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Best Doctors for Hernia

  • online dot green
    Dr. Vipin Nagpal - Hernia Treatment Specialist in Pristyn Care Elantis Hospital, Lajpat Nagar, Delhi, over 31  Years Experience

    Dr. Vipin Nagpal

    MBBS, MS-General Surgery
    31 Yrs.Exp.

    4.5/5

    31 Years Experience

    location icon Pristyn Care Elantis Hospital, Lajpat Nagar, Delhi
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    080-6542-3711
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    Dr. Rakesh Shivhare - Hernia Treatment Specialist in Opp.Badwani Plaza, Manorama Ganj, Old Palasia, Indore, Madhya Pradesh 452003, over 30  Years Experience

    Dr. Rakesh Shivhare

    MBBS, MS(GI & General Surgeon)
    30 Yrs.Exp.

    5.0/5

    30 Years Experience

    location icon Opp.Badwani Plaza, Manorama Ganj, Old Palasia, Indore, Madhya Pradesh 452003
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    Dr. Apoorv Shrivastava - Hernia Treatment Specialist in Pristyn Care Eminent Hospital 6/1 Opp. Barwani Plaza,  Manorama Ganj, Old Palasia, Indore - 452018, over 25  Years Experience

    Dr. Apoorv Shrivastava

    MBBS, DNB-General Surgery
    25 Yrs.Exp.

    4.5/5

    25 Years Experience

    location icon Pristyn Care Eminent Hospital 6/1 Opp. Barwani Plaza, Manorama Ganj, Old Palasia, Indore - 452018
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  • हर्निया रोग क्या है? । Harniya Kya Hota Hai? | Hernia meaning in Hindi
    हर्निया के प्रकार । Types of Hernia in Hindi
    हर्निया रोग के कारण । Causes of Hernia in Hindi
    हर्निया के लक्षण इन हिंदी । Hernia Symptoms in Hindi
    हर्निया रोग से नुकसान । Complications of Hernia in Hindi
    हर्निया रोग का परीक्षण । Diagnosis of Hernia in Hindi
    हर्निया रोग का इलाज । Hernia Treatment in Hindi
    हर्निया सर्जरी के बाद रिकवरी । Recovery time of Hernia Surgery in Hindi
    हर्निया को रोकने के उपाय । Hernia prevention in Hindi
    हर्निया ऑपरेशन के बाद मरीज को किस प्रकार की परेशानियां हो सकती हैं?
    हर्निया का ऑपरेशन कब करना चाहिए?

    हर्निया रोग क्या है? । Harniya Kya Hota Hai? | Hernia meaning in Hindi

    हर्निया की समस्या तब पैदा होती है जब पेट का कोई अंदरूनी अंग यानी कि पेट की मांसपेशी, टिश्यू या छोटी आंत पेट की कमजोर त्वचा में छेद करके बाहर आ जाती हैं। हर्निया आमतौर पर नाभि के हिस्से के चारों तरफ कहीं भी हो सकता है। जांघ के ऊपरी हिस्से, बीच पेट में और ग्रोइन क्षेत्रों (पेट और जांघ के बीच का भाग) में भी हो सकता है। हालांकि हर्निया कोई आपात स्थिति नहीं है लेकिन यदि समय रहते इसका इलाज न किया जाए, तो इसकी वजह से इंसान  मौत भी हो सकती है।

    हर्निया (hernia meaning in hindi) अक्सर पेट के दाहिनी ओर और नाभि क्षेत्र में विकसित होता है। यह जोरदार मेहनत, शरीर पर पड़ने वाला दबाव और गर्भावस्था के कारण हो सकता है। बढ़ती उम्र के मरीजों को हर्निया की शिकायत होने की संभावना अधिक होती है। इसके अलावा नवजात शिशुओं को भी हर्निया हो सकता है।

    हर्निया के प्रकार । Types of Hernia in Hindi

    हर्निया के निम्न प्रकार नीचे दिए जा रहे हैं:

    • इनगुइनल हर्निया: यह हर्निया का सबसे आम प्रकार है। हर्निया के कुल मामलों में से 75 प्रतिशत मामले इनगुइनल हर्निया के होते हैं। इनगुइनल हर्निया महिलाओं की तुलना में पुरुषों को अधिक प्रभावित करता है। यह मेल बच्चों में भी हो सकता है। इनगुइनल हर्निया तब आकार लेता है जब आंत का एक हिस्सा इनगुइनल कैनाल, जो, आंतरिक जांघ से होकर गुजरती है, में फैल जाता है।
    • इंसिज़नल हर्निया: इंसिज़नल हर्निया तब होता है जब पेट की दीवार में पूर्व में हुई किसी सर्जरी या ऑपरेशन के चीरे के कारण  टिश्यू बाहर निकलने लगता है और हर्निया का रूप ले लेता है। पूर्व में पेट की सर्जरी करा चुके लोगों को इस प्रकार का हर्निया होने का जोखिम अधिक होता है।
    • फेमोरल हर्निया: फेमोरल हर्निया एक प्रकार का ग्रोइन हर्निया है जो फेमोरल कैनाल में होता है और इनगुइनल कैनाल के नीचे चलता है। जब वसायुक्त ऊतक इनगुइनल कैनाल में प्रवेश कर जाता है तो इस स्थिति को फेमोरल हर्निया के नाम से जानते हैं। फेमोरल हर्निया कमर या जांघ के पास एक उभार के रूप में दिखाई देता है। फेमोरल हर्निया को फेमोरोसील भी कहा जाता है।
    • अम्बिलिकल हर्निया: नाभि संबंधी हर्निया को अम्बिलिकल हर्निया कहते हैं। यह तब होता है जब आंत का एक हिस्सा नाभि के पास पेट की दीवार में एक छेद के माध्यम से होकर गुजरता है। अधिकांश नाभि संबंधी हर्निया जन्म से मौजूद होते हैं।
    • हायटल हर्निया: हायटल हर्निया एक अन्य सामान्य प्रकार का हर्निया है। यह 50 वर्ष अधिक आयु वर्ग के लोगों में देखने को मिलता है। हायटल हर्निया के कारण मरीज को GERD का सामना करना पड़ता है और पेट की सामग्री आहार नली में रिसने लगती है जिससे पेट में जलन होने लगती है।
    • पेरिनियल हर्निया: पेरिनियल हर्निया तब होता है जब ऊतक पेल्विक फ्लोर में एक छेद के माध्यम से पेट की गुहा में प्रवेश कर जाता है। हालांकि इस प्रकार के हर्निया के मामले अपेक्षाकृत दुर्लभ ही देखने को मिलते हैं।

    हर्निया रोग के कारण । Causes of Hernia in Hindi

    हर्निया के निम्नलिखित कारण हो सकते हैं:

    • कब्ज रहना
    • लगातार खांसी आना
    • आनुवंशिक कारण
    • पेट की आंतरिक चोट या किसी प्रकार की सर्जरी
    • धूम्रपान व शराब का अधिक मात्रा में सेवन
    • बढ़ती उम्र
    • भारी सामान उठाना
    • प्रेगनेंसी
    • समय पहले बच्चे का जन्म या कम समय में जन्म होना

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    हर्निया के लक्षण । Hernia Symptoms in Hindi

    हर्निया के निम्न लक्षण होते हैं:

    • पेट में अचानक तेज दर्द होना
    • जी मिचलाना
    • उल्टी होना
    • पेट में लाल और जामुनी रंग का उभार दिखाई देना
    • पेट में एक प्रकार की सूजन होना
    • लंबे समय खड़े रहने, वजन उठाने या पेट पेट पर दबाव पड़ने से दर्द होना
    • पुरुषों में हर्निया के लक्षण – अंडकोष के चारों तरफ खिंचाव महसूस होना
    • गैस पास करने में परेशानी होना

    हर्निया रोग से नुकसान । Complications of Hernia in Hindi

    यदि हर्निया का समय पर इलाज न किया जाए तो मरीज को निम्नलिखित गंभीर जटिलताओं का सामना करना पड़ सकता है:

    • हर्निया बढ़ सकता है और अधिक गंभीर व जटिल लक्षणों को पैदा कर सकता है। इसके अलावा हर्निया का बड़ा हुआ आकार आस-पास के टिश्यू पर बहुत अधिक दबाव डाल सकता है, जिससे सूजन और दर्द हो सकता है।
    • हर्निया का इलाज न कराने पर आंत का एक हिस्सा पेट की दीवार में फंस सकता है। इसके कारण आंत बाधित हो सकती है और गंभीर दर्द, मतली या कब्ज का कारण बन सकती है।
    • यदि आंतों के फंसे हुए भाग को पर्याप्त रक्त प्रवाह नहीं मिलता है, तो इससे जान का जोखिम हो सकता है। इससे आंत के टिश्यू संक्रमित हो सकते हैं या मर सकते हैं। ऐसी स्थिति में मरीज को तत्काल इलाज की आवश्यकता होती है।
    • यदि हर्निया का समय पर इलाज नहीं किया जाता है तो मरीज को अधिक दर्द, उल्टी, बुखार और गैस पास करने या मल त्याग करने में परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

    हर्निया रोग का परीक्षण । Diagnosis of Hernia in Hindi

    जांच के दौरान डॉक्टर आपके लक्षणों को पूछेंगे और आपके पुराने स्वास्थ्य के बारे में जानने की कोशिश करेंगे। इसके अलावा निम्न इमेजिंग परीक्षणों का भी उपयोग करेगा:

    • अल्ट्रासाउंड: पेट का अल्ट्रासाउंड शरीर के अंदर की संरचनाओं की छवि बनाने के लिए उच्च आवृत्ति वाली ध्वनि तरंगों का उपयोग करता है। इसकी मदद से पेट के अंदर मौजूद अतिरिक्त उभार या हर्निया को आसानी से देखा जा सकता है।
    • सीटी स्कैन: हर्निया की पुष्टि के लिए सीटी स्कैन बेहद कारगर जांच प्रक्रिया है। सीटी स्कैन की मदद से पेट की एक छवि बनाने के लिए एक्स-रे को कंप्यूटर तकनीक से जोड़ा जाता है।
    • एमआरआई: एमआरआई स्कैन पेट की आंतरिक छवि को बनाने के लिए चुंबकीय और रेडियो तरंगों के संयोजन का उपयोग करता है। इसकी मदद हर्निया की आकृति को आसानी से देखा जा सकता है। 
    • एक्स-रे: एक्स-रे की मदद से हर्निया पहचान करने के लिए डॉक्टर मरीज को डायट्रीजोएट मेग्लुमिन/डायट्रीजोएट सोडियम (गैस्ट्रोग्राफिन) या तरल बेरियम घोल युक्त तरल पदार्थ पीने को कहता है। इस तरल को पीने के बाद पाचन तंत्र की साथ इमेज एक्स-रे छवियों पर हाइलाइट होती हैं।
    • एंडोस्कोपी: एंडोस्कोपी के दौरान, डॉक्टर मरीज के गले के नीचे, अन्नप्रणाली और पेट में एक ट्यूब से जुड़ा एक छोटा कैमरा डालता है। इससे पेट की एकदम साफ इमेज देखने को मिलती है।

    हर्निया रोग का इलाज । Hernia Treatment in Hindi

    हर्निया का सफल इलाज दो प्रकार की सर्जिकल प्रक्रियाओं की मदद से किया जा सकता है। ओपन सर्जरी और लेप्रोस्कोपिक सर्जरी। ओपन सर्जरी में डॉक्टर बड़ा चीरा लगाते हैं और हर्निया का इलाज करते हैं। जबकि, लेप्रोस्कोपिक प्रक्रिया में छोटे कट की मदद से ही इलाज किया जाता है। 

    इन दोनों प्रक्रियाओं के बारे में नीचे विस्तार से जानकारी दी जा रही है:

    • ओपन सर्जरी: ओपन सर्जरी से पहले मरीज को जनरल एनेस्थीसिया दिया जाता है। इसके बाद सर्जन त्वचा में एक कट (चीरा) लगाकर हर्निया को वापस उसी जगह पर धकेल देता है। इसके बाद सर्जिकल साइट को चीरे की मदद से बंद कर दिया जाता है। यदि हर्निया का आकार बड़ा है तो सर्जन हर्निया की ओपनिंग को बंद करने के लिए लचीली जाली के एक टुकड़े का इस्तेमाल कर सकता है। यह हर्निया को दोबारा आने से रोकने में मदद करता है। ओपन सर्जरी के बाद मरीज को ठीक होने में अधिक समय लग सकता है। सर्जरी के बाद पूरी तरह से ठीक होने के लिए डॉक्टर के दिशा-निर्देशों का पालन करें।
    • लेप्रोस्कोपिक प्रक्रिया: Pristyn Care में हर्निया का लेप्रोस्कोपिक प्रक्रिया से इलाज करते समय 3D मेष का उपयोग किया जाता है। यह एक एडवांस मेष होता है जबकि सामान्य सर्जरी में सिंथेटिक जाली का उपयोग किया जाता है। 3D मेष सर्जरी में पॉलीमर जाल का इस्तेमाल होता है। यह सर्जिकल प्रक्रिया बड़े आकार के हर्निया को ठीक करने के लिए इस्तेमाल की जाती है। इस सर्जरी के बाद हर्निया के दोबारा विकसित होने की संभावना बेहद कम होती है।

    लेप्रोस्कोपिक सर्जरी प्रक्रिया से पहले रोगी के प्रभावित हिस्से को सामान्य या लोकल एनेस्थीसिया की मदद से सुन्न किया जाता है। इसके बाद छोटा कट लगाया जाता है। इस कट के जरिए लेप्रोस्कोप को शरीर के अंदर डाला जाता है। लेप्रोस्कोप एक पतली ट्यूब होती है जिसमें छोटा कैमरा लगा होता है। इस कैमरे की मदद से सर्जन पेट की इमेज को एक स्क्रीन की मदद से देखता है और एक दूसरे चीरा लगाकर अन्य मेडिकल उपकरणों को शरीर के अंदर इंसर्ट कर हर्निया को उसकी मूल स्थिति में धकेल देता है।   

    ज्यादातर मरीज लेप्रोस्कोपिक सर्जरी का चयन इसलिए करते हैं क्योंकि सर्जरी के बाद हर्निया के दोबारा विकसित होने की संभावना न के बराबर होती है। इसके अलावा सर्जरी के करीब 48 घंटे के अंदर मरीज अपनी जीवनशैली को एन्जॉय कर सकता है।

    हर्निया सर्जरी के बाद रिकवरी । Recovery time of Hernia Surgery in Hindi

    हर्निया सर्जरी के बाद मरीज को पूरी तरह से ठीक होने के लिए निम्न बातों को ध्यान में रखना चाहिए:

    • सर्जरी के बाद होने वाले दर्द को ठीक करने के लिए डॉक्टर दर्द निवारक दवाएं लिखेगा। इन्हें समय पर लेते रहें।
    • सर्जरी के बाद होने वाले की देखभाल के लिए सर्जन के निर्देशों का सावधानीपूर्वक पालन करें। यदि घाव के आसपास किसी प्रकार का संक्रमण का कोई लक्षण जैसे बुखार, लालिमा, स्त्राव, या दर्द होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
    • हर्निया सर्जरी के बाद, मरीज को कई हफ्तों तक सामान्य रूप से चलने-फिरने में परेशानी हो सकती है। रिकवरी टाइम में मरीज को किसी भी जोरदार गतिविधि और वजन उठाने से बचना चाहिए।

    हर्निया को रोकने के उपाय । Hernia prevention in Hindi

    आमतौर पर हर्निया को होने से नहीं रोका जा सकता है। कभी-कभी हर्निया वंशानुगत स्थिति या पिछली सर्जरी के कारण होता है। लेकिन हर्निया के जोखिमों को कम करने के लिए जीवनशैली में कुछ बदलाव किए जा सकते हैं।

    निम्नलिखित तरीकों को अपनाकर हर्निया के जोखिमों को कम किया जा सकता है:

    • धूम्रपान को छोड़कर हर्निया के जोखिमों से बचा जा सकता है। इसके लिए डॉक्टर से सलाह लें और स्मोकिंग बंद करने के लिए विचार करें।
    • लगातार होने वाली खांसी को नियंत्रित कर हर्निया के जोखिमों से बचा जा सकता है।
    • वजन को नियंत्रित रखें। इससे हर्निया होने के जोखिम कम होते हैं। 
    • मल त्याग करते समय या पेशाब करते समय अधिक जोर न लगाएं।
    • कब्ज, हर्निया के कारणों में से एक है। ऐसे में पर्याप्त मात्रा में उच्च फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ का सेवन कर हर्निया के जोखिमों से बचा जा सकता है।
    • पेट की मांसपेशियों को मजबूत बनाने वाले व्यायाम करें। इससे हर्निया के जोखिम को कुछ हद तक कम किया जा सकता है।
    • भारी वजन उठाने से बचें। यदि आपको कोई भारी वस्तु उठानी है तो घुटनों को मोड़ें, न कि अपनी कमर या पीठ को। 
    • भारी वस्तुएं उठाते समय सांस रोकने से बचें। 

    हर्निया ऑपरेशन के बाद मरीज को किस प्रकार की परेशानियां हो सकती हैं?

    हर्निया का ऑपरेशन एक सामान्य प्रक्रिया है जिसे आमतौर पर इसके उपचार के लिए किया जाता है। हालांकि, अन्य बीमारियों के उपचार की तरह हर्निया के ऑपरेशन के बाद भी मरीज को निम्न परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है:

    • पेशाब करने में दर्द
    • ब्लीडिंग
    • पेट में द्रव जमा होना
    • सांस लेने में कठिनाई
    • सर्जिकल साइट पर संक्रमण
    • पेट और पीठ में दर्द

    हर्निया का ऑपरेशन कब करना चाहिए?

    हर्निया का ऑपरेशन करने की आवश्यकता रोगी की स्थिति, हर्निया के प्रकार, और उसके लक्षणों पर निर्भर करती है। यहां कुछ सामान्य स्थितियां हैं जिनमें हर्निया का ऑपरेशन करना चाहिए:

    1. दर्द और असुविधा: जब हर्निया के क्षेत्र में दर्द या असुविधा होती है और यह रोगी की दिनचर्या को प्रभावित करता है, तो ऑपरेशन की आवश्यकता हो सकती है।
    2. हर्निया का बढ़ना: जब हर्निया का आकार बढ़ता है और स्वाभाविक रूप से ठीक नहीं हो सकता है, तो ऑपरेशन का समय आ सकता है।
    3. हर्निया जमना: जब हर्निया जम जाता है, इसका यदि तत्काल इलाज नहीं किया जाता है, तो यह ऑपरेशन की आवश्यकता पैदा कर सकता है।
    4. आस्थाई उपायों की असफलता: यदि आस्थाई उपाय जैसे कि ट्रस्स या मेडिकल मैनेजमेंट से सुरक्षित और सुधारित नहीं हो रहा है, तो ऑपरेशन की विचारणा की जा सकती है।
    5. संबंधित स्वास्थ्य समस्याएं: अगर हर्निया के साथ किसी अन्य स्वास्थ्य समस्या का संबंध है, तो चिकित्सक हर्निया का ऑपरेशन सुझा सकते हैं।
    हमारे विशेषज्ञ डॉक्टरों से मुफ्त परामर्श लें!
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    हर्निया के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

    हर्निया की शुरुआत कैसे होती है?

    हर्निया की शुरुआत आमतौर पर पेट की मांसपेशियों के कमजोर होने से होती है। शुरुआत में प्रभावित स्थान पर हल्का उभार या सूजन दिखाई दे सकती है, जो खांसने, छींकने, भारी वजन उठाने या लंबे समय तक खड़े रहने पर अधिक स्पष्ट हो जाती है। कुछ लोगों को उस स्थान पर हल्का दर्द, खिंचाव या जलन भी महसूस हो सकती है। यदि इन लक्षणों को नजरअंदाज किया जाए, तो हर्निया समय के साथ बड़ा हो सकता है।

    हर्निया कब खतरनाक हो जाता है?

    हर्निया तब खतरनाक हो सकता है जब उभार वापस अंदर न जाए, तेज दर्द होने लगे, उल्टी आए, बुखार हो, गैस या मल त्याग बंद हो जाए या उभार का रंग लाल, बैंगनी या काला दिखाई देने लगे। यह स्थिति आंत में रक्त प्रवाह रुकने का संकेत हो सकती है, जिसके लिए तुरंत चिकित्सा और सर्जरी की आवश्यकता पड़ सकती है।

    क्या हर हर्निया का ऑपरेशन करवाना जरूरी होता है?

    हर हर्निया में तुरंत ऑपरेशन की आवश्यकता नहीं होती। यदि हर्निया छोटा है और किसी प्रकार की परेशानी नहीं हो रही है, तो डॉक्टर कुछ समय तक निगरानी रखने की सलाह दे सकते हैं। लेकिन यदि हर्निया का आकार बढ़ रहा हो, दर्द हो रहा हो या जटिलताओं का खतरा हो, तो सर्जरी ही सबसे प्रभावी और स्थायी उपचार माना जाता है।

    क्या हर्निया अपने आप ठीक हो सकता है?

    नहीं। हर्निया अपने आप ठीक नहीं होता। दवाओं या घरेलू उपायों से इसके लक्षणों में कुछ समय के लिए राहत मिल सकती है, लेकिन पेट की कमजोर मांसपेशियां स्वयं सामान्य स्थिति में नहीं आतीं। इसलिए हर्निया का स्थायी इलाज सर्जरी ही माना जाता है।

    हर्निया ऑपरेशन में कितना समय लगता है?

    हर्निया का ऑपरेशन आमतौर पर 30 मिनट से 90 मिनट के बीच पूरा हो जाता है। यह समय हर्निया के प्रकार, आकार और अपनाई गई सर्जिकल तकनीक पर निर्भर करता है। अधिकांश मरीज ऑपरेशन के बाद उसी दिन या अगले दिन अस्पताल से घर जा सकते हैं।

    हर्निया ऑपरेशन के बाद कब तक आराम करना चाहिए?

    हर्निया ऑपरेशन के बाद शुरुआती कुछ दिनों तक पर्याप्त आराम करना चाहिए। अधिकांश मरीज 1 से 2 सप्ताह में सामान्य दैनिक गतिविधियां शुरू कर सकते हैं, जबकि भारी शारीरिक काम या वजन उठाने से लगभग 4 से 6 सप्ताह तक बचने की सलाह दी जाती है। डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही अपनी दिनचर्या शुरू करनी चाहिए।

    क्या हर्निया ऑपरेशन के बाद दोबारा हो सकता है?

    हाँ, कुछ मामलों में हर्निया दोबारा हो सकता है, लेकिन आधुनिक सर्जिकल तकनीकों और मेष (Mesh) के उपयोग से इसकी संभावना काफी कम हो जाती है। ऑपरेशन के बाद डॉक्टर द्वारा बताई गई सावधानियों का पालन करना, वजन नियंत्रित रखना और भारी वजन उठाने से बचना पुनः हर्निया होने के जोखिम को कम करता है।

    क्या अल्ट्रासाउंड से हर्निया का पता चल जाता है?

    हाँ, अधिकांश मामलों में अल्ट्रासाउंड जांच से हर्निया की पहचान की जा सकती है। यदि हर्निया स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देता या उसकी स्थिति जटिल होती है, तो डॉक्टर सीटी स्कैन या एमआरआई जैसी अतिरिक्त जांच कराने की सलाह दे सकते हैं ताकि सही निदान किया जा सके।

    हर्निया में क्या खाना चाहिए और क्या नहीं खाना चाहिए?

    हर्निया होने पर फाइबर से भरपूर आहार जैसे हरी सब्जियां, फल, साबुत अनाज, दालें और पर्याप्त मात्रा में पानी का सेवन करना चाहिए ताकि कब्ज की समस्या न हो। तला-भुना, अत्यधिक मसालेदार भोजन, जंक फूड, धूम्रपान और शराब से बचना चाहिए। यदि हायटल हर्निया है, तो एक बार में अधिक भोजन करने के बजाय थोड़ी-थोड़ी मात्रा में भोजन करना अधिक लाभदायक होता है।

    हर्निया का इलाज देर से कराने पर क्या हो सकता है?

    यदि हर्निया का समय पर इलाज नहीं कराया जाता, तो इसका आकार बढ़ सकता है और दर्द अधिक गंभीर हो सकता है। कुछ मामलों में आंत हर्निया के अंदर फंस सकती है, जिससे रक्त प्रवाह प्रभावित हो सकता है। ऐसी स्थिति में संक्रमण, आंत को नुकसान और आपातकालीन सर्जरी की आवश्यकता पड़ सकती है। इसलिए हर्निया के लक्षण दिखाई देने पर जल्द से जल्द डॉक्टर से परामर्श लेना उचित होता है।