भगंदर को अंग्रेजी में Anal Fistula In Hindi कहा जाता है। यह मनुष्यों में होने वाली एक गंभीर गुदा बीमारी है। इस स्थिति में गुदा की परत और आंत के अंतिम छोर का मिलाप हो जाता है और जोड़ वाले स्थान पर एक छेद आ जाता है, यह छेद जल्दी ठीक नहीं होता है। इनके कारण गुदा के हिस्से पर घांव बनने लगते हैं और लाल चित्ते भी पड़ जाते हैं। जिसकी वजह से खुजली और दर्द का सिलसिला शुरु हो जाता है।
गुदा भाग के चारों तरफ का स्थान पीला पड़ जाता है। मल द्वार के ठीक बगल में फोड़ा जैसा बन जाता है जिसमें मवाद भर जाता है जो थोड़े- थोड़े समय पर रिसता रहता है। भगंदर का ठीक समय पर इलाज न किया जाए तो यह कैंसर का रूप भी ले सकता है। कुछ समय बाद भगंदर अपना मुंह दूसरी तरफ भी बना लेता है। दोमुखी द्वार बन जाने की वजह से मरीज को ज्यादा तकलीफ का सामना करना पड़ता है।
कभी कभी ऐसी स्थिति भी बन जाती है कि इसका मुंह जांघ के किसी हिस्से पर उभर आता है जो की बहुत खतरनाक है। क्योंकि इसमें मवाद, खून और दुर्गंध के साथ मल रिसने लगता है। भगंदर रोग होने के बाद इंसान को चलने फिरने, कुर्सी पर या किसी समतल जगह पर बैठने, पीठ के बल लेटने और शौंच करते समय असहनीय पीड़ा होती है।
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भगंदर के कारण
भगंदर कई कारणों से हो सकता है। भगंदर होने का कोई एक विशेष कारण नहीं होता है। भगंदर होने के कारणों में शामिल है:
- गुदा द्वार की ठीक से सफाई न होना।
- गुदा द्वार पर अधिक खुजली कर देना।
- अधिक समय तक साइकिल, बाइक चलाना या ऐसी कोई भी सवारी करना जहां बहुत अधिक समय तक बैठे रहना पड़ता हो।
- लंबे समय से कब्ज होना।
- गुदा क्षेत्र के बाल साफ न करना।
- अधिक मिर्च मसालेदार चीजों का नियमित रुप से सेवन करना।
- गुदा द्वार पर चोट लगना।
- किसी जगह पर लंबे समय तक बैठे रहना।
- गुदा सेक्स करने से भी भगंदर होने की संभावना बनी रहती है।
इन कारणों से भगंदर होने की संभावना अधिक रहती है। डॉक्टर का कहना है की इसके अतिरिक्त भी बहुत से ऐसे कारण हो सकते हैं जिसकी वजह से भगंदर की बीमारी संभव है।
भगंदर के लक्षण
भगंदर के निम्नलिखित लक्षण होते हैं:
- व्यक्ति को उठते-बैठते और खांसते समय गुदा में दर्द होना।
- शौंच के समय दर्द होना।
- बदबूदार मल या खून का निकलना
- कई दिनों तक गुदा क्षेत्र में दर्द और सूजन होना
- हमेशा शौंच करने की जरूरत महसूस होना
- गुदा के आस-पास बहुत जल्दी फुंसी या फोड़ा हो जाना
- जल्दी थक जाना
- इंफेक्शन के कारण अधिक बुखार और ठंड लगना
ध्यान रखें, भगंदर और फिशर के लक्षण एक समान महसूस हो सकते हैं। भगंदर के लक्षणों को अनदेखा करना भारी पड़ सकता है। इनमें से कोई भी लक्षण महसूस होने पर तुरंत डॉक्टर से मिलकर इसकी जांच करवानी चाहिए।
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क्या भगंदर का बिना ऑपरेशन इलाज किया जा सकता है?
यदि भगंदर अपने प्रारंभिक अवस्था में हैं तो निम्न रामबाण घरेलू नुस्खे कारगर हो सकते हैं। हालांकि यदि आपके लक्षण तेज हैं और जख्म गहरा है तो इसके उपचार के लिए सर्जरी ही सबसे अच्छा विकल्प होता है।
भगंदर का घरेलू उपचार — Home Remedies For Anal Fistula in Hindi
कुछ घरेलू नुस्खे एनल फिस्टुला के लक्षण को कम करके इसे बढ़ने से रोकने में मदद करेंगे और इसके कारण होने वाले जलन को भी कम करेंगे।
भगंदर के घरेलू इलाज में निम्नलिखित इलाज शामिल है:
शरीर में फाइबर की मात्रा संतुलित करें
ज्यादातर गुदा रोग कब्ज की देन होते हैं, भगंदर भी उसी का एक परिणाम हो सकता है।कब्ज दूर करने के लिए फाइबर युक्त पदार्थ का सेवन करना चाहिए। भगंदर के दौरान मांसाहारी भोजन कम खाना चाहिए। यह भगंदर को जड़ से खत्म करने का उपाय है।
गुनगुने पानी से सिंकाई करें
भगंदर होने पर गुदा भाग पर गुनगुने पानी से सिंकाई करना बहुत लाभकारी होता है। यह भगंदर के दर्द से राहत देता है।
नीम की पत्ती का उपयोग
भगंदर भगाने में यह रामबाण औषधि है। नीम की पत्तियों का कई तरह से उपयोग किया जा सकता है। नीम की पत्तियों को उबालकर उस पानी से भगंदर से प्रभावित जगह को धोना चाहिए। उबली हुई नीम की पत्तियों का पेस्ट बनाकर भगंदर पर लगाने से भी लाभ मिलता है। नीम और देशी घी का लेप बहुत कारगर होता है। नीम की पत्ती, देशी घी और तिल बराबर मात्रा में पीस लेने के बाद उसमें जौ का आटा मिलाकर लेप तैयार करें। अब इस लेप को किसी कपड़े में बाँधकर भगंदर वाले स्थान पर बांधिए। इस विधि द्वारा दर्द से बहुत जल्द आराम मिलता है और भगंदर के पूरी तरह से ठीक होने की संभावना काफी हद तक बढ़ जाती है।
अनार के पत्ते का इस्तेमाल
अनार के पत्ते को पानी में उबाल लेने के बाद उस पानी से फिस्टुला से प्रभावित क्षेत्र को धोने से बहुत लाभ प्राप्त होता है।
केला और कपूर
पके हुए केले के बीच में चीरा लगाकर, चीरे वाली जगह पर कपूर रखकर खाना चाहिए। इससे आराम मिलता है। ध्यान देने वाली बात: इस केले को खाने से एक घंटे पहले और खाने के एक घंटे बाद किसी भी दूसरी चीज का सेवन नहीं करना चाहिए।
काली मिर्च का उपयोग
लाजवंती और काली मिर्च के उपयोग से भगंदर में राहत मिलती है। काली मिर्च और लाजवंती को पीसकर उसका एक लेप तैयार करें और फिर उस लेप को एनल फिस्टुला वाली जगह पर लगाएं।
लहसुन का इस्तेमाल
लहसुन जीवाणु खत्म करने की बेहतरीन दवा है। लहसुन को पीसकर घी में भुन लेना चाहिए और फिर उसे भगंदर वाली जगह पर लेप की तरह लगाना चाहिए।
त्रिफला का उपयोग
भगंदर में त्रिफला बहुत उपयोगी होता है। त्रिफला, क्वाथ से धोने के बाद उसपर बिल्ली या कुत्ते की हड्डी का चूर मिलाकर भगंदर पर लगाने से बहुत राहत मिलती है।
गूलर और कांच नार
गूलर के फूल और कचनार की पत्ती को पीसकर गोली बनाइए और दिन में दो बार गरम पानी के साथ इसका सेवन करने पर भगंदर को ठीक होने में टाइम नहीं लगता है। (इसे खाने से पहले अपने डॉक्टर से बात करें)
मनार के दूध का इस्तेमाल
मनार के दूध में रुई भिगोने के बाद उस रुई को किसी मिट्टी का दिया या हांडी में सरसों के तेल के साथ जलाएं। जब रुई जलने लगे तब किसी मिट्टी के बर्तन में काजल बना ले। इस काजल को भगंदर पर लगाने से बहुत लाभ मिलता है।
हल्दी और मनार
हल्दी में मनार का दूध मिलाकर उसे अच्छी तरह से पीस लेना चाहिए। थोड़ा सूखने के बाद उसे भगंदर वाले स्थान पर लगाने से राहत मिलती है।
हल्दी वाले दूध से करें भगंदर का देसी उपचार
भगंदर एक बैक्टीरियल इंफेक्शन (Bacterial Infection) की वजह से होता है। घर में इसके इलाज के लिए हल्दी इस्तेमाल की जा सकती है। हल्दी में एंटीबैक्टीरियल गुण मौजूद होते हैं जो बैक्टीरिया को खत्म करते हैं और भगंदर को बढ़ने से रोकते हैं। इसमें एंटी-बायोटिक गुण भी पाए जाते हैं जो शरीर के इम्यून सिस्टम को बेहतर बनाते हैं। अगर आप हल्दी और दूध का सेवन करते हैं तो इससे भगंदर में काफी राहत मिल सकती है। एक गिलास दूध में एक चम्मच शहद और भूनी हुई हल्दी मिलाकर रोज सोने से पहले उसका सेवन करें। शहद मिलाने से हल्दी के एंटीबैक्टीरियल गुण में बढ़ोतरी होती है।
अजवायन का तेल
घर बैठे भगंदर का घरेलू इलाज करने के लिए अजवायन की पत्ती पत्ती से निर्मित तेल आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। कई शोध में यह पाया गया है कि अजवायन में एंटीबैक्टीरियल (Antibacterial), एंटी-इंफ्लेमेटरी (Anti-inflammatory), एंटी-वायरल (Antiviral) और एंटीबायोटिक (Antibiotic) गुण मौजूद होते हैं।
अजवायन के तेल का सेवन करने से कब्ज, एनस मार्ग की सूजन और दर्द में राहत मिलती है। इसके सेवन से आंत में चल रही हलचल कम और एनस के रास्ते में होने वाली ब्लीडिंग भी बंद हो हो जाती है। इस तरह से यह आपके भगंदर को खत्म कर सकता है।
इसके अलावा अजवायन के तेल का सेवन करने से पेट से संबंधित कई तरह की समस्याएं दूर हो जाती हैं। इस तेल का इस्तेमाल करने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है। एक गिलास गुनगुने पानी में एक बड़े चम्मच से अजवायन के तेल को अच्छी तरह से मिलाने के बाद उसे दिन में 2-3 बार पीएं। कुछ दिनों तक इसका सेवन करने से आपके भगंदर की समस्या खत्म हो सकती है।
प्याज या लहसुन का सूप
प्याज में सल्फर की भरपूर मात्रा पाई जाती है जबकि लहसुन में एंटीबैक्टीरियल (Antibacterial) और एंटी-फंगल (Antifungal) गुण पाए जाते हैं। दोनों का कॉम्बिनेशन भगंदर के लिए एक बहुत ही बेहतर उपाय है जो आसानी से Fistula Ka Home Treatment कर सकता है इसके साथ दोनों का मिश्रण पीने मात्र से आपकी इम्यूनिटी बेहतर हो जाती है जो आपके शरीर को वायरल इंफेक्शन (Viral Infection) से बचाने में मदद करता है। एक तरह से देखा जाए तो यह एंटीबायोटिक का काम करता है।
प्याज और लहसुन का सूप तैयार करने के लिए एक मध्यम आकार की प्याज, थोड़ी मात्रा में लहसून और एक कप पत्तागोभी की जरूरत होती है। सबसे पहले आप लहसुन, प्याज और पत्तागोभी को बारीक काट लें। इसके बाद इन तीनों को पानी में डालकर तब तक उबालें जब तक पानी का रंग पूरी तरह से बदल नहीं जाए। जैसे ही पानी का रंग बदल जाता है, इसे दो मिनट तक और उबालें और गैस बंद कर दें। जब पानी ठंडा हो जाए तब इसे आप पी सकते हैं।
यह सूप आपके एनस के पास की सूजन को सिर्फ एक घंटे में ही ठीक कर सकता है, साथ ही यह स्टूल पास करने के दौरान होने वाले दर्द को भी कम करता है।
पपीता है भगंदर का रामबाण घरेलू उपाय
कई बार भगंदर का कारण कब्ज और पेट में होने वाली हलचल होती है। कब्ज की वजह से भगंदर के दौरान मल त्याग करने में बहुत परेशानी होती है। पपीता के सेवन से पेट का कब्ज सही हो जाता है और मल त्याग करते वक्त आपको सुविधा होती है। साथ ही यह आपके पूरे शरीर को Detox भी करता है।
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भगंदर का घरेलू इलाज करने के लिए आप एक पका हुआ पपीता लें। सबसे पहले इस पपीते के छिलके को बाहर निकालें, फिर आप इसे छोटे छोटे टुकड़ों में काटकर फ्रिज में रख दें। जब यह ठंडा हो जाए तब आप इसका सेवन करें। अगर आप सुबह के नाश्ते में पपीता का हलवा शामिल करते हैं तो यह आपके भगंदर को ठीक करने के लिए एक अच्छा उपाय साबित हो सकता है।
पत्तागोभी
पत्तागोभी उच्च प्रोटीन और उच्च फाइबर का एक बेहतरीन स्त्रोत है। यह मल त्याग करने में आपकी मदद और धीरे धीरे भगंदर को हील करने में आपकी मदद कर सकता है। इसमें प्रोटीन और फाइबर भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं जो मल मार्ग को साफ और मल को मुलायम बनाने का काम करते है। जिससे आपको मल त्याग करते समय ज्यादा परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता है।
आप चाहे तो पत्ता गोभी का सूप बनाकर पी सकते हैं। सूप बनाने के लिए आपको दो कप कटी हुई पत्ता गोभी को पानी में उबालना है। जब पत्ता गोभी अच्छी तरह से उबल जाए और पानी का रंग पूरी तरह से बदल जाए तब पानी को छान दें। फिर उस पानी में स्वादानुसार काला नमक मिलाएं और एक चम्मच सोंठ का चूर्ण मिलाकर उसका सेवन करें।
टी ट्री आयल
टी ट्री ऑयल (Tea Tree Oil) में एंटीबैक्टीरियल और एंटीवायरल गुण मौजूद होते हैं जो किसी भी जख्म को आसानी से भर सकते हैं। इसका इस्तेमाल भगंदर के जख्म को भरने के लिए किया जा सकता है। इसे इस्तेमाल करने का तरीका, एक चम्मच जैतून तेल और एक चम्मच टी ट्री ऑयल को एक साथ मिलाने के बाद इसे एक कॉटन के कपड़े की मदद से भगंदर से प्रभावित क्षेत्र पर लगाएं। कुछ दिनों तक लगातार ऐसा करने से आपके भगंदर की बीमारी दूर चली जाती है
निर्गुण्डी का तेल
निर्गुंडी का तेल उन बैक्टीरिया को नष्ट करता है जो भगंदर का कारण होते हैं। भगंदर से छुटकारा पाने के लिए आप निर्गुंडी के तेल को कॉटन के कपड़े की मदद से भगंदर पर लगा सकते हैं। इससे आपको राहत मिलेगी।
लौंग
लौंग में एंटीबैक्टीरियल और एंटीवायरल गुण पाए जाते हैं जो आपके आमाशय स्वास्थ्य को बेहतर बनाने का काम करते हैं। इसके लिए आप लौंग का एक चम्मच चूर्ण तैयार करें और अदरक वाली चाय में इस लौंग को मिलाकर पी लें। कुछ दिनों तक इसका सेवन करने के बाद आप अपने एनस मार्ग में बदलाव देख पाएंगे।
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अंगूर के बीज का अर्क
अंगूर के बीज का अर्क एंटीबायोटिक की तरह काम करता है जो भगंदर को काफी आसानी से ठीक कर सकता है। इसका इस्तेमाल करने के लिए सबसे पहले आप अंगूर के बीज के अर्क को प्रभावित क्षेत्र पर लगभग 20 मिनट तक लगाएं और फिर ठंडे पानी की मदद से इसे धो दें। यह अर्क आपके गड्ढे को भरने और दर्द एवं सूजन को कम करने में मददगार साबित हो सकता है।
आरोग्यवर्धिनी वटी है
आरोग्यवर्धिनी वटी पाचन तंत्र से संबंधित कई समस्याओं को खत्म कर मल त्याग को आसान बनाती है। इसका इस्तेमाल करने से भगंदर के दौरान होने वाली समस्याएं ज्यादा विकराल रूप नहीं ले पाती हैं। भगंदर का घरेलू इलाज करने के लिए आप आरोग्यवर्धिनी वटी का इस्तेमाल पानी के साथ कर सकते हैं।
भगंदर में क्या नहीं खाना चाहिए
- इस दौरान माँस, मछली इत्यादि जैसे भोज्य पदार्थों के सेवन से बचना चाहिए।
- भगंदर के दौरान अधिक तैलीय यानी जिस खाना में अधिक तेल, रिफाइन इत्यादि का उपयोग किया गया हो उसका सेवन नहीं करना चाहिए।
- भगंदर में अधिक मसालेदार चीजों को खाने से परहेज करना चाहिए।
अब आपने भगंदर का घरेलू उपचार Home Remedies For Anal Fistula हिंदी में अच्छी तरह समझ लिया होगा। अगर आप या आपके जानने वाले भगंदर से पीड़ित हैं तो उन्हें भगंदर के घरेलू उपचार बताने और अपनाने के साथ ही साथ डॉक्टर से सलाह लेने के लिए प्रेरित करें। भगंदर बीमारी में डॉक्टर से सलाह लेना उचित होता है क्योंकि परेशानी ज्यादा होने की स्थिति में एक मात्र विकल्प आपरेशन ही बचता है।
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Pristyn Care से कराएं भगंदर का इलाज
हमारे सबसे अनुभवी डॉक्टर भगंदर की जाँच करने के बाद आपको उचित उपचार जैसे- घरेलू न्नुस्खे, दवाइयाँ या सर्जरी कराने की सलाह देंगे।
Pristyn Care से भगंदर का इलाज कराने के कई फायदे हैं, जैसे:
- मरीज का ख्याल:- मरीज को खुद कुछ नहीं करना पड़ता है। प्रिस्टिन केयर के कर्मचारी मरीज की पर्ची बनवाने से लेकर खाने और रहने तक का सब काम करते हैं।
- बेहतरीन इलाज:- प्रिस्टिन केयर में बेहद उम्दा और अनुभवी डॉक्टर की टीम कार्यरत है जो मरीजों को यह एहसास दिलाती है कि अब उनकी बीमारी हमेशा के लिए दूर होने वाली है। सभी डॉक्टर को 10 से अधिक वर्ष का अनुभव होता है
- उच्च टेक्नोलॉजी का उपयोग:- प्रिस्टिन केयर में उच्च टेक्नोलॉजी से बनी मशीनों से इलाज किया जाता है जिससे मरीज को दर्द का एहसास तक नहीं होता है।
- बेहतरीन सुविधा:- बेहतरीन सुविधाओं में शामिल है एक दिन के अंदर डिस्चार्ज, जीरो EMI में उपचार, आपरेशन के बाद फ्री फॉलोअप और ऑपरेशन के दिन मरीज के लिए निःशुल्क वाहन की सुविधा।
अगर आप या आपका कोई परिचित भगंदर से पीड़ित है तो भगंदर के घरेलू उपचार का इस्तेमाल करने के साथ साथ डॉक्टर से भी अवश्य संपर्क करें। यदि आप डॉक्टर से सलाह लेना चाहते हैं तो हमें कॉल करें या अपॉइंटमेंट बुक करें।
निष्कर्ष – Conclusion
भगंदर एक ऐसी बीमारी है जिसका ठीक समय पर उपचार न किया जाए तो यह गंभीर गंभीर समस्याएं खड़ी कर सकती है। इंसान का चलना- फिरना और एक से दूसरी जगह आना जाना बिल्कुल बंद हो जाता है। काम छूट जाता है। इंसान बिल्कुल चिड़चिड़ा हो जाता है। हालांकि, भगंदर को हमेशा के लिए नष्ट करने के लिए सिर्फ और सिर्फ सर्जरी ही एक विकल्प है। ऊपर बताए गए घरेलू नुस्खे इसके दर्द और जलन को कम करके इसे बढ़ने से रोकते हैं।
डिस्क्लेमर: यह ब्लॉग सामान्य जानकारी के लिए लिखा गया है| अगर आप किसी बीमारी से ग्रसित हैं तो कृपया डॉक्टर से परामर्श जरूर लें और डॉक्टर के सुझावों के आधार पर ही कोई निर्णय लें|