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पॉलिसिस्टिक ओवरी डिसऑर्डर (पीसीओडी) और प्रेगनेंसी को लेकर महिलाओं के मन में तरह तरह के प्रश्न होते हैं। आज सही जानकारी का अभाव होने के कारण इससे संबंधित ढेरों भ्रम फैले हुए हैं। किसी का मानना है की PCOD Me Pregnancy in Hindi पीसीओडी में गर्भधारण नहीं किया जा सकता तो किसी का मानना है की यह एक बहुत ही गंभीर बीमारी है जिसका कोई इलाज नहीं है। जबकि सच्चाई कुछ और ही है। 

प्रिस्टीन केयर के इस खास ब्लॉग में आज हम पीसीओडी और प्रेगनेंसी से जुड़ी सभी जरूरी चीजों के बारे में आपको विस्तार से बताने वाले हैं। इस ब्लॉग को पूरा पढ़ने के बाद पीसीओडी और प्रेगनेंसी को लेकर आपके मन में जो भी सवाल हैं उनका जवाब मिल जाएगा और साथ ही इससे जुड़ी भ्रांतियां भी दूर हो जाएंगी।        

      विषय सूची

01.  पीसीओडी क्या है
02. पीसीओडी के कारण 
03. पीसीओडी के लक्षण 
04. पीसीओडी और गर्भधारण 
05. पीसीओडी और ओव्यूलेशन 
06. पीसीओडी और फर्टिलिटी  
07. पीसीओडी का निदान 
08. पीसीओडी का इलाज 
09. पीसीओडी में प्रेगनेंसी संभव है? 
10. निष्कर्ष 

पीसीओडी क्या है — PCOD in Hindi

पीसीओडी महिलाओं में होने वाली एक सामान्य बीमारी है। यह महिला की प्रजनन क्षमता (Fertility) को प्रभावित करती है। PCOD Me Pregnancy in Hindi पीसीओडी एक ऐसी स्थिति है जिसमें अंडाशय बहुत सारे अपरिपक्व या आंशिक रूप से परिपक्व अंडे जारी करने लगता है जो अंततः सिस्ट में बदल जाते हैं। इस बीमारी से पीड़ित महिला का शरीर असंतुलित तरीके से हार्मोन का उत्पादन करता है जिसके कारण एण्ड्रोजन हार्मोन का निर्माण बढ़ जाता है और गर्भधारण करने में दिक्कतें आती हैं। (और पढ़ें: प्रेगनेंट नहीं होने के कारण और इलाज

पीसीओडी के कारण — Causes of PCOD in Hindi

अभी तक पीसीओडी के सटीक कारणों का पता नहीं चल पाया है लेकिन विशेषज्ञ का कहना है की इंसुलिन प्रतिरोध, हार्मोन में असंतुलन और अनुवांशिकी के कारण यह समस्या होती है। अगर आपके परिवार में किसी को यह बीमारी पहले हो चुकी है तो आपको इसे होने का खतरा लगभग 50% तक बढ़ जाता है। बदलती जीवनशैली, मोटापा, टेस्टोस्टेरोन और ल्यूटिनाइजिंग हार्मोन का हुआ स्तर भी पीसीओडी के कारण बन सकते हैं। 

पीसीओडी से पीड़ित लगभग 80% महिलाओं में इंसुलिन प्रतिरोध मौजूद पाया जाता है। यह अंडाशय को टेस्टोस्टेरोन का ज्यादा मात्रा में निर्माण करने के लिए उत्तेजित कर सकता है। जो फॉलिकल के सामान्य विकास में बाधा पैदा करता है जो ओव्यूलेशन में नियमितता का कारण बनता है। 

पीसीओडी के लक्षण — Symptoms of PCOD in Hindi

पीसीओडी के कुछ खास लक्षण होते हैं जिन्हे देखकर PCOD Me Pregnancy in Hindi आप या आपके डॉक्टर इस बात का अंदाजा लगा सकते हैं की आप पीसीओडी से पीड़ित हैं। इसका समय पर सही इलाज बहुत आवश्यक है क्योंकि यह सीधे तौर पर आपकी प्रजनन क्षमता को प्रभावित करता है। नीचे हम कुछ लक्षणों के बारे में बात कर रहे हैं, अगर आप इनमें से किसी भी लक्षण को खुद में देखती या महसूस करती हैं तो तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए।      

  • मुहांसे आना 
  • बाल झड़ना  
  • वजन बढ़ना 
  • स्किन ऑयली होना 
  • ओवरी में सिस्ट होना  
  • बार बार गर्भपात होना 
  • पीरियड्स का नहीं आना 
  • अचानक से मूड बदलना 
  • डिप्रेशन या एंग्जाइटी होना 
  • अनियमित पीरियड्स आना 
  • गर्भाधारण करने में समस्या आना 
  • चेहरे और शरीर पर ज्यादा बाल आना 

पीसीओडी और गर्भधारण — PCOD and Conception in Hindi

जब आप पीसीओडी से पीड़ित होती हैं तो आपके शरीर में एस्ट्रोजन का लेवल कम और एंड्रोजेन का लेवल ज्यादा हो जाता है। महिलाओं की तुलना में एंड्रोजेन की मात्रा पुरुषों में ज्यादा होती है। जहां एक तरफ यह पुरुष के सेक्स ऑर्गन के विकास में एक खास रोल अदा करता है। वहीँ दूसरी तरह यह महिलाओं में एस्ट्रोजन हार्मोन में बदल जाता है। PCOD Me Pregnancy in Hindi पीसीओडी और प्रेगनेंसी को लेकर कई महिलाओं में यह भ्रम फैली हुई है की वे पीसीओडी से पीड़ित होने की स्थिति में गर्भधारण नहीं कर सकती हैं। (और पढ़ें: प्रेगनेंसी टेस्ट कब और कैसे करें?)

जबकि सच्चाई बिलकुल इसके उलट है, आप पीसीओडी से पीड़ित होने के बाद भी गर्भधारण कर सकती हैं। पीसीओडी शरीर में हार्मोन में असंतुलन होने के कारण उत्पन्न एक बीमारी है जिसका इलाज संभव है।   

पीसीओडी और ओव्यूलेशन — PCOD and Ovulation in Hindi

आपके शरीर में मौजूद ल्यूटिनाइजिंग हार्मोन की वजह से ओव्यूलेशन की प्रक्रिया होती है। लेकिन जब आप PCOD Me Pregnancy in Hindi पीसीओडी से पीड़ित होती हैं तो आपके शरीर में इस हार्मोन का लेवल बिलकुल कम हो जाता है जिसके कारण ओव्यूलेशन की प्रक्रिया नहीं हो पाती है। इसके अलावा, पीसीओडी की स्थिति में फॉलिकल्स स्टिमुलेटिंग हार्मोन का लेवल भी कम हो जाता है। 

यह हार्मोन पुरुषों के टेस्टिस और महिलाओं की ओवरी के कामों को पूरा करने के लिए आवश्यक है। हार्मोन में असंतुलन होने के कारण महिलाओं के मासिक धर्म अनियमित रूप से आने लगते हैं जिसके कारण या तो उन्हें ओव्यूलेशन नहीं होती है और कभी कभी हो जाती है लेकिन इस स्थिति में महिलाओं को प्रेगनेंट होने में दिक्कतें जरूर आती हैं।   

पीसीओडी और फर्टिलिटी — PCOD and Fertility in Hindi 

पीसीओडी से पीड़ित महिलाओं के शरीर में एंड्रोजेन के अलावा टेस्टोस्टेरोन का स्तर भी अधिक होता है जिसके कारण उनके चेहरे और शरीर पर बाल उगने लगते हैं। PCOD Me Pregnancy in Hindi इस बीमारी की स्थिति में महिलाओं का शरीर इंसुलिन को प्रतिक्रिया नहीं देता है जिसकी वजह से उनके शरीर में ग्लूकोज का स्तर हमेशा ज्यादा रहता है। शरीर में इंसुलिन की मात्रा अधिक होने के कारण वजन बढ़ता है जो सीधा उनकी प्रजनन क्षमता यानी की फर्टिलिटी को प्रभावित करता है। लेकिन इन सबके बावजूद भी वे गर्भधारण कर सकती हैं। (और पढ़ें: महिलाओं में फर्टिलिटी बढ़ाने के प्राकृतिक एवं घरेलू उपाय)

गर्भधारण करने में शायद आपको थोड़ा समय लग जाए, लेकिन आप प्रेगनेंट हो सकती हैं और मां भी बन सकती हैं। पीसीओडी के कौन से इलाज के माध्यम का आप चुनाव करती हैं, आपकी बीमारी की स्थिति क्या है और आप शारीरिक रूप से कितना स्वस्थ हैं आदि चीजों पर आपकी रिकवरी निर्भर करती है। पीसीओडी का इलाज करने तथा इससे छुटकारा पाने के बाद आपको गर्भधारण करने में कोई समस्या नहीं आती है।     

पीसीओडी का निदान — Diagnosis of PCOD in Hindi

पीसीओडी का निदान करने के लिए कोई एक खास जांच नहीं है। इसका निदान करने के लिए अनेकों जांच और दूसरी विधियों का इस्तेमाल किया जाता है। इस बीमारी से पीड़ित होने की स्थिति में सबसे पहले डॉक्टर आपसे आपके मेडिकल इतिहास, मासिक धर्म, बीएमआई, खान पान और व्यायाम के बारे में पूछते हैं। फिर हार्मोन की समस्याओं और डायबिटीज संबंधित पारिवारिक इतिहास की बारे में जानते हैं। इतनी बेसिक जानकारियों को लेने के बाद वे आपकी स्किन, थायरॉइड, ब्रेस्ट और पेट की जांच करते हैं। 

अल्ट्रासाउंड की मदद से डॉक्टर इस बात का पता लगाते हैं की ओवरी में कोई असामान्यता जैसे की ओवरी में सिस्ट तो नहीं है। डॉक्टर खून जांच की मदद से टेस्टोस्टेरोन, कोलेस्ट्रॉल, इंसुलिन, प्रोलैक्टिन, ट्राइग्लिसराइड्स और थायरॉइड उत्तेजक हार्मोन के स्तर का पता लगाते हैं। इसके अलावा वे थायरॉइड फंक्शन टेस्ट, लिपिड लेवल टेस्ट और फास्टिंग ग्लूकोज टेस्ट का भी सुझाव दे सकते हैं। पीसीओडी का स्पष्ट रूप से निदान करने के लिए इन सभी चीजों का इस्तेमाल करने के साथ साथ आपके लक्षणों को भी ध्यान में रखा जाता है।

पीसीओडी का इलाज — Treatment of PCOD in Hindi

जैसे पीसीओडी का कोई एक खास जांच नहीं है वैसे ही इसका कोई एक इलाज नहीं है। इस बीमारी को दूर करने के लिए ढेरों उपायों का इस्तेमाल किया जाता है। इसमें स्वस्थ और संतुलित आहार का सेवन करना, शरीर को फिट रखना, नियमित रूप से व्यायाम करना और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर द्वारा निर्देशित दवाओं का सेवन करना शामिल है। (और पढ़ें: पीसीओडी का घरेलू इलाज)  

संतुलित आहार और व्यायाम  

साबुत अनाज, हरी पत्तेदार सब्जियां, फल, और कम वसा वाले डेयरी उत्पाद ‘संतुलित आहार’ का बहुत ही खास स्रोत हैं। संतुलित आहार आपके शरीर को स्वस्थ रखने में मदद करता है और व्यायाम आपके शरीर के साथ साथ आपके मन को भी चुस्त और दुरुस्त रखता है। पीसीओडी की समस्या को दूर करने में संतुलित आहार और नियमित व्यायाम बहुत बड़ी भूमिका निभाते हैं।     

वजन कम करना 

अधिक वजन वाली महिलाओं को डॉक्टर सबसे पहले वजन कम करने की सलाह देते हैं। क्योंकि उनका मानना है की कम से कम पांच प्रतिशत भी वजन कम करने से मासिक धर्म चक्र सामान्य हो सकता है। जिसकी वजह से ओव्यूलेशन की प्रक्रिया शुरू हो सकती है और उनके मां बनने की संभावना बढ़ सकती है।

दवा का सेवन 

पीसीओडी के लक्षणों को कम तथा दूर करने के लिए डॉक्टर दवाओं का सुझाव भी देते हैं। नियमित रूप से पीरियड्स लाने के लिए डॉक्टर आपको गर्भनिरोधक गोलियों का सेवन करने की सलाह दे सकते हैं। 

खान पान, व्यायाम और दवाओं का इस्तेमाल करने के साथ साथ इस बीमारी से पीड़ित महिलाओं को कुछ चीजों से परहेज भी करने की आवश्यकता होती है। इसमें शराब, सिगरेट, तंबाकू आदि शामिल हैं। इन सभी नशीली चीजों का सेवन करने वाली महिलाओं में एंड्रोजेन की मात्रा अधिक होती है जो पीसीओडी के कारणों में से एक है। इनसे छुटकारा पाना भी एक तरह से पीसीओडी का इलाज है।      

क्या पीसीओडी में प्रेगनेंसी संभव है — Is Pregnancy Possible in PCOD in Hindi

हां, पीसीओडी में प्रेगनेंसी संभव है। पीसीओडी एक बीमारी है जो हार्मोन में असंतुलन होने के कारण पैदा होती है। इसका इलाज मौजूद है। हम इसके बारे में ऊपर विस्तार से बात कर चुके हैं। पीसीओडी की स्थिति में गर्भधारण करने के लिए आपका शारीरिक रूप से स्वस्थ होना बहुत जरूरी है। (और पढ़ें: क्या ओवेरियन सिस्ट में प्रेगनेंसी संभव है?)

पीसीओडी में प्रेगनेंसी के लिए आपको संतुलित आहार का सेवन, रोजाना सुबह में हल्का फूलका व्यायाम, योग और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर द्वारा निर्धारित दवा का सेवन करना चाहिए। इससे आपके पीरियड्स सही से समय पर आने लगते हैं और ओव्यूलेशन की प्रक्रिया भी शुरू हो जाती है। फिर आप आराम से गर्भधारण कर सकती हैं। अगर आपको पीसीओडी है तो इससे डरने की नहीं बल्कि तुरंत डॉक्टर से मिलने की जरूरत है।             

निष्कर्ष 

प्रेगनेंसी में कई तरह की बाधाएं आती हैं। लेकिन इन सभी बाधाओं में एक चीज कॉमन होती है और वो है आपका शारीरिक रूप से कमजोर और गर्भधारण करने के लिए असमर्थ होना। ये सभी समस्याएं खराब लाइफस्टाइल, अनहेल्दी खान पान और साफ सफाई की कमी के कारण होती हैं। पीसीओडी भी इन्ही समस्याओं में से एक है। इसकी स्थिति में गर्भधारण करने में थोड़ी बहुत समस्याएं आती हैं। लेकिन खुद की लाइफस्टाइल को बेहतर बनाकर, हेल्दी खान पान को अपना कर और रोजाना सुबह हल्का फूलका व्यायाम एवं योग करके इस समस्याओं को दूर किया जा सकता है। इसके बाद आपको गर्भधारण करने में किसी तरह की कोई बाधा नहीं आएगी और आप मां बनने के सुख का पूरा आनंद उठा पाएंगी।       

आगे पढ़ें:

प्रेगनेंसी के लक्षण

गर्भावस्था में खान पान

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