पाइल्स क्या है
पाइल्स एक शारीरिक बीमारी है जिसकी स्थिति में मरीज के एनस और रेक्टम की नसों में सूजन आ जाती है। सूजन आने की वजह से मरीज को स्टूल पास करते समय काफी तनाव और दर्द महसूस होता है। कभी कभी स्टूल के साथ खून भी आ सकता है। पाइल्स के दो प्रकार होते हैं जिन्हे अंदरूनी पाईल्स और बाहरी पाइल्स के नाम से जाना जाता है। पाइल्स का प्रकार इस बात पर निर्भर करता है की वह रेक्टम के किस हिस्से में हुआ है।
पाइल्स कोई गंभीर बीमारी नहीं है लेकिन समय पर इसपर ध्यान नहीं दिया गया तो कुछ समय के बाद यह गंभीर रूप ले सकता है। यह शुरुआती स्टेज में अपने आप ही ठीक हो जाता है। अगर अपने आप ठीक नहीं हुआ तो दवाओं की मदद से इसे ठीक किया जा सकता है और अगर दवाओं का भी इसपर कुछ असर नहीं हुआ तो लेजर सर्जरी के जरिए इसे हमेशा के लिए ठीक किया जा सकता है। लेजर सर्जरी पाइल्स के लिए इलाज का सबसे बेहतरी माध्यम है।
प्रारंभिक अवस्था में पाइल्स का पता लगाना क्यों महत्वपूर्ण है
पाइल्स की समस्या कई कारणों से होती है। इसमें ज्यादा मसालेदार भोजन खाना, लंबे समय तक पेट में कब्ज होना, नियमित रूप से सौच न जाना, सौच करते समय ज्यादा प्रेशर लगाना, पेट ठीक तरीके से साफ न होना, एक ही पोजीशन में लंबे समय तक बैठना या खड़े रहना, डायरिया से पीड़ित होना, भोजन में पोषक तत्वों की कमी होना, ज्यादा दवाओं का सेवन करना, ज्यादा मोटापा होना आदि शामिल है।
पाइल्स के शुरुआती स्टेज में ही इसका पता लगाया जा सकता है। इसका पता लगाने के लिए मरीज के अंदर कुछ लक्षण दिखाई देते हैं जैसे की स्टूल पास करते समय दर्द और जलन होना, कभी कभी स्टूल के साथ साथ खून का आना, एनस के क्षेत्र में खुजली होना गांठ जैसा महसूस होना।
अगर आप अपने अंदर ऊपर बताए गए लक्षणों को देखते हैं या फिर आप पाइल्स की समस्या से पीड़ित हैं तो आपको तुरंत इसकी जांच करवानी चाहिए। जांच के बाद आपकी बीमारी और स्थिति का अच्छे से पता चलता है। एक बार जब डॉक्टर को बीमारी और उसकी स्थिति का पता चल जाता है तो फिर उस समस्या को हमेशा के लिए खत्म करना आसान हो जाता है। समय पर बीमारी का पता लगाकर इसका सही इलाज कराकर मौजूदा बीमारी को गंभीर रूप लेने और दूसरी बीमारियों का कारण बनने से रोका जा सकता है।
पाइल्स का प्रारंभिक अवस्था में पता नहीं लगाया गया या फिर इसको नजरअंदाज किया गया तो यह दूसरे स्टेज में जा सकता है। दूसरे स्टेज में भी इसका जांच और इलाज नहीं किया गया तो यह फिस्टुला में बदल सकता है। फिस्टुला की स्थिति में मरीज को एनल कैंसर और ट्यूबरक्लोसिस जैसी खतरनाक बीमारियां होने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसी बीमारियों की हालत में कई बार मरीज की मौत भी हो जाती है।
यही कारण है कि पाइल्स का प्रारंभिक अवस्था में पता लगाकर इसका सही से इलाज कराना चाहिए नहीं तो यह आगे आपकी मौत तक का कारण बन सकता है।
पाइल्स का बेस्ट इलाज
पाइल्स के बहुत सारे इलाज के तरीके मौजूद हैं लेकिन लेजर सर्जरी को सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। अगर आप पाइल्स की समस्या से परेशान हैं तो प्रिस्टीन केयर (Pristyn Care) से संपर्क कर सकते हैं। प्रिस्टीन केयर लेजर सर्जरी और अपने अनुभवी सर्जन की मदद से पाइल्स की समस्या को जड़ से खत्म कर देते हैं।
पाईल्स का इलाज लेजर सर्जरी से के बाद इस बीमारी के फिर से होने का खतरा लगभग खत्म हो जाता है। पाइल्स के बेस्ट इलाज देने के साथ साथ प्रोटीन केयर अपने मरीजों और भी दूसरी बहुत सारी सुविधाएं फ्री में देते हैं। इसमें पाइल्स की सर्जरी के दिन मरीज के लिए कैब बुक करना, हॉस्पिटल में मरीज की जगह खुद सभी पेपरवर्क करना, मरीज के लिए एक डीलक्स रूम और साथ ही उनकी देखरेख करने के लिए केयर बड्डी भी मुहैय्या कराते हैं। प्रिस्टीन केयर में मरीज को किसी भी चीज की टेंशन लेने की जरूरत नहीं पड़ती है।