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कार्पल टनल सिंड्रोम एक सामान्य शारीरिक बीमारी है, जिससे पीड़ित होने पर हाथ सुन्न पड़ जाते हैं और उसमें झनझनाहट होती है। इस बीमारी की स्थिति में मीडियन नर्व पर अधिक दबाव पड़ता है। मीडियन नर्व एक मुख्य नस है, जो कंधे से लेकर कलाई तक जाती है।

कलाई में मौजूद यह नर्व हाथ के काम करने की क्रिया को नियंत्रित करती है। साथ ही, किसी भी चीज को महसूस करने की क्षमता भी प्रदान करती है। यह नर्व कलाई के जिस हिस्से से हाथ में प्रवेश करती है, उसे मेडिकल की भाषा में कार्पल टनल कहा जाता है।

कार्पल टनल एक पतली नली की तरह होता है। जब इसमें किसी प्रकार की सूजन होती है तो यह मीडियन नर्व को प्रभावित करता है। जब इस नर्व पर अधिक दबाव पड़ता है और यह दब जाता है तो इस स्थिति को कार्पल टनल सिंड्रोम कहा जाता है।

कार्पल टनल सिंड्रोम का इलाज कैसे किया जाता है — Treatment Of Carpal Tunnel Syndrome In Hindi

कार्पल टनल का इलाज कई तरह से किया जाता है। इसमें स्पिलिंटिंग, दवाएं और कॉर्टिकॉस्टेरॉइड्स आदि शामिल हैं। इन सभी उपायों की मदद से कार्पल टनल सिंड्रोम के लक्षणों को काफी हद तक कम और इस बीमारी का प्रभवशाली इलाज किया जा सकता है।

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अगर मीडियन नर्व पर हल्का-फुल्का दबाव पड़ रहा है तो ऊपर बताए गए इलाज के माध्यम से इस समस्या का इलाज संभव है। लेकिन जब इन सबसे कोई फायदा नहीं होता है तो डॉक्टर सर्जरी का सुझाव देते हैं। सर्जरी की मदद से कार्पल टनल सिंड्रोम का परमानेंट इलाज किया जा सकता है।

कार्पल टनल सिंड्रोम का सर्जिकल इलाज कैसे किया जाता है — Surgeries For Carpal Tunnel Syndrome In Hindi

कार्पल टनल सिंड्रोम की सर्जरी को दो तरह से किया जाता है। इसमें पहला ओपन सर्जरी और दूसरा एंडोस्कोपिक सर्जरी है। ओपन सर्जरी को पारंपरिक सर्जरी या कन्वेंशनल सर्जरी के नाम से भी जाना जाता है। कार्पल टनल सिंड्रोम की सर्जरी को Carpal Tunnel Release Surgery In Hindi कहा जाता है।

 

  • कार्पल टनल सिंड्रोम की ओपन सर्जरी — Open Surgery For Carpal Tunnel Syndrome In Hindi

 

इस सर्जरी के दौरान सर्जन मरीज की कलाई या हाथ पर एक बड़ा सा चीरा लगाते हैं। उसके बाद, कार्पल टनल को बड़ा करने और मीडियन नर्व पर पड़ रहे दबाव को कम करने के लिए लिगामेंट को काट देते हैं। सर्जरी की प्रक्रिया खत्म होने के बाद लगाए गए चीरे को टांकों की मदद से बंद कर दिया जाता है। आमतौर पर इस सर्जरी को लोकल एनेस्थीसिया के प्रभाव में किया जाता है।

 

  • कार्पल टनल सिंड्रोम की एंडोस्कोपिक सर्जरी — Endoscopic Surgery For Carpal Tunnel Syndrome In Hindi

 

इस प्रक्रिया के दौरान डॉक्टर मरीज के हाथ या कलाई में एक छोटा से चीरा लगाते हैं। फिर उस चीरे के जरिए एंडोस्कोप को कलाई के अंदर डालते हैं। एंडोस्कोप एक मेडिकल उपकरण है, जिसके एक छोर पर कैमरा लगा होता है। कैमरे की मदद से डॉक्टर तंत्रिका, लिगामेंट और टेंडन को कंप्यूटर स्किन पर देखते हैं। उसके बाद, सर्जरी को पूरा करते हैं। Surgical Treatment For Carpal Tunnel Syndrome In Hindi

कार्पल टनल सिंड्रोम की सर्जरी के बाद लिगामेंट के टिशू धीरे-धीरे दोबारा बनने शुरू हो जाते हैं, जिसके कारण नस को आवश्यक जगह मिल जाती है। सर्जरी के बाद त्वचा के ऊपरी जख्म को ठीक होने में लगभग 1-2 सप्ताह का समय लगता है। लेकिन अंदरूनी जख्म को ठीक होने में 1-2 महीने का समय लग सकता है।

कार्पल टनल सिंड्रोम की ओपन सर्जरी और एंडोस्कोपिक सर्जरी के बीच क्या फर्क है?

विशेषज्ञ का कहना है कि कार्पल टनल सिंड्रोम की ओपन सर्जरी की तुलना में एंडोस्कोपिक सर्जरी अधिक प्रभावशाली है। क्योंकि यह इसके सर्जिकल इलाज का एक आधुनिक माध्यम है। ओपन सर्जरी के दौरान और बाद में जटिलताओं का खतरा अधिक होता है। जबकि एंडोस्कोपिक सर्जरी के साथ ऐसी कोई बात नहीं है।

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कार्पल टनल सिंड्रोम की एंडोस्कोपिक सर्जरी के फायदे Benefits Of Endoscopic Surgery For Carpal Tunnel Syndrome In Hindi

एंडोस्कोपिक सर्जरी के अनेकों फायदा होने के कारण ही आज दुनिया भर में कार्पल टनल सिंड्रोम का बेस्ट सर्जिकल इलाज करने के लिए के प्रक्रिया का चुना जा रहा है। इस सर्जरी के निम्नलिखित फायदे हैं।

 

  • छोटा सा चीरा लगता है

 

ओपन सर्जरी की तुलना में एंडोस्कोपिक सर्जरी के दौरान मरीज के हाथ या कलाई में एक काफी छोटा सा चीरा लगता है। साथ ही, इस सर्जरी के दौरान ब्लीडिंग भी नहीं होती है। एंडोस्कोपिक सर्जरी कार्पल टनल सिंड्रोम का एक दर्द रहित और रक्तहिन इलाज है।

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  • एक दिन की प्रक्रिया है

 

कार्पल टनल सिंड्रोम की एंडोस्कोपिक सर्जरी एक दिन की प्रक्रिया है। इस सर्जरी के बाद के मरीज को हॉस्पिटलाइजेशन की आवश्यकता नहीं होती है। सर्जरी खत्म होने के कुछ ही घंटों के बाद मरीज को क्लिनिक या हॉस्पिटल से डिस्चार्ज कर दिया जाता है। जबकि ओपन सर्जरी के बाद मरीज को हॉस्पिटलाइजेशन की आवश्यकता पड़ सकती है।

 

  • जटिलताओं का खतरा शून्य होता है

 

कार्पल टनल सिंड्रोम की ओपन सर्जरी के दौरान बड़ा सा चीरा लगता है। इसलिए जटिलताओं का खतरा अधिक होता है। ओपन सर्जरी के दौरान लिगामेंट के अधूरा कटने, जख्म बनने, निशान पड़ने और दूसरी नसों या रक्त-कोशिकाओं को नुकसान पहुंचने का खतरा भी अधिक होता है।

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लेकिन कार्पल टनल सिंड्रोम की एंडोस्कोपिक सर्जरी के दौरान या बाद में किसी प्रकार का कोई खतरा नहीं होता है। क्योंकि एंडोस्कोपिक सर्जरी को एंडोस्कोप नामक उपकरण की मदद से किया जाता है। इस सर्जरी के दौरान लिगामेंट के अधूरा कटने, जख्म बनने, निशान पड़ने या दूसरी नसों और रक्त-कोशिकाओं को नुकसान पहुंचने का खतरा लगभग शून्य होता है। 

 

  • बेहतर रिजल्ट आता है

 

ओपन सर्जरी की तुलना में कार्पल टनल सिंड्रोम की एंडोस्कोपिक सर्जरी का रिजल्ट बेहतर आता है। यही कारण है कि आज हर कोई कार्पल टनल से छुटकारा पाने के लिए इस प्रक्रिया का चुनाव कर रहा है।

 

  • रिकवरी काफी जल्दी होती है

 

कार्पल टनल की ओपन सर्जरी की तुलना में एंडोस्कोपिक सर्जरी के बाद मरीज की रिकवरी काफी जल्दी होती है। इतना ही नहीं, रिकवरी के दौरान मरीज को किसी तरह परेशानी का सामना भी नहीं करना पड़ता है।

अगर आपको कार्पल टनल सिंड्रोम की शिकायत है और आप कम से कम समय में इसका बेस्ट सर्जिकल इलाज पाना चाहते हैं तो एक अनुभवी हड्डी रोग विशेषज्ञ से परामर्श करने के बाद एंडोस्कोपिक सर्जरी का चुनाव कर सकते हैं।

हमारे प्रिस्टीन केयर क्लिनिक में कार्पल टनल सिंड्रोम का इलाज एंडोस्कोपिक सर्जरी से किया जाता है। इस सर्जरी को एक अनुभवी, कुशल और विश्वसनीय हड्डी रोग विशेषज्ञ की देखरेख में पूरा किया जाता है। हमारे डॉक्टर को कार्पल टनल सिंड्रोम की गहरी समझ और मॉडर्न सर्जरी में सालों का अनुभव प्राप्त है।

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ये डॉक्टर अब तक कार्पल टनल सिंड्रोम की हजारों सफल एंडोस्कोपिक सर्जरी कर चुके हैं। दूसरे क्लिनिक या हॉस्पिटल की तुलना में हमारे क्लिनिक में इस सर्जरी को काफी कम खर्च में किया जाता है। इतना ही नहीं, कम से कम खर्च में कार्पल टनल सिंड्रोम की एंडोस्कोपिक सर्जरी करने के साथ-साथ अपने मरीजों को ढेरों फ्री सुविधाएं भी प्रदान करते हैं।

हमारी सुविधाओं में सर्जरी वाले दिन फ्री कैब फैसिलिटी (सर्जरी से पहले मरीज को घर से क्लिनिक लाना और सर्जरी खत्म होने के बाद क्लिनिक से वापस घर छोड़ना), सर्जरी से पहले वाले सभी जांचों पर 30% तक की छूट और सर्जरी के बाद कुछ दिनों तक डॉक्टर के साथ फ्री फॉलो-अप्स की सुविधा आदि शामिल हैं।

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डिस्क्लेमर: यह ब्लॉग सामान्य जानकारी के लिए लिखा गया है| अगर आप किसी बीमारी से ग्रसित हैं तो कृपया डॉक्टर से परामर्श जरूर लें और डॉक्टर के सुझावों के आधार पर ही कोई निर्णय लें|