भगन्दर का घरेलू उपचार

भगंदर क्या है — What is Fistula in Hindi

भगंदर को अंग्रेजी में Fistula कहा जाता है। यह मनुष्यों में होने वाली एक गंभीर शारीरिक बीमारी है। इस स्थिति में गुदा द्वार में या उसके आस पास छोटी-छोटी फुंसियां हो जाती हैं जो जल्दी ठीक नहीं होती हैं। इनके कारण गुदा के हिस्से पर घाव बनने लगते हैं और लाल चित्ते भी पड़ जाते हैं। जिसकी वजह से खुजली और दर्द का सिलसिला शुरु हो जाता है। यही बाद में जाकर भगंदर का रूप ले लेता है।

गुदा भाग के चारों तरफ का स्थान पीला पड़ जाता है। मल द्वार के ठीक बगल में फोड़ा जैसा बन जाता है जिसमें मवाद भर जाता है जो थोड़े- थोड़े समय पर रिसता रहता है। भगंदर का ठीक समय पर इलाज न किया जाए तो यह कैंसर का रूप भी ले सकता है। कुछ समय बाद भगंदर अपना मुंह दूसरी तरफ भी बना लेता है। दोमुखी द्वार बन जाने की वजह से मरीज को ज्यादा तकलीफ का सामना करना पड़ता है।

कभी कभी ऐसी कंडिशन भी बन जाती है कि इसका मुंह जांघ के किसी हिस्से पर उभर आता है जो की बहुत खतरनाक है। क्योंकि इसमें मवाद, खून और दुर्गंध के साथ मल रिसने लगता है। भगंदर रोग होने के बाद इंसान को चलने फिरने, कुर्सी पर या किसी समतल जगह पर बैठने, पीठ के बल लेटने और सौच करते समय असहनीय पीड़ा होती है।

भगंदर के प्रकार — Types of Fistula in Hindi

भगंदर के दो प्रकार के होते हैं।

  • अपूर्ण भगंदर
  • पूर्ण भगंदर

अपूर्ण भगंदर में भगंदर रोग का सिर्फ एक ही मुंह बनता है। पूर्ण भगंदर में भगंदर रोग का मुंह दो जगहों से बनता है। यह अधिक खतरनाक होता है।

भगंदर के कारण — Causes of Fistula in Hindi

भगंदर कई कारणों से हो सकता है। भगंदर होने का कोई एक विशेष कारण नहीं होता है। भगंदर होने के कारण में शामिल है:

  • गुदा द्वार की ठीक से सफाई न होना।
  • गुदा द्वार पर अधिक खुजली कर देना।
  • गुदा द्वार के बाल साफ न करना।
  • अधिक समय तक साइकिल, बाइक चलाना या ऐसी कोई भी सवारी करना जहां बहुत अधिक समय तक बैठे रहना पड़ता हो।
  • लंबे समय से कब्ज की प्राब्लम होना।
  • अधिक मिर्च मसालेदार चीजें नियमित रुप से खाना।
  • गुदा द्वार पर चोट लगना।
  • किसी जगह पर लंबे समय तक बैठे रहना
  • गुदा सेक्स करने से भी भगंदर होने की संभावना बनी रहती है

डॉक्टर द्वारा बताए गए इन कारणों से भगंदर रोग होने की संभावना अधिक रहती है। डॉक्टर का कहना है की इसके अतिरिक्त भी कुछ कारण हो सकते हैं जिसकी वजह से भगंदर की बीमारी संभव है।

भगंदर के लक्षण — Symptoms of Fistula in Hindi

भगंदर के निम्नलिखित लक्षण होते हैं:

  • व्यक्ति को उठते, बैठते और खांसते समय गुदा में दर्द होना।
  • सौच करते समय दर्द होना।
  • बदबूदार मल या खून का निकलना
  • कई दिनों तक गुदा के पास दर्द और सूजन होना
  • हमेशा सौच करने की अर्जेंसी होना
  • गूदे के पास बहुत जल्दी फुंसी या फोड़ा होना
  • जल्दी थक जाना
  • इंफेक्शन के कारण अधिक बुखार और ठंड लगना

ध्यान रखें, भगंदर और फिशर के लक्षण सामान भी महसूस हो सकते हैं। भगंदर के लक्षणों को अनदेखा करना भारी पड़ सकता है। इनमें से कोई भी लक्षण महसूस होने पर तुरंत डॉक्टर से मिलकर इसकी जांच करवानी चाहिए।

भगंदर का इलाज — Treatment of Fistula in Hindi

भगंदर का इलाज मुख्य रुप से 4 प्रकार से हो सकता है। इन 4 तरीकों में शामिल है – भगंदर का घरेलू उपचार (Home Remedies For Fistula), भगंदर का डॉक्टरी इलाज (Medical Treatment For Fistula), भगंदर का होम्योपैथिक इलाज (Fistula Treatment in Homeopath) और भगंदर का आयुर्वेदिक इलाज (Fistula Treatment in Ayurveda)। आइए समझते हैं की भगंदर का घरेलू उपचार क्या है।

भगंदर का घरेलू उपचार — Home Remedies For Fistula in Hindi

भगंदर एक ऐसी बीमारी है जिसका ठीक समय पर उपचार न किया जाए तो यह गंभीर गंभीर समस्याएं खड़ी कर सकती है। इंसान का चलना- फिरना और एक से दूसरी जगह आना जाना बिल्कुल बंद हो जाता है। काम छूट जाता है। इंसान बिल्कुल चिड़चिड़ा हो जाता है। इन समस्याओं से बेहतर है कि भगंदर को घरेलू उपचार (Bhagandar Ka Gharelu Ilaj) के जरिए भगंदर की समस्या को दूर कर दिया जाए।

भगंदर के घरेलू उपचार में निम्नलिखित इलाज शामिल है:

  • शरीर में फाइबर की मात्रा संतुलित करें – भगंदर में कब्ज हो जाती है। कब्ज दूर करने के लिए फाइबर युक्त पदार्थ का सेवन करना चाहिए। भगंदर रोग के दौरान मांसाहारी भोजन कम खाना चाहिए।
  • गुनगुने पानी से सिकाई करें – भगंदर होने पर गुदा भाग पर गुनगुने पानी से सिकाई करना फ़ायदेमंद होता है। यह भगंदर के दौरान राहत देता है।
  • नीम की पत्ती का उपयोग – भगंदर भगाने में यह रामबाण औषधि है। नीम की पत्तियों का कई तरह से उपयोग किया जा सकता है। नीम की पत्तियों को उबालकर उस पानी से भगंदर को धोना चाहिए। उबली हुई नीम की पत्तियों का पेस्ट बनाकर भगंदर पर लगाने से भी लाभ मिलता है। नीम और देशी घी का लेप बहुत कारगर होता है। इसमें नीम की पत्ती, देशी घी और तिल बराबर मात्रा में पीस लेने के बाद उसमें जौ का आटा मिलाकर लेप तैयार करें। अब इस लेप को किसी कपड़े में बाँध कर भगंदर के स्थान पर बांधिए। इस विधि द्वारा दर्द से बहुत जल्द आराम मिलता है और भगंदर पूरी तरह से ठीक होने की संभावना काफी हद तक बढ़ जाती है।
  • अनार के पत्ते का उपयोग – अनार के पत्ते को पानी में उबाल लेने के बाद उस पानी से फिस्टुला से प्रभावित क्षेत्र को धोने से बहुत लाभ प्राप्त होता है।
  • केला और कपूर का उपयोग – पके हुए केले के बीच में चीरा लगा कर उस चीरे वाली जगह पर कपूर रखकर खाना चाहिए। इससे आराम मिलता है। ध्यान देने वाली बात: इस केले को खाने से एक घंटे पहले और खाने के एक घंटे बाद किसी भी दूसरी चीज का सेवन नहीं करना चाहिए।
  • काली मिर्च का उपयोग – लाजवंती और काली मिर्च के उपयोग से भगंदर में राहत मिलती है। काली मिर्च और लाजवंती को पीसकर उसका एक लेप तैयार करें और फिर उस लेप को फिस्टुला वाली जगह पर लगाएं।
  • लहसुन का उपयोग – लहसुन जीवाणु खत्म करने की बेहतरीन दवा है। लहसुन को पीसकर घी में भुन लेना चाहिए और फिर उसे भगंदर वाली जगह पर चाहिए।
  • त्रिफला का उपयोग – भगंदर में त्रिफला बहुत उपयोगी होता है। त्रिफला क्काथ से धोने के बाद उसपर बिल्ली या कुत्ते की हड्डी का चूर मिलाकर भगंदर पर लगाने से बहुत राहत मिलती है।
  • गूलर और कांच नार का उपयोग – गूलर के फूल और कांच नार की पत्ती को पीसकर गोली बनाइए और दिन में दो बार गरम पानी के साथ इसका सेवन करने पर भगंदर को ठीक होने में टाइम नहीं लगता है। 
  • मनार के दूध का उपयोग – मनार के दूध में रुई भिगोने के बाद उस रुई को किसी मिट्टी के दिये या हांडी में सरसों के तेल के साथ जलाएं। जब रुई जलने लगे तब किसी मिट्टी के बर्तन में काजल बना ले। इस काजल को भगंदर पर लगाने से बहुत लाभ मिलता है।
  • हल्दी और मनार का उपयोग – हल्दी में मनार का दूध मिलाकर अच्छी तरह से पिस लेना चाहिए। फिर थोड़ा सा सूखने के बाद उसे भगंदर के स्थान पर लगाने से राहत मिलती है।

भगंदर के दौरान क्या नहीं खाना चाहिए — What To Avoid During Fistula in Hindi

  • भगंदर के दौरान माँस, मछली इत्यादि जैसे भोज्य पदार्थों के सेवन से बचना चाहिए।
  • भगंदर के दौरान अधिक तैलीय यानी जिस खाना में अधिक तेल, रिफाइन इत्यादि का उपयोग किया गया हो उसका सेवन नहीं करना चाहिए।
  • भगंदर में अधिक मसालेदार चीजों को खाने से परहेज करना चाहिए।

अब तब आपने भगंदर का घरेलू उपचार Home Remedies For Fistula हिंदी में अच्छी तरह समझ लिया होगा। अगर आप या आपके जानने वाले भगंदर की समस्या से पीड़ित हैं तो उन्हें भगंदर के घरेलू उपचार बताने और अपनाने के साथ ही साथ डॉक्टर से सलाह लेने के लिए प्रेरित करें। भगंदर बीमारी में डॉक्टर से सलाह लेना उचित होता है क्योंकि परेशानी ज्यादा होने की स्थिति में एक मात्र विकल्प आपरेशन ही बचता है।

भगंदर रोग के विशेषज्ञ डॉक्टर के लिए आपको इधर उधर भटकने की जरूरत नही है। प्रिस्टिन केयर के पास विशेषज्ञ डॉक्टर की टीम है जो भगंदर का परमानेंट इलाज करती है। 

प्रिस्टिन केयर से ही क्यों कराएं अपना इलाज

प्रिस्टिन केयर से भगंदर का इलाज कराने के कई फायदे हैं, जैसे:

  • मरीज का ख्याल:- मरीज को अपने आप कुछ नही करना पड़ता है। प्रिस्टिन केयर के कर्मचारी मरीज की पर्ची बनवाने से लेकर खाने और रहने तक का सब काम करते हैं।
  • बेहतरीन इलाज:- प्रिस्टिन केयर में बेहद उम्दा और अनुभवी डॉक्टर की टीम कार्यरत है जो मरीजों को यह एहसास दिलाती है कि अब उनकी बीमारी हमेशा के लिए दूर होने वाली है।
  • उच्च टेक्नोलॉजी का उपयोग:- प्रिस्टिन केयर में उच्च टेक्नोलॉजी से बनी मशीनों से इलाज किया जाता है जिससे मरीज को दर्द का एहसास तक नही होता है।
  • बेहतरीन सुविधा:- बेहतरीन सुविधाओं में शामिल है एक दिन के अंदर डिस्चार्ज, कोई EMI कॉस्ट नही, आपरेशन के बाद फ्री फॉलोअप और ऑपरेशन के दिन मरीज के लिए निःशुल्क वाहन सुविधा।

अगर आप या आपका कोई परिचित भगंदर से पीड़ित है तो भगंदर के घरेलू उपचार का इस्तेमाल करने के साथ साथ डॉक्टर से भी अवश्य संपर्क करें।

One thought on “भगंदर का घरेलू उपचार — Home Remedies For Fistula in Hindi”

  1. मुझे भगन्दर कि समस्या हैं
    जो बिल्कुल अपने प्राथमिक स्तर पर हैं। क्योंकि abhi मुझे कोई दर्द नहीं हो रहा हैं। नली के बाहर 1-1.5इंच बाहर छोटा सा फुंसी जैसा हैं जो कभी कभी बढ़ जाता हैं कभी अपने आप pichak जाता हैं और अगर कभी फोड़ते हैं तो उसमे से कुछ ब्लड निकलता हैं 4-5 बूंद।

    उस फुंसी के पीछे कुछ पतली नश कि तरह हार्ड हो रहा हैं।
    यह करीब 8-10 महीने से इसी तरह हैं। 2-3 महीने homiyopath और abhi बीते महीने कुछ टेबलेट खायी डाक्टर के सलाह से लेकिन मुझे कुछ विशेष परिवर्तन नहीं लगा। तो मैं ऑनलाइन सर्च करते वक़्त आपके बारे में जाना। अब आपको msg कर रहा हूँ। कृपया उचित सलाह दे।
    अब उसकी कठोरता बढ़ी हैं

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