period ke kitne din baad pregnancy hoti hai

रीना कंसीव करने के लिए कई जतन कर रही थी, उसने अपनी दोस्त से सुना कि पीरियड्स और पीरियड्स के चार-पांच दिन बाद प्रेग्नेंट होने की संभावना बढ़ जाती है। उसे कुछ समझ नहीं आया, इसलिए वह डॉक्टर के पास इस बारे में बात करने के लिए गई, जहां डॉक्टर ने पीरियड्स के कितने दिन बाद प्रेग्नेंसी होती है? (period ke kitne din baad pregnancy hoti hai) समझाया।

पीरियड्स का प्रेग्नेंसी से सीधा कनेक्शन है। जब भी किसी महिला के पीरियड्स मिस होते हैं, उसे ये लगने लगता है कि प्रेग्नेंसी है। इसलिए ये जानना भी जरूरी है कि पीरियड्स के कितने दिन बाद प्रेग्नेंसी होती है? (period ke kitne din baad pregnancy hoti hai) सबसे पहले ये जानना जरूरी कि पीरियड्स का प्रेग्नेंसी से कनेक्शन किस तरह है। जब कोई लड़की किशोर अवस्था (Teen age) में पहुंचती है तब उसका शरीर प्रेग्नेंसी के लिए खुद को तैयार करने लगता है। इसका पहला चरण पीरियड्स आना होता है। 

जब अंडाशय (Ovary) से अंडा रिलीज होता है और पुरुष के स्पर्म से मिल कर निषेचित यानी फर्टिलाइज नहीं होता तब अंडा टूट जाता है, जिससे ब्लीडिंग होना शुरू हो जाती है। यह ब्लीडिंग किसी को तीन दिन, किसी को पांच दिन रहती है। जब ये अंडा स्पर्म से मिल जाता है तो प्रेग्नेंसी हो जाती और अंडा न टूटने की वजह से ब्लीडिंग नहीं होती।

पीरियड्स को मासिक धर्म चक्र भी कहा जाता है। कई ये सोचते हैं कि पीरियड्स में सेक्स करने से प्रेग्नेंसी ठहर जाती है। कई ये भी सोचते हैं कि पीरियड्स के शुरू होने से लेकर खत्म होने के आसपास की तारीखों में सेक्स करने से प्रेग्नेंसी ठहरने की सबसे ज्यादा संभावना होती है। तो आइए जानते है कि (period ke kitne din baad pregnancy hoti hai) पीरियड्स के कितने दिन बाद प्रेग्नेंसी होती है?

ओव्यूलेशन क्या है? पीरियड्स और प्रेग्नेंसी पर इससे क्या फर्क पड़ता है?

ओव्यूलेशन (Ovulation) एक प्रक्रिया है, जो मासिक चक्र (Monthly Cycle) के बीच होती है। ओव्यूलेशन में अंडा अंडाशय (Ovary) से रिलीज होता है, यह प्रक्रिया पीरियड्स शुरू होने से दो हफ्ते पहले शुरू हो जाती है। इस दौरान अगर सेक्स किया जाता है तो प्रेग्नेंसी ठहरने की पूरी संभावना होती है। क्योंकि इस दौरान अंडा रिलीज होता है और उसे स्पर्म मिल जाता है तो वो फर्टिलाइज हो कर प्रेग्नेंसी ठहरा देता है। इस तरह हर महीने इन दिनों प्रेग्नेंट होने की संभावना होती है।

ओव्यूलेशन की प्रक्रिया प्रेग्नेंसी होने के लिए बहुत जरूरी है। हर महिला की पीरियड्स की तारीख अलग होती है, इसलिए ओव्यूलेशन का समय भी अलग ही होगा। इसमें अंडे (Eggs) अंडाशय में एक्टिव हो जाते है और एक्टिव होने के बाद कोई एक एग फैलोपिन ट्यूब में पहुंच कर स्पर्म का इंतजार करता है। अंडाशय से अंडा रिलीज होने के बाद सिर्फ 12 से 24 घंटे तक ही जीवित रहता है, स्पर्म न मिलने पर अपने आप ही खत्म हो जाता है। जब ये खत्म होता है, तब ब्लीडिंग होती है। एक बार एग खत्म हो जाए तो प्रेग्नेंसी के लिए अगले महीने तक का इंतजार करना होता है।

कैसे तय करें, प्रेग्नेंट होने के लिए ओव्यूलेशन कब होगा?

पीरियड्स का स्वस्थ मासिक चक्र 28 से लेकर 36 दिनों तक का होता है। इसलिए हर महिला में ओव्यूलेशन कब होगा, ये उनके मासिक चक्र की समय सीमा पर निर्भर करता है। ओव्यूलेशन के समय को काउंट किया जा सकता है। आप चाहे तो इस बारे में डॉक्टर से भी बात कर सकते हैं। आजकल जैसे पीरियड्स ट्रेक करने के लिए मोबाइल एप आ गए हैं, वैसे ही ओव्यूलेशन को ट्रेक करने के लिए भी मोबाइल एप्लिकेशन मौजूद हैं। ओव्यूलेशन को ट्रेक करने के लिए पहले ये पता करे कि आपका मासिक चक्र कितने दिनों का हैं? ओव्यूलेशन पीरियड्स के पहले दिन से दो हफ्ते पहले होता है।

जिनका मासिक चक्र 28 दिन का हैं, वे 14वें दिन पर ओव्युलेट करेगी। जिनका मासिक चक्र 21 दिन का हैं, वे 7वें दिन ओव्युलेट करेगी।  जिन महिलाओं का मासिक चक्र 35 से 36वें दिन पर होता हैं, उनका ओव्यूलेशन 21वें दिन पर होता हैं।  

 

मासिक चक्रओव्यूलेशन का दिनफर्टाइल टाइम 
35 दिन21वें दिन दिन 19, 20 और 21
32 दिन18वें दिन दिन 16, 17 और 18
28 दिन14वें दिन दिन 12, 13 और 14
24 दिन10वें दिनदिन 8, 9 और 10
21 दिन7वें दिन दिन 5, 6 और 7

पीरियड्स के कितने दिन बाद प्रेग्नेंसी होती हैं? (Periods Ke Kitne Din Baad Pregnancy Hoti Hai?)

पीरियड्स के बाद प्रेग्नेंसी अगले मासिक धर्म चक्र के पहले ओव्यूलेशन में हो सकती है। अगर 28 दिन का मासिक चक्र है तो पीरियड्स खत्म होने के 10 वें दिन से लेकर 17 वें दिन तक प्रेग्नेंसी के लिए सही समय माना जाता है। अगर किसी महिला का 28 दिन का मासिक चक्र है तो प्रेग्नेंसी की सबसे ज्यादा संभावना पीरियड्स खत्म होने के 12 वां, 13 वां और 14 वां दिन पर रहती है। जब 17 वां दिन गुजर जाता है तो प्रेग्नेंसी की संभावना भी कम हो जाती है। इस हिसाब से ओव्यूलेशन का दिन प्रेग्नेंसी होने के लिए सबसे सही समय माना जाता है। ओव्यूलेशन से पहले के पांच दिन अगर शारीरिक संबंध बनाएं जाएं तब गर्भ धारण करने में कामयाबी मिल सकती है। जिस दिन ओव्यूलेशन होता है, उस दिन भी शारीरिक संबंध बनाने से गर्भवती होने की संभावना होती है, लेकिन जब ओव्यूलेशन को 12 से 24 घंटे गुजर जाते है तब एग निषेचन यानी फर्टिलाइजेशन के लिए नहीं फैलोपिन ट्यूब में नहीं होता है और प्रेग्नेंसी की संभावना ओव्यूलेशन के 12 से 24 घंटे के बाद खत्म हो जाती है।

पीरियड्स के कितने दिन बाद प्रेग्नेंसी नहीं होती है? (Periods Ke Kitne Din Baad Pregnancy Nahi Hoti Hai?)

जैसे ही आपके पीरियड्स शुरू होते हैं, ओव्यूलेशन की प्रक्रिया भी शुरू हो जाती है और आपकी ओवरी से अंडे निकलने शुरू हो जाते है जिसकी वजह से इस दौरान सेक्स करने से गर्भधारण करने की संभावना ज्यादा हो जाती है। mc ke kitne din baad pregnant hoti hai in hindi मासिक धर्म से पहले दिन से लेकर अगले छह दिनों तक गर्भधारण की संभावना लगभग न के बराबर होती है। लेकिन जिस महिला का मासिक धर्म कम समय का होता है उन्हें गर्भधारण की संभावना अधिक होती है। क्योंकि इस दौरान ओव्यूलेशन की प्रक्रिया काफी जल्दी हो जाती है जिसकी वजह से सेक्स करने के बाद स्पर्म उनके शरीर में लगभग एक सप्ताह तक रहता है। Period Ke Kitne Din Baad Pregnant Hoti Hai आमतौर पर पीरियड्स में गर्भधारण की संभावना कम होती है। 

क्या पीरियड्स में शारीरिक संबंध बनाने पर प्रेग्नेंसी हो सकती है?

कई कहते हैं कि पीरियड्स में सेक्स करने पर सौ प्रतिशत गर्भवती होने की संभावना होती है। जैसा कि पहले दी गई जानकारी के अनुसार प्रेग्नेंसी की ज्यादा संभावना ओव्यूलेशन के दिनों के आसपास शारीरिक संबंध बनाने पर होती है। एग फैलोपिन ट्यूब से चले जाने के बाद संभावना कम हो जाती है लेकिन ऐसा नहीं है कि कोई महिला इस स्थिति में प्रेग्नेंट नहीं हो सकती है। एग फुट जाने के बाद पीरियड्स आते है, इसलिए प्रेग्नेंसी की संभावना बिल्कुल कम हो जाती है लेकिन इस दौरान प्रेग्नेंसी हो सकती है ये एक अपवाद है, जो कुछ ही केस में दिखता है।

कितने दिन के बाद प्रेग्नेंसी टेस्ट करनी चाहिए (Kitne Din Baad Pregnancy Test Karna Chahie)

विशेषज्ञ का ऐसा मानना है की पीरियड्स आने पहले पहले या फिर उसके दूसरे दिन प्रेग्नेंसी टेस्ट करनी चाहिए। प्रेग्नेंसी टेस्ट करने के कई तरीके हैं। यह आप पर निर्भर करता है की आप कैसे कंफर्टेबल हैं। आप चाहें तो डॉक्टर के पास जा सकती हैं या फिर घर बैठे खुद से प्रेग्नेंसी टेस्ट किट या घरेलू उपायों की मदद से मात्रा कुछ ही मिनटों में अपनी प्रेग्नेंसी की पुष्टि कर सकती हैं। Period Ke Kitne Din Baad Pregnant Hoti Hai प्रेग्नेंसी टेस्ट करने के लिए आपके यूरिन की आवश्यकता होती है। क्योंकि इसमें ही प्रेग्नेंसी के हार्मोन की मौजूदगी का पता लगाया जाता है। 

ओव्यूलेशन होने के क्या लक्षण है?

ओव्यूलेशन हर महिला में अलग अलग दिन पर होता हैं, निर्भर करता है कि मासिक धर्म चक्र कितने दिनों का है। महिलाएं ओव्यूलेशन का दिन किसी एप के जरिए भी पता कर सकती हैं। अगर किसी एप का इस्तेमाल नहीं करना है तो हम कुछ लक्षण बता रहे हैं, जिससे आप ओव्यूलेशन को पहचान सकते हैं। 

  • शारीरिक तापमान बदलना (Change Body temperature) :- वैसे तो यह सामान्य लक्षण है, बुखार या किसी और वजह से भी शारीरिक तापमान बदल सकता है। लेकिन सामान्य तौर पर मासिक धर्म चक्र शुरू होने पर सामान्य तापमान 97.2 से 97.6 डिग्री फेरेनहाइट हो सकता है। ओव्यूलेशन जैसे जैसे करीब आता है, तापमान बढ़ने लगता है, चाहे तो डिजिटल थर्मामीटर का इस्तेमाल कर भी तापमान जान सकते है।
  • सर्वाइकल म्यूकस (cervical mucus) में बदलाव:- सर्वाइकल म्यूकस महिला शरीर से डिस्चार्ज होने वाला जैल टाइप का पदार्थ है। पीरियड्स शुरू होने के दो सप्ताह पहले यूटेरस के निचले हिस्से गर्भाशय ग्रीवा (uterine cervix) में तरल पदार्थ यानी लिक्विड बनने लगता है, जिसके डिस्चार्ज होने पर ओव्यूलेशन शुरू हो जाता है। 
  • इसके अलावा भी कई लक्षण हैं, जैसे पेट में दर्द, ब्रेस्ट का आकार बढ़ना, बर्ताव में बदलाव आदि।

ओव्यूलेशन प्रक्रिया से जुड़े डिसऑर्डर 

अगर ओव्यूलेशन प्रक्रिया सही तरह से नहीं हो रही है तो इनफर्टिलिटी या प्रेग्नेंसी होने में परेशानी आ सकती है, इनके बारे में जानना जरूरी है। ओव्यूलेशन प्रक्रिया से जुड़े कुछ डिसऑर्डर निम्न है। 

पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम

पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम (PCOS) में ओवेरी यानी अंडाशय बढ़ा होता जाता है और इसमें सिस्ट भर जाता है। इससे हार्मोन का बैलेंस बिगड़ जाता है। इस डिसऑर्डर में मोटापा, असामान्य तरीके से बाल बढ़ना और मुहांसे होना जैसे लक्षण शामिल हैं।

हाइपोथैलेमिक डिसफंक्शन (Hypothalamic dysfunction)

जब शरीर में एफएसएच और एलएच हार्मोन बनना रुक जाते हैं तब ये हार्मोन ओव्यूलेशन और मासिक धर्म चक्र पर बुरा असर डालते हैं। इसमें अनियमित पीरियड्स, ज्यादा ब्लीडिंग, मासिक धर्म का न आना जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। यह डिसऑर्डर ज्यादा शारीरिक या भावनात्मक तनाव (Physical or emotional stress), अचानक कम या ज्यादा वजन होने के कारण होता हैं।

प्रीमेच्योर ओवेरियन इन्सफिएंसी (Premature ovarian insufficiency)

एस्ट्रोजन कम होने पर एग बनना बंद हो जाता है। यह एक ऑटोइम्यून बीमारी, आनुवंशिक असामान्यताओं (Genetic abnormalities) या पर्यावरण में मौजूद जहरीले पदार्थों (environmental toxins) के कारण हो सकता है। इससे भी ओव्यूलेशन की प्रक्रिया में रूकावट हो सकती है।

अगर आपको ऐसा लग रहा है कि ओव्यूलेशन ठीक ढंग से नहीं हो पा रहा है तो डॉक्टर से जांच करा कर इलाज करवाना चाहिए। इस ब्लॉग के जरिए  आपको जवाब मिल गया होगा कि period ke kitne din baad pregnancy hoti hai? 

पीरियड्स और प्रेगनेंसी में डॉक्टर की भूमिका (Periods Aur Pregnancy Men Doctor Ki Bhumika)

जैसे पीरियड्स और प्रेगनेंसी आपस में जुड़े हुए हैं वैसे ही पीरियड्स और प्रेगनेंसी से डॉक्टर जुड़े हुए हैं। आमतौर पर महिलाएं पीरियड्स और प्रेगनेंसी को लेकर बहुत कम जागरूक होती हैं। इसलिए पीरियड्स में अनियमितता आने, सामान्य से अधिक या कम ब्लीडिंग होने, ब्लीडिंग के रंग में बदलाव तथा बदबू आने या प्रेगनेंसी के दौरान किसी तरह की कोई समस्या या परेशानी होने पर या तो वे तुरंत घबरा जाती हैं या फिर इन समस्याओं को नजरअंदाज कर देती हैं। 

आगे पढ़ें: पीरियड्स क्या है और क्यों होता है

दोनों ही स्थितियों में उन्हें परेशानी हो सकती हैं। क्योंकि ज्यादातर समय घबराने के बाद वे डॉक्टर से मिलने के बजाय खुद ही इलाज शुरू कर देती हैं जिसका दुष प्रभाव बुरी तरह से उनके शरीर और सेक्सुअल लाइफ पर पड़ता है। साथ ही नजरअंदाज करने की स्थिति में भी समस्या ठीक होने के बजाय और गंभीर रूप लेती है। इसलिए यह आवश्यक है की जैसे ही आपको पीरियड्स या प्रेगनेंसी से संबंधित किसी तरह की कोई परेशानी या कन्फ्यूजन हो तो तुरंत डॉक्टर से मिलकर इस बारे में बात करनी चाहिए। 

डॉक्टर आपके लक्षणों को देखने के बाद कुछ जांच करते हैं जिसकी मदद से आपके पीरियड्स या प्रेगनेंसी से संबंधित समस्याओं के बारे में पता चलता है। फिर इसके बाद सही इलाज के माध्यम का चुनाव किया जाता है जो बहुत ही प्रभावशाली तरीके से आपकी परेशानियों को दूर करता है। साथ ही अगर आपको अपनी ओव्यूलेशन डेट का पता नहीं चल रहा है तो भी आप डॉक्टर से संपर्क कर सकती हैं। इस बारे में डॉक्टर आपकी मदद कर करेंगे। (आगे पढ़ें: पीरियड्स मिस होने से पहले प्रेग्नेंसी के क्या लक्षण दिखाई देते हैं)  

इन सबके अलावा, अगर अभी भी आपके पास पीरियड्स और प्रेगनेंसी से संबंधित कोई प्रश्न जैसे की पीरियड्स कब आता है, पीरियड्स कब नहीं आता है, ओव्यूलेशन डेट कैसे पता की जाती है, गर्भधारण करने का सबसे सही समय कब होता है, प्रेगनेंसी टेस्ट कब और कैसे की जाती है तथा पीरियड्स और प्रेगनेंसी के दौरान किन बातों का ध्यान रखा जाता है तो आप डॉक्टर से संपर्क कर इन सबके जवाब हासिल कर सकती हैं। ये सभी आपके  साबित होंगे।

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