतरीन सुविधाओं में शामिल है- एक दिन के अंदर डिस्चार्ज, कोई EMI कॉस्ट नही, आपरेशन के बाद निःशुल्क फालोअप और आपरेशन कराने वाले मरीज़ों के आने और जाने के लिए निःशुल्क वाहन सुविधा।

अगर आप को या आपके किसी भी परिचित को भगन्दर की बीमारी है तो भगंदर का घरेलू उपचार- Home remedies for Fistula करने के साथ ही साथ समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए प्रिस्टिन केयर (Pristyn Care) की सुविधा प्राप्त कर सकते हैं।

2 thoughts on “भगन्दर का घरेलू उपचार”

  1. My fistula developed because of another problem which was piles. I tried various home remedies for curing the fistula. But the problem remained the same. Then I underwent laser surgery from Pristyn Care. There was no pain or any discomfort. I followed the recovery tips provided by the doctor during discharge. I even recovered within a week.

  2. मेरा भगन्दर कई इलाज के बाद भी बढ़ता जा रहा था| मैंने गूगल पर ‘home remedies for fistula in hindi’ सर्च किया और इस जगह पर आ गया और फिर मैंने अच्छी तरह से पूरे आर्टिकल को पढ़ा इसके बाद मुझे यह पता चला की भगंदर होने पर हमें जितना ध्यान दवाई पर देना होता है उससे कहीं ज्यादा खान पान पर संयम बरतना पड़ता है| इसलिए, मैंने अपने खान-पान में परिवर्तन किया और ऊपर बताई गई नीम और देसी घी वाले नुस्खे को आजमाना शुरू किया. कुछ ही दिनों में चमत्कार हो गया और मेरा भगंदर परसों काफी हद तक सूख गया था. आशा करता हूँ कि कुछ ही दिनों में यह पूरी तरह से सूख जाएगा…

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