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मोतियाबिंद ऑपरेशन — प्रक्रिया और खर्च 

आंखें शरीर का एक बहुत ही खास अंग हैं। जहां एक तरफ इनके ठीक होने से जिंदगी बहुत आसान और खूबसूरत होती हैं, वहीं दूसरी तरफ इनके खराब होने के कारण जीवन कष्टदायक हो जाता है। चोट लगने एवं उम्र बढ़ने के कारण आंखों में कई तरह की बीमारियां होती हैं, मोतियाबिंद भी उन्ही में से एक है।

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मोतियाबिंद क्या है?

मोतियाबिंद आंखों में होने वाली एक सामान्य बीमारी हैं। इससे पीड़ित होने पर आंख में धुंधलापन छा जाता है, जिसके कारण आपको चीजें साफ दिखाई नहीं देती हैं। आमतौर पर मोतियाबिंद 50 साल की उम्र के लोगों में देखने को मिलता हैं। लेकिन आंखों पर चोट लगने या या किसी दूसरे कारणों से यह किसी भी उम्र के इंसान को हो सकता है।

मोतियाबिंद पूरी दुनिया में अंधेपन का सबसे बड़ा कारण है। मोतियाबिंद के बाद दूसरा कारण काला मोतियाबिंद यानी ग्लूकोमा है। कई बार मोतियाबिंद के बारे में मरीज को सही जानकारी नहीं होने के कारण, उन्हें इस बात का पता भी नहीं चलता है कि वे इस बीमारी से ग्रसित हैं।

लोगों के बीच मोतियाबिंद की सही जानकारी और जागरूकता इस बीमारी को ख़त्म करने में मददगार साबित हो सकते हैं।

इसे पढ़ें: मोतियाबिंद होने पर क्या करना चाहिए? 

मोतियाबिंद को अंग्रेजी में कैटरैक्ट (Cataract) कहा जाता है। मोतियाबिंद की समस्या प्रोटीन क्लंप के कारण पैदा होती है। प्रोटीन क्लंप बनने के कारण लेंस रौशनी को रेटिना तक नहीं भेज पाता है, जिसके कारण आपको चीजें साफ-साफ देखने में परेशानी होती है।

आंखों में आने वाली रौशनी को रेटिना सिग्नल में बदलकर ऑप्टिव नर्व तक भेजता है, जो आगे उसे दिमाग तक ले जाता है और फिर आप चीजों को साफ तौर पर देख पाते हैं। मोतियाबिंद बहुत ही धीमी गति से विकसित होता है। यह बीमारी दोनों आंखों को प्रभावित कर सकती है। लेकिन यह आवश्यक नहीं है की दोनों आंखों में एक जैसा ही प्रभाव छोड़े। आमतौर पर यह दोनों आंखों को अलग-अलग तरह से प्रभावित करता है।

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मोतियाबिंद के ऑपरेशन की प्रक्रिया

मोतियाबिंद की सर्जरी मुख्य तौर पर दो तरह से की जाती है। इसमें पहला मोतियाबिंद की पारंपरिक सर्जरी और दूसरा लेजर लेजर सर्जरी है। इन दोनों ही सर्जरी के बाद रिजल्ट लगभग एक जैसा ही आता है। दोनों ही सर्जिकल प्रक्रियाओं के बाद धुंधली और खराब लेंस को बाहर निकालकर, उसकी जगह पर एक कृत्रिम लेंस को लगा दिया जाता है।

इसे पढ़ें: दिल्ली में मोतियाबिंद का लेजर इलाज

इन दोनों सर्जिकल प्रक्रियाओं के बीच खास फर्क यही है कि इनके दौरान अलग-अलग उपकरणों का इस्तेमाल किया जाता है। आपके मोतियाबिंद की सर्जरी के दौरान डॉक्टर आपकी आंख में चीरा लगाने के लिए ब्लेड या लेजर का इस्तेमाल कर सकते हैं।

मोतियाबिंद की पारंपरिक सर्जरी को फेकोएमल्सिफिकेशन (Phacoemulsification) के नाम से भी जाना जाता है। इस सर्जिकल प्रक्रिया के दौरान सर्जन ब्लेड की मदद से कॉर्निया में एक छोटा सा कट यानी चीरा लगाते हैं, ताकि दूसरे उपकरण उस लेंस के संपर्क में जा सकें जो प्यूपिल के पीछे है।

उसके बाद, सर्जन लेंस कैप्सूल में एक गोलाकार कट लगाते हैं और फिर एक कलम के आकार का उपकरण उसके अंदर डालते हैं, जो साउंड वेव्स की मदद खराब लेंस के छोटे-छोटे टुकड़े कर देता है। फिर डॉक्टर सक्शन मशीन से उन टुकड़ों को आंख से बाहर निकाल देते हैं।

धुंधला लेंस आंख से बाहर निकालने के बाद, सर्जन कृत्रिम लेंस जिसे इंट्राऑकुलर लेंस के नाम से भी जाना जाता है, को लगा देते हैं। पारंपरिक सर्जरी के दौरान लगाया गया कट बहुत ही छोटा होता है। इसलिए सर्जन वहां खुद ही ठीक होने वाली लिक्विड (Self-sealing) लगा देते हैं। इस सर्जरी के बाद आपको टांकों की जरूरत नहीं पड़ती है।

मोतियाबिंद की लेजर सर्जरी के दौरान सर्जन पहले कॉर्निया में और उसके बाद लेंस में एक छोटा सा कट लगाते हैं। उसके बाद, एक मशीन को डालकर खराब लेंस के छोटे-छोटे टुकड़े करने के बाद उसे बाहर निकाल कर उसकी जगह पर एक इंट्राऑकुलर लेंस को सेट कर देते हैं। मोतियाबिंद की लेजर सर्जरी के दौरान कट लगाने के लिए सर्जन ब्लेड की जगह लेजर का इस्तेमाल करते हैं।

साउंड वेव्स की जगह लेजर की मदद से भी खराब लेंस के छोटे-छोटे टुकड़े किए जा सकते हैं। पारंपरिक सर्जरी के कट की तरह ही लेजर सर्जरी के दौरान लगाए गए कट को भी टांकों की जरूरत नहीं पड़ती है। इसे भी बंद करने के लिए खुद से ही ठीक होने वाली लिक्विड का इस्तेमाल किया जाता है। (इसे भी पढ़ें: मात्र 1 दिन में मोतियाबिंद का परमानेंट इलाज)

आमतौर पर लेजर सर्जरी का इस्तेमाल करने की सलाह बहुत ही खास स्थितियों में दी जाती है। नहीं तो ज्यादातर पारंपरिक सर्जरी का ही चुनाव एवं इस्तेमाल किया जाता है। अगर आपको एस्टिग्मेटिज्म है तो आपके नेत्र रोग विशेषज्ञ लेजर सर्जरी द्वारा मोतियाबिंद का ऑपरेशन करने की सलाह देते हैं। क्योंकि मोतियाबिंद का इलाज करते समय आपके एस्टीग्मटिज को भी ठीक किया जा सकता है।

इसे पढ़ें:- मोतियाबिंद ऑपरेशन के बाद अच्छे लेंस का चयन कैसे करें?

साथ ही, अगर आप प्रीमियम इंट्राऑकुलर लेंस जैसे की मल्टीफोकल लेंस का चुनाव करते हैं तो आपको लेजर सर्जरी के साथ साथ अपग्रेडेड लेंस का प्रस्ताव भी दिया जा सकता है। ऐसा इसलिए नहीं है क्योंकि प्रीमियम इंट्राऑकुलर लेंस बहुत महंगे होते हैं, बल्कि इसलिए क्योंकि लेजर सर्जरी के दौरान सर्जन को इस प्रकार के लेन्सेस को परफेक्ट तरीके से लगाने में मदद मिलती है।

साथ ही साथ यह आपकी आंख को सही तरह से रौशनी को रिफ्रेक्ट करने और पास तथा दूर की चीजों को बहुत ही आसानी से साफ-साफ देखने में भी मदद करता है।

मोतियाबिंद के इलाज के दोनों ही तरीके सही और सुरक्षित हैं। लेकिन आमतौर पर इलाज के माध्यम का चुनाव करने से पहले डॉक्टर आपकी बीमारी की स्थिति की जांच करते हैं। उसके बाद, पारंपरिक या लेजर सर्जरी का चुनाव करते हैं। अगर आपको मोतियाबिंद की शिकायत है तो आप सबसे पहले एक नेत्र रोग विशेषज्ञ से मिलें और अपने आंख की जांच कराएं।

इसे पढ़ें: मोतियाबिंद का ऑपरेशन कब करवाना चाहिए?

जांच करने के बाद डॉक्टर इस बात का फैसला करने में आपकी मदद कर सकते हैं की आपके लिए कौन सी सर्जरी और लेंस बेस्ट हैं। आपके ऑपरेशन का खर्च काफी हद तक इलाज की प्रकिया और लेंस के प्रकार पर निर्भर करता है।

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मोतियाबिंद के ऑपरेशन का खर्च 

मोतियाबिंद के ऑपरेशन में खर्च काफी चीजों पर निर्भर करता है। आमतौर पर मोतियाबिंद लेंस की कीमत 1000-25000 तक होती है। लेकिन लेंस की कीमत के अलावा भी ढेरों ऐसे कारक हैं जो मोतियाबिंद ऑपरेशन का खर्च तय करने में एक बड़ी भूमिका निभाते हैं। इसमें सर्जरी का प्रकार, नेत्र सर्जन का अनुभव, हॉस्पिटल या क्लिनिक की विश्वसनीयता, हॉस्पिटलाइजेशन और सर्जरी के बाद फॉलो-अप्स मीटिंग आदि शामिल हैं।

आप अपने जीवनशैली के आधार पर लेंस का चुनाव कर सकते हैं। अगर आपको बाहर रहना और ट्रेवल करना पसंद है तो आप अपनी नजदीकी दृष्टि के साथ समझौता करते हुए दूर दृष्टि वाले लेंस का चुनाव कर सकते हैं। मोतियाबिंद के बाद इस्तेमाल किए जाने वाले हर लेंस की कीमत अलग-अलग होती है। लेंस की कीमत मोतियाबिंद के खर्च को बड़े पैमाने पर प्रभावित कर सकती है।

पारंपरिक तरीके से मोतियाबिंद का ऑपरेशन कराने पर आपका टोटल खर्च लगभग 40000 रुपए तक आ सकता है। लेकिन वहीं अगर आप मॉडर्न और एडवांस मेडिकल टेक्नोलॉजी और अनुभवी नेत्र सर्जन का चयन करते हैं तो मोतियाबिंद ऑपरेशन का खर्च लगभग 80000 रुपए से लेकर 1 लाख 25 हजार रुपए तक आ सकता है।

इसे पढ़ें:- लेसिक सर्जरी में कितना खर्च आता है?

फेम्टोसेकेंड लेजर सर्जरी को मोतियाबिंद का बेस्ट इलाज माना जाता है। यह एक मॉडर्न और एडवांस सर्जिकल प्रक्रिया है जिससे किसी भी प्रकार के मोतियाबिंद को कम से कम समय में बहुत ही आसानी से ठीक किया जा सकता है। अगर आप अपने शहर या उसके आस-पास के सबसे विश्वसनीय और टॉप रेटेड क्लिनिक में मोतियाबिंद का परमानेंट इलाज पाना चाहते हैं तो प्रिस्टीन केयर से संपर्क कर सकते हैं।

इसे पढ़ें: मोतियाबिंद की लेजर सर्जरी के क्या फायदे हैं?

हमारे क्लिनिक में एडवांस फेम्टोसेकेंड कैटरैक्ट सर्जरी से मोतियाबिंद का परमानेंट इलाज किया जाता है। हमारे क्लिनिक में मोतियाबिंद की सर्जरी को एक अनुभवी, कुशल और विश्वसनीय नेत्र रोग विशेषज्ञ के द्वारा पूरा किया जाता है। ये डॉक्टर अब तक मोतियाबिंद की अनेकों सफल सर्जरी कर चुके हैं। ये सर्जन अपने सालों के अनुभव और मॉडर्न मेडिकल टेक्नोलॉजी की मदद से आपकी बीमारी को बहुत ही आसानी से ठीक कर सकते हैं।

निष्कर्ष

मोतियाबिंद दृष्टि को प्रभावित करने वाली एक सामान्य बीमारी है जिसका समय पर सही इलाज आवश्यक है। इसके लक्षणों को नजरअंदाज करने या लंबे समय तक इसका उचित इलाज नहीं कराने पर यह अंधेपन का कारण बन सकता है। इसलिए यह आवश्यक है कि आप खुद में इसके लक्षणों को देखने या इससे पीड़ित होने पर जल्द से जल्द एक नेत्र रोग विशेषज्ञ से परामर्श करें।

मोतियाबिंद की सर्जरी खर्च काफी चीजों पर निर्भर करता है। अगर आप इसकी सर्जरी के अनुमानित खर्च के बारे में जानना चाहते हैं तो खुद के द्वारा चयनित डॉक्टर या क्लिनिक से इस बारे में बात कर सकते हैं। मोतियाबिंद की सर्जरी का अनुजनित खर्च मालूम होने के बाद आप खुद की सर्जरी को अच्छी तरह से प्लान कर सकते हैं।

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डिस्क्लेमर: यह ब्लॉग सामान्य जानकारी के लिए लिखा गया है| अगर आप किसी बीमारी से ग्रसित हैं तो कृपया डॉक्टर से परामर्श जरूर लें और डॉक्टर के सुझावों के आधार पर ही कोई निर्णय लें|

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