आमतौर पर जब प्रजनन अंग (गर्भाशय, फैलोपियन ट्यूब, अंडाशय) से जुड़ी समस्याओं का उपचार करने के सभी अन्य विकल्प विफल हो जाते हैं तब डॉक्टर उपचार के लिए बच्चेदानी का ऑपरेशन (Hysterectomy) की सलाह देते हैं।
हिस्टेरेक्टॉमी एक प्रकार की सर्जिकल प्रक्रिया है, जिसमें मुख्य रूप से गर्भाशय और जरूरत पड़ने पर फैलोपियन ट्यूब, ओवरी आदि को शरीर से बाहर निकाल दिया जाता है। सरल भाषा में लोग इसे बच्चेदानी का ऑपरेशन भी कहते हैं।
बच्चेदानी का ऑपरेशन से पहले महिला को निम्नलिखित बातों का ध्यान देना चाहिए।
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1. जरूरत क्यों है?
कुछ महिलाएं ऐसी होती हैं जिन्हें यह नहीं पता होता है कि आखिर उनकी बच्चेदानी का ऑपरेशन क्यों हो रहा है। यदि आप भी उनमें से हैं तो इस बारे में डॉक्टर से बार करें, उनसे पूछें कि आखिर आपको इस प्रक्रिया से गुजरने की जरूरत क्यों है। क्या प्रजनन अंग से संबंधित उपचार के लिए अन्य विधियाँ नहीं हैं?
2. खुद को तैयार रखें
हिस्टेरेक्टॉमी एक मेजर सर्जरी है जिसमें महिला के शरीर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा उससे अलग कर दिया जाता है। इस प्रक्रिया के बाद महिला के शरीर में हार्मोनल फ्लक्चुएशन होता है, जो सेक्स ड्राइव को प्रभावित करता है साथ ही योनि में सूखापन जैसी कुछ आम समस्याओं का कारण भी बन सकता है।
इसलिए सर्जरी से पहले डॉक्टर से अपने शरीर में होने वाले बदलाव के बार में बात करें और तय करें कि क्या आप प्रक्रिया से गुजरने के लिए तैयार हैं। यदि आप मानसिक/शारीरिक रूप से हिस्टेरेक्टॉमी के लिए तैयार नहीं हैं तो इस बारे में डॉक्टर से बात करें, हो सकता है उनके पास उपचार का कोई अन्य विकल्प हो।
3. सावधानियों का अनुसरण करें
बच्चेदानी का ऑपरेशन करने के 10 से 15 दिन पहले डॉक्टर महिला को कुछ सावधानियाँ बताएंगे और उन्हें उनका अनुसरण करने को कहेंगे। सभी सावधानियों और टिप्स का ध्यानपूर्वक अनुसरण करें। ऐसा नहीं करने पर सर्जरी को सफलतापूर्वक पूरा होने में अड़चन हो सकती है।
डॉक्टर आपको दवाओं का सेवन करने और सर्जरी से एक रात पहले खाने-पीने की सारी चीजें कब बंद करनी है के बारे में बताएंगे। सर्जरी से पहले एस्पिरिन, आईबुप्रोफेन (एडविल, मोट्रिन) और ब्लड थिनर का उपयोग करना भी वर्जित है।
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4. सर्जरी से पहले होगी जाँच
सर्जरी से पहले महिला को नियमित रूप से जाँच कराना पड़ेगा। कुछ जरूरी टेस्ट जैसे- एक्स रे, ब्लड टेस्ट, ईसीजी आदि किये जा सकते हैं। यदि इन टेस्ट्स के बाद डॉक्टर को लगता है कि महिला अभी उपचार के लिए तैयार नहीं है तो वे सर्जरी की डेट आगे बढ़ा देंगे। अपने सर्जन को अपनी एलर्जी, दवाओं, पुराने उपचार आदि के बारे में जरूर बताएं। साथ ही डॉक्टर द्वारा बताई गई सावधानियों का पूरी निष्ठा के साथ अनुसरण करें।
5. सर्जरी की सही प्रक्रिया का चयन
बच्चेदानी का ऑपरेशन करने के लिए दो प्रकार की सर्जिकल विधियाँ हैं। एक ओपन सर्जरी और दूसरी लेप्रोस्कोपिक सर्जरी। ओपन सर्जरी में पेट के निचले हिस्से में 6 से 7 इंच का बड़ा कट लगता है और फिर मांसपेसियों के परत को हटाकर बच्चेदानी को बाहर निकाला जाता है।
लेप्रोस्कोपिक सर्जरी एक एडवांस तकनीक है, जिसमें प्रजनन अंग को बाहर निकालने के लिए आधा इंच से भी कम आकार के 2 से 3 छोटे कट्स लगते हैं।
लेप्रोस्कोपिक सर्जरी में जख्म छोटा होने के कारण रिकवरी भी तेजी से होती है। बच्चेदानी को योनि के माध्यम से भी अलग किया जा सकता है। इस प्रक्रिया को वजाइनल हिस्टेरेक्टॉमी कहते हैं।
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6. रिकवरी टाइम में होगी भिन्नता
यदि आप सोच रही हैं कि बच्चेदानी का ऑपरेशन के बाद शर्मा जी की दुलहिन 1 महीने में दौड़ने लगी थीं तो मैं भी 1 महीने में दौड़ने लगूंगी तो आप गलत हैं। हिस्टेरेक्टॉमी के बाद महिला पूरी तरह से रिकवर कब होगी यह सर्जरी की प्रक्रिया, महिला के स्वास्थय, उम्र, इम्यूनिटी आदि कई चीजों पर निर्भर करता है।
हो सकता है कि आप शर्मा जी के वाइफ से जल्दी रिकवर हो जाएं, तो कई बार रिकवरी में अधिक समय लग सकता है। हालांकि, अधिकतम 6 से 8 सप्ताह में महिला पूरी तरह से रिकवर हो जाती है। यदि रिकवरी में इससे अधिक समय लगता है तो डॉक्टर से बात करना चाहिए।
7. बच्चेदानी का ऑपरेशन आपको व्यक्तिगत रूप से प्रभावित कर सकता है
बच्चेदानी के ऑपरेशन से आपको प्रजनन अंग से जुड़ी समस्या से छुटकारा मिल जाता है, लेकिन यह उपचार आपको पर्सनली प्रभावित करता है। हिस्टेरेक्टॉमी के बाद समय से पहले मेनोपॉज आ जाना, सेक्स डिजायर में बदलाव आ जाना जैसे कुछ लक्षण दिखाई दे सकते हैं। हालांकि इस बारे में आप अपने डॉक्टर से सलाह कर सकते हैं और समय से पहले मीनोपॉज एवं सेक्स डिजायर में परिवर्तन आदि का उपचार करा सकते हैं।
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8. नहीं कर सकेंगी गर्भधारण
इस ऑपरेशन में महिला का मुख प्रजनन अंग बाहर निकाल दिया जाता है, इसलिए प्रक्रिया सम्पन्न होने के बाद दोबारा गर्भवती होने की सोच न रखें। यदि आप बच्चा चाहती हैं तो इस बारे में डॉक्टर से बात करें और प्रजनन विकार का इलाज के लिए हिस्टेरेक्टॉमी की जगह किसी अन्य उपचार विकल्प का चयन करें।
9. डॉक्टर से सलाह लें
बच्चेदानी के ऑपरेशन के बाद मूड स्विंग्स होना, एनेस्थीसिया के प्रभाव के कारण आलस्यपन महसूस होना आदि लक्षण दिखाई देना सामान्य हैं। लेकिन यदि महिला को तेज दर्द, सूजन, असहजता, इन्फेक्शन आदि के लक्षण दिखाई दें तो लक्षण के तीव्र होने का इंतजार नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में तुरंत ही अपने स्त्री रोग विशेषज्ञ की सलाह लें।
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10. अच्छे डॉक्टर का चयन करें
हिस्टेरेक्टॉमी एक मेजर सर्जरी है। जब तक उपचार के लिए अन्य विधियां उपयोग में लाई जा सकती हैं तब तक डॉक्टर हिस्टेरेक्टॉमी की प्रक्रिया से गुजरने की सलाह नहीं देते हैं। इसलिए प्रजनन विकारों का उपचार के लिए सही डॉक्टर का चयन करें। वे हिस्टेरेक्टॉमी का चयन तभी करेंगे जब उनके पास उपचार करने का कोई अन्य साधन नहीं बचेगा। साथ ही यदि आप ऑपरेशन से गुजरने वाली हैं तो यह सुनिश्चित करें कि सर्जन के पास कई वर्षों का अनुभव हो।
निष्कर्ष
बच्चेदानी निकालने के ऑपरेशन को हिस्टेरेक्टॉमी कहते हैं। यह एक मेजर प्रक्रिया है। सर्जरी कराने से पहले महिला को इससे जुड़ी कुछ बातों को जानना बेहद जरूरी है। प्रक्रिया के बाद महिलाएं गर्भधारण नहीं कर सकती हैं। उपचार के लिए अनुभवी डॉक्टर का चयन करना चाहिए और उपचार के बाद जटिलताएँ या जटिलताओं के लक्षण दिखाई देने पर डॉक्टर से बात करना चाहिए।