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हर्ड इम्युनिटी क्या है
हर्ड इम्युनिटी का मतलब है किसी समाज या समूह के लोगों के अंदर रोग प्रतिरोधक क्षमता के विकास को बढ़ाना और उनके जरिए संक्रामक बीमारी के प्रसार को रोकना। इस प्रक्रिया को अपनाने के पीछे सबसे बड़ी बात यह है की अगर पर्याप्त लोगों का इम्यून मजबूत हो जाए तो उनके जरिए किसी भी समाज या समूह में फैल बीमारी की शृंखला को आसानी से तोड़ा जा सकता है।
साथ ही साथ इस तरह की बीमारी को उन लोगों तक पहुंचने से रोका जा सकता है जिन्हें इस बीमारी से सबसे ज्यादा खतरा है या फिर जिनका इम्यून सिस्टम बहुत कमजोर है। आमतौर पर लोगों में हर्ड इम्युनिटी को बढ़ाने के लिए टीका करण का इस्तेमाल किया जाता है। इससे वायरस का फैलाव कम हो जाता है क्योंकि शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाती है जो शरीर में मौजूद वायरस से लड़ती है और फिर उसे खत्म कर देती है।
हर्ड इम्युनिटी चर्चा में क्यों है
कोरोना वायरस ने पूरी दुनिया में डर का माहौल पैदा कर दिया है। ब्रिटेन में तेजी से बढ़ रहे कोरोना वायरस की चुनौती से लड़ने के लिए ब्रिटिश सरकार के प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकारों ने सरकार को हर्ड इम्युनिटी के विकल्प को अपनाने का सुझाव दिया है। इसकी मदद से ब्रिटेन के लोगों का इम्यून सिस्टम मजबूत किया जा सकता है जिसकी मदद से कोरोना वायरस को फैलने से रोकने में मदद मिलेगी।
हर्ड इम्युनिटी को कैसे प्राप्त कर सकते हैं
विषेशज्ञों का मानना है की हर्ड इम्युनिटी की सफलता कई चीजों पर निर्भर करती है। इसमें संक्रमण से बचने के लिए दिए जाने वाले टिका का प्रभाव, टीके के प्रभाव का ड्यूरेशन और समूह का वह भाग जो संक्रमण के प्रसार के लिए जिम्मेदार है आदि शामिल हैं।
गणित के रूप में इसे एक निश्चित संख्या से निर्धारित किया गया है जिसे समूह प्रतिरक्षा सीमा के नाम से जाना जाता है। यह उन लोगों की संख्या को दिखाता है जिसपर संक्रमण का असर और संचार नहीं हो सकता है।
पोलियो के लिए यह सीमा 85-85% है जबकि खसरा के लिए 95% और हाल ही में मौजूद आंकड़ों के आधार पर नए कोरोना वायरस की यह सीमा 60% है। इसका मतलब यह हुआ की किसी भी समूह में नए कोरोना वायरस के प्रति हर्ड इम्युनिटी प्राप्त करने के लिए 60% लोगों का प्रतिरक्षित (Immunized) होना जरूरी है।
हर्ड इम्युनिटी कैसे काम करती है
महामारी वैज्ञानिक मूल प्रजनन क्षमता (Basic Reproductive Number – R0) का इस्तेमाल करके संक्रामक बीमारी को फैलने से रोकने और उसके लिए आवश्यक प्रतिरक्षा सीमा का अनुमान लगाते हैं जिसकी मदद से इसे आगे फैलने से रोकने में मदद मिलती है। यह इस बात की भी पृष्टि करता है की एक मरीज के संपर्क में आने की वजह से दूसरे कितने लोग उस बीमारी से संक्रमित हो सकते हैं। एक से ज्यादा मूल प्रजनन क्षमता होना मतलब यह हुआ की एक बीमार व्यक्ति दूसरे कई लोगों को संक्रमित कर सकता है।
रिसर्च के मुताबिक यह बात सामने आई है की खसरे से पीड़ित एक मरीज लगभग 12-18 लोगों को संक्रमित कर सकता है और इन्फ्लुएंजा से पीड़ित एक मरीज लगभग 2-4 लोगों को संक्रमित कर सकता है। हाल ही में चीन से उपलब्ध प्रमाणों के आधार पर विशेषज्ञों ने इस बात का अनुमान लगाया है की नए कोरोना वायरस का R0 2 से 3 के बीच हो सकता है।
फिलहाल दुनिया के काफी देश हर्ड इम्युनिटी को अपनाने की बात कर रहे हैं ताकि फैल रहे इस वायरस को किसी भी तरह रोका जा सके। उम्मीद यही की जा सकती है आगे यह वाकई में कुछ काम करेगा।