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Garbhpaat k baad mujhe laga tha ki main kabhi maa nahi ban paungi
“जिस बच्चे के आने का हम बेसब्री से इंतजार कर रहे थे, उसे खोने के बाद मुझे लगा था कि शायद मैं कभी मां नहीं बन पाऊँगी। अगली बार गर्भवती होने पर खुशी से ज्यादा डर मेरे मन में था कि कहीं फिर वही न हो जाए। लेकिन सही मार्गदर्शन और लगातार देखभाल ने धीरे-धीरे मेरा डर कम किया और मुझे फिर से उम्मीद करना सिखाया।”
नेहा और आदित्य, 32 वर्षीय दंपति, गुरुग्राम से, लंबे समय से अपने परिवार को बढ़ाने का सपना देख रहे थे। जब नेहा पहली बार गर्भवती हुईं, तो उनके लिए यह जीवन के सबसे खूबसूरत पलों में से एक था। उन्होंने आने वाले बच्चे के लिए सपने सजाने शुरू कर दिए थे, लेकिन कुछ ही समय बाद उन्हें एक ऐसी परिस्थिति का सामना करना पड़ा, जिसकी उन्होंने कभी कल्पना नहीं की थी।
गर्भावस्था के शुरुआती महीनों में नेहा को कुछ स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां महसूस हुईं। जांच के बाद उन्हें पता चला कि उनकी प्रेग्नेंसी आगे नहीं बढ़ पा रही थी और उन्हें गर्भपात (Miscarriage) का सामना करना पड़ा। उनके लिए यह सिर्फ एक मेडिकल स्थिति नहीं थी, बल्कि भावनात्मक रूप से बेहद कठिन समय था।
नेहा बताती हैं कि उस समय सबसे मुश्किल हिस्सा यह समझना था कि आगे क्या करना है। शरीर में होने वाले बदलावों के साथ-साथ मन में कई सवाल थे – क्या वह दोबारा गर्भधारण कर पाएंगी? क्या फिर से ऐसा हो सकता है? क्या वह कभी मां बन पाएंगी? इन चिंताओं ने उन्हें अंदर से काफी परेशान कर दिया था।
कुछ समय तक उन्होंने खुद को संभालने और इस अनुभव से बाहर आने की कोशिश की। लेकिन जब उन्होंने दोबारा परिवार शुरू करने के बारे में सोचना शुरू किया, तो उन्होंने फैसला किया कि इस बार वह विशेषज्ञ की सलाह लेकर आगे बढ़ेंगी।
उन्होंने Pristyn Care में स्त्री रोग विशेषज्ञ से परामर्श लिया। डॉक्टर ने उनकी पिछली मेडिकल हिस्ट्री को ध्यान से समझा और जरूरी जांच के बाद उन्हें बताया कि एक गर्भपात का मतलब यह नहीं होता कि भविष्य में स्वस्थ गर्भावस्था संभव नहीं है। डॉक्टर ने उन्हें संभावित कारणों, सावधानियों और आगे की योजना के बारे में विस्तार से समझाया।
सही जानकारी और मेडिकल सपोर्ट मिलने से नेहा और आदित्य का डर धीरे-धीरे कम होने लगा। उन्होंने डॉक्टर की सलाह के अनुसार अपनी सेहत पर ध्यान देना शुरू किया, जरूरी जांच कराईं और अगली गर्भावस्था के लिए खुद को तैयार किया।
इस सफर में सबसे बड़ा बदलाव यह था कि अब उनके पास सिर्फ चिंता नहीं, बल्कि एक स्पष्ट दिशा थी। नियमित फॉलो-अप, सही देखभाल और विशेषज्ञों के मार्गदर्शन ने उन्हें दोबारा आत्मविश्वास दिया।
कुछ समय बाद जब नेहा दोबारा गर्भवती हुईं, तो इस बार खुशी के साथ थोड़ी चिंता भी थी। लेकिन लगातार डॉक्टर की निगरानी और सही देखभाल के साथ उनकी प्रेग्नेंसी आगे बढ़ी। हर गुजरते महीने के साथ उनका भरोसा बढ़ता गया और वह उस डर से बाहर आने लगीं, जो पिछले अनुभव के बाद उनके मन में बैठ गया था।
आज नेहा अपने बच्चे के साथ एक खुशहाल जीवन जी रही हैं। पीछे मुड़कर देखने पर वह मानती हैं कि सबसे जरूरी बात थी अपनी परेशानी को अकेले न सहना और सही समय पर मदद लेना।
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