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मासिक धर्म जिसे अंग्रेजी में पीरियड्स कहा जाता है,  महिलाओं में होने वाली एक प्राकृतिक प्रक्रिया है। पीरियड्स शुरू होने का अर्थ यह है कि महिलाओं का शरीर गर्भधारण करने की क्षमता हासिल करने की पहली स्टेप को पार कर चुका है। पीरियड्स क्या है? क्यों होता है? कब शुरू होता है? जैसे कई प्रश्न हैं जिनका उत्तर जानना बेहद जरूरी है। इन सभी प्रश्नों के उत्तर जानने के लिए हम Pristyn Care की वरिष्ठ Gynecologist डॉक्टर केतकी से बात करेंगे।

पीरियड्स क्या है — Periods in Hindi

डॉक्टर केतकी बताती हैं, “पीरियड्स का जन्म यानी यौवनावस्था शुरू होना। यौवन अवस्था के शुरू होते ही बच्चों के जननांग (Reproductive Organs) का विकास शुरू हो जाता है। इस दौरान बच्चों के शरीर के कई हिस्सों में बाल आते हैं। इस अवस्था में लड़कों के टेस्टिस (Testis) में स्पर्म बनना शुरू हो जाता है और लड़कियों में पीरियड्स शुरू हो जाता है, जिससे वे गर्भधारण के लिए तैयार हो जाती है। पीरियड्स के दौरान महिला की योनि से रक्तस्त्राव (Bleeding) होता है।”

पीरियड्स क्यों होते हैं — Why Menstrual Cycle Happens in Hindi

डॉक्टर केतकी समझाती हैं, “जब कोई लड़की मेच्योर (Mature) होना शुरू होती है, तब उसका शरीर गर्भधारण के लिए तैयार हो जाता है। जब लड़की अपने यौवन में प्रवेश करती है तब उसके शरीर में कई तरह के हॉर्मोनल बदलाव होते हैं और तभी से पीरियड्स का सिलसिला शुरू होता है।

जब महिला यौवन में पहुंचती है तब हॉर्मोनल प्रभाव के कारण अंडाशय (Ovary) अंडे बनाना शुरू कर देता है। हर महीने गर्भाशय में एक परत का निर्माण होता है जो म्यूकस और खून से बनी होती है। जब महिला के अंडाशय से निकला हुआ अंडा पुरुष के वीर्य से मिलता (Fertilize) है तब भ्रूण बनने और उसे पोषण देने के लिए यह परत अहम रोल निभाती है ।

जब अंडा फर्टिलाइज नहीं होता है तब वह महिला के योनि द्वार से बाहर निकलता है जो म्यूकस और खून को साथ लेकर आता है। इससे महिला को ब्लीडिंग होना शुरू हो जाती है। इस ब्लीडिंग को हम पीरियड्स, मासिक धर्म या माहवारी के नाम से जानते हैं।

पीरियड्स से सम्बंधित कुछ सवाल जो अक्सर पूछे जाते हैं:-

पीरियड्स के दौरान सामान्य से ज्यादा ब्लीडिंग होने या पीरियड्स के ज्यादा दिनों तक रहने पर क्या करें?

आमतौर पर देखा जाए तो स्वस्थ पीरियड पांच से सात दिनों तक चलता है। इस दौरान अगर ब्लीडिंग भारी मात्रा में होती है या फिर पीरियड्स सात दिनों से ज्यादा समय तक चलता है तो यह बीमारी को दर्शाता है। इस बीमारी को हम अतिरज या मेनोरेजिया (Menorrhagia) के नाम से जानते हैं। 

गर्भाशय या अंडाशय से जुड़ी कोई बीमारी, हॉर्मोनल असंतुलन, खून से सम्बंधित कोई बीमारी आदि कई प्रमुख कारण Menorrhagia को जन्म देते हैं।

डॉक्टर केतकी कहती हैं, “किसी महिला को ऐसी समस्या होती है तो उसे बिना देरी को किसी अच्छे Gynecologist से संपर्क करना चाहिए, वरना यह समस्या गर्भधारण में अड़चन पैदा कर सकती है।

अनियमित पीरियड्स क्या है और इसके होने पर क्या करना चाहिए?

दो महीने तक पीरियड्स नहीं आना, Menstrual Cycle 21 दिनों से कम या ज्यादा होना, ब्लीडिंग ज्यादा होना, एक महीने रुक कर पीरियड्स आना, Period Cycle का हर बार बदल जाना जैसी कई परेशानियां अनियमित पीरियड्स कहलाती हैं।

पीरियड्स में अनियमितता होने पर आपको एक अच्छे स्त्री-रोग विशेषज्ञ (Gynecologist) से सलाह लेना चाहिए। 

पीरियड्स नहीं होने पर क्या करें?

डॉक्टर केतकी के अनुसार, “अगर लड़की की उम्र 15-16 वर्ष से ज्यादा हो गई है और उसके पीरियड्स नहीं आ रहे हैं या फिर एक या दो बार आकर बंद हो गए हैं तो यह स्थिति एमेनोरिया (Amenorrhea) के नाम से जानी जाती है। यह एक गंभीर समस्या का संकेत है। अगर किसी भी महिला का मेनोपॉज (Menopause) शुरू हो गया है और पीरियड्स नहीं आ रहे हैं तो इसमें चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है लेकिन अगर लड़की के वयस्क होने के बाद भी उसे पीरियड्स नहीं हो रहे हैं तो यह एक गंभीर समस्या हो सकती है। जिससे लड़की को मां बनने में परेशानी आती है।”

यह समस्या ज्यादातर हॉर्मोनल असंतुलन, शरीर में रक्त की कमी और प्रजनन प्रणाली वाले अंगों के कमजोर होने पर होती है। लेकिन कई दफा प्रजनन अंग में किसी बीमारी के होने के चलते भी इस समस्या को देखा जा सकता है।

अगर पीरियड्स पूरी तरह से बंद हो गए हैं तो संभवतः यह PCOD नामक बीमारी का संकेत हो सकता है। पॉलिसिस्टिक ओवेरियन डिसॉर्डर (PCOD) एक प्रकार का हॉर्मोनल विकार है जिसमें ओवरी (Ovary) की सतह में छोटे-छोटी थैलियों का निर्माण हो जाता है जिससे अंडाशय (Ovary) अंडे बनाने में असमर्थ होता है और पीरियड्स नहीं आते हैं।

PCOD की समस्या में महिला को पीरियड्स नहीं होते हैं और उनके शरीर एवं चेहरे में बाल उगना शुरू हो जाते हैं।

PCOD का इलाज खास किस्म की सर्जरी के तहत किया जा सकता है। अगर इसका इलाज सही समय पर नहीं किया गया तो ये गर्भधारण में  अड़चन बन सकता है। इसलिए पीरियड्स के अनियमित होने पर आप जांच जरूर करवाएं।

पीरियड्स के दौरान तेज दर्द होने पर क्या करें?

पीरियड्स में हल्का-फुल्का दर्द होना आम बात है लेकिन कभी-कभी महिलाओं में यह दर्द इतना ज्यादा हो जाता है कि वे सही से चल तक नहीं पाती हैं। अगर दर्द  बहुत ज्यादा रहता है तो इस समस्या को डिसमेनोरिया (Dysmenorrhea) कहा जाता है।

डॉक्टर कहती हैं “Dysmenorrhea होने की वजह ‘एन्डोमीट्रीओसिस (Endometriosis)’ जैसी खतरनाक बीमारी भी हो सकती है। इसलिए अगर आपको पीरियड्स के दौरान तेज दर्द होता है तो आपको इसकी जांच करवानी चाहिए और सही वजह का पता लगाकर इलाज भी कराना चाहिए।”

एन्डोमीट्रीओसिस एक ऐसी बीमारी है जिसमें ‘इंडोमेट्रिअल Endometrial’ टिश्यू का विकास गर्भाशय के बाहर होने लगता है।

मेनोपॉज किसे कहते हैं — Menopause in Hindi

महिला की ऐसी अवस्था जब उसके पीरियड्स बंद हो जाते हैं, मेनोपॉज कहलाता है। “जब महिला की उम्र 45 से 55 के बीच पहुंच जाती है तो अंडाशय में अंडे बनना बंद हो जाते हैं और गर्भाशय में परत का बनना भी बंद हो जाता है जिससे माहवारी नहीं होती है।”

मेनोपॉज के दौरान महिला को गर्मी का ज्यादा अनुभव होता है, बाल झड़ने की समस्या देखी जा सकती है, योनि में रूखापन आने लगता है और इसके अलावा शरीर में और भी कई बदलाव होने लगते हैं।

निष्कर्ष  

महिलाओं को पीरियड्स होना जरूरी है। अगर महिला को पीरियड्स से संबंधित कोई परेशानी होती हैं तो उसे तुरंत ही किसी स्त्री रोग विशेषज्ञ (Gynecologist) से मिलकर जांच करवानी चाहिए।

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