Enlarged Prostate in Hindi

किशन को प्रोस्टेट से जुड़े कई लक्षण नजर आने लगे थे लेकिन, उन्हें यह नहीं पता था कि उनका प्रोस्टेट वाकई में बढ़ रहा है| किशन कहते हैं “ मैंने ईन्टरनेट में प्रोस्टेट बढ़ने से जुड़े कई प्रश्नों को सर्च किया| लेकिन, जवाब से मैं संतुष्ट नहीं हो पा रहा था तब मैंने प्रोस्टेट से जुड़े डॉक्टर के  बारे में सर्च किया और मेरी मुलाक़ात Pristyn Care के सीनियर डॉक्टर रोहित से हुई”|

डॉक्टर रोहित से किशन ने बहुत से प्रश्न किये| किशन ने उनसे प्रोस्टेट बढ़ने के लक्षण, कारण और इलाज के बारे में पूछा| जिसका जवाब डॉक्टर रोहित ने बड़े आसान शब्दों में दिया जिसे नीचे बताया गया है| डॉक्टर रोहित ने सबसे पहले किशन को प्रोस्टेट के बारे में समझाना शुरू किया| 

डॉक्टर रोहित किशन को बताते हैं कि “प्रोस्टेट हमारे शरीर में मौजूद एक ग्लैंड (gland) है जिसका मुख्य कार्य एक तरह के fluid को उत्पन्न करना होता है। इसी पदार्थ के माध्यम से शुक्राणु इजाकुलेशन (Ejaculation) के दौरान इजाकुलेट (Ejaculate) होते हैं। प्रोस्टेट ग्लैंड को पौरुष ग्रंथि भी कहा जाता है। यह हमारे मूत्राशय के चारों ओर फैली हुई होती है।”

प्रोस्टेट ग्लैंड (Prostate gland ) के लगातार बढ़ने की समस्या अधिकतर उन लोगों में देखी जाती है जिनकी उम्र 40 से ज्यादा होती है। उम्र बढ़ने के साथ-साथ हर पुरुष का प्रोस्टेट ग्लैंड (Prostate gland) बढ़ने लगता है। अगर इसका आकार बहुत बड़ा हो जाता है तो यह मूत्र मार्ग में ब्लॉकेज (Blockage) पैदा कर सकता है। ऐसा होने पर पेशाब से संबंधित परेशानियों और किडनी रोग का खतरा बढ़ जाता है। असामान्य तरीके से बढ़े हुए प्रोस्टेट ग्लैंड को Benign prostate enlargement अथवा BPH कहा जाता है।

एक नजर

  • बढ़े हुए प्रोस्टेट का इलाज करने के लिए लेज़र थेरेपी सबसे बढ़िया विकल्प है
  • प्रोस्टेट ग्लैंड के बीमार होने पर शरीर के कई कार्य प्रभावित हो सकते हैं

पौरुष ग्लैंड बढ़ने के लक्षण – Symptoms of Prostate Gland enlargement in Hindi:

  • दिन में 8 से 10 बार या फिर इससे अधिक पेशाब आना
  • पेशाब करने के बाद बूंद-बूंद पेशाब टपकना
  • पेशाब को थोड़ी समय भी ना रोक पाना
  • सोते वक्त भी बार-बार पेशाब लगने की समस्या
  • मूत्र त्याग के वक्त तेज दबाव और दर्द का आभास होना
  • पेशाब के रंग में बदलाव या फिर अजीब तरह की गंध निकलना
  • पेशाब करने के बाद मूत्र मार्ग में तेज दर्द
  • स्खलन के बाद असहनीय दर्द उत्पन्न होना

पौरुष ग्रंथि के अनियमित बढ़ने पर हमें और भी कई बीमारियाँ हो सकती हैं। मूत्राशय में पेशाब भरे रहने के कारण मूत्र मार्ग में संक्रमण भी हो सकता है। इसके अलावा एक्यूट यूरिनरी रिटेंशन (Acute urinary retention), पेशाब में खून आने की समस्या और मूत्राशय में स्टोन की समस्या भी हो सकती है।

प्रोस्टेट ग्लैंड बढ़ने के कारण: Causes of Prostate Gland enlargement in hindi:

उम्र के बढ़ने के साथ प्रोस्टेट ग्रंथि के आकार में भी बढ़ोतरी होती है और इसे सामान्य मान लिया जाता है। पुरुषों में दो तरह के हॉरमोन्स, ‘टेस्टोस्टेरोन (Testosterone)’ और ‘एस्ट्रोजन (Estrogen)’ का निर्माण होता है। टेस्टोस्टेरोन मेल हॉरमोन (Male hormone) है जबकि, एस्ट्रोजन फीमेल हॉरमोन है। पुरुषों में सामान्य रूप से टेस्टोस्टेरोन हॉरमोन, एस्ट्रोजन के मुकाबले ज्यादा उत्पन्न होता है। उम्र बढ़ने के साथ-साथ हमारे रक्त में मेल हॉरमोन की कमी होती जाती है और एस्ट्रोजन की मात्रा लगातार बढ़ती जाती है। एस्ट्रोजन का रेशिओ (Ratio) बढ़ने के कारण प्रोस्टेट ग्लैंड की कोशिकाएं भी बढ़ने लगती हैं। यही कारण है कि अधिक उम्र होने पर पौरुष ग्रंथि अनचाहे रूप से बढ़ती है। 

 

  • अगर परिवार में किसी को BPH की समस्या है तो यह आप में भी हो सकती है इसलिए लक्षण नजर आने पर बिना देरी किए डॉक्टर से मिलें।
  • पौरुष ग्रंथि बढ़ने के और भी कई कारण हो सकते हैं लेकिन, इन कारणों का पता अब तक नहीं लग पाया है। यही वजह है कि एस्ट्रोजन हॉरमोन के बढ़ते रेशिओ (Ratio) को इसका मुख्य कारक माना जाता है।
  • हृदय रोग, टाइप 2 डायबिटीज, असामान्य ब्लड प्रेशर (Blood pressure) या फिर अधिक मोटापा होने पर भी पौरुष ग्रंथ का आकार बढ़ने लगता है।
  • कभी व्यायाम न करने वाले व्यक्ति में भी यह समस्या देखने को मिल सकती है।

 

प्रोस्टेट ग्लैंड बढ़ने का परीक्षण – Diagnosis Of Prostate Gland Enlargement in Hindi:

बढ़े हुए प्रॉस्टेट ग्लैंड (Prostate Gland) का पता लगाने के लिए डॉक्टर कई तरह के सवाल जवाब और परीक्षण कर सकते हैं-

यूरिन टेस्ट (Urine Test)

इस टेस्ट में आपके पेशाब की जांच की जाती है और उन लक्षणों का पता लगाया जाता है जो पौरुष ग्रंथि बढ़ने के दौरान उत्पन्न होते हैं।

PSA- प्रोस्टेट स्पेसिफिक एंटीजन टेस्ट (Prostate Specific Antigen Test)

‘PSA’ एक तरह का पदार्थ है जो हमारे प्रोस्टेट ग्लैंड (Prostate Gland) में पाया जाता है। प्रोस्टेट ग्लैंड के बढ़ने के साथ इसकी मात्रा में भी इजाफा होता है। हालांकि प्रोस्टेट कैंसर होने पर भी इसकी मात्रा बढ़ जाती है, इसलिए यह टेस्ट करवाना बहुत आवश्यक है।

डिजिटल रेक्टम टेस्ट (Digital rectum test)

इस टेस्ट में आपके मलाशय में उंगली डालकर पौरुष ग्रंथि के आकार का पता लगाया जाता है।

ब्लड टेस्ट (Blood test)

ब्लड टेस्ट के माध्यम से गुर्दे की समस्याओं का पता लगाया जाता है। पौरुष ग्रंथि के बढ़ने के लक्षण नजर आने पर यह टेस्ट जरूरी हो जाता है।

यूरिनरी फ्लो टेस्ट (Urinary flow test)

इस टेस्ट के माध्यम से आपके पेशाब की मात्रा और उसके बहाव का परीक्षण किया जाता है। एक ‘रिसेप्टेकल (Receptacle)’ मशीन से जुड़ा हुआ होता है। इस रिसेप्टेकल में पेशाब करने के बाद सारी जानकारियाँ मशीन के माध्यम से पता लगाई जाती है।

ट्रांसरेक्टल अल्ट्रासाउंड टेस्ट (Transrectal ultrasound test)

इस टेस्ट में आपके मलाशय में अल्ट्रासाउंड जांचक डाला जाता है और यह प्रोस्टेट ग्रंथि के आकार का पता लगाता है। 

प्रोस्टेट बॉयोप्सी टेस्ट (Prostate Biopsy Test)

इसमें आपके प्रोस्टेट ग्रंथि के टिश्यू (Tissue) को ट्रांसरेक्टल (Transrectal) के द्वारा निकाला जाता है। इससे ग्रंथि का परीक्षण होता है और कैंसर के बारे में पता चलता है। 

यूरो डायनमिक और प्रेशर फ्लो टेस्ट (Euro dynamic and pressure flow test)

इस टेस्ट में आपके मूत्राशय के अंदर पानी या फिर हवा का प्रयोग कर दबाव को मापा जाता है। इससे यह पता लगाया जाता है कि आपके मूत्राशय की मसल्स (Muscles) किस तरह कार्य कर रही हैं।

सिस्टोस्कोपी टेस्ट (Cystoscopy test)

इस टेस्ट में आपके मूत्राशय के अंदर एक ट्यूब भेजी जाती है जिसमें कैमरा और टॉर्च रहता है। इससे आपके मूत्र मार्ग और मूत्राशय के अंदर देखकर स्थिति का पता लगाया जा सकता है।

 

प्रोस्टेट ग्लैंड के बढ़ने का बचाव – Prevention of enlargement of the prostate In Hindi:

  • पुरुषों को जब बेचैनी सताती है या फिर तनाव में रहते हैं तो वह पानी और शराब का अधिक सेवन करने लगते हैं। इससे बार-बार पेशाब जाने की जरूरत होती है जो हानिकारक है। तनाव और बेचैनी से दूरी बनाने के लिए व्यायाम करना सरल उपाय है।
  • पेशाब करते वक्त ज्यादा जोर न लगाएं और थोड़ी अधिक देर तक पेशाब करें। पेशाब करने के बाद आपका मूत्राशय पूरी तरह से खाली हो जाना चाहिए।
  • एंटीबायोटिक का सेवन न करें और दिन में दो से तीन लीटर पानी पीयें|
  • कई दवाइयों के सेवन से प्रोस्टेट ग्लैंड बढ़ने की समस्या होती है। ऐसे में आपको डॉक्टर से चर्चा अवश्य करनी चाहिए। डॉक्टर से उन दवाइयों की खुराक कम कराएं या फिर दवाई खाने के समय में बदलाव करें। 
  • रात में शराब का सेवन बिल्कुल ना करें। इसके अलावा कैफीन (caffeine) युक्त पदार्थ भी ना खाएं। इस तरह के पदार्थ हमारे किडनी को मूत्र का उत्पादन करने के लिए प्रेरित करते हैं और मूत्राशय के मांसपेशियों पर भी प्रभाव डालते हैं। ऐसे पदार्थों के सेवन से रात में बार-बार पेशाब जाना पड़ता है।

प्रोस्टेट ग्लैंड बढ़ने का इलाज – Treatment of prostate gland enlargement in hindi

पुरुष ग्रंथि बढ़ने के इलाज में कई सारी थेरेपीज (Therapies) और मेडिकेशन (Medication) शामिल हैं। कौन सा इलाज आपके लिए बेहतर हो सकता है, यह कुछ कारणों पर निर्भर करता है, जैसे-

  • आपकी उम्र
  • पौरुष ग्रंथि का आकार
  • कौन और किस तरह की परेशानियां होती हैं?
  • बॉडी हेल्थ

बढ़े हुए प्रोस्टेट का मेडिकेशन इलाज – Medication Treatment of enlarged Prostate in hindi

पौरुष ग्रंथि बढ़ने के अधिकतर मामलों को दवाइयों के माध्यम से ही ठीक किया जा सकता है। बहुत से मामलों में तो उपचार की जरूरत भी नहीं होती और यह स्वयं ही सामान्य हो जाते हैं। कई तरह के मेडिकेशन इलाज बढ़े हुई प्रोटेस्ट ग्लैंड को ठीक कर सकते हैं जो इस प्रकार हैं-

 

  • अल्फा रिडक्टेस इनहिबिटर (Alpha reductase inhibitors)

 

यह दवाइयाँ सीधा उन हॉरमोन पर असर करती है जो प्रोस्टेट ग्लैंड को बढ़ाते हैं। जिससे प्रोस्टेट ग्रंथि का आकार सामान्य हो जाता है।

 

  • अल्फा ब्लॉकर (alpha blocker)

 

इन दवाइयों के सेवन से ग्रंथि और मूत्राशय के टिश्यू को ढीला किया जा सकता है। इससे रोगी को बहुत राहत मिलती है। 

 

  • कांबिनेशन ड्रग थेरेपी (Combination Drug Therapy)

 

अगर ऊपर बताई गई कोई भी दवाइयाँ असर नहीं दिखाती है तो कंबीनेशन ड्रग थेरेपी इस्तेमाल में लाई जाती है। इस थेरेपी में अल्फा रिडक्टेस इनहिबिटर (Alpha reductase inhibitors) और अल्फा ब्लॉकर (alpha blocker) दोनों को साथ में प्रयोग किया जाता है।

 

प्रोस्टेट बढ़ने का सर्जिकल थेरेपी से इलाज – Treatment of Enlarged Prostate With Surgical Therapy

सर्जरी के माध्यम से भी पौरुष ग्रंथि के बढ़ रहे आकार को कम किया जा सकता है। प्रोस्टेट के आकार को सही करने के लिए कुछ ख़ास सर्जरी को प्रयोग में लाया जाता है जिनका जिक्र हम नीचे कर रहे हैं।

  • ट्रांसयूरेथरल रिसेक्शन ऑफ प्रोस्टेट (Transurethral resection of prostate)

इस सर्जरी में लाइटेड स्कोप (Lighted scope) को आपके मूत्र मार्ग में डाला जाता है और सर्जरी की जाती है। इसमें आपके आउटर प्रोस्टेट (Outer Prostate) के हिस्से को पूरी तरह से निकाल दिया जाता है। सर्जरी के बाद मूत्र का तेज बहाव देखने को मिल सकता है। इस सर्जरी के बाद पेशाब करने के लिए कैथिटर (Catheter) को प्रयोग में लाया जाता है। 

  • ट्रांसयूरेथरल चीरा (Transurethral incision)

इस सर्जरी का इस्तेमाल उन समस्याओं में किया जाता है जिनमें पौरुष ग्रंथि का आकार ज्यादा बड़ा नहीं होता। सर्जन लाइटेड स्कोप को मूत्र मार्ग में डालता है और प्रोस्टेट में छोटे-छोटे चीरा लगा देता है। ऐसा करने के बाद मूत्र आसानी से निकल पाता है और अधिक दबाव भी नहीं बनता।

    • ट्रांसुरेथरल माइक्रोवेव थर्मो थेरेपी 

इस थेरेपी में मूत्र मार्ग से एक इलेक्ट्रोड प्रोस्टेट (Electrode prostate) को पहुंचाया जाता है जिनमें माइक्रोवेव थर्मल एनर्जी (Microwave thermal energy) होती है। यह एनर्जी अंदर से ही प्रोस्टेट के बढ़े हुए आकार को खत्म करके छोटा बना देती यह सर्जरी स्थाई नहीं होती है। यानी, इस सर्जरी के बाद भी उपचार की आवश्यकता हो सकती है। यह थेरेपी आसान है और इसका उपयोग तब किया जाता है जब ग्रंथि का आकार ज्यादा बड़ा न हो।

  • ओपन प्रोस्टेटक्टोमी (Open prostatectomy)

इस सर्जरी के दौरान सर्जन पेट के निचले हिस्से में चीरा लगाता है और पौरुष ग्रंथि तक पहुंच कर बढ़े हुए टिश्यू को खत्म कर देता है। यह सर्जरी तब इस्तेमाल में लाई जाती है जब प्रोस्टेट का इलाज मूत्र मार्ग से किया जाना संभव ना हो या फिर ग्रंथि का आकार बहुत बड़ा हो गया हो।

  • ट्रांसयूरेथरल नीडल एब्लेशन (Transurethral needle ablation)

इसमें पुरुष के प्रोस्टेट ग्लैंड तक एक सुई भेजी जाती है जिसके माध्यम से रेडियोएक्टिव (Radioactive) लाइट को भेजा जाता है। इससे अनचाहे टिश्यू को नष्ट कर दिया जाता है।

सर्जिकल थेरेपी (Surgical Therapy) का इस्तेमाल करना है या नहीं यह कुछ कारकों पर निर्भर करता है। जैसे- 

  • इस थेरेपी का इस्तेमाल तभी किया जाएगा जब समस्या गंभीर हो
  • सभी दवाइयों का इस्तेमाल कर लेने के बावजूद आराम ना मिल रहा हो
  • मूत्राशय में पथरी, किडनी में समस्या या फिर मूत्र मार्ग के ब्लॉक होने पर
  • अगर आप खुद सर्जिकल थेरेपी से बढ़ रहे प्रोस्टेट ग्लैंड का इलाज कराना चाहते हों

 

कुछ ऐसे कारक भी है जिनके होने पर सर्जिकल थेरेपी बिल्कुल भी नहीं की जा सकती:

  • अगर आप पहले से प्रोटेस्ट रेडिएशन थेरेपी (Prostate Radiation Therapy) करा चुके हैं या फिर मूत्र मार्ग की सर्जरी करा चुके हैं तो सर्जिकल थेरेपी से आपका इलाज नहीं किया जा सकता है।
  • मूत्राशय में संक्रमण होने पर 
  • अगर आप किसी न्यूरोलॉजिकल (Neurological) बीमारी से ग्रसित हैं तब भी इस थेरेपी से इलाज नहीं किया जा सकता।

 

लेज़र थेरेपी से करें प्रोस्टेट बढ़ने का इलाज – Treat prostate enlargement with laser therapy

इस थेरेपी में हाई एनर्जी लेज़र को प्रोस्टेट पर दागा जाता है और टिश्यू को नष्ट किया जाता है। यह थेरेपी बहुत ही आसान है और इसमें साइड इफेक्ट्स का ज्यादा खतरा भी नहीं रहता है। इलाज के लिए यह थेरेपी केवल तब अपनाई जा सकती है जब पहले से कोई अन्य इलाज ना किया गया हो। लेज़र थेरेपी से इलाज करने में दो प्रोसीजर (Procedure) अपनाए जाते हैं।

 

  1. इनूक्लिएटिव प्रोसीजर (enucleation procedure)- इस लेज़र थेरेपी में उन tissues को पूरी तरह से हटा दिया जाता है जो पेशाब मार्ग में ब्लॉकेज (Blockage) उत्पन्न करते हैं। यह थेरेपी आगे भी अनचाहे tissue को पनपने से रोकती है। आपको प्रोस्टेट कैंसर है या नहीं यह पता करने के लिए निकाले गए टिश्यू का टेस्ट किया जाता है। 
  2. एब्लेटिव प्रोसीजर (Ablative procedure)– इसमें अनचाहे Tissue का वाष्पीकरण कर दिया जाता है जिससे अवरुद्ध मूत्र मार्ग से राहत मिलती है और मूत्र प्रवाह पहले से बेहतर हो जाता है। 

‘लेज़र ट्रीटमेंट’ उपचार का सबसे बढ़िया आप्शन है जो दर्द रहित होता है और व्यक्ति का इलाज करने में ज्यादा समय नहीं लगता है। बढ़े हुए प्रोस्टेट का इलाज लेज़र ट्रीटमेंट के जरिए कराने के लिए ‘Pristyn Care’ एक बढ़िया विकल्प है जो आपके इलाज को सरल बना सकता है।

प्रोस्टेट बढ़ने का घरेलू इलाज, उपाय और नुस्खे – Prostate enlargement home remedies and tips in Hindi:

डॉक्टर रोहित कहते हैं “प्रोस्टेट ग्लैंड हमारे शरीर का एक प्रमुख ग्लैंड हैं जो शरीर के कई कार्य में अपना योगदान निभाता है। प्रोस्टेट के बीमार होने पर शरीर को बहुत सी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए, इसका इलाज घरेलू नुस्खे के भरोसे छोड़ देना पूरी तरह से अनुचित है। अगर प्रोस्टेट बढ़ने के लक्षण नजर आते हैं तो रोगी को तुरंत ही चेक-अप (Check-up) के लिए जाना चाहिए और अगर रोग पाया जाता है तो डॉक्टर के मुताबिक़ अपना इलाज जारी रखना चाहिए।”

प्रोस्टेट बढ़ने के साइड इफेक्ट्स – Side effects of enlarged prostate

बढ़ी हुई पौरुष ग्रंथि के इलाज के बाद रोगी को एक हफ्ते तक आराम करना चाहिए। दौड़-भाग या फिर वजनी चीजों को नहीं उठाना चाहिए। इलाज के बाद किसी भी चीज का जरूरत से अधिक सेवन न करें। प्रोस्टेट के इलाज के बाद आप में कुछ साइड इफेक्ट्स भी नजर आ सकते हैं- 

  • बढ़ी हुई प्रोस्टेट ग्रंथि के इलाज के बाद कभी-कभी स्खलन से संबंधित साइड इफेक्ट देखने को मिलता है। स्खलन के दौरान वीर्य बाहर न आकर मूत्राशय में जमा हो जाता है। इसे प्रतिगामी स्खलन कहते हैं जो कि एक गंभीर समस्या है। 
  • इलाज के बाद कई बार हम मूत्राशय से अपना नियंत्रण खो देते हैं।
  • इलाज के बाद मूत्र मार्ग में संक्रमण भी हो सकता है।
  • सेक्स से जुड़ी समस्याएँ देखने को मिल सकती हैं।

प्रोस्टेट लेज़र ट्रीटमेंट के लिए आखिर ‘Pristyn Care’ ही क्यों?

  • प्रशिक्षित डॉक्टर की टीम- प्रोस्टेट लेज़र ट्रीटमेंट के लिए हमारे पास एक्सपीरियंस्ड (Experienced) डॉक्टर की टीम है, जो इलाज के दौरान रोगी के सेहत का पूरा ख़याल रखते हैं।
  • एडवांसड टेक्नोलॉजी से होता है ट्रीटमेंट- हमारे डॉक्टर लेज़र ट्रीटमेंट के लिए एडवांसड टेक्नोलॉजी (Advanced Technology) का प्रयोग करते हैं जिससे प्रोस्टेट का इलाज और भी आसान हो जाता है।
  • अपने शहर में करा सकते हैं ट्रीटमेंट- हमारे डॉक्टर 10 से ज्यादा शहरों में मौजूद हैं। इसलिए, आपको ट्रीटमेंट के लिए ज्यादा दूर जाने की आवश्यकता नहीं होगी।
  • फ्री फॉलो अप- हम अपने मरीज़ों को फ्री फॉलो अप (Follow up) की सुविधा भी प्रदान करते हैं। इसके साथ मरीज़ के आने जाने का ख़र्चा भी हम ही उठाते है।
  • इंश्योरेंस की सुविधा- हमारी इंश्योरेंस (Insurance) टीम के जरिये आप प्रोस्टेट का लेज़र ट्रीटमेंट 100% की छूट पर करा सकते हैं।

 

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