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हमारे चेहरे की हड्डियों के अंदर हवा से भरी छोटी-छोटी जगहें होती हैं, जिन्हें साइनस कहा जाता है। ये साइनस नाक से जुड़े होते हैं और बलगम (म्यूकस) बनाने में मदद करते हैं। जब इनमें सूजन या संक्रमण हो जाता है, तो इसे साइनसाइटिस कहा जाता है।
यह कुछ दिनों से लेकर 4 हफ्तों तक रहता है और अक्सर वायरल संक्रमण या सर्दी-जुकाम के बाद होता है।
जब साइनस की समस्या 12 हफ्तों से ज्यादा बनी रहे, तो उसे क्रॉनिक साइनसाइटिस कहा जाता है।
धूल, धुआं, परागकण या मौसम बदलने से एलर्जी होने पर साइनस की समस्या बढ़ सकती है।
साइनस का निदान करने के लिए डॉक्टर अस्पताल बुलाकर आपके लक्षणों की करीब से जांच करते है। साथ ही आपसे इस बारे में भी पूछा जाता है कि आपको साइनस के लक्षण कब शुरू हुए हैं और हाल ही में आप किसी एलर्जिक पदार्थ के संपर्क में तो नहीं आए हैं।
इसके अलावा कुछ टेस्ट भी किए जा सकते हैं, जिनकी मदद से साइनोसाइटिस की पुष्टि करने में मदद मिलती है। इन टेस्टों में निम्न शामिल हैं –
साइनोसाइटिस का इलाज करने के लिए डॉक्टर आमतौर पर एंटीबायोटिक व नाक साफ करने वाली (डिकंजेस्टेंट) दवाएं देते हैं। यदि किसी कारण से एंटीबायोटिक दवाओं से साइनसाइटिस ठीक नहीं हो पा रहा है या फिर स्थिति निरंतर गंभीर होती जा रही है, तो साइनसोटमी सर्जरी की जा सकती है।
साइनस का उपचार साइनसोटमी सर्जरी प्रक्रिया से किया जाता है, जिसकी मदद से साइनस संबंधी विभिन्न प्रकार के रोगों का इलाज किया जाता है। साइनस नाक के दोनों तरफ बनी एक थैलीनुमा संरचना (कैविटी) है, जिसके भागों को निम्न के नाम से जाना जाता है –
साइनसोटमी सर्जरी को दो अलग-अलग तरीकों से किया जा सकता है, जिन्हें एक्सटर्नल साइनसोटमी और एंडोस्कोपिक साइनसोटमी के नाम से जाना जाता है।
इन सर्जिकल प्रक्रियाओं के करने के तरीकों के बारे में नीचे बताया गया है –
इसे ओपन साइनसोटमी भी कहा जा सकता है। एक्सटर्नल साइनसोटमी को करने के लिए सर्जन कई अलग-अलग तरीकों का इस्तेमाल करते हैं, जैसे ट्रेफिनेशन और फ्रंटल साइनस ऑब्लिटेरेशन।
ट्रेफिनेशन प्रोसीजर को निम्न तरीके से किया जाता है –
इस प्रक्रिया में नाक के अंदरूनी हिस्से की जांच करने के लिए एंडोस्कोप नामक उपकरण का इस्तेमाल किया जाता है। इस सर्जरी को करने के लिए निम्न स्टेप किए जा सकते हैं –
यदि आपको 10 दिनों से ज्यादा नाक बंद रहने, तेज सिरदर्द, चेहरे में सूजन, बुखार या सांस लेने में परेशानी हो रही है, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।

साइनस की समस्या मुख्य रूप से नाक संबंधी समस्या जैसे नाक की संरचना का सही न होना की वजह से होती है। इसके अलावा, यह समस्या एलर्जी, जेनेटिक, दांत संबंधी समस्याओं इत्यादि के कारण भी हो सकती है।
साइनस से छुटकारा पाने का सबसे आसान तरीका अपनी दिनचर्या में बदलाव करना है। इसके लिए अधिक मात्रा में पानी पीना, योगा करना, रोग-प्रतिरोधक क्षमता (immunity power) को बढ़ाने वाले खादय पदार्थों को डाइट में करना इत्यादि तरीके को अपनाया जा सकता है।
साइनस की शुरूआत ज़्यादातर जुखाम के लक्षणों जैसे नाक का बहना, चेहरे पर दर्द या खुजली होना इत्यादि तरह से होती है, जो कुछ समय के बाद गंभीर रूप ले लेती है। साइनस की समस्या मुख्य रूप से 1-3 हफ्तों तक रह सकती है।
जी हां, साइनस का इलाज संभव है। इसके लिए दवाई लेना, आयुर्वेदिक इलाज करना, एंटिबायोटिक दवाई का सेवन करना, साइनसाइटिस सर्जरी करना इत्यादि को अपनाया जा सकता है।
जी हां, साइनस का असर आँखों पर पड़ सकता है, जिसकी वजह से उनकी आँखों पर सूजन, आँखों का लाल होना, आँखों पर खुजली होना इत्यादि जैसी समस्याएँ हो सकती हैं।