एनल फिशर एक शारीरिक समस्या है जो किसी भी व्यक्ति को प्रभावित कर सकती है। फिशर की स्थिति में एनस में छोटा सा एक कट हो जाता है और इसी कट को मेडिकल भाषा में फिशर कहा जाता है। फिशर से पीड़ित वयक्ति को सौच करते समय काफी दर्द और तकलीफ होती है। स्टूल पास करते समय कभी कभी खून भी आ सकता है।
‘फिशर’ बवासीर का अगला स्टेज है। जब आप अपने बवासीर की समस्या का इलाज समय पर सही से नहीं कराते हैं तो यह एक वक्त के बाद फिशर में बदल जाता है। फिशर की स्थिति में आपको उठने, बैठने और अपने दैनिक जीवन के कामों को रकने में परेशानी हो सकती है।
फिशर की शुरुआत में एनस में छोटा सा कट होता है लेकिन समय पर इसका इलाज न करने या फिर लंबे समय तक इसे नजरअंदाज करने पर यह गंभीर रूप ले लेता है जिसकी वजह से आपकी परेशानियां बढ़ जाती हैं। इसलिए फिशर की समस्या होने पर तुरंत अपने आस पास के डॉक्टर से मिलकर इसका सही जांच और इलाज कराना चाहिए।
फिशर के इलाज के लिए बहुत सारे उपाय मौजूद हैं लेकिन लेजर सर्जरी के द्वारा इसका इलाज सबसे सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। क्योंकि लेजर सर्जरी की मदद से डॉक्टर इस बीमारी को हमेशा के लिए खत्म कर दते हैं। ज्यादातर केसेस में दवाई, मलहम, घरेलू उपचार या दूसरी चीजों का इस्तेमाल करने पर आपको बवासीर के दर्द, जलन और तकलीफों से थोड़ी देर के लिए तो आराम मिल जाता है। लेकिन कुछ समय के बाद बावासीर की समस्या फिर से शुरू हो जाती है और फिर आपकी तकलीफे भी जैसी की तैसी आपके सामने होती हैं। यही कारण है आज हर कोई बवासीर का इलाज लेजर सर्जरी के जरिए करवाना पसंद कर रहा है।
एनल फिशर ऐसी बीमारी जिसका स्थायी रूप से इलाज नहीं किया गया तो यह समय के साथ साथ गंभीर होता है। जैसे जैसे यह गंभीर होता है वैसे वैसे आपकी तकलीफें और बेचैनी भी बढ़ती है। एक समस्य के बाद फिशर फिस्टुला में बदल जाता है। फिस्टुला बवासीर का आखिरी स्टेज है। इसमें कैंसर और ट्यूबरक्लोसिस होने का खतरा बढ़ जाता है। इस स्थिति में आपकी मृत्यु भी हो सकती है। लेजर सर्जरी बवासीर का स्थायी इलाज है। इसकी मदद से बवासीर की समस्या बहुत ही आसानी से जड़ से खत्म किया जा सकता है। इस सर्जरी के बाद फिशर के दोबारा होने का खतरा लगभग न के बराबर होता है।
पारंपरिक सर्जरी की तुलना में लेजर सर्जरी बहुत प्रभावशाली और सुरक्षित है। पारंपरिक सर्जरी के दौरान मरीज को बड़ा सा कट लगता है, काफी खून निकलता है, टांके लगते हैं, टांको को सूखने में समय लगता है, टांको से जख्म बनने और इंफेक्शन होने का भी खतरा रहता है, इसके अलावा मरीज को ठीक होने में महीनों तक का समय लगता है। लेकिन लेजर सर्जरी के साथ ऐसी कोई बात नहीं है।
लेजर सर्जरी एक संक्षिप्त सर्जिकल प्रक्रिया है जो 20-30 मिनट के अंदर पूरी हो जाती है। सर्जरी करने से पहले डॉक्टर मरीज की शारीरिक जांच करते हैं ताकि वह बवासीर के स्थिति को अच्छे से समझ सकें। जांच करने के बाद मरीज को जेनेरल अनेस्थिसिया दिया जाता है और फिर सर्जरी की जाती है।
सर्जरी के दौरान मरीज को दर्द या रक्स्राव नहीं होता है। मरीज को कट, टांके, जख्म या दाग भी नहीं होते हैं। ये चीजें न होने की वजह से मरीज को ठीक होने में बहुत काम समय लगता है। सर्जरी के दिन ही मरीज को हॉस्पिटल से डिस्चार्ज कर दिया है। सर्जरी के दो दिन के बाद से मरीज अपने दैनिक जीवन के कामों को शुरू करने के लिए फिट हो जाते है। लेजर सर्जरी के दौरान या बाद में मरीज को किसी भी तरह की परेशानी होने का खतरा लगभग न के बराबर होता है।
प्रिस्टीन केयर फिशर का बेस्ट इलाज करने के साथ साथ अपने मरीजों को और भी ढेर सारी सुविधाएं देते हैं। इसमें मरीज के लिए सर्जरी के दिन गाड़ी बुक करना, डॉक्टर के साथ उनका अप्वाइंटमेंट लेना, हॉस्पिटल में उनकी जगह सभी पेपरवर्क पूरा करना, रहने के लिए एक डीलक्स रूम और मरीज की अच्छे से देखभाल करने के लिए एक केयर बड्डी मुहैय्या कराना आदि शामिल है।
अगर आप अपने फिशर की समस्या से हमेशा के लिए पीछा छुड़ाना चाहते हैं तो प्रिस्टीन केयर से संपर्क कर सकते है।
डिस्क्लेमर: यह ब्लॉग सामान्य जानकारी के लिए लिखा गया है| अगर आप किसी बीमारी से ग्रसित हैं तो कृपया डॉक्टर से परामर्श जरूर लें और डॉक्टर के सुझावों के आधार पर ही कोई निर्णय लें|