Views: 52
Sabne issey sirf Periods ka Dard kaha par sachayi kuch aur thi
“कई सालों तक मुझे लगता रहा कि शायद मैं ही दर्द को ज्यादा महसूस करती हूँ और हर महीने इसे सहना ही पड़ेगा। जब दर्द इतना बढ़ गया कि मेरी नौकरी और रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित होने लगी, तब भी लोग इसे सिर्फ पीरियड्स का दर्द कहते रहे। जब मुझे पता चला कि इसके पीछे एंडोमेट्रियोसिस था, तो डर के साथ एक राहत भी मिली, क्योंकि आखिरकार मुझे समझ आया कि मैं इतने सालों से किस दर्द से गुजर रही थी।”
स्नेहा कपूर, 31 वर्षीय एक कंटेंट राइटर, दिल्ली से, कई वर्षों तक हर महीने होने वाले तेज दर्द को सामान्य मानकर सहती रहीं। शुरुआत में उन्हें लगता था कि पीरियड्स के दौरान दर्द होना आम बात है और हर महिला को इससे गुजरना पड़ता है। लेकिन समय के साथ यह दर्द इतना बढ़ने लगा कि उनके लिए इसे नजरअंदाज करना मुश्किल हो गया।
हर महीने पीरियड्स के कुछ दिन उनके लिए चिंता और परेशानी लेकर आते थे। तेज पेट दर्द, कमर में दर्द और अत्यधिक थकान की वजह से वह अपने काम और रोजमर्रा की गतिविधियों पर ध्यान नहीं दे पाती थीं। कई बार उन्हें ऑफिस से छुट्टी लेनी पड़ती थी और अपनी सामान्य दिनचर्या रोकनी पड़ती थी।
स्नेहा बताती हैं कि सबसे मुश्किल हिस्सा यह था कि आसपास के लोग अक्सर इसे “सामान्य पीरियड पेन” मान लेते थे। उन्होंने भी लंबे समय तक खुद को यही समझाया कि शायद दर्द सहना ही पड़ेगा। उन्होंने दर्द की दवाइयां लीं और अलग-अलग तरीके अपनाए, लेकिन राहत सिर्फ कुछ समय के लिए मिलती थी।
धीरे-धीरे दर्द का असर उनकी जिंदगी के दूसरे हिस्सों पर भी पड़ने लगा। वह ट्रैवल करने, सोशल प्लान बनाने और अपनी पसंदीदा गतिविधियों में हिस्सा लेने से बचने लगीं, क्योंकि उन्हें डर रहता था कि कहीं दर्द अचानक बढ़ न जाए। इसके अलावा, लंबे समय से चल रही परेशानी ने उन्हें मानसिक रूप से भी थका दिया था।
आखिरकार उन्होंने Pristyn Care में स्त्री रोग विशेषज्ञ से सलाह लेने का फैसला किया। जांच और मेडिकल हिस्ट्री के आधार पर डॉक्टर ने बताया कि यह सिर्फ सामान्य पीरियड्स का दर्द नहीं था, बल्कि उन्हें एंडोमेट्रियोसिस (Endometriosis) की समस्या थी। डॉक्टर ने समझाया कि इसमें गर्भाशय की अंदरूनी परत जैसी टिश्यू गर्भाशय के बाहर बढ़ने लगती है, जिससे दर्द और अन्य परेशानियां हो सकती हैं।
स्नेहा के लिए यह जानना एक तरफ चिंता की बात थी, लेकिन दूसरी तरफ राहत भी थी, क्योंकि आखिरकार उन्हें अपनी परेशानी का सही कारण पता चल गया था। डॉक्टर ने उनकी स्थिति के अनुसार इलाज के विकल्प समझाए और बताया कि सही समय पर उपचार लेने से लक्षणों को नियंत्रित किया जा सकता है और जीवन की गुणवत्ता बेहतर हो सकती है।
इलाज के दौरान उन्हें नियमित मेडिकल गाइडेंस मिला और उन्होंने डॉक्टर की सलाह के अनुसार अपनी दिनचर्या में बदलाव किए। जरूरत के अनुसार उपचार लेने के बाद धीरे-धीरे दर्द की तीव्रता कम होने लगी और वह फिर से अपनी सामान्य जिंदगी की ओर लौटने लगीं।
कुछ समय बाद स्नेहा ने महसूस किया कि अब हर महीने आने वाले दिन डर और दर्द से नहीं, बल्कि सामान्य जीवन का हिस्सा बन गए हैं। वह दोबारा अपने काम पर ध्यान दे पा रही थीं, बाहर जा पा रही थीं और उन चीजों को कर पा रही थीं जिन्हें उन्होंने लंबे समय तक टाल दिया था।
आज स्नेहा मानती हैं कि सबसे जरूरी कदम था अपनी परेशानी को गंभीरता से लेना और समय पर विशेषज्ञ से सलाह लेना।
“यह सिर्फ मासिक धर्म का दर्द नहीं था,” स्नेहा कहती हैं। “जब मुझे इसका सही कारण पता चला, तभी मैं सही इलाज की दिशा में आगे बढ़ पाई।”
Author:
Sneha Kapoor
Dedicated Support at Every Step!
Our Doctors are available 24 hours a day, 7 days a week to help you!
Dedicated Support at Every Step!
Our Doctors are available 24 hours a day, 7 days a week to help you!
Popular Posts










