खराब लाइफस्टाइल, गलत खान-पान, प्रदूषित हवा, धूल, धुआं और एलर्जी के कारण इंसान को कई तरह की बीमारियां होती हैं। साइनस भी उन्ही में से एक है। साइनस को मेडिकल की भाषा में साइनोसाइटिस कहा जाता है। इससे पीड़ित होने पर मरीज को सांस लेने में दिक्कत, सिर में दर्द, नाक में खुजली, बुखार, गले में खराश, थकान और खांसी जैसे समस्याएं होती हैं।
साइनस खोपड़ी में हवा से भरी एक जगह है, जो आंख, गाल, नाक की हड्डी और माथे के पीछे होती है। स्वस्थ साइनस में बैक्टीरिया नहीं होता है। लेकिन जब साइनस में सूजन आ जाती है या बलगम बन जाती है तो इसमें कीटाणु पनपने लगते हैं, जिसके कारण यह संक्रमित हो जाता है।
साइनस से आज एक बड़ी आबादी ग्रसित है। यह नाक में होने वाली एक सामान्य बीमारी है। यह नजला और सांस लेने में तकलीफ से शुरू होता है और आगे जाकर गंभीर रूप धारण कर लेता है। लोग अक्सर सर्दी-खांसी को साइनस का नाम दे देते हैं, लेकिन ऐसा नहीं है। यह दोनों एक दूसरे से बिलकुल अलग हैं।
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साइनस का सर्जिकल इलाज
साइनस का सर्जिकल इलाज दो तरह से किया जाता है, जिसमें पहला ओपन सर्जरी यानी कन्वेंशनल सर्जरी और दूसरा एंडोस्कोपिक सर्जरी है। साइनस की कन्वेंशनल सर्जरी को एक्सटर्नल साइनसोटमी के नाम भी जाना जाता है। एंडोस्कोपिक सर्जरी साइनस का एक मॉडर्न और एडवांस सर्जिकल इलाज है। इसका पूरा नाम फंक्शनल एंडोस्कोपी साइनस सर्जरी (FESS – Functional Endoscopic Sinus Surgery In Hindi) है।
साइनस की सर्जरी कैसे होती है?
साइनस की सर्जरी को एक ENT विशेषज्ञ डॉक्टर करता है। इस सर्जरी को शुरू करने से पहले डॉक्टर मरीज को ऑपरेशन थियेटर में लाते हैं। वहां मरीज को एनेस्थीसिया दिया जाता है। जनरल एनेस्थीसिया देने के बाद मरीज पूरी तरह से बेहोश हो जाते हैं। जबकि लोकल एनेस्थीसिया के बाद शरीर का वह हिसस सुन्न हो जाता है, जिसकी सर्जरी करनी होती है लेकिन मरीज होश में होता है।
जनरल एनेस्थीसिया के बाद मरीज को सर्जरी के दौरान कुछ भी महसूस नहीं होता है। जबकि लोकल एनेस्थीसिया के बाद मरीज को हल्का-फुल्का दर्द महसूस हो सकता है। एनेस्थीसिया देने के बाद डॉक्टर सर्जरी की प्रक्रिया को शुरू करते हैं।
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साइनस की ओपन सर्जरी
इस सर्जरी को करने के लिए ENT सर्जन अलग-अलग तरीकों का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसमें ट्रेफिनेशन और फ्रंटल साइनस ऑबलीटेरेशन शामिल हैं।
-ट्रेफिनेशन प्रक्रिया
ट्रेफिनेशन प्रक्रिया के दौरान सर्जन मरीज की भौं के ऊपर कट लगाते हैं। फिर विशेष मेडिकल उपकरणों की मदद से साइनस कैविटी में एक छेद बनाते हैं और वहां जमा हुए द्रव को बाहर निकाल देते हैं। उसके बाद, उस छेद में एक ट्यूब को लगा देते हैं, ताकि बचे हुए द्रव को सर्जरी के बाद आसानी से बाहर निकाला जा सके।
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ट्यूब लगाने के बाद, कट को टांकों की मदद से बंद कर दिया जाता है। साथ ही, ट्यूब को भी टांकों की मदद से स्थिर बना दिया जाता है। हालांकि, साइनस में जमा द्रव जब पर्याप्त रूप से मरीज की नाक से बाहर निकलने लगता है तो ट्यूब को भी बाहर निकाल दिया जाता है।
-फ्रंटल साइनस ऑबलीटेरेशन
इस प्रक्रिया के दौरान सर्जन मरीज के सिर के सामने वाले हिस्से में एक कट लगाते हैं। सिर के सामने लगाए गए कट को कोरोनल कट भी कहा जाता है। कट लगाने के बाद, सर्जन एक मेडिकल उपकरण की मदद से साइनस के प्रभावित टिशू को काटकर बाहर निकाल देते हैं।
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फिर साइनस में जमा द्रव को नाक के रास्ते बाहर निकालकर उसकी जगह पर नरम टिशू को भर दिया जाता है। सर्जरी के दौरान साइनस के आस-पास की हड्डी में एक विशेष प्रकार के तार या प्लेट को लगाया है और फिर टांकों की मदद से लगाए गए कट को बंद कर दिया जाता है।
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साइनस की एंडोस्कोपिक सर्जरी
इस प्रक्रिया के दौरान नाक के अंदरूनी हिस्से की जांच करने के लिए एंडोस्कोप नामक उपकरण का इस्तेमाल किया जाता है। सर्जरी की शुरुआत में सर्जन एंडोस्कोप को नाक के जरिए मरीज के साइनस में डालते हैं। फिर क्षतिग्रस्त या बढ़ी हुई हड्डी को काटकर बाहर निकाल देते हैं। साथ ही, सर्जन साइनस में कैथिटर को लगा देते हैं, ताकि समय-समय पर वहां फसने/जमा होने वाला द्रव आसानी से बाहर निकल सके।
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कैथिटर की मदद से साइनस में एंटीबायोटिक दवाएं भी डाली जाती हैं, ताकि इंफेक्शन की संभवाना को कम या खत्म किया जा सके। जब साइनस में जमा द्रव मरीज की नाक से बाहर आने लगता है तो कैथिटर को भी बाहर निकाल दिया जाता है। साइनस की एंडोस्कोपिक सर्जरी को पूरा होने में लगभग 45-90 मिनट का समय लगता है।
साइनस की एंडोस्कोपिक सर्जरी को इसका बेस्ट सर्जिकल इलाज माना जाता है। यह एक दिन की सर्जिकल प्रक्रिया है, जिसके बाद मरीज को हॉस्पिटलाइजेशन की जरूरत नहीं पड़ती है। सर्जरी खत्म होने के कुछ ही घंटों के बाद मरीज को हॉस्पिटल से डिस्चार्ज कर दिया जाता है। इस सर्जरी के बाद मरीज की रिकवरी भी बहुत जल्दी होती है।
अगर आपको साइनस की समस्या है और आप कम से कम समय में इसका बेस्ट इलाज पाना चाहते हैं तो आपको एक अनुभवी ENT डॉक्टर से परामर्श करने के बाद एंडोस्कोपिक सर्जरी का चुनाव करना चाहिए।
साइनस का इलाज दवाओं से भी किया जा सकता है
साइनस का इलाज कई तरह से किया जाता है। इसमें दवाएं, घरेलू नुस्खे और सर्जरी आदि शामिल हैं। दवाओं में एनाल्जेसिया, सर्दी और खांसी की दवा, टॉपिकल यानी लगाने वाली दवा, इंट्रानासल कॉर्टिकॉस्टेरॉइड्स, एंटीबायोटिक्स आदि शामिल हैं। साइनस की आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक दवाएं भी आती हैं।
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आमतौर पर साइनस के शुरुआती इलाज के तौर पर डॉक्टर दवाओं का सुझाव देते हैं। लेकिन जब इन सबसे कोई फायदा नहीं होता है या साइनस गंभीर होता है तो एंडोस्कोपिक सर्जरी का चयन किया जाता है।
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इतना ही नहीं, कम से कम खर्च में साइनस का बेस्ट सर्जिकल इलाज करने के साथ-साथ हम अपने मरीजों को ढेरों सुविधाएं भी प्रदान करते हैं। इसमें सर्जरी वाले दिन फ्री पिकअप और ड्रॉप, सभी जांचों पर 30% तक की छूट और सर्जरी के बाद डॉक्टर के साथ प्राधान्य फॉलो-अप्स आदि शामिल हैं। हमारे ENT विशेषज्ञ डॉक्टर आपकी बीमारी को कम से कम समय में बहुत ही आसानी से दूर कर सकते हैं।
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डिस्क्लेमर: यह ब्लॉग सामान्य जानकारी के लिए लिखा गया है| अगर आप किसी बीमारी से ग्रसित हैं तो कृपया डॉक्टर से परामर्श जरूर लें और डॉक्टर के सुझावों के आधार पर ही कोई निर्णय लें|