Pelvic floor dysfunction

पेल्विक फ्लोर उन सभी मांसपेशियों का समूह है जो मूत्राशय (Urinary Bladder), गर्भाशय (Uterus), प्रोस्टेट (Prostate), योनि, मलाशय, और गुदा से जुड़ी रहती हैं। पेल्विक क्षेत्र जांघ के ऊपर और नाभि के नीचे मौजूद होता है। लोगों को पेल्विक फ्लोर से जुड़ी समस्याएं तब होती हैं जब पेल्विक मसल्स काम करना बंद कर देते हैं। पेल्विक फ्लोर की मसल्स का एक्टिव रहना बहुत जरूरी है। यह क्षेत्र शरीर के अंदर होने वाले कई जरूरी कार्यों के लिए बना हुआ है। पुरुषों की तुलना में महिलाओं में पेल्विक फ्लोर से जुड़ी समस्याएं अधिक देखने को मिलती हैं। महिलाओं में सेक्सुअल इंटरकोर्स (Sexual Intercourse) के दौरान भी पेल्विक मसल्स सहायता करते हैं।

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पेल्विक फ्लोर डिस्फंक्शन क्या है — What is Pelvic Floor Dysfunction in Hindi

पेल्विक मसल्स कमजोर पड़ने पर पेल्विक फ्लोर डिस्फंक्शन की समस्या होती है। स्वस्थ व्यक्ति का पेल्विक मसल्स पर पूरा कंट्रोल होता है। लेकिन जब पेल्विक मसल्स कमजोर होने लगते हैं तब इन पर कंट्रोल भी धीरे धीरे कम होने लगता है। पेल्विक फ्लोर डिस्फंक्शन होने पर पेल्विक मसल्स को कड़ा और रिलैक्स करने की क्षमता खत्म हो जाती है। 

पेल्विक फ्लोर डिस्फंक्शन से इन मसल्स पर थोड़ा बहुत दबाव तो डाला जा सकता है लेकिन इन्हें ढीला करना मुश्किल हो जाता है। इससे स्टूल पास करने में असहजता होती है और शौच कार्य अधूरा रह जाता है। जिसकी वजह से कभी भी अचानक से स्टूल पास हो जाता है। पेल्विक फ्लोर डिस्फंक्शन को लगातार नजरअंदाज करने पर बड़ी समस्या हो सकती है। पेट से संबंधित समस्याएं और इंफेक्शन होने का खतरा भी बढ़ जाता है।

पेल्विक फ्लोर डिस्फंक्शन के लक्षण — Symptoms of Pelvic Floor Dysfunction in Hindi

पेल्विक फ्लोर डिस्फंक्शन होने पर इसके कई लक्षण नजर आते हैं। आमतौर पर ये लक्षण रोज नजर आते हैं लेकिन कभी कभी कुछ विशेष कार्य के दौरान बढ़ जाते हैं।

  • यूरिन से जुड़ी समस्याएं जैसे यूरिन करते समय दर्द, यरिन करने में परेशानी होना आदि।
  • कब्ज (Constipation in Hindi), डाइजेशन में दिक्कत, आंत में खिंचाव जैसे लक्षण नजर आते हैं।
  • कमर के आस पास तेज दर्द। यह दर्द मसल्स में होता है। 
  • प्राइवेट पार्ट्स में तेज दर्द। मलाशय (Rectum) में भी दर्द हो सकता है।
  • महिलाओं को सेक्स के दौरान दर्द होता है।
  • पेल्विक क्षेत्र में दबाव महसूस होता है। दबाव होने पर ऐंठन हो सकती है।
  • स्टूल पास करते समय जोर नहीं लग पाता है। उठते बैठते यूरिन और स्टूल अचानक से निकल जाता है। 
  • पेट में गुड़गुड़ाहट और आंत के अंदर मूवमेंट महसूस होता है।
  • अचानक से यूरिन करने का मन होता है लेकिन यूरिन नहीं निकलता है या कई बार में थोड़ा थोड़ा करके निकलता है। 

पेल्विक फ्लोर डिस्फंक्शन के कारण — Causes of Pelvic Floor Dysfunction in Hindi

पेल्विक फ्लोर डिस्फंक्शन की समस्या अचानक से हो जाती है। इसके अचानक से हो जाने का क्या कारण है? इसका पता अभी तक नहीं लग पाया है। लेकिन कुछ ऐसे कारण हैं जो ज्ञात हैं जिनसे पेल्विक फ्लोर डिस्फंक्शन होने की संभावना ज्यादा होती है।

बच्चे को जन्म देने के बाद 

जब कोई महिला बच्चे को जन्म देती है तो उसके पेल्विक क्षेत्र की मसल्स में भारी दबाव और खिंचाव पैदा होता है। जिससे पेल्विक फ्लोर डिस्फंक्शन हो सकता है। डिलीवरी के बाद महिलाओं में यह समस्या अधिक देखने को मिलती है। हालांकि, सही खान-पान और व्यायाम कर इस बीमारी से जल्द ही छुटकारा पाया जा सकता है।

पेल्विक सर्जरी 

अगर पेल्विक क्षेत्र में कभी किसी कारण से सर्जरी हुई है तो पेल्विक फ्लोर डिस्फंक्शन होने की संभावना अधिक होती है।

मोटापा

मोटापे से पेल्विक फ्लोर डिस्फंक्शन का खतरा बढ़ जाता है। भारी पेट वाले व्यक्ति में यह खतरा अधिक होता है।

चोट लगना

अगर पेल्विक क्षेत्र में गहरी चोट लगती है तो पेल्विक फ्लोर डिस्फंक्शन हो सकता है। ऐसा होने पर पेल्विक मसल्स पर कंट्रोल नहीं रहता है और चोट के कारण हर समय तेज दर्द की शिकायत भी रहती है। इससे इंफेक्शन बढ़ने का भी खतरा रहता है, इसलिए तुरंत डॉक्टर से मिलकर जांच और इलाज करवाना चाहिए।

पेल्विक फ्लोर डिस्फंक्शन की जांच — Diagnosis of Pelvic Floor Dysfunction in Hindi

पेल्विक फ्लोर डिस्फंक्शन की जांच करने में बहुत परेशानी होती है। पेल्विक क्षेत्र के कौन से हिस्से में समस्या है जो पेल्विक फ्लोर डिस्फंक्शन का कारण बन रही है, इस बात का पता लगाने के लिए कई टेस्ट करने पड़ते हैं।

सबसे पहले तो डॉक्टर आपकी मेडिकल हिस्ट्री, आपको किस तरह के लक्षण नजर आते हैं और शरीर के किस भाग में दर्द होता है आदि चीजों के बारे में जानने की कोशिश करते हैं। स्थिति को बेहतर रूप से समझने के लिए डॉक्टर फिजिकल टेस्ट भी कर सकते हैं जैसे कि स्टूल पास करवाना, यूरिन करवाना, पेल्विक अंगों में हल्का दबाव पैदा करना आदि। इससे मसल्स की कमजोरी और दर्द का पता चलता है। 

पेरिनियोमीटर टेस्ट

यह टेस्ट पेल्विक एरिया की मसल्स के संकुचन और ढीले होने की स्थिति का पता लगाने के लिए किया जाता है। पेरिनियोमीटर एक उपकरण है जो योनि या गुदा मार्ग से शरीर के भीतर डाला जाता है। यह डिवाइस डॉक्टर को पेल्विक एरिया के अंदर की स्थिति को समझने में मदद करता है। 

इलेक्ट्रोड टेस्ट 

पेल्विक मसल्स के संकुचन और रिलैक्सेशन (Relaxation) की स्थिति का पता इलेक्ट्रोड टेस्ट से भी लगाया जा सकता है। डॉक्टर एनस और वजाइना या ओवेरी के बीच में इलेक्ट्रोड रखते हैं और फिर जांच करते हैं। पेल्विक फ्लोर डिसफंक्शन की जांच करने के लिए जो अन्य विधियां इस्तेमाल में लाई जाती हैं उनसे यह कम खतरनाक है। 

पेल्विक फ्लोर डिस्फंक्शन का इलाज — Treatment of Pelvic Floor Dysfunction in Hindi

पेल्विक फ्लोर डिसफंक्शन का इलाज आसानी से किया जा सकता है। आप अपने जीवनशैली को बेहतर बनाकर इनके लक्षणों को खुद कम कर सकते हैं। इसके अलावा, सर्जरी के जरिए भी इसका इलाज किया जा सकता है। पेल्विक फ्लोर डिसफंक्शन का इलाज कई तरह से किया जा सकता है;

बायो फीडबैक थेरेपी 

यह पेल्विक मसल्स को रिलैक्स कर स्थिति को बेहतर बनाता है। इसमें शरीर के अंदर कुछ खास प्रकार के उपकरण डाले जाते हैं। जिनमें सेंसर लगे होते हैं जो पेल्विक मसल्स की मॉनिटरिंग करते हैं। इसकी मदद से मसल्स की हर एक्टिविटी पर ध्यान रख इलाज किया जाता है।

बायो फीडबैक थेरेपी ‘बॉवल मूवमेंट (Bowel Movement)’ को सुधारता है। इस थेरेपी के बाद पेल्विक मसल्स में काफी सुधार आ जाता है और स्ट्रेस भी कम हो जाता है। इसकी सबसे अच्छी बात यह है कि इसके साइड इफेक्ट्स (Side Effects) नहीं होते हैं और इसकी प्रक्रिया के दौरान दर्द भी नहीं सहना पड़ता है।

दवाएं

पेल्विक फ्लोर डिस्फंक्शन के लक्षणों को दवा के माध्यम से भी कम किया जा सकता है। लक्षणों को देखकर खुद से किसी भी दवा का सेवन नहीं करना चाहिए। डॉक्टर से जांच करवाने के बाद उनके द्वारा सुझाई गई दवाओं का ही सेवन करना चाहिए। 

पेल्विक फ्लोर डिस्फंक्शन की सर्जरी — Surgery of Pelvic Floor Dysfunction in Hindi

पेल्विक फ्लोर डिस्फंक्शन में सर्जरी भी करनी पड़ सकती है। कभी कभी मलाशय का कुछ भाग अपनी बाहरी सतह से बाहर आ जाता है। यह भाग गुदा (Anus) की ओर निकल आता है या गुदा से बाहर निकलने की कोशिश करता है। इस दौरान काफी दर्द का सामना भी करना पड़ता है। केवल दवाइयों से रेक्टल प्रोलैप्स का इलाज नहीं किया जा सकता है। इसकी समस्या होने पर सर्जरी ही एकमात्र बेहतर इलाज बचता है। 

पेल्विक फ्लोर मसल्स को मजबूत बनाने के लिए एक्सरसाइज Exercises To Keep Pelvic Floor Muscles Strong in Hindi

सेतुबंधासन 

सेतुबंधासन को नियमित रूप से करने पर आप पेल्विक मसल्स में सुधार ला सकते हैं। यह एक्सरसाइज पेल्विक मसल्स के अलावा हिप्स को भी मजबूती देता है और शेप को टोन (Tone) करता है। 

सेतुबंधासन करने का तरीका

  • किसी समतल जगह में पीठ के बल लेट जाएं।
  • अब पैरों को सामने की ओर फैलाएं और हाथों को बॉडी से सटा लें। 
  • लंबी गहरी सांस लें। घुटनों को धीरे-धीरे मोड़ना शुरू करें। कमर को ऊपर उठाएं। शरीर का बल एड़ी और कंधे पर रखें और फिर धीर धीरे एड़ी को हिप्स के नजदीक लाएं। 
  • हाथों से जमीन की तरफ दबाव बनाएं| इससे कमर को ऊपर तक उठाने में आसानी होती है। ध्यान रखें कि आसन करते वक्त सिर सीधा होना चाहिए। 
  • इसी स्थिति में 30 से 40 सेकंड तक बने रहें। फिर सांस छोड़ते हुए आसन से बाहर आ जाएं।

कीगल एक्सरसाइज

कीगल एक्सरसाइज पूरी तरह से पेल्विक क्षेत्रों को लाभ पहुंचाती है। यह स्टूल-यूरिन में असामान्यता और पीठ के निचले हिस्से के दर्द को कम करती है। वयस्कों को कीगल एक्सरसाइज जरूर करना चाहिए।

कैसे करें कीगल एक्सरसाइज

  • पलथी मारकर बैठ जाएं।
  • अब आपको ध्यान लगाने की जरूरत है।
  • आंखों को बंद करें और ब्लैडर की मसल्स में ध्यान लगाएं।
  • उन्हें सिकोड़ने और रिलैक्स करने का प्रयास करें।
  • मांसपेशियों में दबाव डालकर उन्हें 4-5 सेकंड के लिए सिकोड़े फिर छोड़ दें।
  • ऐसा ही लगातार दस बार करें। ऐसा रोज करने से पेल्विक मसल्स से जुड़ी समस्याएं दूर हो जाती हैं।

स्क्वाट्स 

स्क्वाट्स से आप अपने पेल्विक फ्लोर की मसल्स को लचीला और मजबूत बना सकते हैं। 

स्क्वाट्स  करने का तरीका

  • सीधा खड़े हो जाएं और हाथों को सामने की ओर करें।
  • छाती को हल्का बाहर निकालें और घुटनों के बल झुकना शुरू करें। जैसे ही हिप्स घुटनों की बराबरी में आए, उसी स्थित में रुक जाएं। आपको लगेगा कि आप कुर्सी पर बैठे हैं। ध्यान रहे कि हाथ सीधा होना चाहिए। 
  • इस पोजीशन में 30 से 40 सेकण्ड्स तक रहें फिर उठ जाएं। ऐसा लगातार 8 से 10 मिनट तक करें। एक महीने तक इस एक्सरसाइज को करने से पेल्विक क्षेत्र काफी मजबूत हो जाता है। 

निष्कर्ष – Conclusion

पेल्विक फ्लोर डिसफंक्शन की समस्या अगर एक बार हो जाए तो यह लंबे समय तक रहती है। इसलिए इससे बचने का सबसे अच्छा उपाय है कि अपने खान पान पर विशेष ध्यान दें। पाचन तंत्र को कमजोर बनाने वाले आहार न खाएं, अगर पेल्विक फ्लोर की गड़बड़ी का डॉक्टर से इलाज करवा रहे हैं तो उनकी सभी बातों का अनुसरण करें। डॉक्टर जिस तरह का भोजन खाने को कहते हैं वही खाएं। अपने मन मुताबिक किसी भी चीज का सेवन करने से बचना चाहिए।  

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