गर्भपात के कितने दिन बाद पीरियड आता है

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गर्भपात के कितने दिन बाद पीरियड आता है? ये सवाल लगभग हर महिला के मन में हो सकता है। गर्भपात को अबॉर्शन या एबॉर्शन के नाम से भी जाना जाता है। अबॉर्शन चाहे जिस किसी भी वजह से हो, गर्भपात कराने के लिए एक महिला को शारीरिक और मानसिक तनाव एवं बदलाव – दोनों से ही गुजरना पड़ता है।

एबॉर्शन कराने पर महिला को अपनी सेहत का ख्याल रखना चाहिए। एबॉर्शन के बाद पीरियड्स आने से महिला का मासिक धर्म चक्र सामान्य हो जाता है, जिससे वह अपनी रूटीन लाइफ को दोबारा शुरू कर सकती है।

अगर हालही में आपका अबॉर्शन हुआ है और उसके बाद पीरियड्स समय पर नहीं आ रहे हैं या आपको गर्भधारण करने में किसी तरह की कोई समस्या आ रही है तो आपको एक स्त्री रोग विशेषज्ञ से परामर्श करना चाहिए। स्त्री रोग विशेषज्ञ आपकी समस्या के सटीक कारण का पता लगाकर उचित इलाज की मदद से आपकी बीमारी को दूर कर सकती हैं। अगर आप घर बैठे हमारे अनुभवी और विश्वसनीय स्त्री रोग विशेषज्ञ से मुफ्त परामर्श करना चाहती हैं तो इस ब्लॉग के ऊपर दायीं तरफ दिए गए मोबाइल नंबर या बुक अप्वाइनमेंट बटन का उपयोग करें।

स्त्री रोग विशेषज्ञ के अनुसार, अधिकतर लड़कियों और महिलाओं को यही पता नहीं होता है कि पीरियड्स क्या हैं और क्यों होते हैं। अगर आपको भी इसके बारे में नहीं मालूम है तो लिंक पर क्लिक करके उस ब्लॉग को विस्तार से पढ़ सकती हैं।

प्रिस्टीन केयर के इस ख़ास ब्लॉग में आज हम आपको बच्चा गिराने के बाद कितने दिन बाद पीरियड आता है, के बारे में विस्तार से बताने वाले हैं। उम्मीद करते हैं इस ब्लॉग को पूरा पढ़ने के बाद आपको इस बात की पूरी जानकारी हो जाएगी कि गर्भपात के कितने दिन बाद पीरियड आता है।

Table of Contents

एबॉर्शन कैसे किया जाता है?

अबॉर्शन के दौरान गर्भ में मौजूद भ्रूण को दवाओं या सर्जरी की मदद बाहर निकाला जाता है। यह पूरी तरह से गर्भावस्था की अवधि, महिला के ओवरऑल हेल्थ और डॉक्टर पर निर्भर करता हैं कि वह एबॉर्शन के लिए दवाओं का इस्तेमाल करते हैं या सर्जरी का।

अबॉर्शन के बारे में विस्तार से जानने के लिए आप इस ब्लॉग “अबॉर्शन यानि गर्भपात कैसे होता है?” को पढ़ सकती हैं। अबॉर्शन की दवाओं का इस्तेमाल करने से पहले आपको डॉक्टर से अवश्य परामर्श करना चाहिए।

डॉक्टर मरीज की स्थिति और दूसरे महत्वपूर्ण बिंदुओं को ध्यान में रखते हुए बच्चा गिराने की दवाएं निर्धारित करते हैं। आमतौर पर इन दवाओं का असर 1-4 घंटे के अंदर दिखाई देने लगता है। साथ ही, प्रेग्नेंसी के टिश्यू शरीर से बाहर निकलने लगते हैं।

अबॉर्शन की इस प्रक्रिया को पूरा होने में काफी लंबा समय लगता है। जब यूटेरस खाली होने लगता है तो हैवी पीरियड्स और क्रैंप महसूस हो सकते हैं। इसमें कभी-कभी हफ्तों तक भी ब्लीडिंग हो सकती है।

सर्जरी के जरिए एबॉर्शन को वैक्यूम एस्पिरेशन (Vacuum Aspiration) कहते हैं। इस प्रक्रिया के दौरान स्पेकुलम नामक मेडिकल उपकरण को महिला के शरीर के अंदर डालकर यूटेरस को खाली कर दिया जाता है।

गर्भपात के कितने दिन बाद पीरियड आता है? (Periods After Abortion In Hindi)

अबॉर्शन के कितने दिन बाद पीरियड आता है या गर्भपात के बाद मासिक धर्म कब आता है? यह प्रश्न हर उस महिला के मन में आता है जो अनचाहे गर्भ का अबॉर्शन करा चुकी हैं या आगे गर्भपात कराने वाली होती हैं।

अगर आपके मन में भी ऐसे प्रश्न हैं तो हम आपको बता दें कि सफलतापूर्वक गर्भपात होने के लगभग 4-8 सप्ताह के अंदर पीरियड्स आने शुरू हो जाते हैं। एबॉर्शन के बाद निश्चित समय तक डॉक्टर से फॉलोअप जरूर लें।

अगर गर्भपात के बाद पीरियड न आए तो इस बारे में डॉक्टर से जरूर बात करें। आज अनेको “पीरियड्स जल्दी लाने के उपाय” मौजूद हैं जिनकी मदद से आप अपने पीरियड्स को जल्दी ला सकती हैं। लेकिन इन उपायों का इस्तेमाल करने से पहले एक बात डॉक्टर से अवश्य बात करें।

एबॉर्शन और पीरियड्स में क्या संबंध है? (Abortion and Periods)

प्रेग्नेंसी, एबॉर्शन और पीरियड्स का आपस में गहरा संबंध हैं। आमतौर पर प्रेग्नेंसी होने पर पीरियड्स मिस होते हैं। जब अंडे और स्पर्म के बीच फर्टिलाइजेशन की क्रिया नहीं होती है तो अंडा अपने आप फुट जाता है और योनि से ब्लीडिंग होती है, जिसे पीरियड्स कहते है।

गर्भ से भ्रूण को हटाने यानि अबॉर्शन करने पर ब्लीडिंग होती है और पीरियड्स आ जाते हैं। कई बार जब प्राकृतिक रूप से गर्भपात होता है तब भी ब्लीडिंग होने लगती है या ब्लड क्लॉट आने लगते हैं।

एबॉर्शन के कितने दिन बाद तक ब्लीडिंग होती है? (Bleeding after Abortion)

अबॉर्शन को दवा और सर्जरी – दोनों ही तरह से किया जा सकता है और इन दोनों ही प्रक्रियाओं के दौरान ब्लीडिंग होती है। ब्लीडिंग गर्भपात होने के बाद का लक्षण है। आमतौर पर गर्भपात होने के बाद लगभग दो हफ्ते तक ब्लीडिंग होना सामान्य बात है।

सर्जिकल अबॉर्शन में ब्लीडिंग कम होती है, लेकिन दवाओं से किए एबॉर्शन में लगभग 9 दिनों तक ब्लीडिंग होती है। हालाँकि, कुछ मामलों में ब्लीडिंग ज्यादा-कम भी हो सकती है।

अगर आप अबॉर्शन यानी एबॉर्शन के कितने दिन बाद पीरियड आता है, के बारे में विस्तार से जानना चाहती हैं तो अभी हमारे अनुभवी और विश्वसनीय स्त्री रोग विशेषज्ञ के साथ बुक अप्वाइंटमेंट की मदद से उनसे अपनी परेशानियों के बारे में विस्तार से बात कर सकती हैं।

एबॉर्शन के बाद यूटेरस की सफाई 

एबॉर्शन होने के बाद ज्यादा ब्लीडिंग होने पर यूटेरस की सफाई कराने की आवश्यकता पड़ सकती है। यूटेरस की सफाई करने की प्रक्रिया को डाइलेशन और क्यूरेटेज (Dilation and Curettage) या फिर डीएंडसी कहते है।

इस प्रक्रिया के दौरान डॉक्टर सर्विक्स में चम्मच जैसा एक टूल डालकर टिश्यू को बाहर निकाल देते हैं। आमतौर पर इस प्रक्रिया को जरूरत पड़ने पर ही किया जाता है।

एबॉर्शन के बाद पूरी तरह से ठीक होने में कितना समय लगता है?

एबॉर्शन के बाद पूरी तरह से ठीक होने में कितना समय लगेगा यह काफी हद तक महिला की ओवरऑल हेल्थ पर निर्भर करता है। आमतौर पर ऐसा कहा जाता है कि प्रेग्नेंसी की अवधि जितनी होती है, एबॉर्शन के बाद ठीक होने में भी लगभग उतना ही समय लगता है।

साथ ही, महिला की रिकवरी काफी हद तक इस बात पर भी निर्भर करती है कि एबॉर्शन किस तरीके से किया गया है।

एबॉर्शन के कितने दिन बाद शारीरिक संबंध बनाना चाहिए?

एबॉर्शन के बाद ब्लीडिंग होना सामान्य बात है। ब्लीडिंग पूरी तरह से बंद होने के बाद शारीरिक संबंध बनाने की सलाह दी जाती है। आमतौर पर एबॉर्शन के बाद लगभग एक हफ्ते तक यौन संबंध बनाने से मना किया जाता है।

जब ब्लीडिंग बंद हो जाए तो मरीज को एक बार डॉक्टर से जरूर सलाह लेनी चाहिए। साथ ही, एबॉर्शन के बाद किस तरह का गर्भनिरोधक इस्तेमाल करना है, इसके बारे में भी अपने डॉक्टर से अवश्य राय लेनी चाहिए।

एबॉर्शन के कितने दिन बाद दोबारा कंसीव यानी गर्भधारण कर सकते हैं?

स्त्री रोग विशेषज्ञ के अनुसार, सफल अबॉर्शन के मात्र 2-3 सप्ताह के अंदर फिर से कंसीव / गर्भधारण किया जा सकता है। अगर आप एबॉर्शन के बाद गर्भधारण करने का प्लान बना रही हैं तो आपको सबसे पहले एक स्त्री रोग विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए ताकि संभावित जटिलताओं के खतरे को कम से कम या ख़त्म किया जा सके।

अगर आप गर्भपात के बाद गर्भधारण से संबंधित विस्तृत जानकारी प्राप्त करना चाहती हैं तो यह ब्लॉग “महिलाएं अबॉर्शन के कितने दिन बाद प्रेगनेंट हो सकती हैं?” आपके लिए ख़ास है।

एबॉर्शन के बाद कमजोरी महसूस होने पर क्या करें?

एबॉर्शन के बाद कमजोरी होना आम है। ऐसे में एक महिला को निम्नलिखित बातों का खास ख्याल रखना चाहिए:-

  • भरपूर नींद लें।
  • भरपूर पानी पिएं।
  • संतुलित डाइट लें।
  • कोई भी भारी सामान न उठाएं।
  • मन को शांत और पॉजिटिव रखें।
  • डॉक्टर की देखरेख में हल्का-फुल्का व्यायाम करें।
  • ज्यादा कमजोरी होने पर डॉक्टर से मिलकर कुछ दवाएं ले लें।

एबॉर्शन के बाद खुद का कैसे ख्याल रखें?

एबॉर्शन के बाद पीरियड्स को लेकर ध्यान रखें। गर्भपात नैचुरल है या करवाया गया है, दोनों के बाद भी महिला को अपना ध्यान रखना चाहिए। एबॉर्शन के बाद महिला में कई बदलाव आते हैं, जिसकी वजह से मानसिक तनाव होता है।

एबॉर्शन के बाद निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए:-

एबॉर्शन-के-बाद-किन-बातों-का-ध्यान-रखना-चाहिए

एबॉर्शन के बाद अपना डाइट कैसा रखें?

एबॉर्शन के बाद शरीर में कमजोरी आ जाती है, इसलिए इस दौरान अपनी डाइट का ध्यान रखना जरूरी है। अबॉर्शन के बाद किन चीजों को अपनी डाइट में शामिल करना चाहिए, इसके बारे में आप निचे दिए गए टेबल को पढ़कर समझ सकती हैं।

गर्भपात-के-बाद-क्या-खाएं

01. आयरन

एबॉर्शन के समय ब्लीडिंग ज्यादा होती है, जिससे एनीमिया हो सकता है। इसलिए एबॉर्शन के बाद आयरन से भरपूर चीजों का सेवन करना चाहिए। आयरन रेड ब्लड सेल्स को बनाने में मदद करता है, जिससे खून बढ़ता है। मटर, सेम, फिश, मूंगफली, ओटमील, पालक, किशमिश में भरपूर मात्रा में आयरन पाया जाता है।

02. विटामिन सी  

विटामिन सी शरीर में आयरन को एब्जॉर्ब करने में मदद करता है। आयरन को डाइट में शामिल करने के साथ संतुलित मात्रा में विटामिन सी लेना भी जरूरी है। विटामिन सी के लिए संतरे, ग्रेपफ्रूट, कीवी, स्ट्रॉबेरीज, ब्रोकली, टमाटर आदि को अपनी डाइट में शामिल किया जा सकता है।

03. मैग्नीशियम

मैग्नीशियम मानसिक सेहत को बेहतर करने में मदद करता है। डाइट में मैग्नीशियम शामिल करने से घबराहट, नींद न आना, चिड़चिड़ापन आदि कम हो जाता है। केला, एप्रिकॉट, बादाम, काजू, मटर, सेम और दूध मैग्नीशियम का बेहतर श्रोत हैं।

04. चॉकलेट

ब्रिटिश जर्नल ऑफ क्लिनिकल फार्माकोलॉजी की एक रिसर्च के मुताबिक, चॉकलेट मूड़ को ठीक करने में मदद करता है। चॉकलेट में फ्लावोनोइड होता है, जिससे दिमाग को फायदा होता है। एबॉर्शन के बाद संतुलित मात्रा में चॉकलेट खाना फायदेमंद होता है।

एबॉर्शन के बाद डॉक्टर से मिलना आवश्यक क्यों है?

आप अपनी मर्जी से फैसला करके प्रेगनेंसी की एक समय सिमा के अंदर डॉक्टर की मदद से अबॉर्शन करवा सकती हैं। अबॉर्शन करने के लिए डॉक्टर दवा या सर्जरी का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन कई बार प्राकृतिक रूप से भी अबॉर्शन हो जाता है।

खैर, गर्भपात का कारण चाहे जो भी हो, आपके शरीर पर इसका बुरा असर पड़ता है, जिसके कारण आपको भविष्य में दोबारा गर्भधारण करने में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

अबॉर्शन के बाद आप शारीरिक रूप से काफी कमजोर हो जाती हैं। क्योंकि इस दौरान काफी अधिक मात्रा में ब्लीडिंग होती है। ब्लीडिंग होने के कारण कई बार इंफेक्शन होने का ख़तरा भी बढ़ जाता है। इसलिए अबॉर्शन के बाद स्त्री-रोग विशेषज्ञ से मिलना आवश्यक है

कई बार कुछ महिलाएं अबॉर्शन के तुरंत बाद फिर से गर्भधारण नहीं करना चाहती हैं। ऐसे में उन्हें पीरियड्स और ओव्यूलेशन की सही जानकारी न होने के कारण जब वे बिना सेफ्टी के संबंध बनाती हैं तो फिर से अनजाने में कंसीव यानी गर्भधारण कर लेती हैं।

इसलिए गर्भपात के कितने दिन बाद पीरियड आता है, गर्भपात के बाद मासिक धर्म कब आता है, एबॉर्शन (अबॉर्शन) के कितने दिन बाद पीरियड आता है, गर्भपात के कितने दिन बाद पीरियड आता है या एबॉर्शन के बाद ओवुलेशन कब होता है इस बारे में पता होना चाहिए। अबॉर्शन के बाद स्त्री रोग विशेषज्ञ से परामर्श करके गर्भनिरोधक का सेवन करना चाहिए।

अगर आपका हाल ही अबॉर्शन हुआ है या फिर आगे अबॉर्शन कराने का प्लान है तो आपको पीरियड्स, ओव्यूलेशन और दूसरी आवश्यक पहलुओं से संबंधित जानकारी प्राप्त करने के लिए डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

अबॉर्शन के बाद आपको लगभग एक हफ्ते तक कुछ परेशानियां हो सकती हैं जैसे कि योनि से ब्लीडिंग और योनि में खुजली होना आदि।

अगर आप अबॉर्शन के दो दिन से अधिक समय तक निम्नलिखित लक्षणों को खुद में अनुभव करें तो जल्द से जल्द डॉक्टर से मिलना चाहिए:-

  • उलटी होना
  • बेहोशी आना
  • नींद नहीं आना
  • तेज बुखार होना
  • कमर में दर्द होना
  • हेवी ब्लीडिंग होना
  • ब्रेस्ट में सूजन होना 
  • योनि से बदबूदार डिस्चार्ज होना

ऊपर बताए गए लक्षण गंभीर बीमारियों की ओर इशारा हो सकते हैं। समय पर डॉक्टर से मिलकर आप इन लक्षणों को गंभीर रूप लेने से रोक सकती हैं। इसलिए अबॉर्शन के बाद जब तक आप पूरी तरह ठीक नहीं हो जातीं स्त्री-रोग विशेषज्ञ के संपर्क में रहना चाहिए।

डिस्क्लेमर: यह ब्लॉग सामान्य जानकारी के लिए लिखा गया है| अगर आप किसी बीमारी से ग्रसित हैं तो कृपया डॉक्टर से परामर्श जरूर लें और डॉक्टर के सुझावों के आधार पर ही कोई निर्णय लें|