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एसीएल टियर (घुटने की चोट) का ट्रीटमेंट: निदान, सर्जरी, प्रक्रिया, रिकवरी और लागत

खेल के दौरान पैर और घुटने में चोट लगना साधारण बात है, लेकिन जब चोट गंभीर हो जाती है और दर्द का कारण बनती है तो, मरीज को इलाज की आवश्यकता हो सकती है। एसीएल टियर के गंभीर मामलों में अक्सर सर्जरी की आवश्यकता होती है। एसीएल लिगामेंट के टूटने की स्थिति में एसीएल रिकंस्ट्रक्शन सर्जरी की आवश्यकता पड़ सकती है। यदि आप भी इस प्रकार की समस्या से परेशान हैं और इलाज कराना चाहते हैं तो नीचे दिए गए नंबर पर कॉल करें और भारत के बेस्ट ऑर्थोपेडिक सर्जन से अपना इलाज करवाने के लिए तुरंत अपॉइंटमेंट बुक करवाएं।

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  • एसीएल टियर क्या है?

    ACL का पूरा नाम एंटीरियर क्रूसिएट लिगामेंट है जो कि घुटने में होता है। घुटना मानव शरीर का सबसे बड़ा और जटिल जोड़ है। यह ठीक से काम करने के लिए चार प्राथमिक स्नायुबंधन के साथ-साथ कई मांसपेशियों, टेंडन और माध्यमिक स्नायुबंधन पर निर्भर रहता है।

    घुटने के किनारों पर दो स्नायुबंधन मीडियल कोलेटरल लिगामेंट (MCL) और लेटरल कोलेटरल लिगामेंट (LCL) होते हैं। जबकि घुटने के केंद्र में दो क्रॉस्ड लिगामेंट्स होते हैं, जिन्हें एंटीरियर क्रूसिएट लिगामेंट (ACL) और पोस्टीरियर क्रूसिएट लिगामेंट (PCL) के नाम से जाना जाता है। एसीएल, पिंडली की हड्डी के सामने के शीर्ष भाग को जांघ की हड्डी के पीछे के निचले हिस्से से जोड़ता है और पिंडली की हड्डी को आगे की ओर खिसकने से रोकता है।

    एंटीरियर क्रूसिएट लिगामेंट का काम घुटने के रोटेशन में मदद करना है। एसीएल, मस्तिष्क और मांसपेशियों को घुटने की स्थिति की सटीक जानकारी और सिग्नल भेजता है। साथ ही घुटने के जिस हिस्से में रोटेशन अत्यधिक है, वहां पर घूर्णी गति (रोटेशन स्पीड) को रोकने या कम करने का काम करता है। यदि शरीर, इस घुमाव को नियंत्रित करने में विफल रहता है, तो एसीएल फट सकता है। एंटीरियर क्रूसिएट लिगामेंट (एसीएल) कई प्रतिबंधों में से एक है जो घुटने के घूमने की क्रिया को रोकता है। इसी घूर्णन को रोकने के कारण एसीएल फट सकता है। इसमें मेनिस्कि, हड्डी, जॉइंट कैप्सूल, कोलेटरल लिगामेंट और पोस्टीरियर क्रूसिएट लिगामेंट शामिल हैं। एसीएल का फटना ही एसीएल टियर कहलाता है।

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    एसीएल टियर का इलाज क्या है?

    घुटने की गंभीर चोट यानी कि एसीएल टियर को सर्जरी के माध्यम से ठीक किया जा सकता है। एसीएल टियर का सर्जिकल ट्रीटमेंट ही एकमात्र विकल्प है। यदि एसीएल को सर्जरी के माध्यम से बदल दिया जाए या घुटने के आसपास से किसी अन्य टेंडन के साथ रिकंस्ट्किट किया जाए तो बेहतर परिणाम प्राप्त होते हैं। एसीएल रिकंस्ट्रक्शन के कई सर्जिकल विकल्प मौजूद हैं। हालांकि एसीएल टियर की सर्जिकल प्रक्रिया का प्रकार विशिष्ट सर्जन की पसंद और मरीज की स्थिति के आधार पर एक मरीज से दूसरे मरीज में भिन्न हो सकती है।

    एसीएल टियर का इलाज आमतौर पर आर्थोस्कोपिक तकनीक की मदद से किया जाता है। इस प्रक्रिया के दौरान, सर्जन घुटने पर एक या दो छोटे चीरे लगाता है। फटे हुए एसीएल को व्यवस्थित करने के लिए ग्राफ्ट को पटेलर टेंडन या हैमस्ट्रिंग टेंडन से लिया जाता है। 

    इसके बाद टिबिया व फीमर दोनों में ड्रिल के माध्यम से एक होल किया जाता है और ग्राफ्ट को घुटने के आर-पार पिरोया जाता है। प्रत्येक सुरंग में हड्डी का एक टुकड़ा और पटेलर टेंडन, मूल एसीएल की स्थिति में रह जाता है, और लिगामेंट रिकंस्ट्रक्ट हो जाता है। ग्राफ्ट सुरक्षित करने के लिए हड्डी के किनारे पर और सुरंग के बीच में एक पेंच को “वेजिंग” करके फिट कर दिया जाता है। वैकल्पिक रूप से, ग्राफ्ट को अन्य तकनीक जैसे स्टेपल, टांके और और बटन आदि द्वारा भी सुरक्षित किया जा सकता है। 

    एसीएल पुनर्निर्माण के अलावा, चोट लगने पर घुटने के भीतर अन्य संरचनाओं के लिए अतिरिक्त प्रक्रियाएं की जा सकती हैं। फटे हुए मेनिस्कस को या तो रिपेयर किया जा सकता है या उसे काटा जा सकता है। इस प्रक्रिया को मेनिससेक्टोमी कहते हैं। अन्य लिगामेंट को भी रिपेयर या रिकंस्ट्रक्ट किया जा सकता है। 

    क्या आप इनमें से किसी लक्षण से गुज़र रहे हैं?

    एसीएल टियर सर्जरी से पहले होने वाली जांच

    एसीएल टियर की सर्जरी करने से पहले डॉक्टर शारीरिक परीक्षण करने की सलाह दे सकता है। इस दौरान डॉक्टर सूजन और कोमलता के लिए घुटने की जांच करेगा। आपके चोटिल घुटने की तुलना आपके बिना चोट वाले घुटने से करेगा। गति की सीमा और जोड़ की कार्यप्रणाली का आकलन करने के लिए वह आपके घुटने को विभिन्न स्थितियों में मूव करने के लिए कह सकता है। इसके अलावा निम्न प्रकार की जांच प्रक्रिया से गुजरना पड़ सकता है:

    • एक्स-रे: हड्डी के फ्रैक्चर का पता लगाने के लिए एक्स-रे की आवश्यकता हो सकती है। हालांकि, एक्स-रे में लिगामेंट और टेंडन जैसे नरम ऊतक दिखाई नहीं देते हैं।
    • एमआरआई: एमआरआई आपके शरीर में कठोर और नरम दोनों प्रकार के ऊतकों की छवियां बनाने के लिए रेडियो तरंगों और एक चुंबकीय क्षेत्र का उपयोग करता है। एमआरआई, की मदद से एसीएल टियर का क्षेत्र और उपास्थि सहित घुटने में अन्य ऊतकों को नुकसान के संकेतों को देखा जा सकता है।
    • अल्ट्रासाउंड: आंतरिक संरचनाओं को देखने के लिए ध्वनि तरंगों का उपयोग करते हुए, घुटने के स्नायुबंधन, टेंडन और मांसपेशियों में चोटों की जांच के लिए अल्ट्रासाउंड का उपयोग किया जा सकता है।

    एसीएल टियर का इलाज कितने प्रकार से किया जा सकता है?

    एसीएल टियर का इलाज, चोट की गंभीरता और उसके कारण होने वाले लक्षण के आधार पर निर्भर करता है। साथ ही यह मरीज की विशिष्ट आवश्यकताओं पर भी निर्भर करता है। युवा एथलीटों में अक्सर सर्जरी की आवश्यकता होती है जबकि वृद्ध व्यक्तियों में, एसीएल सर्जरी को टाला जाता है। इसे निम्न प्रकार से ठीक किया जा सकता है:

    गैर सर्जिकल उपचार

    कई डॉक्टर एसीएल टियर को ठीक करने केलिए ब्रेसिंग का सुझाव देते हैं, जिसमें घुटने को किसी भी प्रकार की अस्थिरता से बचाने के लिए ब्रेस का उपयोग किया जाता है। अन्य विकल्पों में पैर पर बहुत अधिक दबाव डालने से बचने के लिए बैसाखी का उपयोग करना शामिल है। साथ ही चोट के कारण होने वाली सूजन को कम करने के लिए फिजियोथेरेपी की मदद ली जा सकती है। इसके अलावा घुटने की कार्यप्रणाली को बहाल करने में मददगार कुछ व्यायाम करने की सलाह दी जा सकती है। इस प्रकार की एक्टिविटी से पैर की मांसपेशियां मजबूत होती हैं।

    सर्जिकल उपचार

    एसीएल टियर के सर्जिकल उपचार में लिगामेंट का पुनर्निर्माण (लिगामेंट रिकंस्ट्रक्शन) शामिल है। अधिकांश एसीएल टियर के मामले में, टियर को दोबारा वापस सिलना या ठीक करना संभव नहीं होता है। इसलिए, घुटने की स्थिरता को बहाल करने के लिए लिगामेंट रिकंस्ट्रक्शन की जरूरत पड़ती है। इसमें डॉक्टर फटे लिगामेंट को टिश्यू ग्राफ्ट (मरीज के हैमस्ट्रिंग, क्वाड्रिसेप्स या पेटेलर टेंडन का एक हिस्सा) से बदल देता है। इसके बदले में, यह ग्राफ्ट नए लिगामेंट के बढ़ने का आधार बन जाता है। 

    ग्राफ्ट को घुटने के किसी भी हिस्से से लिया जा सकता है। लेकिन पटेलर टेंडन, यानी कि पिंडली की हड्डी और घुटने की टोपी के बीच के हिस्से से ग्राफ्ट को चयन करना सर्जन की पहली पसंद होता है। ग्राफ्ट का एक अन्य स्रोत हैमस्ट्रिंग टेंडन भी है, जो जांघों के पीछे मौजूद होता है। जांघ और घुटने की कैप के बीच मौजूद क्वाड्रिसेप्स टेंडन ग्राफ्ट के लिए एक और सामान्य स्रोत है। कई मामलों में, कैडेवर ग्राफ्ट का भी उपयोग किया जा सकता है। हालांकि, ग्राफ्ट का उपयोग करने के अपने फायदे और नुकसान हैं। इसलिए इसका चयन करने से पहले आर्थोपेडिक सर्जन के साथ गहन चर्चा जरूर करनी चाहिए। 

    इस सर्जरी के बाद मरीज को सक्रिय रूप से खेल (स्पोर्टस) में वापस आने में लगभग छह महीने या उससे अधिक का समय लग सकता है। एसीएल की चोट से संबंधित किसी भी सर्जरी में एंटीरियर क्रूसिएट लिगामेंट कंस्ट्रक्शन भी शामिल होता है। इसे एक आर्थोस्कोप की मदद से छोटा चीरा लगाकर पूरा किया जाता है। यह एक कम आक्रामक प्रक्रिया है। इस प्रक्रिया के दौरान मरीज को कम दर्द होता है और अस्पताल में कम समय बिताना पड़ता है। इस प्रक्रिया के बाद मरीज बेहद कम समय में ठीक हो जाती है।

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    एसीएल रिकंस्ट्रक्शन सर्जरी की प्रक्रिया

    एसीएल का पुनर्निर्माण कई बुनियादी चरणों का पालन करता है, हालांकि वे मामले-दर-मामले थोड़े भिन्न हो सकते हैं:

    • आर्थोपेडिक सर्जन घुटने के जोड़ के चारों ओर छोटे चीरे लगाता है, जिससे आर्थोस्कोप और सर्जिकल उपकरणों को शरीर के अंदर प्रवेश कराया जा सके।
    • आर्थ्रोस्कोप को घुटने में डाला जाता है और जोड़ के आसपास की जगह का विस्तार करने के लिए सलाइन सॉल्यूशन प्रदान किया जाता है। यह आर्थोस्कोपिक कैमरे सहित सर्जिकल उपकरणों के लिए जगह बनाता है, जो मॉनिटर पर वीडियो भेजता है ताकि सर्जन घुटने के जोड़ के अंदर देख सके।
    • इसके बाद सर्जन फटे एसीएल को घेरने वाली संरचनाओं का मूल्यांकन करता है, जिसमें बाएं और दाएं मेनिस्कस और आर्टिकुलर कार्टिलेज शामिल हैं। यदि इनमें से किसी भी सॉफ्ट टिश्यू में कोई घाव है, तो सर्जन उन्हें रिपेयर करता है।
    • इसके बाद ग्राफ्ट काटा जाता है (जब तक कि डोनर एलोग्राफ्ट का उपयोग नहीं किया जाता है)। ग्राफ्ट बनाने के लिए रोगी के शरीर के दूसरे हिस्से से टेंडन के एक हिस्से को काटा जाता है, जिसे फिर पटेला और टिबिया से ली गई हड्डी के प्लग के प्रत्येक सिरे पर जोड़ दिया जाता है। ये प्लग उस ग्राफ्ट को पकड़ने में मदद करते हैं जो नया एसीएल बनेगा।
    • सर्जन एक लचीली गाइड तार का उपयोग करके फीमर और टिबिया में नया एसीएल डालता है।
    • हड्डी के प्लग को सुरक्षित करने के लिए स्क्रू का उपयोग किया जाता है। समय के साथ, ये प्लग आसपास की हड्डी में विकसित हो जाते हैं।
    • प्रक्रिया को पूरा करने के लिए सर्जिकल उपकरण हटा दिए जाते हैं।

    ऑर्थ्रोस्कोपी एसीएल रिकंस्ट्रक्शन सर्जरी के फायदे

    ऑर्थ्रोस्कोपी एसीएल रिकंस्ट्रक्शन सर्जरी के निम्नलिखित फायदे हो सकते हैं:

    • आर्थोस्कोपिक एसीएल रिकंस्ट्रक्शन सर्जरी एक फटे लिगामेंट की मरम्मत के लिए एक न्यूनतम इनवेसिव तकनीक है। 
    • पारंपरिक सर्जिकल तकनीकों की तुलना में आर्थोस्कोपिक एसीएल रिकंस्ट्रक्शन सर्जरी की सफलता दर अधिक है। 
    • मिनिमली इनवेसिव होने के कारण इस सर्जिकल प्रक्रिया को ओपन सर्जरी की तुलना में अधिक पसंद किया जाता है।
    • यह प्रक्रिया आसपास के ऊतकों को कम नुकसान नहीं पहुंचाती है। 
    • इस प्रक्रिया के बाद रिकवरी बहुत आसान और तेज हो जाती है। 
    • यह सर्जिकल प्रक्रिया एक आउट पेशेंट के आधार पर की जा सकती है। इस प्रक्रिया के बाद मरीज तेजी से ठीक हो जाता है।
    • मरीज पारंपरिक एसीएल टियर सर्जरी के विपरीत कम समय के भीतर काम फिर से शुरू कर सकता है।

    एसीएल सर्जरी के बाद रिकवरी में कितना समय लगता है?

    एसीएल रिकंस्ट्रक्शन के बाद मरीज को अपनी पुरानी खेल गतिविधियों में लौटने में आमतौर पर छह से नौ महीने लग सकते हैं। सर्जरी के बाद मरीज बैसाखी और पैर के ब्रेस के सहारे चलने में सक्षम होता है। हालांकि पूरी तरह से रिकवर होने के लिए मरीज को निम्न बातों का ध्यान रखने की सलाह दी जाती है:

    • सर्जरी के बाद घुटने की मजबूती और मोशन की रेंज बढ़ाने वाले व्यायाम, रिकवरी अवधि की शुरुआत में ही प्रारंभ कर दिए जाते हैं।
    • सर्जरी के करीब चार महीने बाद मरीज को दौड़ने का अभ्यास शुरू करने की सलाह दी जाती है।
    • धुरी (घुटने घुमाने की प्रक्रिया) बनाने का अभ्यास सर्जरी के लगभग पांच महीने बाद शुरू किया जाता है।
    • प्रतिस्पर्धी खेलों में वापसी छह महीने की शुरुआत से ही शुरू हो सकती है।
    • आर्थोस्कोपिक सर्जिकल प्रक्रिया से इलाज कराने वाले मरीज, ओपन सर्जरी की तुलना में काफी कम समय में रिकवर कर लेते हैं। 
    • एसीएल सर्जरी के बाद रिकवरी के दौरान होने वाले दर्द को दवा की मदद से सफलतापूर्वक ठीक किया जा सकता है। इसकी रिकवरी अवधि भी एक रोगी से दूसरे रोगी में अलग-अलग होती है। मरीज को पूरी तरह से ठीक होने का निर्धारण मांसपेशियों की ताकत की बहाली, गति की सीमा और घुटने के जोड़ की प्रतिक्रिया पर आधारित होता है। 

    यदि एसीएल टियर का इलाज नहीं करवाते हैं तो क्या होगा?

    लिगामेंट को पर्याप्त रक्त की आपूर्ति नहीं मिलती है इसलिए, एसीएल की चोटें अपने आप ठीक नहीं होती हैं। यदि इन्हें अनुपचारित छोड़ दिया जाता है, तो वे निम्नलिखित स्वास्थ्य स्थितियों का कारण बन सकती हैं:

    • घुटने के जोड़ की अस्थिरता: क्षतिग्रस्त एसीएल जोड़ वजन को सहन नहीं कर सकता है और आगे बढ़ते हुए क्रम में और अधिक अस्थिर होता जाता है। एक स्थिति ऐसी आती है जब घुटना पूरी तरह से चलने के लिए भी अस्थिर हो जाता है।
    • दर्द: एसीएल की चोटें दर्दनाक होती हैं। यदि अनका इलाज न किया जाए तो दर्द समय के साथ बढ़ता जाता है और घुटना इतना सूज जाता है कि व्यक्ति को हिलने-डुलने तक में परेशानी होने लगती है।
    • विकलांगता: यदि एसीएल टियर का इलाज न किया जाए तो, घुटने का जोड़ स्थायी रूप से झुकने और सीधा करने की क्षमता खो देता है, जिससे स्थायी विकलांगता हो सकती है।
    • गठिया: एसीएल टियर के कारण लिगामेंट ठीक से काम नहीं कर सकता है, इसका कार्यात्मक भार आसपास के ऊतकों जैसे हड्डियों, टेंडन और मांसपेशियों द्वारा पैदा होता है। यह अतिरिक्त तनाव आगे चलकर गठिया का कारण बन सकता है।

    एसीएल सर्जरी के बाद रिकवरी में कितना समय लगता है?

    एसीएल रिकंस्ट्रक्शन के बाद मरीज को अपनी पुरानी खेल गतिविधियों में लौटने में आमतौर पर छह से नौ महीने लग सकते हैं। सर्जरी के बाद मरीज बैसाखी और पैर के ब्रेस के सहारे चलने में सक्षम होता है। हालांकि पूरी तरह से रिकवर होने के लिए मरीज को निम्न बातों का ध्यान रखने की सलाह दी जाती है:

    • सर्जरी के बाद घुटने की मजबूती और मोशन की रेंज बढ़ाने वाले व्यायाम, रिकवरी अवधि की शुरुआत में ही प्रारंभ कर दिए जाते हैं।
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    अधिकांश पूछे जाने वाले प्रश्न/ FAQs

    एसीएल पुनर्निर्माण सर्जरी के बाद मैं कितनी जल्दी खेल खेलना शुरू कर सकता हूं?

    उचित फिजियोथेरेपी की मदद से, एथलीट करीब 4 से 8 सप्ताह के बाद कुछ खेल गतिविधियों में लौट सकता है, लेकिन ऐसे खेलों जिनमें घुटने के जोड़ पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, उनमें वापसी करने में मरीज को लगभग 8 महीने लग सकते हैं। हालांकि सर्जरी के बाद किसी भी प्रकार की खेल गतिविधियों में शामिल होने से पहले आर्थोपेडिक सर्जन की सलाह जरूर लेनी चाहिए।

    एसीएल रिकंस्ट्रक्शन सर्जरी के लिए इस्तेमाल होने वाला सबसे आम ग्राफ्ट कौन सा है

    एसीएल टियर रिपेयर के लिए सबसे अधिक इस्तेमाल किए जाने वाले ग्राफ्ट में पेटेलर टेंडन ऑटोग्राफ्ट, पटेला टेंडन एलोग्राफ़्ट, हैमस्ट्रिंग ऑटोग्राफ़्ट, या क्वाड्रिसेप्स टेंडन ऑटोग्राफ़्ट शामिल है।

    क्या एसीएल टियर सर्जरी जरूरी है?

    एसीएल टियर सर्जरी की आवश्यकता चोट के प्रकार पर निर्भर करती है। स्ट्रेचिंग और स्ट्रेंथिंग एक्सरसाइज का उपयोग करके आंशिक टियर को प्रबंधित किया जा सकता है। लेकिन गंभीर स्थिति में इसे इलाज की आवश्यकता होती है। एसीएल टियर समस्या होने पर आमतौर पर एथलीट को सर्जरी करवाने की सिफारिश की जाती है ताकि वे दोबारा अपने खेल को शुरू कर सकें। 

    क्या मैं एसीएल रिकंस्ट्रक्शन के बाद तैर सकता हूं?

    हां, एसीएल रिकंस्ट्रक्शन सर्जरी के बाद तैरा जा सकता है। आमतौर पर एसीएल सर्जरी के बाद तैरने की सलाह दी जाती है क्योंकि यह क्वाड्रिसेप्स (हैमस्ट्रिंग मसल) को मजबूत करता है, जो टेंडन ग्राफ्ट को सहारा देने में मदद करता है। हालांकि, सर्जरी के बाद कम से कम 4-5 महीने तक तैराकी और दौड़ने से बचना चाहिए। यदि आप चाहें, तो डॉक्टर की अनुमति से सर्जरी के 2-3 महीने बाद अपने पैरों को पैडल किए बिना सिर्फ अपनी बाहों की मदद से तैर सकते हैं।

    क्या घुटने की आर्थ्रोस्कोपी के बाद सूजन होगी?

    घुटने की आर्थ्रोस्कोपी के बाद सूजन होना बहुत आम है, खासकर चीरों के पास वाली जगह पर। यह आमतौर पर कुछ ही हफ्तों में ओवर-द-काउंटर दवाओं और बर्फ की सिकाई की मदद से ठीक हो जाती है। सर्जरी के बाद फिजियोथेरेपी रिकवरी को बढ़ावा देती है और सूजन को बहुत तेजी से कम करने में मदद करती है।

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    Content Reviewed By
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    Dr. Kamal Bachani
    32 Years Experience Overall
    Last Updated : February 24, 2024

    हमारे मरीजों की प्रतिक्रिया

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