एक रिपोर्ट के अनुसार लगभग 50% गर्भवती महिलाओं को बवासीर की समस्या होती है। गर्भवती महिलाओं में बवासीर अक्सर थर्ड सेमेस्टर के दौरान होता है या डिलीवरी के बाद।
बवासीर गुदा की नसों का सूजन है। बाहरी बवासीर वैरिकोज वेंस की तरह दिखाई देती है।
बवासीर दो तरह की होती हैं- आंतरिक और बाहरी। आंतरिक बवासीर को तुरंत उपचार की जरूरत हो सकती है, जिसमें दवा, नॉन-सर्जिकल मेथड और सर्जरी शामिल हैं।
बाहरी बवासीर अगर दर्द और ब्लीडिंग का कारण नहीं बन रही है तो इसका इलाज जरूरी नहीं समझा जाता है। गर्भावस्था के दौरान महिला को बाहरी या आंतरिक बवासीर में से एक हो सकता है, या दोनों हो सकता है।
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गर्भावस्था के दौरान बवासीर होने के कारण
गर्भावस्था के माह बढ़ने के साथ शिशु का आकार भी बढ़ता जाता है। इससे गर्भाशय बड़ा हो जाता है और महिला के श्रोणि पर अधिक दबाव बनने लगता है।
यह बदलाव महिला के मलाशय और गुदा क्षेत्र की नसों में दबाव उत्पन्न करता है जिससे बवासीर की संभावना बढ़ जाती है।
गर्भावस्था के दौरान शरीर में प्रोजेस्टेरोन हार्मोन की मात्रा में वृद्धि होती है जो बवासीर का कारण बन सकता है। यह महिला की नसों की दीवारों को आराम पहुंचाता है जिससे उनमें सूजन का खतरा बढ़ जाता है।
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शरीर में खून की मात्रा में वृद्धि से नसों का आकार बड़ा हो जाता है, जो गर्भावस्था के दौरान पाइल्स का कारण बन सकता है।
कुछ अन्य कारण जो गर्भावस्था के दौरान बवासीर पैदा कर सकते हैं:
- मल त्याग के दौरान प्रेशर डालना
- फाइबर की कमी
- पानी की कमी
- लंबे समय तक बैठे या खड़े रहना
- अधिक वजन उठाना
- कब्ज
एक शोध के अनुसार लगभग 38 प्रतिशत गर्भवती महिलाओं को कब्ज की समस्या रहती है। कब्ज गर्भावस्था के दौरान बवासीर का एक मुख्य कारण है।
जो गर्भवती महिलाएं आयरन सप्लीमेंट का सेवन करती हैं, उनमें कब्ज की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए प्राकृतिक खाद्य पदार्थों से आयरन की भरपाई करें।
गर्भावस्था के दौरान बवासीर के लक्षण
गर्भावस्था के दौरान बवासीर के निम्न लक्षण नजर आ सकते हैं:
- गुदा के पास सूजन, दर्द और जलन
- खुजली
- मल त्याग के दौरान दर्द और बाद में बलगम का स्त्राव
- मल त्याग के बाद मांसपेशियों का गुदा के बाहर निकलना, जिसे धीरे से अंदर धकेला जा सकता है
- ब्लीडिंग (आंतरिक बवासीर में ब्लीडिंग का खतरा अधिक रहता है)
अगर महिला बवासीर पर अधिक तनाव डालती है तो दर्द बढ़ जाता है और खून बह सकता है। इसलिए गुदा क्षेत्र पर खुजली करने या दबाव बनाने से बचना चाहिए।
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गर्भावस्था के दौरान बवासीर का उपचार
गर्भावस्था के दौरान बवासीर का इलाज दवा और सर्जरी दोनों से किया जा सकता है। हालांकि, डॉक्टर बहुत जटिल परिस्थति में ही सर्जरी की सलाह देते हैं।
घरेलू उपचार
गर्भवती महिला बवासीर के लक्षणों को कम करने के लिए घर में ही निम्न उपचार कर सकती है:
- गुनगुने पानी से नहाएं, जो अधिक गरम न हो। नहाने के पानी में एप्सम साल्ट डालें।
- मल त्याग के बाद पोछने के लिए मुलायम वाइप्स का प्रयोग करें।
- दिन में कई बार थोड़े-थोड़े समय के लिए गुदा में आइस पैक रखें।
- भरपूर मात्रा में पानी का सेवन करें। यह मल को मुलायम रखेगा।
- फाइबर का सेवन अधिक करें, कब्ज का खतरा कम होगा।
- दबाव को कम करने के लिए बैठने के बजाय एक तरफ होकर लेटें।
- बैठते समय गुदा के नीचे तकिया रखें।
- माह के अधिकतर दिनों में, डॉक्टर की परमिशन के बाद, आधा घंटा तक एक्सरसाइज अवश्य करें।
- बहुत अधिक देर तक टॉयलेट शीट पर न बैठें। मल त्याग के दौरान जोर न लगाएं।
- कीगल व्यायाम करें।
- सिट्ज बाथ लें।
- दिन में कई बार गुदा को कुछ इंच तक गुनगुने पानी में रखें। यह दर्द कम करेगा।
- अपने पैरों को सिर की तरफ करके करवट लेकर सोने से बवासीर होने की संभावना कम हो सकती है। इसी पोजीशन में बाएँ तरफ सोने से रक्त प्रवाह बेहतर रहता है।
- टॉयलेट पेपर कठोर महसूस हो सकता है। गंध और अल्कोहल रहित वेट वाइप्स का इस्तेमाल करें।
- ऐसे पैड्स का इस्तेमाल करें जिसमें सुन्न करने के गुण हों। विच हेज़ल पैड्स का उपयोग भी फायदेमंद रहेगा।
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मेडिकल उपचार
गर्भावस्था के दौरान बवासीर के मेडिकल उपचार में शामिल हैं:
रबर बैंड लिगेशन
इस प्रक्रिया में, बवासीर के आधार के चारों ओर एक रबर बैंड लगाया जाता है। यह बैंड उस मस्से हो रहे रक्त प्रवाह को रोक देता है और मस्सा सूखकर गिर जाता है।
इस प्रक्रिया में 10-12 दिन लग सकते हैं। प्रक्रिया के सफल हो जाने के बाद उस क्षेत्र में निशान ऊतक बन जाते हैं जिससे बवासीर के दोबारा होने की संभावना कम हो जाती है। यह एक नॉन-सर्जिकल तकनीक है जिसका उपयोग गर्भवती महिला पर भी किया जा सकता है।
स्क्लेरोथेरेपी
एक विशेष केमिकल इंजेक्शन के माध्यम से बवासीर में डाला जाता है। यह कुछ ही दिनों में मस्सों को सुखा देता है। इस प्रक्रिया में 15-30 मिनट का समय लगता है। बेहतरीन परिणाम प्राप्त करने के लिए आपको यह उपचार दो से चार बार लेना पड़ सकता है।
स्टेपलेड हेमोराहाइडोपेक्सी
एक स्टेपलिंग डिवाइस की मदद से बड़ी आंत के अंतिम भाग को स्टेपल किया जाता है। इससे बवासीर के मस्सों में खून की कमी होने लगती है और वह सूखकर गिर जाते हैं।
यह एक सर्जिकल प्रक्रिया है जिसे अधिकतर जनरल एनेस्थीसिया के प्रभाव में किया जाता है। यह आंतरिक बवासीर का उपचार के लिए की जाती है। बाहरी बवासीर में यह अधिक प्रभावी नहीं है।
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हेमोराहाइडेक्टोमी
यह बवासीर को दूर करने की एक सर्जिकल प्रक्रिया है जो अपने साथ कई जोखिम समेटे हुए है। इसे हमेशा जनरल एनेस्थीसिया देकर किया जाता है।
इसमें बवासीर के ऊतकों को काटा जाता है और टाँके लगाए जा सकते हैं। इस प्रक्रिया के बाद गुदा क्षेत्र की मांसपेशियों को क्षति पहुँचने का खतरा बढ़ जाता है। रिकवरी लंबी हो सकती है।
गर्भावस्था के दौरान इस सर्जरी का चयन बहुत ही गंभीर परिस्थिति में किया जाता है।
निष्कर्ष
गर्भावस्था के दौरान बवासीर को दूर करने के लिए सर्जरी अंतिम विकल्प है। डॉक्टर शुरुआत में स्टूल सॉफ्टनर और टॉपिकल क्रीम से इलाज करते हैं।
अगर लक्षण दर्दनाक नहीं है तो महिला बवासीर के साथ डिलीवरी कर सकती है। डिलीवरी के बाद यह अपने आप ठीक हो सकता है।
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यदि डॉक्टर को लगता है कि गर्भवती महिला के बवासीर का इलाज होना चाहिए तो जांच के बाद उचित प्रक्रिया का चयन किया जा सकता है।
गर्भावस्था के दौरान बवासीर का उपचार कराने के लिए आप Pristyn Care की मदद ले सकते हैं। हमारे अनुभवी गुदा रोग विशेषज्ञ मिनिमल इनवेसिव प्रक्रिया का चयन करते हैं, जिससे जटिलताओं की संभावना नहीं रहती है।
डिस्क्लेमर: यह ब्लॉग सामान्य जानकारी के लिए लिखा गया है| अगर आप किसी बीमारी से ग्रसित हैं तो कृपया डॉक्टर से परामर्श जरूर लें और डॉक्टर के सुझावों के आधार पर ही कोई निर्णय लें|