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अगर आपको मां बनने की ख्वाहिश है तो प्रेगनेंसी की खबर आपके लिए एक बड़ी खुशखबरी से कम नहीं है। यह आपके जीवन और परिवार में खुशियां भर देगी। लेकिन अगर आप अभी मां बनने की प्लानिंग नहीं कर रही हैं तो यह खबर आपके लिए दुखदायी हो सकती है।

खैर, आपकी नियत कोई भी हो प्रेगनेंसी की पुष्टि करने के लिए आपको एक प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है जिसे मेडिकल की भाषा में प्रेगनेंसी टेस्ट कहते हैं। इस प्रक्रिया के बाद, यह बात साफ होती है कि आप प्रेगनेंट हैं या नहीं।

प्रेगनेंसी टेस्ट क्या है — How To Check Pregnancy In Hindi

समय पर पीरियड्स नहीं आने पर तुरंत आपके मन में यह ख्याल आता है की कहीं आप प्रेगनेंट तो नहीं हैं। हालांकि, यह मात्र एक अनुमान होता है जो आपकी प्रेगनेंसी की तरफ इशारा करता है। आप गर्भवती हैं या नहीं, इस बात की पुष्टि प्रेगनेंसी टेस्ट के बाद होती है।

प्रेगनेंसी के बारे में विस्तार से जानने के लिए आप इस ब्लॉग “महिला प्रेगनेंट कैसे होती है – शुरू से अंत तक” को पढ़ सकती हैं।

स्त्री-रोग विशेषज्ञ इस टेस्ट को कई तरह से करते हैं। प्रेगनेंसी टेस्ट के दौरान आपके पेशाब में ह्यूमन कोरियोनिक गोनाडोट्रोफिन (एचसीजी) हार्मोन की मौजूदगी और उसके स्तर का पता लगाया जाता है। एचसीजी की मौजूदगी या गैर मौजूदगी ही इस बात का फैसला करती है की आप मां बनने वाली हैं या नहीं।

प्रेगनेंसी टेस्ट कब करना चाहिए — Pregnancy Test Kab Karna Chahiye

कई महिलाओं के मन में यह प्रश्न भी उठता है कि सेक्स यानी इंटरकोर्स के कितने दिन बाद प्रेगनेंसी टेस्ट करे, तो हम आपको बता दें कि सेक्स करने के बाद स्पर्म और अंडा आपस में मिलते हैं। इनके निषेचन की प्रक्रिया शुरू होती है और फिर निषेचित डिंब यानी की फर्टिलाइज्ड अंडा गर्भाशय में प्रत्यारोपित हो जाता है। इस प्रक्रिया के पूरा होने के बाद आप प्रेगनेंट हो जाती हैं।

प्रेगनेंट होते ही आपके शरीर में एचसीजी हार्मोन का निर्माण शुरू हो जाता है जो निषेचन की क्रिया होने के बाद लगभग दो सप्ताह तक आपके पेशाब में पाया जा सकता है। इसका मतलब यह हुआ कि अगर आपका पीरियड्स निर्धारित समय के एक सप्ताह के अंदर नहीं हुआ है तो आपको प्रेगनेंसी टेस्ट करनी चाहिए। जैसे-जैसे आपके प्रेगनेंसी की अवधि बढ़ती है वैसे-वैसे आपके शरीर में एचसीजी हार्मोन का स्तर भी बढ़ता है।

प्रेगनेंसी टेस्ट कैसे करते हैं — Pregnancy Test Kaise Karen 

आमतौर पर प्रेगनेंसी टेस्ट तीन तरह से किया जाता है। सबसे पहले घरेलू उपाय की मदद से। उसके बाद, प्रेगनेंसी टेस्ट किट के जरिए घर पर और अंत में डॉक्टर की मदद से क्लिनिक जाकर।

प्रेगनेंसी टेस्ट करने का घरेलू तरीका — Home Remedies To Check Pregnancy In Hindi

आप घर बैठे ही घरेलू नुस्खों की मदद से अपनी प्रेगनेंसी की जांच कर सकती हैं। लेकिन इस विधि और इसके रिजल्ट की विश्वसनीयता बहुत कम है। कई बार इसके रिजल्ट गलत आ जाते हैं।

घरेलू उपाय से प्रेगनेंसी टेस्ट करने के लिए आप निम्नलिखित चीजों का इस्तेमाल कर सकती हैं:-

  • साबुन
  • चीनी
  • टूथपेस्ट
  • विनेगर
  • प्याज
  • ब्लीच
  • डेटॉल
  • बेकिंग सोडा

ऊपर बताए गए प्रेगनेंसी टेस्ट के घरेलू उपाय की मदद से आप घर बैठे प्रेगनेंसी की जांच कर सकती हैं।

प्रेगनेंसी टेस्ट किट से घर बैठे प्रेगनेंसी टेस्ट कैसे करते हैं — Pregnancy Test Kit Se Ghar Par Pregnancy Kaise Check Karen

प्रेगनेंसी टेस्ट किट प्रेगनेंसी जांच करने का सबसे विश्वसनीय, सुरक्षित और आसान तरीका माना जाता है। यह लगभग पांच मिनट के अंदर रिजल्ट दे देता है। इसका इस्तेमाल करने के लिए सबसे पहले इसे बाजार से खरीदें और फिर इसके साथ दिए गए दिशा निर्देश को अच्छे से पढ़ें और समझें।

हर कंपनी के प्रेगनेंसी टेस्ट किट पर अलग-अलग दिशा निर्देश दिए होते हैं और इनके इस्तेमाल की प्रक्रिया भी एक दूसरे से अलग होती है। 

किसी टेस्ट किट के स्ट्रिप पर पेशाब की एक से दो बूंदें रखनी होती है तो किसी स्ट्रिप पर पेशाब करना होता है। प्रेगनेंसी टेस्ट करने के बाद, रिजल्ट के तौर किसी डिजिटल टेस्ट किट पर प्रेगनेंट या नट प्रेगनेंट लिखा हुआ आता है तो किसी टेस्ट किट में गुलाबी या नीली लाइनें दिखाई देती हैं। इसलिए किसी भी किट का इस्तेमाल करने से पहले किट और उसके इस्तेमाल की प्रक्रिया को अच्छी तरह समझना आवश्यक है।

प्रेगनेंसी टेस्ट किट की दिशा निर्देश को समझने के बाद आपको प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए। किट के स्ट्रिप पर पेशाब की कुछ बूंदों को डालें और लगभग पांच मिनट तक इंतजार करें। उसके बाद, स्ट्रिप पर आपको कुछ रंगीन लकीरें दिखाई देंगी या किट पर प्रेगनेंट या नट प्रेगनेंट लिखा हुआ दिखाई देगा।

रंगीन लकीरों के मतलब को समझने के लिए किट के साथ मिले दिशा नर्देश को पढ़ें। इस प्रक्रिया की मदद से बिना किसी परेशानी का सामना किए आप कुछ ही मिनटों में घर बैठे अपनी प्रेगनेंसी की पुष्टि कर सकती हैं।

क्लिनिक में प्रेगनेंसी टेस्ट कैसे किया जाता है — Clinic Me Pregnancy Test Kaise Kiya Jata Hai

अगर आप ऊपर बताए गए दोनों तरीकों के रिजल्ट से संतुष्ट नहीं हैं तो फिर आप क्लिनिक जाकर स्त्री-रोग विशेषज्ञ द्वारा प्रेगनेंसी टेस्ट करवा सकती हैं। प्रेगनेंसी टेस्ट करने के सभी तरीकों में यह तरीका सबसे बेहतरीन और भरोसेमंद माना जाता है। इसका रिजल्ट 100% सही होता है।

क्लिनिक में प्रेगनेंसी टेस्ट के लिए डॉक्टर तीन तरीकों का इस्तेमाल करते हैं जिसमें निम्नलिखित शामिल हैं:-

01. पेशाब जांच

इस प्रक्रिया में डॉक्टर आपके पेशाब का सैंपल लेते हैं और फिर उसमें एचसीजी की मौजूदगी और स्तर की जांच करते हैं। जांच करने के बाद वे इस बात की पुष्टि करते हैं की आप गर्भवती हैं या नहीं। आमतौर पर डॉक्टर इस जांच के लिए सुबह के पेशाब का सैंपल लेते हैं।

02. खून जांच

पेशाब के साथ-साथ डॉक्टर खून जांच की मदद से भी इस बात का पता लगाते हैं की आप प्रेगनेंट हैं या नहीं। खून जाँच के जरिए ओव्यूलेशन के लगभग एक हफ्ता बाद या फर्टिलाइज्ड अंडे के ट्रांसप्लांट होने के एक या दो दिन के अंदर ही प्रेगनेंसी की पुष्टि की सकती है।

इस जांच की मदद से डॉक्टर एक्टोपिक या मोलर प्रेगनेंसी का भी पता लगाते हैं। यह दोनों स्थितियां बहुत ही गंभीर होती हैं जो आपकी जान के लिए खतरनाक भी साबित हो सकती हैं। अगर आप एक्टोपिक प्रेगनेंसी के बारे में विस्तार से जानना चाहती हैं तो इस ब्लॉग “एक्टोपिक प्रेगनेंसी का कारण, लक्षण और इलाज” को अवश्य पढ़ें।

03. अल्ट्रासाउंड 

इस विधि के जरिए डॉक्टर आपके गर्भ में पल रहे भ्रूण की साफ फोटो को कंप्यूटर स्क्रीन पर देखते हैं। यह फोटो ब्लैक एंड व्हाइट होती है जिसकी मदद से डॉक्टर आपकी प्रेगनेंसी की पुष्टि करते हैं।

निष्कर्ष

अपनी प्रेगनेंसी की पुष्टि करने के लिए आप ऊपर बताए गए माध्यमों का इस्तेमाल कर सकती हैं। घरेलू उपाय या प्रेगनेंसी टेस्ट किट में कई बार रिजल्ट गलत भी आ जाते हैं। ऐसी स्थिति में खुशी मनाने या दुःख जाहिर करने की जगह आपको अपने आस-पास के डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। डॉक्टर आपकी प्रेगनेंसी की 100% सही पुष्टि करते हैं। इसके अलावा, घरेलू उपचारों के जरिए प्रेगनेंसी की जांच करने से पहले एक बार डॉक्टर से मिलकर उनकी राय जरूर लें।

डिस्क्लेमर: यह ब्लॉग सामान्य जानकारी के लिए लिखा गया है| अगर आप किसी बीमारी से ग्रसित हैं तो कृपया डॉक्टर से परामर्श जरूर लें और डॉक्टर के सुझावों के आधार पर ही कोई निर्णय लें|