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मोतियाबिंद का ऑपरेशन कब करवाना चाहिए?
अगर आपको पास या दूर की चीजें कम दिखाई देती हैं, गाड़ी चलाने या दूसरे व्यक्ति के चेहरे के भावों को पढ़ने में परेशानी होती है तो इसका मतलब यह हुआ कि आपको मोतियाबिंद है। यह आंखों को प्रभावित करने वाली एक आम बीमारी है। मोतियाबिंद (Cataract Means In Hindi) को अंग्रेजी में कैटरैक्ट कहा जाता है।
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शोध से यह बात सामने आई है कि पूरे भारत में लगभग 90 लाख से लेकर एक करोड़ 20 लाख लोग दोनों आंखों से अंधे हैं। हर साल 25 लाख मोतियाबिंद के नए मामले सामने आते हैं। भारत में लगभग 63% अंधेपन का कारण मोतियाबिंद है।
पहले मोतियाबिंद का ऑपरेशन बहुत ही जटिल और दर्द भरा होता था, लेकिन मेडिकल साइंस में आई क्रांति ने मोतियाबिंद के ऑपरेशन को बहुत ही आसान और प्रभावशाली बना दिया है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organization) के आंकड़ों के अनुसार, भारत में 2003 के बाद से मोतियाबिंद के कारण होने वाली नेत्रहीनता में लगभग 25% की कमी आई है। और इन सबका कारण लोगों के प्रति मोतियाबिंद की जागरूकता है। विशेषज्ञ का यह भी कहना है कि मोतियाबिंद के प्रति जागरूकता बढ़ा कर इस बीमारी की रोकथाम की जा सकती है।
मोतियाबिंद मोतियाबिंद को हिंदी में मुक्तबिन्द (Cataract In Hindi) भी कहा जाता है। यह बीमारी है जो आंख के लेंस को प्रभावित करती है। लेंस, आंख का एक बहुत ही खास और स्पष्ट हिस्सा है, जो प्रकाश यानी इमेज को रेटिना पर फोकस करने का काम करता है। आंख के पिछले पर्दे को रेटिना कहा जाता है। इसमें कुछ कोशिकाएं होती हैं जिन तक प्रकाश पहुंचता है। इसे पढ़ें: मोतियाबिंद होने पर क्या करना चाहिए?
ये कोशिकाएं उस प्रकाश का विश्लेषण करके सामने वाली चीज की पहचान करने यानि की देखने में सक्षम होती हैं। सामान्य आंख में प्रकाश पारदर्शी लेंस से होते हुए रेटिना तक जाता है। रेटिना पर प्रकाश पहुंचने के बाद नर्व सिग्नल्स में बदलकर मस्तिष्क की ओर जाता है।
रेटिना को शार्प इमेज प्राप्त करने के लिए लेंस का साफ यानी क्लियर होना आवश्यक है। लेकिन मोतियाबिंद से पीड़ित होने की स्थिति में लेंस में धुंधलापन छा जाता है, जिसके कारण प्रकाश लेंस से स्पष्ट रूप से नहीं गुजर पाता है और आपको चीजें धुंधली दिखाई देती हैं।
नजर धुंधली होने के कारण आपको पढ़ने, ड्राइव करने या अपने उन सभी दैनिक जीवन के कामों को करने में परेशानियां होती हैं, जिसके लिए आपको तेज दृष्टि की आवश्यकता होती है।
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मोतियाबिंद का ऑपरेशन कब करना चाहिए (Motiyabind Ka Operation Kab Karna Chahiye)
दी अमेरिकन एकेडमी ऑफ ऑफथेल्मोलॉजी (The American Academy of Ophthalmology) ने चार प्रश्नों की एक लिस्ट तैयार की है, जो इस बात का फैसला लेने में आपकी मदद कर सकते हैं की आपको मोतियाबिंद का ऑपरेशन कब करवाना चाहिए। नीचे दिए गए चार प्रश्न निम्नलिखित हैं:-
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01. क्या मोतियाबिंद आपके दैनिक जीवन के कामों को प्रभावित करता है?
मोतियाबिंद के ढेरों लक्षण हैं, लेकिन इन सब में सबसे खास दृष्टि का धीमा और धुंधला होना एवं एक आंख में डबल विजन होना है। क्लेरिटी और कॉन्ट्रास्ट की कमी होने के कारण उन लोगों को अपने दैनिक जीवन के कामों जैसे की पढ़ने, लिखने, सिलाई करने, खाना पकाने या गाड़ी चलाने आदि में सबसे अधिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। क्योंकि इसमें साफ और तेज दृष्टि की आवश्यकता होती है।
02. क्या आपको मोतियाबिंद के कारण रात के समय गाड़ी चलाने में परेशानी होती है?
मोतियाबिंद के कारण आपको रौशनी के चारों तरह एक गोलाकार परछाईं दिखाई देती है। धीमी लाइट में चीजें साफ-साफ दिखाई नहीं देती हैं, जिसके कारण आपको रात के समय गाड़ी चलाने में परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
इसे पढ़ें: मोतियाबिंद की लेजर सर्जरी के क्या फायदे हैं?
मोतियाबिंद की स्थिति गंभीर होने पर आपके आंख की दृष्टि ख़त्म भी हो सकती है, जिसकी वजह से आप उस विजन टेस्ट में फेल हो सकते हैं जो ड्राइवर लाइसेंस के लिए जरूरी है।
03. क्या मोतियाबिंद आपको उन सभी गतिविधियों को करने से रोकता है जो आपको पसंद हैं?
अगर आपको स्कीइंग या अन्य बाहरी गतिविधियां पसंद हैं तो मोतियाबिंद से पीड़ित होने पर यह सब करनाआपके लिए परेशानी भरा हो सकता है। क्योंकि मोतियाबिंद के कारण तेज रौशनी के प्रति आपके आंखों की संवेदनशीलता बढ़ जाती है।
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मोतियाबिंद एक आंख से दूसरी आंख में विजुअल डिफरेंस (Visual Difference) पैदा कर सकता है। यह उस दूर दृष्टि को प्रभावित कर सकता है जिसकी एक गोल्फर को जरूरत होती है।
04. क्या आप अन्य तरीकों से अपने मोतियाबिंद का प्रबंधन कर सकते हैं?
अगर आपने अभी मोतियाबिंद की सर्जरी नहीं कराने का फैसला किया है तो आप कुछ सामान्य टूल्स की मदद से अपनी दृष्टि को स्थिर रख सकते हैं। इसके लिए आपको अपने घर में ब्राइट लाइट और कॉन्ट्रास्टिंग कलर को शामिल करना चाहिए। साथ ही, ग्लेयर को कम करने के लिए आप पोलराइज्ड सनग्लासेस और एक वाइड-ब्रिम्ड हैट का भी इस्तेमाल कर सकते हैं।
मैग्नीफाइंग ग्लेयर की मदद से आप अपने दैनिक जीवन के कामों को बहुत आसानी से कर सकते हैं। अगर मोतियाबिंद आपके दैनिक जीवन के कामों में परेशानियां खड़ी नहीं करता है तो आप अपने ऑपरेशन को कुछ समय के लिए स्थगित कर सकते हैं।
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लेकिन अगर मोतियाबिंद के कारण आपको अपने दैनिक जीवन के कामों को करने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है तो फिर आपको तुरंत डॉक्टर से मिलकर ऑपरेशन के बारे में बात करनी चाहिए। आमतौर पर मोतियाबिंद का विकास बहुत धीमी गति से होता है। यही कारण है कि कई बार लोगों को यह समझ में भी नहीं आता है कि वह इस बीमारी से पीड़ित हैं।
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जब मोतियाबिंद पूरे लेंस में फैल जाता है या जब आपको कम दिखाई देने लगता है तब डॉक्टर से मिलने के बाद आपको यह बात मालूम होती है की आप मोतियाबिंद से पीड़ित हैं। इसलिए यह आवश्यक है कि आप समय-समय पर अपने आंखों की जांच कराएं। साथ ही, आंखों में किसी भी तरह की कोई परेशानी होने पर तुरंत नेत्र रोग विशेषज्ञ से परामर्श करें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
मोतियाबिंद का इलाज कैसे किया जाता है?
दवाओं या आई ड्रॉप से मोतियाबिंद का इलाज संभव नहीं है। मोतियाबिंद का इलाज सर्जरी से किया जाता है और इसकी सर्जरी को कई तरह से किया जा सकता है। लेकिन उन सबमें लेजर सर्जरी को सबसे बढ़िया इलाज माना जाता है। क्योंकि यह इस बीमारी का मॉडर्न और एडवांस इलाज है।
मोतियाबिंद का ऑपरेशन कैसे होता है?
Motiyabind Ka Operation के दौरान सर्जन खराब लेंस को बाहर निकालकर उसकी जगह पर एक नया कृत्रिम लेंस लगा देते हैं। इस सर्जरी को एनेस्थीसिया के प्रभाव में किया जाता है। इसलिए सर्जरी के दौरान मरीज को दर्द, ब्लीडिंग या दूसरी किसी भी तरह की परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ता है। मोतियाबिंद ऑपरेशन को एक नेत्र रोग विशेषज्ञ के द्वारा पूरा किया जाता है।
मोतियाबिंद की सर्जरी को पूरा होने में कितना समय लगता है?
मोतियाबिंद की दूसरी सर्जिकल प्रक्रियाओं को पूरा होने में लगभग 20-40 मिनट का समय लगता है। जबकि इसकी लेजर सर्जरी को पूरा होने में मात्र 10-15 मिनट का समय लगता है।
मोतियाबिंद की लेजर सर्जरी के बाद ठीक होने में कितना समय लगता है?
मोतियाबिंद की लेजर सर्जरी एक दिन की प्रक्रिया है जिसे पूरा होने में मात्र 10-15 मिनट का समय लगता है। इस सर्जरी के दौरान मरीज को कट और टांके नहीं आते हैं तथा ब्लीडिंग भी नहीं होती है। इतना ही नहीं, सर्जरी के बाद इंफेक्शन या दूसरे साइड इफेक्ट्स और जटिलताओं का खतरा भी लगभग शून्य होता है। इसलिए इस सर्जरी के बाद मरीज को ठीक होने में ज्यादा समय नहीं लगता है। मोतियाबिंद की लेजर सर्जरी के लगभग 1 सप्ताह के बाद से मरीज अपने दैनिक जीवन के कामों को दोबारा शुरू कर सकते हैं। हालांकि, पूरी तरह से ठीक होने में लगभग 4-6 सप्ताह का समय लग सकता है।
मोतियाबिंद ऑपरेशन में कितना खर्च आता है?
एक आंख के मोतियाबिंद ऑपरेशन का खर्च लगभग 25000 रुपए से लकर 1 लाख रुपए तक आता है। लेकिन यह इस सर्जरी का फाइनल कॉस्ट नहीं है। क्योंकि मोतियाबिंद की सर्जरी का कॉस्ट काफी चीजों पर निर्भर करता है और इसमें बदलाव आ सकते हैं।
- विदेशी मोनोफोकल लेंस की कीमत लगभग 28000-35000 रुपए तक होती है
- भारतीय मल्टीफोकल लेंस की कीमत लगभग 45000-55000 रुपए तक होती है
- विदेशी मल्टीफोकल लेंस की कीमत लगभग 70000-80000 रुपए तक होती है
- ट्रायफोकल लेंस की कीमत लगभग 85000-95000 रुपए तक होती है
इन सबके अलावा, मोतियाबिंद ऑपरेशन का खर्च निम्नलिखित चीजों पर भी निर्भर करता है:-
- मोतियाबिंद का प्रकार
- स्थिति की गंभीरता
- डॉक्टर की फीस
- क्लिनिक की विश्वसनीयता
- सर्जरी का प्रकार
- सर्जरी के बाद हॉस्पिटलाइजेशन
- सर्जरी के बाद डॉक्टर के साथ फॉलो-अप्स मीटिंग
अगर आप मोतियाबिंद की सर्जरी के खर्च से संबंधित अधिक जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं तो अभी हमसे संपर्क कर सकते हैं।
मोतियाबिंद का बेस्ट इलाज क्या है?
लेजर सर्जरी को मोतियाबिंद का बेस्ट इलाज माना जाता है। यह एक मॉडर्न और एडवांस सर्जिकल प्रक्रिया है जिसकी मदद से किसी भी प्रकार के मोतियाबिंद को हमेशा के लिए ठीक किया जा सकता है। अगर आप मोतियाबिंद से पीड़ित हैं तो एक अनुभवी नेत्र रोग विशेषज्ञ से परामर्श करने के बाद लेजर सर्जरी का चयन कर सकते हैं। इस सर्जरी के तुरंत बाद ही मरीज को तेज और साफ दृष्टि हासिल हो जाती है। हालांकि, कुछ मामलों में साफ दृष्टि आने में 2-4 दिनों का समय लग सकता है। यह काफी हद तक मरीज के ओवरऑल हेल्थ पर निर्भर करता है।
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- भारत में मोतियाबिंद की फ्री सर्जरी - प्रक्रिया और जटिलताएं
- मोतियाबिंद की सर्जरी के बाद अच्छे लेंस का चयन कैसे करें?
डिस्क्लेमर: यह ब्लॉग सामान्य जानकारी के लिए लिखा गया है| अगर आप किसी बीमारी से ग्रसित हैं तो कृपया डॉक्टर से परामर्श जरूर लें और डॉक्टर के सुझावों के आधार पर ही कोई निर्णय लें|