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Mujhe darr tha ki main apni patni ko kabhi saaf nahi dekh paunga
“मुझे लगा था कि उम्र के साथ धुंधली होती नजर को अब मुझे ऐसे ही स्वीकार करना पड़ेगा। लेकिन जब अपने ही परिवार के चेहरों को साफ देखना मुश्किल होने लगा, तब डर लगने लगा कि कहीं मैं अपनी पत्नी को भी ठीक से देख न पाऊँ। सर्जरी के बाद पहली बार उन्हें साफ देखा, तो लगा जैसे मेरी जिंदगी का एक खोया हुआ हिस्सा वापस मिल गया हो।”
मोहन शर्मा, 67 वर्षीय रिटायर्ड बैंक कर्मचारी, जयपुर से, ने कभी नहीं सोचा था कि धीरे-धीरे कम होती नजर उनकी जिंदगी की छोटी-छोटी खुशियों को इतना प्रभावित करने लगेगी। शुरुआत में उन्हें पढ़ते समय अक्षर धुंधले दिखाई देने लगे और रात में गाड़ी चलाने में परेशानी होने लगी। उन्होंने इसे उम्र के साथ आने वाला सामान्य बदलाव समझकर नजरअंदाज कर दिया।
समय के साथ उनकी नजर और कमजोर होती गई। टीवी देखना, अखबार पढ़ना और रोजमर्रा के छोटे काम भी पहले जैसे आसान नहीं रहे। तेज रोशनी में आंखों में चुभन महसूस होती थी और कम रोशनी में चीजें साफ दिखाई नहीं देती थीं। लेकिन सबसे ज्यादा परेशानी उन्हें तब महसूस होती थी जब वह अपने परिवार के साथ समय बिताते थे और चेहरे पहले जैसी स्पष्टता से दिखाई नहीं देते थे।
मोहन बताते हैं कि उन्होंने धीरे-धीरे अपनी कई पसंदीदा गतिविधियां कम कर दीं। वह बाहर जाने से बचने लगे, क्योंकि उन्हें रास्तों और आसपास की चीजों को पहचानने में दिक्कत होती थी। उन्हें यह भी डर रहता था कि कहीं उनकी कम होती नजर की वजह से कोई गलती न हो जाए।
आखिरकार परिवार के कहने पर उन्होंने आंखों की जांच करवाने का फैसला किया। जांच के बाद पता चला कि उन्हें मोतियाबिंद (Cataract) है, जिसमें आंख के प्राकृतिक लेंस पर धुंधलापन आ जाता है और धीरे-धीरे दृष्टि प्रभावित होने लगती है। डॉक्टर ने उन्हें बताया कि इसका प्रभावी इलाज सर्जरी के माध्यम से संभव है, जिसमें खराब लेंस को हटाकर एक नया कृत्रिम लेंस लगाया जाता है।
शुरुआत में मोहन सर्जरी को लेकर थोड़ा चिंतित थे। उनकी सबसे बड़ी चिंता यही थी कि क्या ऑपरेशन सुरक्षित होगा और क्या उनकी नजर पहले जैसी हो पाएगी। Pristyn Care में परामर्श के दौरान डॉक्टर ने उन्हें पूरी प्रक्रिया, आधुनिक तकनीक और रिकवरी के बारे में विस्तार से समझाया, जिससे उनका डर काफी कम हुआ।
उन्होंने सर्जरी करवाने का निर्णय लिया। प्रक्रिया बहुत कम समय में पूरी हो गई और उन्हें जल्द ही घर जाने की अनुमति मिल गई। शुरुआती दिनों में डॉक्टर की सलाह के अनुसार उन्होंने आंखों की देखभाल की और नियमित रूप से दवाइयां इस्तेमाल कीं।
कुछ ही समय बाद उन्हें अपनी दृष्टि में बड़ा बदलाव महसूस होने लगा। चीजें पहले से ज्यादा साफ दिखाई देने लगीं, पढ़ना आसान हो गया और वह फिर से अपनी रोजमर्रा की गतिविधियों में पहले की तरह शामिल होने लगे।
लेकिन उनके लिए सबसे भावुक पल वह था जब उन्होंने सर्जरी के बाद अपनी पत्नी का चेहरा साफ देखा। वर्षों से धुंधली नजर की वजह से जो चेहरे की स्पष्टता उनसे दूर हो गई थी, वह वापस आ चुकी थी।
आज मोहन अपने परिवार के साथ पहले से ज्यादा सक्रिय जीवन जी रहे हैं। वह मानते हैं कि नजर को कमजोर होना उम्र का हिस्सा हो सकता है, लेकिन सही समय पर इलाज लेकर जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाया जा सकता है।
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Author:
Mohan Sharma
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