urine infection in hindi

नेहा को बार बार यूरिन की इच्छा होने लगी। कुछ दिनों तक तो उसने इस पर ध्यान नहीं दिया। लेकिन एक दिन यूरिन में जलन भी महसूस होने लगी। वह डॉक्टर के पास गई। डॉक्टर ने उसे कुछ जांच कराने के लिए कहा। जिसके नतीजे आने के बाद डॉक्टर ने उसे यूरिन इंफेक्शन यानी यूटीआई बीमारी से पीड़ित बताया। कई लोग हैं जो जल्दी-जल्दी पेशाब आने को सामान्य समझते हैं। लेकिन जरुरी नहीं कि यह हमेशा नॉर्मल ही हो। 

यूरिन इंफेक्शन (पेशाब में संक्रमण) को यूटीआई भी कहा जाता है। यूटीआई यानी यूरिनेरी ट्रेक्ट इंफेक्शन (Urinary Tract Infection)। यूरिन इंफेक्शन यूरिन सिस्टम यानी किडनी, मूत्रवाहिनी (Ureters), मूत्राशय (Bladder), यूरिन मार्ग (Urethra) में से किसी में भी हो सकता है। महिलाओं में पुरुषों से ज्यादा यूटीआई होने की संभावना होती हैं। यूटीआई बैक्टीरिया के कारण होता है, लेकिन कुछ मामलों में यह वायरस और फंगस के कारण भी होता है। यूटीआई वैसे तो कोई बड़ी बीमारी नहीं, लेकिन महिलाएं यूरिन में जलन होने पर डॉक्टर को दिखाने में लापरवाही बरतती है। हाइजीन का ध्यान न रखना, खुद के इस्तेमाल किये हुए पैड्स धो कर दोबारा इस्तेमाल करना, अस्वच्छ जगह पर यूरिन करने से इंफेक्शन की संभावना बढ़ जाती है। यूरिन इंफेक्शन होना आम बात है, चालीस प्रतिशत महिला और बारह प्रतिशत पुरुष को यूटीआई की परेशानी से जूझना पड़ता है। यूटीआई ब्लेडर तक हुआ है तो ज्यादा दिक्कत नहीं आती है। लेकिन किडनी तक फैलने के बाद तकलीफ बढ़ जाती है। 

यूरिन इंफेक्शन (यूटीआई) के प्रकार — Types of Urine Infection or UTI in Hindi

ब्लैडर में इंफेक्शन (Bladder Infection) :- इस तरह के संक्रमण को सिस्टाइटिस भी कहते हैं। यह ब्लैडर में बैक्टीरियल इंफेक्शन होने से होता हैं। जिसकी इम्यूनिटी कमजोर होती है, उन्हें यीस्ट भी ब्लैडर इंफेक्शन के कारण होता है। 

यूरिन मार्ग इंफेक्शन (Urethra Infection) :- इसे यूरेथ्राइटिस भी कहते है। यह भी बैक्टीरिया की वजह से होता है। इसमें यूरिन मार्ग में सूजन हो जाता है जिसके कारण पेशाब करते समय दर्द होता है। 

किडनी इंफेक्शन (Kidney Infection) :- इस स्टेज में बीमारी गंभीर रूप ले लेती है और अस्पताल में भर्ती होने तक की नौबत तक आ जाती है। बुखार, पेशाब में खून, पेल्विस में दर्द इसके आम लक्षण हैं। अगर बैक्टीरिया किडनी में चले जाएं तो जान का खतरा भी हो सकता है। इस स्थिति को युरोसेप्सिस भी कहते है, इसमें ब्लड प्रेशर कम होने के बाद शॉक (Shock) और मौत तक हो जाती है।         

यूरिन इंफेक्शन (यूटीआई) के लक्षण — Symptoms of UTI or Urine Infection in Hindi

यूटीआई में हमेशा लक्षण दिखाई दें, ये जरूरी नहीं। सामान्य तौर पर नीचे दिए गए लक्षण दिखाई देते हैं :-

  • ठंड लगना।
  • बुखार आना।
  • जी मिचलाना।
  • उल्टी होना।
  • यूरिन में तेज गंध आना।
  • महिलाओं में पैल्विक दर्द।
  • यूरिन करने की इमरजेंसी होना।
  • पुरुषों में मलाशय (Rectum) में दर्द।
  • कम मात्रा में जल्दी-जल्दी पेशाब आना
  • पेशाब में खून आना (Blooding in Urine)
  • यूरिन का रंग कोको-कोला या चाय की तरह दिखना।
  • पेशाब के साथ जलन (Burning With Urination) होना
  • पीठ में ऊपर और साइड की जगह में दर्द और कोमलता होना।

यूरिन इंफेक्शन (यूटीआई) के कारण — Causes of Urine Infection or UTI in Hindi

यूरिनेरी सिस्टम का काम यूरिन इंफेक्शन से बचाना है। लेकिन कभी कभी ऐसा करने में ये सिस्टम नाकामयाब हो जाता है। यूरिन इंफेक्शन में बैक्टीरिया Urethra के जरिए यूरिन मार्ग (Urinary Tract) में प्रवेश कर ब्लैडर में अपनी संख्या बढ़ा लेते हैं। 

इसके होने के कारण निम्न हैं:

  • मेनोपॉज से पीड़ित होने पर ।
  • अस्वच्छ (Unclean) रहने के कारण।
  • ब्लैडर को पूरी तरह से खाली न करने पर।
  • डायबिटीज की वजह से भी यूरिन इंफेक्शन हो सकता है।
  • गर्भनिरोधक (Birth Control) चीजों का इस्तेमाल करना।
  • सर्जरी या लंबे समय तक बिस्तर पर आराम करने से भी यूरिन इंफेक्शन हो सकता है।
  • कमजोर इम्यून सिस्टम और टैम्पोन का इस्तेमाल करने से यूटीआई होने का डर रहता है।
  • ब्लैडर में इंफेक्शन (यूटीआई का एक प्रकार) एशररीशिया कोली नामक बैक्टीरिया से होता है जो पाचन तंत्र (Gastrointestinal Tract) में पाया जाता है। इंटरकोर्स की वजह से भी यह इंफेक्शन हो जाता है। लगभग सभी महिलाओं को उनकी एनोटॉमी (शरीर रचना विज्ञान) के कारण यह इंफेक्शन होने का रिस्क होता हैं। 
  • Urethra में यूटीआई:-  Gastrointestinal Bacteria एनस से लेकर Urethra तक फैल जाता है। चूंकि महिला शरीर में Urethra योनि के बिल्कुल पास होता है, तब यौन संचारित संक्रमण (Sexually Transmitted Infections) जैसे क्लैमाइडिया, माइकोप्लाज्मा, हर्पीस, गोनोरिया होने का ज्यादा डर होता है।

यूरिन इंफेक्शन (यूटीआई) से कैसे बचें — How to Prevent Urine Infection or UTI in Hindi 

  • सेक्स के बाद पेशाब जरूर करें।
  • प्राइवेट पार्ट्स को साफ रखें।
  • ढीले और कॉटन के अंदरूनी वस्त्र (Underwear) पहनें।
  • टैम्पोन के बजाय पैड्स और मेंस्ट्रुअल कप का इस्तेमाल करें।
  • प्राइवेट पार्ट्स में किसी तरह के खुशबू वाले प्रोडक्ट का इस्तेमाल न करें।
  • संतुलित मात्रा में पानी पीने और यूरिन करने से यूटीआई से बचा जा सकता है।
  • पेशाब और सौच के बाद योनि से लेकर एनस तक का हिस्सा साफ जरूर करें।
  • Spermicides यानी बर्थ कंट्रोल के लिए शुक्राणु नाशक दवाई का इस्तेमाल न करें।
  • शराब और कैफीन कम मात्रा में लें, इससे ब्लैडर में होने वाले इंफेक्शन की संभावना बढ़ जाती है। 

यूटीआई के जोखिम Risk Factors of Urine Infection or UTI in Hindi

  • कमजोर इम्यूनिटी, डायबिटीज के कारण भी यूटीआई रोग हो सकता है।
  • किसी तरह की यूरिनरी सर्जरी भी यूटीआई होने के जोखिम को बढ़ा सकती है।
  • जो खुद से यूरिन नहीं कर सकते हैं और इस परेशानी के लिए कैथेटर का इस्तेमाल करते हैं, उन्हें यूटीआई होने का खतरा सबसे ज्यादा होता हैं।
  • किडनी की पथरी या प्रोस्टेट के बढ़ने के कारण भी यूटीआई होने का खतरा रहता है। इन बीमारियों की वजह से यूरिन ब्लैडर में फंस जाता है।
  • जो बच्चे यूरिनरी ट्रैक्ट की असामान्यताओं के साथ जन्मे हैं उन्हें यूटीआई होने का खतरा ज्यादा होता हैं। इसमें बच्चे के शरीर से सामान्य तरीके से यूरिन नहीं निकल पाता है और कभी कभी यूरिन मार्ग में वापिस भी चला जाता है।

यूरिन इंफेक्शन (यूटीआई) से जुड़ी जटिलताएं — Complications of Urine Infection or UTI in Hindi

  • प्रेग्नेंसी में यूटीआई होने पर कम वजन वाला बच्चा और प्रीमेच्योर बेबी होने की संभावना होती हैं।
  • किसी भी महिला को दोबारा यूटीआई हो सकता हैं। इसलिए समय समय पर जांच और इलाज करवाते रहना चाहिए।
  • यूटीआई का ठीक से इलाज न कराने पर सेप्सिस होने की संभावना बहुत ज्यादा होती है। इससे जान का खतरा भी रहता है।  
  • जिन्होंने यूरिन इंफेक्शन होने पर इलाज पूरी तरह से नहीं करवाया हैं, उन्हें किडनी में इंफेक्शन जैसी दूसरी बीमारियां होने की संभावना बढ़ जाती हैं। पूरा इलाज करवाने पर दोबारा यूटीआई होने और दूसरी तरह की परेशानियां कम आती हैं।

यूरिन इंफेक्शन (यूटीआई) की जांच — Diagnosis of Urine Infection or UTI in Hindi

डॉक्टर संदेह होने पर सबसे पहले लक्षण पूछते हैं। इसके आधार पर वह यूरिन सैंपल लेते हैं, जिसकी जांच की जाती है। 

  • यूरिन सैंपल में सफेद और लाल रक्त कोशिका (White & Red Blood Cells) और बैक्टीरिया की जांच की जाती हैं। सैंपल देने के लिए सबसे पहले प्राइवेट पार्ट्स को एक बार साफ कर लें और उसके बाद यूरिन का सैंपल दें।
  • अगर आपको तुरंत पेशाब आने की परेशानी हो रही हैं तो डॉक्टर यूरिनरी ट्रेक्ट की असामान्यता जांचने के लिए अल्ट्रासाउंड सीटी स्कैन या एमआरआई कर सकते हैं। 
  • अगर इससे पहले भी यूटीआई की समस्या हुई है तो डॉक्टर सिस्टोस्कोपी (Cystoscopy) करवा सकते हैं। इसमें एक लंबी और पतली ट्यूब का इस्तेमाल कर Urethra और Bladder के अंदर देखा जाता है।

यूरिन इंफेक्शन (यूटीआई) का इलाज — Treatment of Urine Infection or UTI in Hindi

डॉक्टर यूरिन इंफेक्शन का इलाज करने के लिए सबसे पहले इसके कारण का पता लगाते हैं। अगर इसका कारण बैक्टीरिया है तो कुछ दिन एंटीबायोटिक्स लेने की सलाह दी जाती है। इसमें मरीज को ज्यादा से ज्यादा तरल पदार्थ (लिक्विड) लेने की सलाह दी जाती है ताकि बैक्टीरिया यूरिन के रास्ते शरीर से बाहर निकल जाएं। अगर दर्द हो रहा है तो दर्द निवारक दवा और पीठ-पेट पर गर्म पैड से सिंकाई करने को कहा जाता है।

जो प्राइवेट पार्ट्स की साफ-सफाई रखते हैं उन्हें यूटीआई का खतरा कम रहता हैं। अगर यूटीआई होता भी है तो दवाई के जरिए जल्दी ठीक हो जाता है। इस तरह के केस में 2 से 3 दिन में इलाज पूरा हो जाता है। जबकि शारीरिक रूप से कमजोर मरीज के इलाज में 7 से 14 दिन लगते हैं। यूटीआई अगर वायरस या फंगस के कारण हुआ हैं तो एंटीवायरल या एंटीफंगल दवाई दी जाती हैं। यूटीआई के इलाज के लिए लापरवाही बरतने पर किडनी में इंफेक्शन भी हो सकता है। अस्पताल में भर्ती होने की नौबत भी आ सकती है। इसलिए अगर आप खुद में इसके किसी भी लक्षण को देखते हैं तो तुरत डॉक्टर से मिलकर इसकी जांच और इलाज करवाएं।  

और पढ़े:

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *