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युटेरस फाइब्रॉयड्स के लिए मायोमेक्टॉमी की प्रकिया – Myomectomy in hindi
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मायोमेक्टोमी क्या है? - What is Myomectomy in Hindi?
गर्भाशय की रसौली (युटेरस फाइब्रॉयड्स) निकालने के लिए जो सर्जरी की जाती है उसे मायोमेक्टोमी कहते हैं। रसौली (uterin fibroids) एक प्रकार की गांठ है जो गर्भाशय में बनने लगती है। गांठ से कैंसर होने का खतरा नहीं रहता है लेकिन फिर भी यह कई प्रकार की समस्याएं खड़ी कर देती है। रसौली का इलाज ना कराया जाए तो बांझपन की समस्या भी हो सकती है। इसे लायोम्योमा (leiomyoma) भी कहते हैं।
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गर्भाशय की रसौली के क्या लक्षण हैं? What are the Symptoms of Uterus Fibroids in Hindi?
आमतौर पर रसौली के कोई लक्षण नजर नही आते हैं। कई बार ये दर्द भी नही देते हैं। कभी-कभी कुछ लक्षण नजर आ सकते हैं-
- बार-बार पेशाब आना
- मासिक धर्म में अत्यधिक रक्तस्त्राव होना।
- मासिक धर्म का समय न आने पर भी रक्तस्त्राव होना।
- पेल्विक क्षेत्र में तेज दर्द उठना।
- संभोग के दौरान दर्द होना।
- पेट फूला हुआ दिखाई देना।
मायोमेक्टोमी की जरूरत कब होती है?
गर्भाशय के रसौली के लक्षणों को दवा के माध्यम से भी कम किया जा सकता है। कुछ खास प्रकार की दवाइयाँ दी जाती हैं जिनसे मासिक धर्म में अधिक ब्लीडिंग और पेल्विक क्षेत्र के दर्द को कम किया जा सकता है। इस प्रकार की दवाइयाँ शरीर के उन चुनिंदा हारमोंस को टारगेट करती हैं जिनकी मदद से ब्लीडिंग और दर्द को रोका जा सके। लेकिन यह दवाइयाँ रसौली को पूरी तरह से खत्म नहीं कर सकती हैं। हां यह दवाइयां फाइब्रॉइड के आकार को छोटा जरूर कर सकती हैं। रसौली से पूरी तरह से छुटकारा पाने के लिए सर्जरी की जाती है।
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गर्भाशय में फाइब्रॉइड की क्या वजह है? Causes of Uterus Fibroids in Hindi?
रसौली होने पर महिलाओं को कई सारे कष्ट उठाने पड़ते हैं। यह दर्दभरा होता है और रक्तस्राव भी होता है। इस प्रकार की स्थिति में हिस्टरेक्टॉमी भी की जा सकती है, लेकिन ऐसी कई वजह हैं जिनके कारण आपको मायोमेक्टोमी ही करवानी पड़ती है। जैसे-
- अगर आप मां बनना चाहती हैं तो हिस्टरेक्टॉमी से रसौली का इलाज नही करवा सकती हैं। हिस्टरेक्टॉमी में गर्भाशय को निकाल दिया जाता है जिसके कारण सर्जरी के बाद महिला कभी भी मां नही बन पाती है।
- अगर रसौली की वजह से महिला की प्रजनन क्षमता कम होती जा रही है, तो मायोमेक्टोमी की जाती है।
- गर्भवस्था से संबंधित अन्य परेशानियां जैसे, मिसकैरेज (miscarriage) में भी मायोमेक्टोमी ही सही इलाज है।
- रसौली की वजह से लेबर पेन होने पर मायोमेक्टोमी की जा सकती है।
गर्भाशय की रसौली का परीक्षण - Diagnosis of uterus Fibroids in Hindi?
अगर आप में यूटेरस फाइब्रॉइड के लक्षण नजर आते हैं तो डॉक्टर कुछ प्रकार के टेस्ट कर सकते हैं-
- अल्ट्रासाउंड (ultrasound)- ध्वनि तरंगों के माध्यम से गर्भाशय की छवि प्राप्त करना।
- ब्लड टेस्ट- डॉक्टर महिला के रक्त की जांच भी कर सकते हैं। कोई अन्य बीमारी है या नही, इस बात का पता करने के लिए यह टेस्ट किया जाता है। ब्लड टेस्ट के साथ CBC (Complete blood count) टेस्ट भी किया जा सकता है।
- एमआरआई(MRI)- यह टेस्ट फाइब्रॉइड के आकार और स्थान को अधिक बेहतर ढंग से दिखाता है।
- हिस्टेरोस्कोपी- एक उपकरण (हिस्टेरोस्कोप) की मदद से गर्भाशय के भीतर का चित्र देखा जाता है।
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मायोमेक्टोमी से पहले क्या सावधानी बरतें - What are the Precautions Before Myomectomy in Hindi?
- सर्जरी के कुछ हफ्ते पहले से नशा न करें।
- सर्जरी के दो दिन पहले से किसी भी प्रकार की पिल्स लेने से बचें। अगर रोगी हैं, तो अपनी दवाइयां डॉक्टर को दिखाएं।
- सेर्गेरी के 6 घंटे पहले से कुछ भी न खाएं। 2 घंटे पहले से पानी भी न पिए।
मायोमेक्टोमी सर्जरी के प्रकार और पक्रिया- Myomectomy surgery Types and Procedure in Hindi
मायोमेक्टोमी तीन तरह से की जा सकती है। कौन सी मायोमेक्टोमी करनी है यह परीक्षण के बाद ही पता चलता है। रसौली का स्थान, प्रकार और संख्या के आधार पर मायोमेक्टोमी के प्रकार को चुना जाता है।
एब्डोमिनल मायोमेक्टोमी (abdominal myomectomy)
इसे लेप्रोटोमी (laparotomy) भी कहते हैं। इस सर्जरी के लिए पेट मे एक चीरा लगाया जाता है और गर्भाशय से रसौली निकाली जाती है। गर्भाशय में फाइब्रॉयड की संख्या अधिक है, आकार लंबा है या गहराई में है तो एब्डोमिनल मायोमेक्टोमी की जा सकती है। सर्जन एब्डोमेन में छोटा सा आड़ा चीरा लगाएंगे और सर्जरी करेंगे। लेकिन,आड़ा (horizantal) चीरा लगाने से केवल छोटे आकार के फाइब्रॉइड को निकाला जा सकता है। चीरा 3 से 4 इंच का होता है जिसके कारण सर्जरी के बाद त्वचा में हल्का सा दाग आ सकता है। बड़े आकार के फाइब्रॉइड को आसानी से निकालने के लिए वर्टिकल चीरा लगाया जाता है।
सर्जरी हो जाने के बाद डॉक्टर टांका लगा कर चीरा बंद कर देते हैं| एब्डोमिनल मायोमेक्टोमी में रोगी महिला को 3 से 4 दिन तक हॉस्पिटल में रुकने की आवश्यकता होती है।
लेप्रोस्कोपिक या रोबोटिक मायोमेक्टोमी (laparoscopic or robotic myomectomy)
लेप्रोस्कोपीकि या रोबोटिक मायोमेक्टोमी के दौरान बहुत कम चीरे लगाए जाते हैं, जिनका आकार भी बड़ा नहीं होता है। यह सर्जरी इलाज के दौरान शरीर को सबसे कम नुकसान पहुचाती है। एब्डोमिनल मायोमेक्टोमी की तुलना में, लेप्रोस्कोपी या रोबोटिक मायोमेक्टोमी में कम खून बहता है, रिकवरी जल्दी होती है और परिणाम भी अच्छे रहते हैं। साइड इफ़ेक्ट भी कम देखने को मिलते हैं।
रोबोटिक सर्जरी का खर्चा एब्डोमिनल सर्जरी के मुकाबले अधिक रहता है। लेकिन साइड इफ़ेक्ट और अन्य नुकसान को देखें तो रोबोटिक सर्जरी अच्छा विकल्प है।
- लेप्रोस्कोपिक मायोमेक्टोमी की प्रक्रिया (Laparoscopic Myomectomy Procedure)
इस सर्जरी में डॉक्टर सबसे पहले नाभि के नीचे एक हल्का सा चीरा लगाएंगे और एक ट्यूब के माध्यम से लेप्रोस्कोप को गर्भाशय के अंदर डालेंगे। लेप्रोस्कोपिक एक प्रकार का इंस्ट्रूमेंट है जिसमें कैमरा लगा होता है| एब्डोमिनल वॉल में कुछ और छोटे आकार के चीरा लगाए जाएंगे और सर्जरी की जाएगी। रोगी महिला के पेट में कार्बन डाइऑक्साइड भर दी जाएगी ताकि सर्जन को देखने में परेशानी ना हो।
गर्भाशय से रसौली को हटाने के बाद कार्बन डाइऑक्साइड गैस निकाल ली जाएगी और टांका लगा दिया जाएगा। इस प्रकार की सर्जरी में रोगी को 1 दिन हॉस्पिटल में बिताने की आवश्यकता पड़ती है।
- रोबोटिक मयोमेक्टमी की प्रक्रिया (Robotic Myomectomy Procedure)
इस सर्जरी में डॉक्टर सबसे पहले नाभि के नीचे हल्का सा कट लगाते हैं और फिर रोबोट के माध्यम से सर्जरी की बची हुई प्रक्रिया को पूरा करते हैं।
सर्जन फाइब्रॉयड्स को निकालते वक्त उन्हें छोटे-छोटे टुकड़ों में काट सकता है या फिर बिना काटे निकाल सकता है। अगर बिना काटे निकालता है तो अधिक लंबा चीरा लगाने की जरूरत होती है।
हिस्टेरोस्कोपिक मायोमेक्टोमी (Hysteroscopic Myomectomy)
ये बहुत छोटे आकार के रसौली को काटने के लिए की जाती है| सर्जरी के इस प्रकार में किसी प्रकार का चीरा लगाने की आवश्यकता नहीं होती है। योनि मार्ग से सर्जिकल इंस्ट्रूमेंट गर्भाशय तक पहुचाएं जाते हैं और रसौली को काटकर निकाल लिया जाता है।
- महिला को सबसे पहले लोकल या जनरल एनेस्थेसिया दिया जाता है।
- अब सर्जन एक पतला औजार जिसमे कैमरा फिट होगा, आपके योनि में डालेंगे और उपकरण को गर्भाशय ग्रीवा से गर्भाशय के भीतर ले जाएंगे।
- अब आपके गर्भाशय के भीतर एक खास प्रकार का लिक्विड डाला जाएगा जो गर्भाशय की दीवालों को चौड़ा कर देगा जिससे सर्जरी करने में आसानी होगी।
- अब फाइब्रॉइड को सर्जन छोटे छोटे भागों में काट देंगे। यह फाइब्रॉइड लिक्विड के साथ बाहर आ जाएँगे|
- इस सर्जरी के बाद महिला एक दिन में हॉस्पिटल से छूट जाएगी।
मायोमेक्टोमी सर्जरी कराने के रिस्क - What are the Risks of Myomectomy in Hindi
- खून की कमी- गर्भाशय में रसौली की वजह से महिलाओं में असामान्य मेंस्ट्रुअल ब्लीडिंग पहले से ही रहती है। ऐसे में सर्जरी के बाद अगर बहुत अधिक खून बह जाता है तो महिला एनेमिया का शिकार हो सकती है।
- हिस्टेरोक्टोमी की जरूरत- मायोमेक्टोमी के बाद हिस्टेरोक्टोमी की जरुरत बहुत गंभीर केस में देखने को मिलती है। कुछ केसेस में मायोमेक्टोमी के बाद ब्लीडिंग रुकने का नाम ही नहीं लेती जिसके कारण पूरे गर्भाशय को हटाना पड़ता है।
- गर्भवस्था संबंधित समस्याएं- मायोमेक्टोमी की वजह से डिलीवरी के दौरान मुसीबत खड़ी हो सकती है। अगर गर्भाशय चोटिल है तो नार्मल डिलीवरी होने की संभावना खत्म हो जाती है। फिर डॉक्टर सिजीरियन (cesarean) डिलीवरी करा सकते हैं।
- दाग- सर्जरी के बाद चीरा का दाग हमेशा के लिए रह सकता है। रोबोटिक मायोमेक्टोमी के मुकाबले एब्डोमिनल मायोमेक्टोमी में दाग अधिक बड़ा होता है।
मायोमेक्टोमी के बाद क्या सावधानी रखें - Precautions After Myomectomy in Hindi
- डॉक्टर जितने दिन तक कहें, उतने दिन तक आराम करें।
- कोई भी भारी चीज न उठाएं। इसके अलावा किसी भी प्रकार की एक्सरसाइज तब तक न करें, जब तक के लिए डॉक्टर ने मना किया हो।
- खान-पान पर विशेष ध्यान दें। बहुत ठंडा या बहुत गर्म भोजन न करें। फाइबर युक्त और फलों का सेवन अधिक करें। डॉक्टर की बताई गई डाइट चार्ट फॉलो करें।
मायोमेक्टोमी का भारत में खर्च - Cost of Myomectomy in India in Hindi
मायोमेक्टोमी की लागत इस बात पर निर्भर करती है कि सर्जन किस प्रकार की मायोमेक्टोमी कर रहा है। रोबोटिक मयोमेक्टमी में अधिक खर्च आता है। इसके अलावा सर्जरी के दौरान इस्तेमाल लाए जाने वाले उपकरण, सर्जन का अनुभव आदि बातों पर भी सर्जरी का खर्च निर्भर करता है। भारत मे मायोमेक्टोमी की लागत एक लाख से लेकर दो या ढाई लाख तक हो सकती है
मायोमेक्टोमी के बाद रिकवर होने में कितना समय लगता है
यह इस बात पर निर्भर करता है कि, आपने किस प्रकार की मायोमेक्टोमी कराई है। एब्डोमिनल मायोमेक्टोमी कराने पर रिकवर होने में अधिक समय लगता है वहीं, रोबोटिक या लेप्रोस्कोपिक में कम समय लगता है। अनुभवी डॉक्टर से सर्जरी कराने में रिस्क कम रहता है औरआसानी से रिकवरी हो जाती है|
डिस्क्लेमर: यह ब्लॉग सामान्य जानकारी के लिए लिखा गया है| अगर आप किसी बीमारी से ग्रसित हैं तो कृपया डॉक्टर से परामर्श जरूर लें और डॉक्टर के सुझावों के आधार पर ही कोई निर्णय लें|