Laparoscopy in Hindi

लैपरोस्कोपिक एक सर्जिकल डायगोनोस्टिक प्रक्रिया (Surgical Diagnostic Procedure) है जिसके जरिए दिल (Heart),गाल ब्लैडर (Gallbladder), फेफड़े (Lungs), किडनी (Kidney), अपेंडिक्स (Appendix) से लेकर हर्निया (Hernia) के साथ साथ छोटी और बड़ी आंत (Small and Big Intestine) का इलाज किया जाता है। कैंसर या ट्यूमर (Cancer or Tumor) का पता लगाने और ये कितने फैले (Spread) हुए हैं आदि बातों का पता लगाने के लिए लैपरोस्कोपिक का इस्तेमाल एक बायोप्सी (Biopsy) के रूप में भी किया जाता है। साथ ही साथ महिला के प्रेग्नेंट (Pregnant) ना होने के कारणों (Causes) का भी पता लगया जाता है कि आखिर वो कौन सी इन्हेरेंट परेशानी (Inherent Problem) है जो प्रेग्नेंसी के बीच बाधा (Hindrance) बनकर सामने आ रही है। 

अपने अनेकों खासियत (USP) की वजह से ये बस एक इलाज की पद्धति (Treatment Method) ही नहीं बल्कि कितनी बीमारियों की जांच की प्रक्रिया (Diagnosis Process) भी है। लैपरोस्कोपी मरीजों के इलाज का सबसे बेहतर माध्यम (Method) माना जाता है क्योंकि इसका प्रयोग कर इलाज करते समय मरीज के शरीर में बहुत ही छोटा कट (Cut) लगाया जाता है। जो बहुत ही कम समय में ठीक हो जाता है और साथ इंफेक्शन (Infection) होने का रिस्क (Risk) भी कम होता है और सर्जरी के बाद मरीज की रिकवरी बहुत तेज (Quick Recovery) होती है। इन सभी सुविधाओं के बावजूद भी लैपरोस्कोपिक से संबंधित सर्जरी की कीमत इतनी कम होती है कि कोई भी इंसान इसे आसानी से Afford कर सकता है। 

लैपरोस्कोपिक सर्जरी कैसे की जाती है (How Is Laparoscopic Surgery Performed in Hindi)

लैपरोस्कोपी सर्जरी कराने से पहले मरीज को डॉक्टर से मिलना होता है और उनसे बात करने के बाद इस बात को Confirm करना होता हैकि वह इस इलाज के लिए पूरी तरह से तैयार (Ready) हैं या नहीं। साथ ही साथ मरीज इस बात का भी पता लगाते हैं कि यह सर्जरी कितनी सेफ और सफल (Safe and Successful) है। 

इन बातों का पता लगने के बाद डॉक्टर मरीज को इस बात की जानकारी देते हैं कि लैपरोस्कोपी सर्जरी से पहले उन्हें क्या खाना है और क्या नहीं खाना है। साथ ही साथ वे मरीज से उनके एलर्जी (Allergy) और दूसरी चल रही इलाज (Treatment) के बारे में पूछते हैं ताकि इस बात को पूरी तरह से confirm कर लिया जाए कि सर्जरी के दौरान या फिर इसके बाद मरीज को किसी भी तरह की दिक्कत या परेशानी (Problem or Complication) ना आए। 

सर्जरी को परफॉर्म करने से ठीक पहले मरीज को अपना चश्मा, कॉन्टैक्ट लेंस और शरीर से सोने-चांदी या दूसरे गहनों को उतारने के लिए कहा जाता है। जरा सी गलती इस सर्जरी के निगेटिव रिजल्ट (Negative Result) का कारण बन सकती है। यह सर्जरी बहुत ही प्रभावी (Effective) होता है, इसलिए इसे सक्सेसफुली (Successfully) करने के लिए डॉक्टर से लेकर मरीज तक हर किसी को बहुत ही सावधान (Alert) रहने की जरूरत होती है।  

जब मरीज पूरी तरह से सर्जरी के लिए तैयार हो जाता है तब उसे जनरल एनेस्थीसिया (General Anaesthesia) दिया जाता है फिर इसके बाद सर्जन (Surgeon) सर्जरी (Surgery) की जाने वाली जगह को साफ (Clean) करता है और साथ उस जगह के आसपास की बाल को हटाता भी है क्योंकि ऐसा ना करने पर मरीज को इंफेक्शन (Infection) होने के चांसेस (Chances) रहते हैं। 

जब सभी चीजें कर दी जाती हैं तब सर्जन मरीज के शरीर के जिस हिस्से की सर्जरी करनी होती है वहां पर एक छोटा सा कट (Cut) लगाता है। कई बार एक से ज्यादा भी चीरे लगते हैं और यह पूरी तरह से मरीज की बीमारी और उस बीमारी की कंडीशन (Condition) पर निर्भर (Depend) करता है।   

मरीज के पेट को फुलाकर उसे सर्जरी के लिए तैयार करने के लिए कार्बन डाइऑक्साइड (Carbon Dioxide) पंप किया जाता है और ऐसा करने के लिए पेट पर लगे कट के जरिए एक बहुत ही पतली और हलकी ट्यूब (Tube) को मरीज के पेट में डाला जाता है जिसे लैपोरोस्कोप (Laparoscope) के नाम से जाना जाता है।  

लैपरोस्कोपिक का इस्तेमाल टिस्यूज (Tissues) के नमूने (Samples) को लेने के लिए किया जाता है। और साथ ही लिक्वीड (Liquid) से भरे सिस्ट (Cyst) को बाहर निकालने, किसी खास अंग (Special Parts) में हुए डैमेज (Damage) को ठीक करने या दूसरी परेशानी को ठीक करने के लिए किया जाता है। 

खैर सर्जरी का उद्देश्य (Purpose) जो भी हो, एक बार जब लैपरोस्कोपिक का काम पूरा हो जाता है तो फिर उसे मरीज के शरीर से बाहर निकाल लिया जाता है। इसके बाद लगाए हुए कट को पट्टी या टांके (Bandage or Stitches) की मदद से बंद कर दिया जाता है। इस सर्जरी में लगभग आधे घंटा से लेकर दो घंटा तक लगता है लेकिन एक्जेक्ट ड्यूरेशन (Exact Duration) बीमारी के ऊपर डिपेंड करता है। क्योंकि लैपरोस्कोपी का इस्तेमाल काफी बीमारियों का इलाज करने के लिए किया जाता है और हर एक बीमारी के लिए अलग समय लगता है। सर्जरी खत्म होने के बाद मरीज को हॉस्पिटल में कुछ समय तक रखा जाता है और फिर उसी दिन या फिर अगले दिन उसे डिस्चार्ज (Discharge) कर दिया जाता है।

लैपरोस्कोपिक सर्जरी के फायदे (Profits of Laparoscopic Surgery in Hindi)

कम रक्तश्राव (Less Bleeding)

लैपरोस्कोपिक सर्जरी के समय ब्लीडिंग (Bleeding) का कम रिस्क रहता है क्योंकि ओपन सर्जरी (Open Surgery) की तुलना में इस सर्जरी के कट का साइज (Size of Incision / Cut) बहुत छोटा होता है। जिसकी वजह से ब्लीडिंग होने और मरीज के शरीर में खून चढ़ाने (Blood Transfusion) के चांसेस बहुत कम हो जाते हैं। 

कम दर्द होना (Less Pain)

कट का साइज छोटा होने की वजह से सर्जरी के बाद होने वाले दर्द का रिस्क कम हो जाता है। इसकी वह से मरीज को नाही ज्यादा दर्द होती है और नाही उसे लंबे समय तक पेन किलर (Pain Killer) लेने की जरुरत पड़ती है। 

कम निशान पड़ना (No Scars)

सर्जरी के बाद वाला कट का एक छोटे से निशान बनने के चांसेस होते हैं। जबकि बड़ी सर्जरी की वजह से हुए बड़े जख्म में जो स्कार टिश्यू (Tissue) बनाते हैं उनसे इंफेक्शन (Infection) होने का खतरा बड़ जाता है। 

इंफेक्शन होने के चांसेस कम होते हैं (Low Chance of Infection)

ओपन सर्जरी की तुलना में लैपरोस्कोपिक सर्जरी में इंटरनल ओर्गंस (Internal Organs) का बाहरी दूषित पदार्थों (External Contaminants) से संपर्क (Contact) बहुत कम होता है जिसकी वजह से सर्जरी के बाद इंफेक्शन होने का रिस्क बहुत ही कम हो जाता है। लैपरोस्कोपिक सर्जरी के बाद संक्रमण से बचने के लिए लंबे समय तक एंटीबायोटिक दवाएं (Antibiotic Medicine) नहीं खानी पड़ती हैं। 

हॉस्पिटल में कम समय तक रुकना (Short Stay in Hospital)

लैपरोस्कोपिक सर्जरी के बाद रिकवरी (Recovery) बहुत तेज होती है जिससे मरीज को ज्यादा समय तक हॉस्पिटल में रुकने की जरुरत नहीं पड़ती है। सामान्य तौर पर मरीज को उसी दिन या फिर उसके अगले दिन डिस्चार्ज (Discharge) कर दिया जाता है। रिकवरी बहुत तेज होने की वजह से इस सर्जरी के कुछ ही दिन के बाद मरीज अपने दैनिक जीवन (Daily Life) को शुरू कर सकता है। जबकि ओपन सर्जरी में रिकवरी बहुत धीमी होती है और मरीज को काफी दर्द का सामना भी करना पड़ता है। 

ओपन सर्जरी की तुलना में लैपरोस्कोपिक सर्जरी ज्यादा सुरक्षित (Safe) होती है। इस सर्जरी के बाद मरीज को परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता है। सर्जरी के 2-3 दिन के अंदर ही मरीज चलने फिरने लगता है। 

सर्जरी के बाद ध्यान देने वाली बातें (Things to Keep in Mind Post Laser Surgery)

  • सर्जरी के बाद मरीज को ज्यादा चलना नहीं चाहिए। (Don’t walk a lot)
  • सर्जरी के बाद मरीज को दौड़ना नहीं चाहिए। (Don’t run)
  • सर्जरी के बाद मरीज को व्यायाम नहीं करना चाहिए। (Skip gym for few days)
  • सर्जरी के बाद मरीज को भारी सामान नहीं उठाना चाहिए। (Don’t lift heavy weight)
  • सर्जरी के बाद ऐसी गतिविधियां नहीं करनी चाहिए जिनमें ताकत लगती है या फिर पेट पर असर पड़ता है। (Refrain from any physical activity that requires force and pressurizes your stomach)
  • सर्जरी के बाद गाड़ी नहीं चलानी चाहिए। (Don’t drive)
  • सर्जरी के बाद कुछ दिनों तक कोल्ड्रिंक नहीं पीनी चाहिए। (Don’t drink cold drink)
  • सर्जरी के बाद इंफेक्शन से बचने के लिए चीरे के एरिया (Area) को साफ रखना चाहिए। (Keep the cut clean)
  • सर्जरी के बाद गंदगी से दूर रहना चाहिए। (Keep distance from dirt)

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