किडनी खून को फिल्टर करके वेस्ट पदार्थ और पानी को अलग करता है और पेशाब बनाता है।लेकिन जब वेस्ट पदार्थ की मात्रा अधिक होती है तो ये किडनी में इकठ्ठा होकर पत्थर की ठोस पदार्थ का रूप ले लेते हैं। इसे किडनी/गुर्दे की पथरी कहा जाता है।
भारत की लगभग 12% जनसंख्या किडनी स्टोन से पीड़ित होती है।(1) इनमें से लगभग 50% लोग किडनी डैमेज से प्रभावित होते हैं और अंत में अपनी जान गंवा बैठते हैं।
किडनी स्टोन के कई प्रकार हैं, जैसे – कैल्शियम ऑक्सालेट, कैल्शियम फॉस्फेट, इस्ट्रूवाईट स्टोन, यूरिक एसिड स्टोन आदि।
आर्थिक रूप से विकसित देशों में किडनी स्टोन से प्रभावित लगभग 70% मामलों में लोग कैल्शियम ऑक्सालेट या फॉस्फेट स्टोन से पीड़ित होते हैं।
एक रिसर्च के मुताबिक़ नींबू का सेवन करके कैल्शियम स्टोन बनने के दर को काफी कम कर सकते हैं। (2)
नींबू में मौजूद साइट्रेट पथरी के उत्पादन को दो तरह से रोकता है। पहला – इसमें मौजूद साइट्रेट पेशाब में कैल्शियम ऑक्सालेट और कैल्शियम फॉस्फेट के अतिसंतृप्ति (supersaturation) को कम कर देता है। मतलब पेशाब में कैल्शियम या अन्य क्रिस्टल अधिक नहीं घुलता है। (3) दूसरा- यह कैल्शियम ऑक्सालेट के क्रिस्टलीकरण को रोक देता है, जिससे ये कठोर पदार्थ में तब्दील नहीं हो पाता है। (4)
किडनी की पथरी का इलाज के लिए नींबू का इस्तेमाल कैसे करें?
चूंकि, नींबू में साइट्रेट की अधिक मात्रा होती है, इसलिए यह नए पत्थर नहीं बनने देता है। वहीं इसे पीने से पेशाब का उत्पदान बढ़ जाता है, जिससे पथरी धीरे-धीरे पेशाब नली के माध्यम से बाहर निकल जाती है।
इसके लिए आपको पानी का सेवन बढ़ाना होगा। कम से कम 2.5 से 3 लीटर पानी पीना पड़ेगा ताकि आप 1.5 से 2 लीटर पेशाब का उत्पादन कर सकें।
पढ़ें- किडनी स्टोन क्या है? कारण लक्षण और इलाज
विशेषज्ञों के अनुसार 7 कप पानी में आधा कप नींबू मिलाकर पीने से फायदा देखा जा सकता है। टेस्ट के लिए शक्कर मिला सकते हैं, लेकिन नमक न डालें।
यह एक लंबी प्रक्रिया है, इसलिए आप लगातार कुछ महीनों तक नींबू-पानी पीते रहें और शरीर में पानी की कमी न होने दें।
किडनी स्टोन से बचाव के लिए टिप्स
- किडनी स्टोन को बढ़ने से रोकने के लिए पानी का भरपूर सेवन करें।
- सोडियम और मीट का सेवन न करें।
- अपने डॉक्टर से एक डाइट चार्ट बनवाएं और जाने कि क्या खाना है और क्या नहीं (पढ़ें- किडनी स्टोन में क्या खाएं और क्या नहीं खाना चाहिए?)
इलाज कराएं
यदि स्थिति गंभीर है और अधिक दर्द होता है तो डॉक्टर के कहने पर इलाज कराएं। इलाज नहीं कराने पर किडनी फेल हो सकती है।
इलाज के लिए लेजर तकनीक का चयन करें। यह एक मिनिमल इनवेसिव तकनीक है, जिसमें पथरी को तोड़ने और हटाने के लिए कोई कट नहीं किया जाता है। डॉक्टर पेशाब नली के माध्यम से एक पतली ट्यूब डालते हैं और लेजर फाइबर को अंदर डालकर लेजर बीम से पथरी को छोटे आकार में तोड़ देते हैं। पथरी पेशाब के साथ बाहर निकल जाती है।
जानने के लिए पढ़ें – किडनी स्टोन का लेजर ऑपरेशन कैसे होता है?
यदि आप एक दर्द रहित और एडवांस उपचार चाहते हैं तो हमें फोन कर सकते हैं या अपॉइंटमेंट बुक कर सकते हैं। हम गुर्दे की पथरी का लेजर ऑपरेशन के लिए नो कॉस्ट ईएमआई की सुविधा भी देते हैं, जिससे आप बिना ब्याज के छोटे-छोटे क़िस्त में अपनी सर्जरी करवा सकते हैं।
इसके अलावा हम रोगी को डायग्नोसिस में 30 % की छूट देते हैं और हमारे डॉक्टर इलाज के लिए भारत के सबसे लेटेस्ट उपकरण का उपयोग करते हैं जिससे इलाज आसान हो जाता है।
हॉस्पिटल आने-जाने के लिए कैब की फ्री सुविधा, डॉक्टर के साथ प्राधान्य फॉलो-अप्स, केयर बड्डी आदि हमारी कुछ रियायती सुविधाएं हैं जो आपके सर्जरी के अतिरिक्त खर्च को कम कर देते हैं।
निष्कर्ष- भारत में लगभग 12% जनसंख्या किडनी स्टोन से पीड़ित होते हैं। नींबू में मौजूद साइट्रेट पथरी का इलाज्ज करने के लिए बहुत फायदेमंद है। नींबू से पथरी का इलाज करने के लिए दिन में 2.5 से 3 लीटर पानी पिएं। 7 कप पानी में ½ कप नींबू मिलाकर पीना फायदेमंद है। पथरी खत्म होने में लंबा समय लगेगा, इसलिए कुछ महीने तक प्रक्रिया जारी रखें। यदि आप किडनी स्टोन की गंभीर स्थिति में हैं तो डॉक्टर के सलाह अनुसार लेजर सर्जरी करवा लें।
डिस्क्लेमर: यह ब्लॉग सामान्य जानकारी के लिए लिखा गया है| अगर आप किसी बीमारी से ग्रसित हैं तो कृपया डॉक्टर से परामर्श जरूर लें और डॉक्टर के सुझावों के आधार पर ही कोई निर्णय लें|