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एनल फिशर का स्थायी इलाज, क्या दवाएं फिशर का स्थायी इलाज हैं?
एनल में जब किसी प्रकार का कट या दरार बन जाता है तो इस स्थिति को फिशर या एनल फिशर कहा जाता है। यह एक गंभीर शारीरिक बीमारी है जिसकी वजह से मरीज को सौच के दौरान बहुत परेशानियों का सामना करना पड़ता है। पेट में कब्ज होने की वजह स्टूल कठोर हो जाता है और जब मरीज इसे पास करता है तब यह एनल के अंदर की स्किन पर प्रेशर डालता है जिसकी वजह से एनल के अंदर की स्किन में दरारे बन जाती है। फिशर की स्थिति में स्टूल पास करते समय मरीज को दर्द महसूस होता है और कभी कभी स्टूल के साथ खून भी आता है।
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एनल फिशर क्या है
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क्या दवाएं फिशर का स्थायी इलाज हैं?
जैसे दूसरी बीमारी के कुछ लक्षण होते हैं वैसे ही एनल फिशर के कुछ लक्षण हैं जिनकी मदद से आप या आपके डॉक्टर इस बात का अंदाजा लगा सकते हैं की आप एनल फिशर से पीड़ित हैं। इस बीमारी का समय पर जांच और इलाज कराना चाहिए नहीं तो यह दूसरी गंभीर बीमारियों जैसे की क्रोनिक अनल फिशर, अनल फिस्टुला, एनल एस्टेरॉइड्स और नैरोड एनल कैनाल का कारण सकती है।
फिशर के लिए इलाज के बहुत सी दवाएं मौजूद हैं लेकिन सबसे बड़ी समस्या यह की कोई भी दवा इसको पूरी तरह से हमेशा के लिए थी नहीं कर सकती है। बहुत कम बार ऐसा हुआ है जब किसी दवा की मदद से फिशर को ठीक किया गया हो। दवाएं फिशर का स्थायी इलाज नहीं हैं। दवाओं की मदद से मरीज को फिशर के दर्द, जलन और सूजन से थोड़े समय के लिए आराम जरूर मिलता है। लेकिन कुछ समय के बाद यह बीमारी फिर से वापस आ जाती है और परेशानियां शुरू हो जाती हैं।
दवाओं के अलावा घरेलू नुस्खे, आयुर्वेदा, होमियोपैथी, इंजेक्शन और जीवन शैली में बदलाव लाने के बाद भी ज्यादातर केसेस में फिशर वापस आ जाता है। क्योंकि फिशर बवासीर का एक्सटेंडेड वर्जन है। अगर आपको बवासीर है और आपने इसका इलाज नहीं कराया तो एक समय के बाद फिशर में बदल जाता है और अगर आपने फिशर का भी इलाज नहीं कराया तो यह फिस्टुला का रूप ले लेता है। इसलिए समय पर बवासीर या फिशर का स्थायी इलाज कराना जरूरी है। क्योंकि फिस्टुला के बाद एनल कैंसर और ट्यूबरक्लोसिस होने का खतरा बढ़ जाता है।
एनल फिशर का स्थायी इलाज
लेजर सर्जरी फिशर का स्थायी इलाज है क्योंकि इसके द्वारा फिशर को हमेशा के लिए जड़ से खत्म किया जा सकता है। फिशर की लेजर सर्जरी मॉडर्न मेडिकल इंस्ट्रूमेंट के जरिए की जाती है जिसके दौरान मरीज को दर्द और रक्स्राव नहीं होता है। फिशर की लेजर सर्जरी 30 मिनट की सर्जिकल प्रक्रिया है जो बहुत ही अनुभवी और कुशल सर्जन के द्वारा पूरी परफेक्शन की साथ की जाती है। सर्जरी की यह प्रक्रिया पूरी तरह से सुरक्षित और सफल है।
सर्जरी करने से पहले सर्जन मरीज की शारीरिक जांच करते हैं ताकि वे बीमारी और उसकी स्थिति को अच्छे से समझ सकें। इसमें ब्लड टेस्ट, एनल के क्षेत्र की जांच शामिल है। इसके अलावा सर्जन आपको एनोस्कोपी, फ्लेक्सिबल सिग्मोइडोस्कोपी और कोलोनोस्कोपी कराने का भी सुझाव दे सकते हैं। जांच करने के बाद मरीज को जनरल अनेस्थिसिया दिया जाता है और फिर उसके बाद सर्जरी परफॉर्म की जाती है।
फिशर की सर्जरी के दौरान कट, टांके, जख्म और दाग नहीं आते है। सर्जरी के बाद मरीज को उसी दिन डिस्चार्ज कर दिया जाता है। सर्जरी के 48 घंटों के बाद मरीज पूरी तरह से फिट हो जाता है और अपने दैनिक जीवन के कामों को बहुत आराम से शुरू कर सकता है। लेजर सर्जरी के बाद या दौरान कट, रक्तस्राव, दर्द और इंफेक्शन न होने की वजह से मरीज को ठीक होने में बहुत कम समय लगता है। लेजर सर्जरी फिशर का बेस्ट इलाज है। इसके बाद फिशर के दोबारा होने का खतरा लगभग खत्म हो जाता है। लेजर सर्जरी के द्वारा ही फिशर का स्थायी इलाज संभव है।
डिस्क्लेमर: यह ब्लॉग सामान्य जानकारी के लिए लिखा गया है| अगर आप किसी बीमारी से ग्रसित हैं तो कृपया डॉक्टर से परामर्श जरूर लें और डॉक्टर के सुझावों के आधार पर ही कोई निर्णय लें|