hernia Ayurveda treatment

हमारे शरीर के बहुत से अंदरूनी अंग बॉडी कैविटी (Body Cavity) में मौजूद होते हैं। बॉडी कैविटी (Body Cavity meaning in Hindi) का मतलब देहगुहा है। बॉडी कैविटी को हम खोखली जगह भी कह सकते हैं जिसमें शरीर के अंग होते हैं। कभी कभी इन कैविटीज की झिल्ली (Protecting Layer) फट जाती है जिससे अंग का कुछ भाग बाहर निकल आता है। इस विकार को ही हर्निया कहते है। अंदरूनी अंग जो झिल्ली के बाहर निकल आता है, वह साफ साफ बाहरी चमड़ी पर उभरा हुआ नजर आता है। 

हर्निया को कई प्रकार में बांटा गया है। वंक्षण हर्निया (Inguinal Hernia), जघनास्थिक हर्निया (Femoral Hernia), नाभि हर्निया (Umbilical Hernia), हाइटल हर्निया (Hiatal Hernia) आदि। वंक्षण हर्निया के केस हर साल भारत में 10 मिलियन से अधिक देखे जाते हैं। वंक्षण हर्निया में पेट की अंदरूनी परत प्रभावित होती है। सूजन की वजह से पेट की परत कमजोर होने लगती है और अंदर मौजूद मुलायम ऊतक (Tissue) असामान्य रूप से उभरने लगते हैं। पेट में सूजन होने पर तेजी से खांसना, झुकना और भारी वजन नहीं उठाना चाहिए वरना हर्निया हो सकता है।

आयुर्वेदिक डॉक्टर हर्निया का इलाज करने के लिए कुछ खास तरह के तेल लगाने और गर्म सिकाई करने की सलाह देते हैं। सबसे पहले आहार में बदलाव करने की जरूरत होती है। संतुलित आहार से आंत (Intestine) स्वस्थ रहती हैं। इसके अलावा, कई औषधियों के तेल को मिलाकर भी इलाज किया जाता है। साथ ही तनाव में कमी लाने की भी जरूरत होती है।

हर्निया के इलाज के लिए हींग और करंज जैसी जड़ी बूटियां इस्तेमाल की जाती हैं। जड़ी बूटियों के अलावा बस्ती कर्म, विरेचन और स्नेहन की प्रक्रिया बहुत फायदेमंद होती है। हर्निया का पूरी तरह से इलाज के लिए सर्जरी जरूरी है। सर्जरी के बाद सूजन कम नहीं होती है। इसलिए खान पान में विशेष ध्यान रखना चाहिए। डॉक्टर के दिए गए इंस्ट्रक्शन को फॉलो करना चाहिए।

आयुर्वेद में हर्निया क्या है — What Is Hernia In Ayurveda

आयुर्वेद आंतों (Intestines) के सूजन को ही हर्निया कहता है। गलत जीवनशैली अपनाने से ही आंतों में सूजन होती है। ठंडे पानी से नहाने पर, अधिक देर तक दौड़ना-कूदना, वजन उठाना, पेशाब न लगने के बावजूद पेशाब और मल त्याग करने पर हर्निया होता है। 

तीन तरह के दोष होते हैं। वात दोष, पित्त दोष और कफ दोष। वात दोष शरीर में बढ़ता है तो आंत कमजोर होने लगती है। यह Inguinal Hernia का कारण बनता है। पुरुषों में वंक्षण नलिका (Inguinal Hernia) के माध्यम से हर्निया अंडकोष (Testicle) तक पहुंच जाता है। वहीं महिलाओं में हर्निया वंक्षण लिगामेंट्स (Inguinal Ligaments) के नीचे ग्रंथियों के जमाव के रूप में रुक जाता है। 

हर्निया का ध्यान रखना बहुत जरूरी होता है, नहीं तो सूजन बढ़ने की शिकायत हो सकती है। हाइटल हर्निया नाभि से संबंधित है। ज्यादातर यह समस्या 50 से अधिक उम्र के लोगों में देखी जाती है। शरीर बहुत कमजोर होने पर यह कम उम्र के बच्चों में भी हो सकती है। ऐसे में तुरंत डॉक्टर से परामर्श करना चाहिए।

हर्निया के हर्बल इलाज में सबसे पहले आंतो को साफ किया जाता है और फिर पाचन तंत्र को सुधारा जाता है। आंतो से बैक्टीरिया और रोग पैदा करने वाले अन्य छोटे जीवों को हटाया जाता है। 

हर्निया का आयुर्वेदिक उपचार — Ayurvedic Treatment Of Hernia In Hindi

विरेचन

  • लिवर, पित्त की थैली (Gall Bladder) और छोटी आंत (Small Intestine) में पित्त के जमाव को निकालने के लिए यह कर्म फायदेमंद है। 
  • विरेचन का मतलब है शुद्धिकरण यानी सफाई करना। कफ दोष से होने वाले सूजन को ठीक करने के लिए शरीर का शुद्धिकरण किया जाता है। इस शुद्धिकरण में अम्लपर्णी, त्रिकटु और त्रिफला का इस्तेमाल किया जाता है। ‘त्रिफला’ आंवला, हरीतकी और विभीतकी के मिश्रण से बनता है। ‘त्रिकटु’ काली मिर्च, सूखी अदरक और पिप्पली से बनता है। 
  • वात दोष दूर करने के लिए नमकीन, गर्म और तैलीय गुण वाले विरेचक का इस्तेमाल किया जाता है जैसे अदरक और काला नमक।
  • विरेचन की क्रियाओं के बाद शरीर की पाचन क्षमता को बढ़ाया जाता है। इसलिए हल्का आहार दिया जाता है। फिर स्नेहन कर्म की क्रियाओं को करते हैं। इससे शरीर में नई ऊर्जा आती है और मांसपेशियां ताकतवर बनती हैं। 
  • विरेचन कर्म के बाद व्यक्ति हल्का महसूस करता है। दिमाग शांत हो जाता है और शरीर को आराम मिलता है। 

स्नेहन

  • औषधीय तेलों को गर्म कर इनसे शरीर की मालिश की जाती है। इस प्रक्रिया के बाद विषाक्त पदार्थ (Toxic Materials) शरीर से बाहर निकल जाते हैं और शरीर का शुद्धिकरण हो जाता है। 
  • वात दोष से होने वाली हर्निया का इलाज घी और तिल के तेल से किया जाता है। 
  • कफ दोष से होने वाली हर्निया का इलाज कैनोला तेल, सरसों का तेल या अलसी के तेल से किया जाता है। इस कर्म को लगातार एक हफ्ते तक किया जा सकता है।

पिंड स्वेद

  • हर्निया वाली जगह में तेल लगाया जाता है और चावल के गर्म पेस्ट से तैयार थैली से उस जगह की मालिश की जाती है।

इस चिकित्सा का सबसे अधिक इस्तेमाल मस्कुलर डिस्ट्रॉफी (Muscular Dystrophy) के इलाज के लिए किया जाता है। मस्कुलर डिस्ट्रॉफी होने पर शरीर की मांसपेशियां कमजोर और इनकी मोटाई कम होने लगती है। 

निरुह बस्ती कर्म

इसे आस्थापन बस्ती कहा जाता है। दूध के साथ कम मात्रा में तेल (तेल के साथ हर्बल मिश्रण को मिलाया जाता है) का उपयोग किया जाता है। अंडकोष के बढ़ जाने पर, वात विकार होने पर या फिर ऊतकों (Tissues) के कमजोर होने पर यह कर्म बहुत फायदा देता है। 

इस क्रिया के बाद आंतों की गंदगी साफ हो जाती है। पेट साफ हो जाता है और शरीर को नई उर्जा मिलती है। इस क्रिया से ऊतकों के विषैले गुण को खत्म किया जाता है और मल को पूरी तरह से शरीर से बाहर निकाला जाता है। यह पाचन तंत्र (Digestion) को मजबूत बनाता है और शरीर को स्वस्थ रखता है। 

इस क्रिया के बाद रोगी को स्वस्थ आहार लेना चाहिए। पौष्टिक और खनिज से भरे पदार्थ का सेवन शरीर में ऊर्जा के स्तर को बढ़ाता है। 

हर्निया के इलाज के लिए आयुर्वेदिक दवाइयां — Ayurvedic Medicines For Hernia Treatment In Hindi

त्रिफला और गुग्गुल

  • इस दवा में त्रिफला, गुग्गुल और त्रिकटु होते हैं। इसमें पेट साफ करने वाले रेचक पदार्थ (Purgative Products), कफ साफ करने वाले, आंतो को मजबूती देने वाले और शरीर के दर्द और ऐंठन को खत्म करने वाले गुण मौजूद होते हैं। 
  • ये गुण हर्निया के लक्षणों को दूर करते हैं। हर्निया की सर्जरी के बाद सूजन और दर्द की शिकायत होती है। त्रिफला गुग्गुल का सेवन कर दर्द कम किया जा सकता है।

गंधक रसायन 

गंधक रसायन में गंधक के अलावा नाग केसर, दालचीनी और हरीतकी की जरूरी मात्रा भी मौजूद होती है। इसके सेवन से ब्लड सेल्स को साफ किया जा सकता है। ये रक्त कोशिकाओं में मेटाबोलिज्म रेट कंट्रोल करती है। कोई दोष होने पर या ब्लड सेल्स के बहाव में असामान्यताएं होने पर इस दवा को देना चाहिए।

वात और पित्त दोष दूर करने के लिए गंधक रसायन प्रयोग किया जाता है। इससे पाचन क्रिया अच्छी होती है। आंतो में पड़ रहे तनाव को दूर करने के लिए यह दवा कारगर है। इस आयुर्वेदिक दवा का इस्तेमाल भी हर्निया की सर्जरी के बाद होने वाले दर्द को दूर करने के लिए किया जाता है।

हर्निया के इलाज के लिए आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियां — Ayurvedic Herbs For Hernia Treatment In Hindi

कुटज

संक्रमण और दस्त से छुटकारा पाने के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है। भूख न लगना या पाचन तंत्र में गड़बड़ी आदि सब विकारों का इलाज कुटज से किया जा सकता है। आंतों में मौजूद खतरनाक बैक्टीरिया और पैथोजन (बहुत कम आकार के पर्णी (Foliage) जो संक्रमण फैलाते हैं) को यह दवा खत्म कर देती है जिससे हर्निया में लाभ मिलता है। 

मंजिस्ठा

खून की गंदगी और अपशिष्ट पदार्थों को शरीर से बाहर निकालने के लिए इस जड़ी-बूटी का इस्तेमाल किया जाता है। उतकों के स्वास्थ्य को ठीक करने के लिए मंजिष्ठा अच्छी जड़ी-बूटी है। इसलिए हर्निया या अन्य सर्जरी के बाद इसका प्रयोग किया जाता है। मंजिष्ठा को काढ़ा, पेस्ट या पाउडर के रूप में ले सकते हैं। 

सनाय

हमारे शरीर में पाचन तंत्र (Digestive System) होता है। भोजन के पोषक तत्व शरीर में अवशोषित हो जाते और वेस्ट चीजें पाचन तंत्र के सभी अंगों से गुजरने के बाद शरीर के बाहर निकलती हैं। खाद्य पदार्थों को पाचन तंत्र के सभी अंगों तक पहुंचाने वाली मांशपेशियों को पेरिस्टलसिस (Peristalsis) कहते हैं। सनाय का सेवन करने से इन मांसपेशियों के सिकुड़ने की क्षमता बढ़ जाती है जिससे मलत्याग करने में परेशानी नहीं होती है। 

हर्निया के साथ कब्ज हो तो इस जड़ी-बूटी का सेवन करें। कभी कभी खाना पेट की परतों में जमा हो जाता है। ये परत पेट की मांसपेशियों में दबाव पैदा करते हैं जिनसे हर्निया का खतरा बढ़ जाता है। सनाय का सेवन पेट से अनचाही परतों को साफ करता है। 

हींग

फेरूल फोइटिडा (Ferula Foetida) पौधे से प्राप्त होने वाले सुगंधित पदार्थ से हींग बनाया जाता है। हींग में भूख बढ़ाने और पाचन को ठीक करने का गुण पाया जाता है। हींग खाने से अच्छी भूख लगती है और खाया हुआ भोजन अच्छी तरह से पच जाता है। हींग का सेवन करते रहने से कब्ज की भी शिकायत नहीं होती है। कब्जे के न रहने से हर्निया में लाभ मिलता है। हर्निया के खतरे को कम करने में हींग मददगार होता है क्योंकि यह दस्त लगाने का काम (Purgative) करता है।

वात विकार को दूर करने के लिए हींग बहुत अच्छी दवाई  है। पेट में दर्द, मांसपेशियों में दर्द, पेट में ऐंठन, पेट फूलने से भी यह राहत दिलाता हैं। हींग का सेवन सब्जी में डालकर किया जा सकता है। इसके अलावा, हींग को पानी में घोलकर भी पी सकते हैं। 

करंज

करंज आंत को उत्तेजित करने और पेट में गैस को कम करने में मददगार हो सकता है। लेकिन करंज का सेवन करने से पहले आयुर्वेदिक डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है क्योंकि करंज हानिकारक भी हो सकता है।

हर्निया में आयुर्वेदिक दवाइयां कितनी लाभदायक हैं — How Beneficial Is Ayurvedic Medicine In Hernia

हर्निया में ज्यादा आयुर्वेदिक दवाइयां फायदेमंद हैं या नहीं? इसका पता लगाने के लिए एक शोध किया गया। यह शोध हर्निया के 30 मरीजों के ऊपर किया गया। कुछ मरीजों को आयुर्वेदिक दवाएं, गंधक रसायन और त्रिफला गुग्गुल दी गई। फिर स्टडी में पाया गया कि आयुर्वेदिक दवाइयां असरदार हैं। जिन रोगियों ने आयुर्वेदिक दवाओं का सेवन किया था उन्हें दर्द में राहत थी। लेकिन दवाइयां लेने के लिए आयुर्वेदिक चिकित्सक से अवश्य पूछना चाहिए।

आयुर्वेदिक औषधियों का इस्तेमाल करते समय बरतें ये सावधानियां — Precautions While Using Ayurvedic Medicines For Hernia In Hindi 

आयुर्वेदिक औषधियों का कोई नुकसान नहीं होता है। लेकिन इनका सेवन करते समय कुछ सावधानियां बरतनी चाहिए। कुछ खास मामलों में जड़ी-बूटियों से परेशानी हो सकती है। हर रोगी की स्थिति अलग होती है। ऐसे में किसी को फायदा पहुंचाने वाली दवा दूसरे को नुकसान पहुंचा सकती है।

  • आसन, योग और ध्यान करने वाले रोगी हींग का सेवन न करें या डॉक्टर से सलाह लेने के बाद करें। 
  • मंजिस्ठा के सेवन से वात विकार बढ़ने का खतरा रहता है। अधिक ठंड लग रही हो तो मंजिस्ठा का सेवन न करें।
  • जो व्यक्ति बहुत कमजोर है या जिसकी पाचन शक्ति मजबूत है उसे स्नेहन कर्म नहीं कराना चाहिए। मोटापे से ग्रसित व्यक्ति या जिसे दस्त हो उसे भी यह कर्म नहीं कराना चाहिए।
  • शरीर में कमजोरी महसूस होती हो, पाचन कमजोर हो या बुखार हो तो विरेचन कर्म नहीं कराना चाहिए। 
  • दस्त, डायबिटीज और एनल मार्ग से ब्लीडिंग होने पर निरीह बस्ती कर्म नहीं किया जाना चाहिए। बच्चों के लिए भी यह कर्म नुकसानदायक हो सकता है।

हर्निया का सर्जरी  — Surgery Of Hernia In Hindi

हर्निया का इलाज सर्जरी से भी किया जाता है। सर्जरी दो तरह से किया जाता है। पहला ओपन सर्जरी और दूसरा लेप्रोस्कोपिक (Laparoscopic surgery in Hindi) सर्जरी। ओपन सर्जरी में डॉक्टर एक बड़ा कट लगाते हैं और अंगों को उनकी सही जगह पर रखकर उस क्षेत्र को टांके की मदद से बंद कर देते हैं। जबकि लेप्रोस्कोपिक सर्जरी में डॉक्टर बहुत छोटा कट लगते हैं। जिससे रोगी बहुत कम समय में ठीक हो जाता है और इलाज के दौरान रोगी को किसी भी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता है।

अगर आप हर्निया की लेप्रोस्कोपिक सर्जरी कराने की सोच रहे हैं तो Pristyn Care आपके लिए एक बढ़िया विकल्प हो सकता है।

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