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कोलाइटिस क्या है

कोलाइटिस को अल्सरेटिव कोलाइटिस भी कहा जाता है। यह पेट से जुडी एक सामान्य बीमारी है जिसकी स्थिति में मरीज की बड़ी आंत में सूजन हो जाती है। सूजन की वजह से मरीज को पेट में तेज दर्द, ऐंठन, डायरिया, बुखार, कमजोरी, वजन घटना, नींद न आना आदि जैसी समस्याएं शुरू हो जाती हैं। इस बीमारी से पीड़ित मरीज को तुरंत इसका सही जांच और इलाज कराना चाहिए। अगर समय पर इसका इलाज नहीं हुआ तो यह गंभीर रूप ले सकता है और साथ दूसरी कई बीमारियों का कारण भी बन सकता है।   

कोलाइटिस के कारण

इसके सही कारण का अभी तक पता नहीं लगा जा सका है। पहले तनाव और खान पान को इसका मुख्य कारण माना जाता था। लेकिन डॉक्टर के अनुसार अभी इस बीमारी के बहुत से कारण हैं। इसमें इम्यून सिस्टम खराब होना, अनुवांशिकता यानी की अगर आपके परिवार में इस बीमारी से पहले कोई पीड़ित रह चुका है तो आपको यह समस्या होने का खतरा ज्यादा है, उम्र, आमतौर पर यह बीमारी 30 वर्ष से कम आयु के लोगों में होती है लेकिन यह भी सच है की यह किसी भी उम्र के व्यक्ति को प्रभावित कर सकती है और आइसोट्रेटिनॉइन नामक दवा खाने से।  

कोलाइटिस के लक्षण 

जैसे दूसरी बीमारियों के लक्षणों को देखकर बीमारी का पता लगाया जाता है वैसे ही कोलाइटिस के कुछ खास लक्षण हैं जिनकी मदद से इस इस बात का पता लगाया जा सकता है की आप इस बीमारी से पीड़ित हैं। नीचे दिए हुए कारण निम्लिखित हैं: 

  • पेट में दर्द और ऐंठन।
  • भूख न लगना।
  • रेक्टम में दर्द। 
  • रेक्टम से ब्लीडिंग होना।
  • ब्लीडिंग की वजह से एनीमिया होना।
  • बार बार दस्त आना।
  • सौच करने में असमर्थता। 
  • बुखार होना।
  • कमजोरी होना। 
  • वजन काम होना।
  • शरीर में पानी की कमी होना।

इसके अलावा कुछ मरीजों को स्किन से संबंधित समस्या, आंखों में सूजन, किडनी स्टोन, लिवर में समस्या, जोड़ों में दर्द आदि भी महसूस हो सकता है। ऐसी स्थिति होने पर मरीज को तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए।

कोलाइटिस का इलाज 

कोलाइटिस का इलाज करने से पहले डॉक्टर मरीज के लक्षणों को देखते हैं जिसकी मदद से उन्हें यह समझ में आता है की मरीज को कोलाइटिस की समस्या किस कारण से हुई है। इसके बाद वे मरीज का शारीरिक जांच करते हैं जिसमें खून की जांच, मल का जांच, सिटी स्कैन, एक्स-रे आदि शामिल है। इसके अलावा डॉक्टर मरीज को कोलोनोस्कोपी और फ्लेक्सिबल सिग्मोइडोस्कोपी का सुझाव भी दे सकते हैं। 

जांच करने के बाद डॉक्टर को कोलाइटिस के प्रकार और इसकी स्थिति का पता चलता है जिसके बेसिस पर वह इस बीमारी के बेस्ट इलाज का चुनाव करते हैं। कोलाइटिस का इलाज करने के लिए बहुत सारे उपाय मौजूद हैं लेकिन दवाओं और सर्जरी को सबसे बेहतर माना जाता है। इलाज के जरिए आंत की सूजन को कम किया जाता है जिसकी वजह से मरीज को काफी परेशानियों का सामान करना पड़ता है। 

दवाओं द्वारा कोलाइटिस का इलाज

अगर बीमारी अपनी शुरूआती स्टेज में है तो डॉक्टर मरीज को कुछ दवाएं खाने के लिए बोल सकते हैं जिसकी मदद से सूजन कम हो जाती है। सूजन कम होने की वजह से लक्षण भी धीरे धीरे खत्म हो जाते है और फिर मरीज कोलाइटिस की समस्या से छुटकारा मिल जाता है। डॉक्टर जो दवाएं लिखते हैं उसमें सल्फासालजीन, बालसालाजिड, मेसालमाइन और ओलस्लाजाइन शामिल हैं। स्थिति को देखते हुए डॉक्टर कभी कभी एंटीबायोटिक दवाएं भी दे सकते हैं।    

सर्जरी द्वारा कोलाइटिस का इलाज 

जब कोलाइटिस की समस्या गंभीर हो जाती है तब सर्जरी की मदद से इसका इलाज किया जाता है। सर्जरी की मदद से कोलाइटिस की समस्या को खत्म किया जा सकता है। इस सर्जरी को पूरा होने में लगभग एक घंटे का समय लगता है। सर्जरी के दौरान मरीज को कम से कम दर्द और रक्तस्राव होता है। सर्जरी के बाद मरीज को एक दिन तक हॉस्पिटल में रूकना पड़ता है और फिर वह अपने घर जाने के लिए फिट हो जाते हैं। 

अगर आप कोलाइटिस की समस्या से पीड़ित हैं तुरंत अपने आस पास के डॉक्टर से मिलकर इसका जांच और बेहतर इलाज कराएं। 

डिस्क्लेमर: यह ब्लॉग सामान्य जानकारी के लिए लिखा गया है| अगर आप किसी बीमारी से ग्रसित हैं तो कृपया डॉक्टर से परामर्श जरूर लें और डॉक्टर के सुझावों के आधार पर ही कोई निर्णय लें|