गुर्दों का प्रमुख कार्य अपशिष्ट पदार्थ और तरल पदार्थ की अधिक मात्रा को शरीर से बाहर निकालना है। रक्त का शुद्धिकरण (सोडियम, पोटाशियम आदि अपशिष्ट को बाहर निकालना) करके पेशाब बनाने का काम किडनी का ही है। जब हम अपने आहार में कैल्शियम, पोटेशियम आदि खनिजों की अधिक मात्रा शामिल कर लेते हैं तब इनकी अधिकता के कारण ये गुर्दे से पूरी तरह बाहर नहीं निकल पाते हैं। यही अपशिष्ट पदार्थ धीरे-धीरे एकत्रित होकर पत्थर सामान आकृति की संरचना कर लेते हैं, जिसे हम गुर्दे की पथरी अथवा किडनी स्टोन कहते हैं।
गुर्दे की पथरी के लक्षण एकाएक दिखाई देते हैं। जब तक लक्षण दिखाई पड़ते हैं तब तक पथरी का आकार सामान्य से अधिक हो चुका होता है। लक्षणों में शामिल है:
- पेशाब में खून आना
- बार-बार पेशाब आना
- पेशाब के रंग में बदलाव, पथरी होने पर पेशाब का रंग भूरा या लाल हो सकता है
- यूरिन से अजीब तरह की गंध आना
- बुखार और उल्टी
- यूरिन मार्ग में संक्रमण
- कमर के निचले हिस्से में तेज एवं असहनीय दर्द होना
ज्यादातर मामलों में, उपरोक्त लक्षण गुर्दे की पथरी के ही होते हैं। इनके नजर आने पर आपको तुरंत ही डॉक्टर के पास निदान के लिए जाना चाहिए।
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गुर्दे की पथरी का निदान कैसे होता है? – Kidney Stone Ki Janch Kaise Hoti Hai
गुर्दे की पथरी का निदान करने के लिए डॉक्टर मरीज को निम्नलिखित जांच प्रक्रियाओं से गुजरने की सलाह दे सकता है।
ब्लड टेस्ट
ब्लड टेस्ट की मदद से खून में मौजूद मिनरल्स का पता लगाया जाता है। यदि खून में कैल्शियम या यूरिक एसिड की मात्रा अधिक है तो यह किडनी हेल्थ में किसी गड़बड़ी का लक्षण हो सकता है। इस जांच के परिणामानुसार डॉक्टर निदान की प्रक्रिया को आगे बढाते हैं।
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यूरिन टेस्ट
यूरिन टेस्ट में डॉक्टर दो दिनों का यूरिन सैम्पल माग सकते हैं। फिर इसे लैब में जाँच के लिए भेजा जाता है। यदि मूत्र में पथरी बनाने वाले पदार्थों की सामान्य से अधिक मात्रा मौजूद है तो यह किडनी स्टोन का संकेत हो सकता है। जांच के परिणाम के अनुसार डॉक्टर निदान की प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हैं।
इमेजिंग टेस्ट
किडनी स्टोन को विस्तृत रूप से देखने के लिए डॉक्टर कुछ इमेजिंग टेस्ट कराने की सुझाव देते हैं, जो निम्नलिखित हैं:
- सीटी-स्कैन – यह एक किस्म का इमेजिंग टेस्ट है। इस टेस्ट में एक्स-रेज का उपयोग करके किडनी स्टोन को कंप्यूटर स्क्रीन पर देखा जाता है।
- अल्ट्रासाउंड टेस्ट – इस जांच पक्रिया में डॉक्टर हाई फ्रीक्वेंसी रेडियो वेब्स का उपयोग करके किडनी स्टोन को देखते हैं
बाहर निकल चुके पत्थरों की जांच
कुछ लोगों में पेशाब करते समय स्टोन बाहर आ सकता है। स्टोन के कम्पोजीशन का पता लगाने के लिए डॉक्टर उसे लैब में जांच के लिए भेज सकते हैं।
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जाँच के बाद
जाँच के बाद डॉक्टर परिणामानुसार, सर्जिकल या नॉन-सर्जिकल उपचार की सलाह देंगे। यदि पथरी का आकार अधिक बड़ा नहीं है तो डॉक्टर कुछ घरेलू उपचार, डाइट में बदलाव, और दवाइयों की सलाह दे सकते हैं।
स्टोन का साइज बड़ा होने पर अथवा गंभीरता के अनुसार डॉक्टर सर्जरी की सलाह दे सकते हैं। किडनी स्टोन का उपचार करने के लिए कई किस्म की सर्जिकल प्रक्रियाएं उपलब्ध हैं। किडनी स्टोन की साइज, मरीज का स्वास्थ्य और उम्र के अनुसार डॉक्टर सही प्रक्रिया का इस्तेमाल करते हैं।
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इन उपायों का अनुसरण करें:
यदि डॉक्टर के मुताबिक पथरी का आकार अधिक बड़ा नहीं है और उसे पानी पीकर तथा कुछ घरेलू उपचार की मदद से घोला जा सकता है तो आप निम्नलिखित उपायों का अनुसरण कर सकते हैं-
- दिन में 3 से 4 लीटर पानी पिएं।
- डॉक्टर द्वारा बतायी गयी डाइट चार्ट का सख्ती से अनुसरण करें।
- तरल पदार्थों का अधिक से अधिक सेवन करें।
- विटामिन सी युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन न करें।
- कैल्शियम युक्त खाद्य पदार्थों का अधिक सेवन करें।
- सोडियम का कम सेवन करें।
- एनीमल प्रोटीन (मांस आदि) का सेवन न करें।
- डॉक्टर द्वारा बतायी गयी दवाओं का सेवन करें।
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डिस्क्लेमर: यह ब्लॉग सामान्य जानकारी के लिए लिखा गया है| अगर आप किसी बीमारी से ग्रसित हैं तो कृपया डॉक्टर से परामर्श जरूर लें और डॉक्टर के सुझावों के आधार पर ही कोई निर्णय लें|