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    Dr. Rahul Manchanda - Abortion Treatment Specialist in Pristyn Care Elantis Hospital, Lajpat Nagar, Delhi, over 32  Years Experience

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    Dr. Nidhi Moda - Abortion Treatment Specialist in Pristyn Care Sheetla, New Railway Rd, Gurugram, over 24  Years Experience

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  • अबॉर्शन कैसे होता है? (Abortion Kaise Hota Hai)
    अबॉर्शन कैसे करते हैं? (Abortion Kaise Karte Hain)
    अबॉर्शन में कितना दर्द होता है? (Abortion Mein Kitna Dard Hota Hai)
    गर्भपात के बाद कितने दिन आराम करना चाहिए?
    अबॉर्शन के प्रकार (Types of Abortion in Hindi)
    अबॉर्शन से पहले जरूरी जांचें (Before Abortion Procedure)
    अबॉर्शन से पहले तैयारी कैसे करें?
    अबॉर्शन के बाद देखभाल (Post Abortion Care)
    क्या अबॉर्शन के बाद दोबारा गर्भधारण हो सकता है?
    भारत में अबॉर्शन के कानूनी नियम
    असुरक्षित अबॉर्शन के खतरे

    अबॉर्शन कैसे होता है? (Abortion Kaise Hota Hai)

    अबॉर्शन (गर्भपात) एक ऐसी चिकित्सीय प्रक्रिया है जिसमें अनचाहे या असुरक्षित गर्भ को सुरक्षित तरीके से समाप्त किया जाता है। भारत में यह प्रक्रिया पूरी तरह वैध और सुरक्षित है। अबॉर्शन दो तरीकों से होता है मेडिकल (दवाओं से) और सर्जिकल (ऑपरेशन से)। सही तरीका आपकी गर्भावस्था की अवधि और स्वास्थ्य स्थिति पर निर्भर करता है।

    अबॉर्शन कैसे करते हैं? (Abortion Kaise Karte Hain)

    अबॉर्शन करने के दो मुख्य तरीके हैं:

    1. मेडिकल अबॉर्शन (दवाओं से गर्भपात) – 9 सप्ताह तक

    इस प्रक्रिया में दो दवाओं का उपयोग किया जाता है:

    • Mifepristone – यह दवा गर्भावस्था को बनाए रखने वाले हार्मोन को रोकती है। पहले दिन यह दवा ली जाती है।
    • Misoprostol – यह दवा 24 से 48 घंटे बाद ली जाती है। इससे गर्भाशय सिकुड़ता है और गर्भावस्था की ऊतकें बाहर निकल जाती हैं।

    यह प्रक्रिया कैसे होती है:

    1. डॉक्टर पहले अल्ट्रासाउंड और जरूरी जांच करते हैं।
    2. पहली दवा (Mifepristone) दी जाती है।
    3. 24–48 घंटे बाद दूसरी दवा (Misoprostol) ली जाती है।
    4. इसके बाद माहवारी जैसी ऐंठन और रक्तस्राव होता है।
    5. 7 से 10 दिनों में प्रक्रिया पूरी होती है।
    6. 2 हफ्ते बाद अल्ट्रासाउंड से पुष्टि होती है।

    2. सर्जिकल अबॉर्शन – 9 सप्ताह के बाद

    सर्जिकल अबॉर्शन (D&C – Dilation and Curettage) वह प्रक्रिया है जो 9 सप्ताह से अधिक की गर्भावस्था में की जाती है।

    Abortion Procedure (सर्जिकल अबॉर्शन) कैसे होती है:

    1. मरीज को बेहोशी की दवा (Anesthesia) दी जाती है इससे कोई दर्द नहीं होता।
    2. डॉक्टर गर्भाशय ग्रीवा (Cervix) को फैलाने के लिए दवा देते हैं।
    3. एक विशेष उपकरण से गर्भाशय के अंदर की ऊतकें निकाली जाती हैं।
    4. पूरी प्रक्रिया 30 से 60 मिनट में पूरी होती है।
    5. उसी दिन या अगले दिन अस्पताल से छुट्टी मिल जाती है।
    6. कोई कट या टांके नहीं लगते।

    अबॉर्शन में कितना दर्द होता है? (Abortion Mein Kitna Dard Hota Hai)

    यह एक बहुत सामान्य सवाल है जो ज्यादातर महिलाएं पूछती हैं।

    • मेडिकल अबॉर्शन में: माहवारी जैसी ऐंठन और दर्द हो सकता है। यह दर्द Misoprostol लेने के कुछ घंटों बाद शुरू होता है और आमतौर पर 4 से 6 घंटे तक रहता है। डॉक्टर दर्द निवारक दवाएं देते हैं।
    • सर्जिकल अबॉर्शन में: बेहोशी की दवा के कारण प्रक्रिया के दौरान कोई दर्द नहीं होता। बाद में हल्की ऐंठन हो सकती है जो 1-2 दिनों में ठीक हो जाती है।

    सर्जिकल अबॉर्शन में दर्द बहुत कम या नहीं होता, जबकि मेडिकल अबॉर्शन में माहवारी जैसी तकलीफ होती है।

    गर्भपात के बाद कितने दिन आराम करना चाहिए?

    यह सवाल बहुत जरूरी है और हर महिला के लिए जवाब थोड़ा अलग हो सकता है:

    प्रक्रियाआराम का समयकाम पर वापसी
    मेडिकल अबॉर्शन3 से 5 दिन5–7 दिन बाद
    सर्जिकल अबॉर्शन1 से 2 दिन3–5 दिन बाद
    भारी शारीरिक काम2 सप्ताह बाद

    रिकवरी के लिए जरूरी बातें:

    • अबॉर्शन के बाद कम से कम 1 से 2 दिन पूरा आराम करें।
    • खूब पानी पीएं और हल्का पौष्टिक भोजन खाएं।
    • डॉक्टर द्वारा दी गई दवाएं समय पर लें।
    • पहले 4 सप्ताह तक यौन संबंध बनाने से बचें।
    • टैम्पोन की जगह सैनिटरी पैड का उपयोग करें।
    • भारी सामान उठाने या कठोर व्यायाम से बचें।
    • यदि तेज बुखार, बहुत अधिक रक्तस्राव या तेज दर्द हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

    अबॉर्शन के प्रकार (Types of Abortion in Hindi)

    गर्भावस्था की अवधिउचित प्रक्रिया
    6–9 सप्ताहमेडिकल अबॉर्शन (दवाओं से)
    9–20 सप्ताहसर्जिकल अबॉर्शन (D&C)
    एक्टोपिक गर्भावस्थालेप्रोस्कोपिक ऑपरेशन
    मोलर गर्भावस्थाD&C
    20 सप्ताह से अधिक (विशेष मामले)सर्जिकल (डॉक्टर की अनुमति से)

    अबॉर्शन से पहले जरूरी जांचें (Before Abortion Procedure)

    सर्जिकल या मेडिकल अबॉर्शन से पहले ये जांचें की जाती हैं:

    • अल्ट्रासाउंड: गर्भावस्था की स्थिति, अवधि और स्थान (Ectopic तो नहीं) की जांच।

      • 6–8 सप्ताह में: ट्रांसवेजाइनल अल्ट्रासाउंड
      • 2 माह से अधिक: एब्डॉमिनल अल्ट्रासाउंड
    • ब्लड टेस्ट: रक्त समूह, हीमोग्लोबिन, संक्रमण की जांच।

    • मेडिकल हिस्ट्री: मौजूदा दवाओं और एलर्जी की जानकारी।

    अबॉर्शन से पहले तैयारी कैसे करें?

    • उम्र का प्रमाण पत्र साथ रखें।
    • रक्त पतला करने वाली दवाएं (Blood Thinners) पहले से बंद करें  डॉक्टर की सलाह से।
    • प्रक्रिया से 4–6 घंटे पहले कुछ न खाएं-पीएं।
    • अपने साथ सैनिटरी पैड ले जाएं।
    • क्लीनिक में ढीले, आरामदायक कपड़े पहनकर जाएं।
    • किसी परिचित को साथ लेकर जाएं।

    अबॉर्शन के बाद देखभाल (Post Abortion Care)

    शारीरिक देखभाल:

    • दवाएं समय पर लें – एंटीबायोटिक से संक्रमण नहीं होता।
    • सामान्य रक्तस्राव 2 से 4 सप्ताह तक हो सकता है  यह सामान्य है।
    • 2 सप्ताह के अंदर फॉलो-अप अल्ट्रासाउंड जरूर कराएं।
    • अगला मासिक धर्म 4 से 6 सप्ताह में आ सकता है।

    मानसिक देखभाल:

    अबॉर्शन के बाद कुछ महिलाओं को तनाव, उदासी, अकेलापन या अपराध-बोध महसूस हो सकता है। यह सामान्य है।

    • परिवार और भरोसेमंद लोगों से बात करें।
    • यदि मानसिक तकलीफ लंबे समय तक बनी रहे तो काउंसलर से मिलें।

    क्या अबॉर्शन के बाद दोबारा गर्भधारण हो सकता है?

    हां। सही तरीके से की गई अबॉर्शन प्रक्रिया से भविष्य में गर्भधारण की क्षमता पर कोई असर नहीं पड़ता। यह मिथक है कि अबॉर्शन कराने से बाद में बच्चा नहीं होता।

    भारत में अबॉर्शन के कानूनी नियम

    • MTP एक्ट 1971 के तहत भारत में अबॉर्शन वैध है।
    • 20 सप्ताह तक का गर्भपात सामान्यतः किया जा सकता है।
    • 24 सप्ताह तक विशेष मामलों में: यौन शोषण, शारीरिक समस्या, या 18 वर्ष से कम उम्र।
    • 18 वर्ष से कम उम्र की लड़कियों के लिए परिवार की सहमति जरूरी है।
    • अबॉर्शन के लिए पति की सहमति जरूरी नहीं है।

    केवल लाइसेंस प्राप्त डॉक्टर और क्लीनिक में ही अबॉर्शन करवाएं।

    असुरक्षित अबॉर्शन के खतरे

    अप्रशिक्षित व्यक्ति से या बिना लाइसेंस वाली जगह पर अबॉर्शन कराना खतरनाक है। इसके गंभीर खतरे हैं:

    • अधूरा गर्भपात
    • गंभीर संक्रमण (Sepsis)
    • अत्यधिक रक्तस्राव
    • भविष्य में गर्भधारण में समस्या
    • जानलेवा स्थिति
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    गर्भपात से संबंधित अधिकतर पूछे जाने वाले प्रश्न

    अबॉर्शन कैसे होता है हिंदी में (Abortion kaise hota hai in Hindi)?

    अबॉर्शन दो तरीके से होता है मेडिकल (दवाओं से, 9 सप्ताह तक) और सर्जिकल (D&C ऑपरेशन, 9 सप्ताह के बाद)। सर्जिकल अबॉर्शन में बेहोशी की दवा दी जाती है और उपकरण से भ्रूण की ऊतकें निकाली जाती हैं। प्रक्रिया 30–60 मिनट में पूरी होती है।

    अबोसन (अबॉर्शन) कैसे होता है?

    अबोसन’ यानी अबॉर्शन। यह दवाओं या सर्जरी से होता है। डॉक्टर पहले जांच करते हैं और फिर गर्भावस्था की अवधि के अनुसार सही प्रक्रिया चुनते हैं।

    Abortion process in Hindi क्या है?

    Abortion process में पहले अल्ट्रासाउंड जांच होती है, फिर मेडिकल या सर्जिकल प्रक्रिया से गर्भ का समापन होता है। सर्जिकल अबॉर्शन में Anesthesia दी जाती है जिससे दर्द नहीं होता।

    गर्भपात के बाद कितने दिन आराम करना चाहिए?

    सर्जिकल अबॉर्शन के बाद 1–2 दिन आराम काफी होता है। मेडिकल अबॉर्शन में 3–5 दिन आराम की जरूरत हो सकती है। भारी काम के लिए 2 सप्ताह तक प्रतीक्षा करें।

    अबॉर्शन में कितना दर्द होता है?

    सर्जिकल अबॉर्शन में बेहोशी की दवा की वजह से प्रक्रिया के दौरान दर्द नहीं होता। मेडिकल अबॉर्शन में माहवारी जैसी ऐंठन हो सकती है जो दवाओं से कम होती है।

    क्या सर्जिकल गर्भपात दर्दनाक है?

    नहीं। सर्जिकल गर्भपात General या Local Anesthesia के तहत किया जाता है। प्रक्रिया के दौरान मरीज को कोई दर्द नहीं होता। बाद में हल्की ऐंठन संभव है।

    अबॉर्शन के लिए पति की सहमति जरूरी है क्या?

    नहीं। भारतीय कानून के अनुसार अबॉर्शन के लिए पति की सहमति की आवश्यकता नहीं है। यह पूरी तरह महिला का अधिकार है।

    क्या 18 वर्ष से कम उम्र में अबॉर्शन हो सकता है?

    हां, लेकिन इसके लिए माता-पिता या अभिभावक की लिखित सहमति आवश्यक है।