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Maine kabhi nahi socha tha ki Thyroid ki samasya zindagi itni badal degi
सोनाली गुप्ता के लिए थायरॉयड की समस्या सिर्फ गर्दन में आई एक सूजन तक सीमित नहीं थी। धीरे-धीरे इसने उनके आत्मविश्वास, खाने-पीने और रोजमर्रा की जिंदगी पर असर डालना शुरू कर दिया था।
“शुरुआत में मुझे लगा था कि गर्दन पर आई सूजन शायद वजन बढ़ने की वजह से है। लेकिन जब वह लगातार बढ़ती गई, तो मुझे डर लगने लगा कि आखिर मेरे शरीर में हो क्या रहा है।”
लखनऊ में रहने वाली 38 वर्षीय सोनाली एक बैंक में काम करती हैं। ऑफिस की जिम्मेदारियों के साथ घर और परिवार संभालना उनकी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा था।
कुछ साल पहले उन्होंने अपनी गर्दन के सामने एक छोटी-सी गांठ महसूस की।
गांठ में शुरुआत में कोई खास दर्द नहीं था।
इसलिए सोनाली ने इसे ज्यादा गंभीरता से नहीं लिया।
“मैंने सोचा शायद यह कोई सामान्य सूजन होगी और कुछ दिनों में ठीक हो जाएगी।”
लेकिन कुछ दिनों के बजाय कई महीने बीत गए।
गांठ गायब नहीं हुई।
बल्कि धीरे-धीरे उसका आकार बढ़ने लगा।
शीशे में खुद को देखते समय सोनाली की नजर सबसे पहले अपनी गर्दन पर जाती थी।
“पहले मैं इसे छिपाने के लिए कपड़े और दुपट्टे का ज्यादा इस्तेमाल करने लगी थी। मुझे लगता था कि हर कोई मेरी गर्दन की तरफ देख रहा है।”
धीरे-धीरे उन्हें निगलने में भी परेशानी महसूस होने लगी।
खाना खाते समय गले में कुछ अटकने जैसा लगता। कभी-कभी पानी पीते समय भी असहजता महसूस होती।
रात में लेटने पर गर्दन में दबाव और ज्यादा महसूस होता।
फिर उनकी आवाज में भी बदलाव आने लगा।
सोनाली को समझ नहीं आ रहा था कि आखिर एक छोटी-सी गांठ इतनी सारी परेशानियां कैसे पैदा कर सकती है।
उन्होंने कुछ समय तक इसे नजरअंदाज किया।
लेकिन एक दिन खाना खाते समय उन्हें अचानक ऐसा लगा जैसे खाना गले में अटक रहा हो।
उस घटना ने उन्हें डरा दिया।
“उस दिन मैंने तय कर लिया कि अब इसे और टालना नहीं है। मुझे पता करना ही था कि मेरी गर्दन में आखिर हो क्या रहा है।”
सोनाली डॉक्टर के पास गईं।
जांच के बाद डॉक्टर ने थायरॉयड की जांच और अल्ट्रासाउंड कराने की सलाह दी। रिपोर्ट्स में थायरॉयड ग्रंथि में गांठ की पुष्टि हुई।
आगे की जांच के लिए उन्हें कुछ और टेस्ट कराने की सलाह दी गई।
“जब डॉक्टर ने कहा कि मेरी थायरॉयड ग्रंथि में गांठ है, तो मेरे मन में सबसे पहला सवाल यही आया कि कहीं यह कैंसर तो नहीं है।”
कुछ जांचों के बाद डॉक्टर ने उनकी स्थिति और उपलब्ध उपचार विकल्पों के बारे में विस्तार से बताया।
उनकी स्थिति में थायरॉयड ग्रंथि को सर्जरी के माध्यम से निकालने की सलाह दी गई।
सोनाली के लिए यह सुनना आसान नहीं था।
सर्जरी का नाम सुनते ही उनके मन में कई सवाल आने लगे।
क्या ऑपरेशन बहुत दर्दनाक होगा?
गर्दन पर निशान रह जाएगा?
क्या वह सामान्य जिंदगी जी पाएंगी?
क्या उन्हें जिंदगी भर दवाएं लेनी पड़ेंगी?
“मैं बाहर से सामान्य दिखने की कोशिश कर रही थी, लेकिन अंदर से बहुत डरी हुई थी। मुझे लगता था कि थायरॉयड की सर्जरी के बाद मेरी जिंदगी पहले जैसी नहीं रहेगी।”
अपने परिवार से बात करने के बाद सोनाली ने Pristyn Care में विशेषज्ञ से कंसल्टेशन लेने का फैसला किया।
कंसल्टेशन के दौरान ENT विशेषज्ञ और सर्जिकल टीम ने उनकी रिपोर्ट्स को ध्यान से देखा और उन्हें थायरॉयड सर्जरी की प्रक्रिया के बारे में विस्तार से समझाया।
डॉक्टर ने उन्हें बताया कि सर्जरी में थायरॉयड ग्रंथि के प्रभावित हिस्से या आवश्यकता के अनुसार पूरी ग्रंथि को हटाया जा सकता है और आगे की दवाओं व फॉलो-अप की जरूरत व्यक्ति की स्थिति पर निर्भर करती है।
“मेरे लिए सबसे अच्छी बात यह थी कि डॉक्टर ने मुझे जल्दी करने के बजाय मेरी सारी शंकाएं दूर कीं। उन्होंने मुझे बताया कि सर्जरी के बाद किन चीजों का ध्यान रखना होगा।”
काफी सोच-विचार और परिवार से चर्चा करने के बाद सोनाली ने सर्जरी कराने का फैसला किया।
सर्जरी के दिन वह काफी नर्वस थीं।
“ऑपरेशन थिएटर जाने से पहले मेरे मन में सिर्फ यही चल रहा था कि सब ठीक होगा या नहीं। लेकिन डॉक्टर और स्टाफ ने मुझे लगातार भरोसा दिलाया कि मैं सुरक्षित हाथों में हूं।”
सर्जरी सफलतापूर्वक पूरी हुई।
सर्जरी के बाद सोनाली को कुछ समय निगरानी में रखा गया। डॉक्टरों ने उनकी स्थिति की जांच की और उन्हें दवाओं, आराम और फॉलो-अप से जुड़ी जरूरी सलाह दी।
शुरुआती दिनों में उन्हें गले और गर्दन के आसपास कुछ असहजता महसूस हुई।
लेकिन जिस गांठ ने महीनों तक उन्हें परेशान किया था, अब वह उनके लिए चिंता का कारण नहीं थी।
“जब मैंने पहली बार आईने में अपनी गर्दन देखी, तो मेरे मन में डर से ज्यादा राहत थी। मुझे लगा कि आखिरकार मैं इस परेशानी से बाहर निकल रही हूं।”
धीरे-धीरे उन्होंने सामान्य खाना शुरू किया और अपनी रोजमर्रा की गतिविधियों में वापस लौटने लगीं।
कुछ समय बाद सोनाली फिर से ऑफिस जाने लगीं।
अब उन्हें खाना निगलते समय पहले जैसी परेशानी नहीं होती थी।
रात में लेटने पर गर्दन में दबाव महसूस नहीं होता था।
और सबसे बड़ा बदलाव उनके आत्मविश्वास में आया।
“पहले मैं लोगों से बात करते समय अपनी गर्दन छिपाने की कोशिश करती थी। अब मुझे ऐसा करने की जरूरत महसूस नहीं होती।”
रिकवरी के दौरान सोनाली ने डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवाएं लीं और नियमित फॉलो-अप कराया।
उन्होंने यह भी समझा कि थायरॉयड की सर्जरी के बाद नियमित जांच और डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवाएं लेना बेहद जरूरी है।
कुछ महीनों बाद जब उन्होंने पीछे मुड़कर देखा, तो उन्हें एहसास हुआ कि जिस बीमारी को उन्होंने शुरुआत में मामूली समझा था, उसने उनकी जिंदगी पर कितना असर डाला था।
“मैंने बहुत समय सिर्फ इसलिए निकाल दिया क्योंकि मुझे दर्द नहीं हो रहा था। लेकिन अब समझ आया कि दर्द न होना यह साबित नहीं करता कि शरीर में सब कुछ ठीक है।”
अब सोनाली उन लोगों को भी सलाह देती हैं जिन्हें गर्दन में गांठ, सूजन, निगलने में परेशानी या आवाज में लगातार बदलाव महसूस हो रहा हो।
“गर्दन में कोई गांठ या लगातार बदलाव दिखे तो उसे सिर्फ यह सोचकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए कि दर्द नहीं हो रहा है। जांच करवाना बेहतर है।”
आज सोनाली अपनी जिंदगी में वापस लौट चुकी हैं।
वह ऑफिस जाती हैं, परिवार के साथ समय बिताती हैं और पहले की तरह अपने भविष्य की योजनाएं बनाती हैं।
लेकिन उनके लिए सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब उनका दिन अपनी बीमारी के बारे में सोचते हुए शुरू नहीं होता।
“एक समय मुझे लगता था कि यह गांठ मेरी जिंदगी का हिस्सा बन गई है। आज जब मैं बिना डर के अपने दिन की शुरुआत करती हूं, तो महसूस होता है कि थायरॉयड की सर्जरी ने सिर्फ मेरी समस्या का इलाज नहीं किया, बल्कि मुझे मेरी जिंदगी वापस दे दी।”
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Author:
Sonali Gupta
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