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पीसीओएस क्या है? – What Is PCOS In Hindi?
Polycystic Ovary Syndrome (पीसीओएस) महिला स्वास्थ्य से जुड़ी एक गम्भीर है, जो महिला के शरीर में हार्मोनल स्तर को प्रभावित करता है।
इससे पीड़ित महिलाओं के शरीर में पुरुष हार्मोन (androgen) की उत्पत्ति जरूरत से अधिक होती है, फलस्वरूप महिला का मासिक धर्म अनियमित हो जाता है और शरीर एवं चेहरे में बालों की ग्रोथ बढ़ जाती है। पीसीओएस के कारण ओवुलेशन नहीं होता है और डायबिटीज, उच्च रक्तचाप जैसे अन्य रोग होने का जोखिम अधिक हो जाता है।
पीसीओएस से पीड़ित कुछ महिलाओं के अंडाशय में सिस्ट बन जाता है, इसलिए इसे पॉलीसिस्टिक नाम दिया गया है’, हालांकि कुछ महिलाओं के अंडाशय में सिस्ट का निर्माण नहीं होता है।
पीसीओएस के क्या कारण हैं? – Causes Of PCOS In Hindi
अभी तक डॉक्टर को पीसीओएस होने का कोई सटीक कारण नहीं पता है, यह एण्ड्रोजन की अधिकता के कारण होता है। नीचे दिए गए कुछ कारक इसके लिए जिम्मेदार हो सकते हैं
अधिक इंसुलिन
शरीर में पैंक्रियाज (एक ग्लैंड) इन्सुलिन का उत्पादन करता है। इन्सुलिन भोजन में मौजूद शर्करा को सेल्स में अवशोषित कराने में सेल्स की मदद करता है। जब सेल्स इन्सुलिन का उचित उपयोग नहीं कर पाते हैं तो शरीर में सुगर का स्तर बढ़ने लगता है। नतीजन ब्रेन पैंक्रियाज को अधिक इन्सुलिन उत्पादन करने का संकेत देता है (ब्रेन को लगता है कि इन्सुलिन की कमी है) और पैंक्रियाज इन्सुलिन का अधिक मात्रा में उत्पादन करने लगता है। अधिक इन्सुलिन के कारण एण्ड्रोजन का स्तर बढ़ जाता है और ओवुलेशन में परेशानी होती है।
पढ़ें- पीसीओडी क्या है, उपचार
आनुवंशिक
शोध के अनुसार कुछ जीन पीसीओएस से जुड़े हो सकते हैं और यह पीढ़ी दर पीढ़ी बढ़ता जा सकता है।
अधिक एण्ड्रोजन
अंडाशय असामान्य रूप से एंड्रोजन का अधिक उत्पादन करते हैं, जिसके परिणामस्वरूप मुँहासे होते हैं और अधिक बालों का उत्पादन होता है।
पीसीओएस के लक्षण
कुछ महिलाओं में उनके पहले पीरियड के समय के आस-पास ही पीसीओएस के लक्षण दिखाई देने लगते हैं। कुछ महिलाएं शरीर का वजन बढ़ने के बाद या गर्भधारण में परेशानी होने पर इसके लक्षणों का अनुभव करती हैं।
- अनियमित पीरियड्स – पीरियड्स में अनियमितता पीसीओएस का एक संकेत हो सकता है। इसमें साल भर में 9 से कम पीरियड्स आना या एक से दूसरे पीरियड्स के बीच का अंतराल 35 दिनों से ऊपर होना शामिल है।
- हैवी ब्लीडिंग – गर्भाशय की परत अधिक समय तक बनती है, इसलिए आपको सामान्य की अपेक्षा हैवी ब्लीडिंग हो सकता है।
- बाल उगना – पीसीओएस से पीड़ित लगभग 70% महिलाओं में बालों की असाधारण ग्रोथ देखने को मिलती है। ऐसी महिलाओं के चेहरे में, पेट में, कमर में, पीठ में हर जगह बालों की असाधारण ग्रोथ देखने को मिलती है।
- एक्ने – पुरुष हार्मोन त्वचा को अधिक तैलीय बना सकते हैं और इसलिए महिला को चेहरे और छाती जैसे नाजुक जगहों में एक्ने देखने को मिल सकते हैं।
- वजन बढ़ जाना – पीसीओएस से पीड़ित होने के बाद लगभग 80% महिलाओं के वजन में इजाफा होता है और मोटापा देखा जाता है।
- मेल पैटर्न बाल्डनेस – खोपड़ी के बाल पतले हो जाते हैं और झड़ने लगते हैं।
- त्वचा के रंग में बदलाव – त्वचा में गहरे रंग के पैच बन जाते हैं, ये जाँघ क्षेत्र, गले और स्तनों के नीचे भी देखे जा सकते हैं।
- सिर दर्द – हार्मोनल बदलाव के कारण कुछ महिलाओं को सिर दर्द हो सकता है।
पढ़ें- क्या पीसीओसी में गर्भधारण संभव है?
पीसीओएस का निदान कैसे होता है? – How PCOS is diagnosed
आमतौर पर पीसीओएस के होने या न होने का सीधा पता लगाने के लिए कोई निश्चित जाँच प्रक्रिया नहीं है, डॉक्टर महिला से उसकी मेडिकल हिस्ट्री पूछेंगे और शारीरिक बदलाव (हेयर ग्रोथ, त्वचा में पिम्पल्स) को देखेंगे।
इसके बाद डॉक्टर नीचे दिए गए कुछ टेस्ट करवाने की सलाह दे सकते हैं-
पेल्विक एग्जाम
महिला के प्रजनन प्रणाली और अंडाशय में किसी असामान्यता का पता लगाने के लिए डॉक्टर पेल्विक एग्जाम कर सकते हैं, इसमें वे ल्यूब्रिकेटेड ग्लव्स को योनि के भीतर प्रवेश करके अंडाशय और गर्भाशय के ग्रोथ को पता करने की कोशिश करेंगे।
ब्लड टेस्ट
पुरुष हार्मोन के स्तर का पता लगाने के लिए ब्लड टेस्ट किया जाएगा, इसके अलावा इन्सुलिन, कोलेस्ट्रॉल, ट्राइग्लिसराइड आदि का पता लगाने के लिए कई ब्लड टेस्ट किए जा सकते हैं। इससे आपके शरीर में हृदय से जुड़ी बीमारी और डायबिटीज होने के जोखिम का अवलोकन किया जाएगा।
अल्ट्रासाउंड
एक साउंड वेब की मदद से कंप्यूटर स्क्रीन के जरिए गर्भाशय और अंडाशय के असमान्यता का अवलोकन किया जाएगा।
पीसीओएस का उपचार करने के लिए जीवनशैली में बदलाव
पीसीओएस के उपचार की शुरुआत जीवनशैली में परिवर्तन से हो जाती है। वजन कम करके, डाइट में बदलाव करके और अपने जीवनशैली में कुछ एक्सरसाइज शामिल करके पीसीओएस के लक्षणों को कम किया जा सकता है। शरीर का 5 से 10 % वजन कम करके आप पीसीओएस के लक्षणों को काफी हद तक कम कर सकते हैं और पीरियड्स को सामान्य कर सकते हैं, वहीं इससे कोलेस्ट्रॉल और इन्सुलिन के स्तर में भी कमी आ जाती है और डायबिटीज का जोखिम भी कम हो जाता है।
अपने आहार में ऐसी चीजें शामिल करें जो वजन कम करने में मददगार हो। एक शोध में पाया गया है कि कम कार्बोहायड्रेट वाले खाद्य पदार्थ इन्सुस्लिन लेवल और वजन को नियंत्रित करने में बहुत प्रभावी हुए हैं।
डाइट में बदलाव करने के साथ-साथ कुछ व्यायाम करने से शरीर के वजन को कम करने में मदद मिलेगी।
कुछ रिसर्च में यह भी पता चला है कि एक्युपंचर से पीसीओएस के लक्षणों को कम किया जा सकता है, हालांकि अभी और रिसर्च की जरूरत है।
पीसीओएस का मेडिकल उपचार कैसे होता है? – How PCOS Is Treated In Hindi?
निदान करने के बाद हार्मोनल असंतुलन को ठीक करने के लिए डॉक्टर निम्न उपचार कर सकते हैं
गर्भनिरोधक दवाइयाँ
एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टिन को नियमित रूप से लेने पर एण्ड्रोजन का उत्पादन कम होता है और हार्मोन संतुलित हो जाता है। इससे ओवुलेशन विनियमित (regulate) हो जाता है और चेहरे में बाल, एक्ने आदि कई लक्षणों से राहत मिल जाती है। यह इंडोमेट्रियल कैंसर होने के जोखिम को भी कम करता है।
मेटामॉर्फिन
इस दवा का उपयोग डायबिटीज में किया जाता है, जो इन्सुलिन के स्तर को कम करता है। यह पीसीओएस का उपचार करने के लिए भी उपयोग किया जा सकता है।
एक शोध में यह पाया गया कि डाइट में बदलाव करने, एक्सरसाइज करने के साथ-साथ मेटामॉर्फिन का सेवन करने से वजन कम करने में मदद मिलती है और मासिक धर्म को सामान्य करने में मदद मिलती है।
प्रोजेस्टिन थेरेपी
एक से दो महीने तक 10 से 14 दिनों तक प्रोजेस्टिन लेने से आपके पीरियड्स नियमित हो सकते हैं और एंडोमेट्रियल कैंसर से बचाव हो सकता है।
क्लोमिफीन
यह एक प्रकार की फर्टिलिटी ड्रग है जो पीसीओएस से पीड़ित महिला को गर्भधारण होने में मदद करता है। हालांकि, इसके सेवन से एक से अधिक बच्चे होने की संभावना बनी रहती है।
बालों को हटाने की दवाई
अनचाहे बालों से राहत पाने के लिए कुछ उपचार किए जा सकते हैं। इसके लिए डॉक्टर गर्भनिरोधक दवाइयाँ, क्रीम, अन्य दवाइयाँ दे सकते हैं। अनचाहे बालों को हटाने के लिए लेजर उपचार और इलेक्ट्रोलाइसिस भी किया जा सकता है।
सर्जरी
यदि बाकी मेडिकल उपचार फर्टिलिटी का उपचार करने में असफल हो जाते हैं तो सर्जरी की सलाह दी जाती है। इसके लिए ओवेरियन ड्रिलिंग किया जा सकता है। ओवेरियन ड्रिलिंग एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें ओवुलेशन को सामान्य करने के लिए अंडाशय में लेजर या पतली गर्म सुई की मदद से छोटे-छोटे छेद किए जाते हैं।
आईवीएफ
सभी फर्टिलिटी उपचार के विफल हो जाने के उपरान्त भी यदि पीसीओएस पीड़िता गर्भवती नहीं हो पाती है और वह गर्भधारण करना चाहती है तो डॉक्टर आईवीएफ (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन) उपचार की सलाह देते हैं।
पीसीओएस से पीड़ित महिला के गर्भवती होने के लिए आईवीएफ एक बहुत ही बेहतरीन प्रक्रिया है, जिसमें लैब में अंडे और स्पर्म का मिश्रण किया जाता है और भ्रूण निर्माण के बाद उसकी अच्छी तरह से जाँच करके उसे गर्भाशय के अस्तर में रख दिया जाता है।
पढ़ें- आईवीएफ क्या है, पूरी प्रक्रिया और सक्सेस रेट
पीसीओएस की जटिलताएं – Complications Of PCOS In Hindi
पीसीओएस के कारण निम्न जटिलताएं हो सकती हैं:
- बांझपन
- गर्भावधि मधुमेह या गर्भावस्था-प्रेरित उच्च रक्तचाप
- गर्भपात या समय से पहले जन्म
- नॉनक्लोरिक स्टीटोहेपेटाइटिस – लिवर में फैट इकट्ठा होने के कारण लिवर में सूजन
- मेटाबोलिक सिंड्रोम – हाई ब्लड प्रेशर, हाई शुगर लेवल और कोलेस्ट्रॉल या ट्राइग्लिसराइड का असमान्य स्तर जिससे हृदय रोग का जोखिम अधिक हो जाता है
- टाइप 2 मधुमेह या प्रीडायबिटीज
- स्लीप एप्निया
- अवसाद, चिंता और ईटिंग डिसऑर्डर
- असामान्य गर्भाशय रक्तस्राव
- एंडोमेट्रियल कैंसर
Pristyn Care से करें संपर्क
यदि आप पीसीओएस के लक्षणों को अनुभव करते हैं तो इसका निदान करवाने में देरी न करें, यदि समय में इसका उचित निदान हो जाता है तो इस पर लगाम लगाया जा सकता है।
उचित निदान और सही उपचार के लिए आप Pristyn Care को फोन कर सकते हैं या अपॉइंटमेंट बुक कर सकते हैं। हमारे पास अनुभवी स्त्री रोग विशेषज्ञ हैं जो आपके स्थिति का सही निदान करेंगे और उचित उपचार करेंगे।
निष्कर्ष – Conclusion
पीसीओएस में हार्मोनल असंतुलन के कारण महिला का ओवुलेशन प्रभावित होता है, वहीं शरीर में पुरुष हार्मोन की अधिकता के कारण अनचाहे बालों में वृद्धि और एक्ने जैसी परेशानियाँ हो सकती हैं।
वजन नियंत्रित करके और अपने जीवनशैली में एक्सरसाइज शामिल करके पीसीओएस के लक्षणों को कम किया जा सकता है।
जब जीवनशैली में बदलाव करने पर भी महिला को कोई आराम नहीं मिलता है मेडिकल ट्रीटमेंट किया जाता है और अंत में सर्जरी की सलाह दी जाती है। यदि इसके बाद भी महिला ओवुलेट करने में असमर्थ है तो स्त्री रोग विशेषज्ञ आईवीएफ उपचार की सलाह देते हैं।
डिस्क्लेमर: यह ब्लॉग सामान्य जानकारी के लिए लिखा गया है| अगर आप किसी बीमारी से ग्रसित हैं तो कृपया डॉक्टर से परामर्श जरूर लें और डॉक्टर के सुझावों के आधार पर ही कोई निर्णय लें|