आर्थ्रोस्कोपी एक सर्जिकल प्रक्रिया है जिसके दौरान शरीर के जोड़ों से संबंधित स्थितियों और बीमारियों का इलाज किया जाता है। इस सर्जरी को एक अनुभवी हड्डी रोग विशेषज्ञ के द्वारा पूरा किया जाता है। अधिकतर मामलों में आर्थ्रोस्कोपी सर्जरी को कूल्हे, कोहनी, घुटने, कंधे और कलाई के जोड़ों पर किया जाता है।
आर्थ्रोस्कोपी के दौरान डॉक्टर आर्थ्रोस्कोप नामक उपकरण का इस्तेमाल करते हैं। इस सर्जरी के अनेकों फायदों के कारण ही आज पूरी दुनिया भर में इसका इस्तेमाल किया जाता है। आर्थ्रोस्कोपी सर्जरी से निम्नलिखित बीमारियों का इलाज किया जा सकता है:-
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01. कार्पल टनल सिंड्रोम
कार्पल टनल कलाई की हड्डियों और दूसरी मांसपेशियों से बनी एक पतली नली है जिसका काम मीडियन नर्व की सुरक्षा करना है। मीडियन नर्व हाथ के अंगूठे, मध्य और अनामिका उंगलियों से जुड़ा होता है।
जब कार्पल टनल में अन्य कोशिकाएं जैसे कि लिगामेंट्स और टंडन में सूजन आ जाती है और वे फूल जाते हैं तो इसे मेडिकल की भाषा में कार्पल टनल सिंड्रोम कहते हैं। इसका प्रभाव मध्य कोशिकाओं पर पड़ता है। नतीजतन, हाथ सुन्न हो जाता है। कार्पल टनल का इलाज कई तरह से किया जाता है, लेकिन आर्थ्रोस्कोपी को इसका सबसे प्रभावशाली इलाज माना जाता है।
02. हिप रिप्लेसमेंट
यह एक सर्जिकल प्रक्रिया है जिसके दौरान डॉक्टर कूल्हे के क्षतिग्रस्त या खराब हिस्से को प्रोस्थेटिक के साथ बदल देते हैं। हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी को कई तरह से किया जा सकता है जिसमें एक आर्थ्रोस्कोपी है।
अगर आप अपने कूल्हे के दर्द या अकड़न से परेशान हैं और इसका प्रभावशाली इलाज चाहते हैं तो एक हड्डी रोग विशेषज्ञ से परामर्श करने के बाद आर्थ्रोस्कोपी सर्जरी का चयन कर सकते हैं।
03. नी रिप्लेसमेंट
यह भी एक सर्जिकल प्रक्रिया है जिसके दौरान डॉक्टर घुटने के खराब हिस्से को बदल देते हैं। नी रिप्लेसमेंट सर्जरी को आंशिक या पूर्ण – दोनों ही रूप से किया जा सकता है।
हालांकि, यह पूरी तरह से मरीज के स्थिति की गंभीरता पर निर्भर करता है। नी रिप्लेसमेंट सर्जरी को भी कई तरह से किया जा सकता है और इसमें से एक आर्थ्रोस्कोपी है।
04. एंटीरियर क्रूसिएट लिगमेंट इंजरी
एंटीरियर क्रूसिएट लिगमेंट इंजरी यानी एसीएल इंजरी एक गंभीर समस्या है। अक्सर खेलते, चलते, दौड़ते, ऊंचाई से कूदते समय या किसी एक्सीडेंट के कारण एसीएल में चोट आ जाती है जिसके कारण चलने-फिरने, उठने-बैठने, पैरों को मोड़ने या दैनिक जीवन में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। लेकिन आर्थ्रोस्कोपी सर्जरी की मदद से एसीएल इंजरी का प्रभावशाली इलाज किया जा सकता है।
इन सबके अलावा, जोड़ों के दर्द, जोड़ों में अकड़न, फ्रोजन शोल्डर, जोड़ों में अधिक द्रव जमा होने, कार्टिलेज के क्षतिग्रस्त या खराब होने, कंधे की हड्डी का बार-बार अपनी जगह से हट जाने, टंडन और मांसपेशियों के समूह का क्षतिग्रस्त या खराब होने, घुटने, कोहनी, कंधे, टखने या शरीर के दूसरे जोड़ों में तेज दर्द, सूजन और लालिमा का इलाज करने के लिए भी आर्थ्रोस्कोपी का इस्तेमाल किया जा सकता है।
आर्थोस्कोपी एक मॉडर्न और एडवांस सर्जिकल प्रक्रिया है जिसके दौरान आर्थोपेडिक सर्जन एक आर्थ्रोस्कोप का इस्तेमाल करते हैं। आर्थ्रोस्कोप के आखिरी छोर पर एक कैमरा और लाइट लगा होता है, जिसकी मदद से डॉक्टर को सर्जरी की जाने वाली जगह को अच्छी तरह से मूल्यांकन करने में मदद मिलती है।
आर्थ्रोस्कोपी सर्जरी के निम्नलिखित फायदे हैं:-
01. दर्द नहीं होता है
आर्थ्रोस्कोपी को लोकल, जनरल या स्पाइनल एनेस्थीसिया के प्रभाव में किया जाता है। इसलिए इस पूरी प्रक्रिया के दौरान मरीज को जरा भी दर्द या दूसरी किसी तरह की परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ता है।
02. ब्लीडिंग नहीं होती है
इस प्रक्रिया के दौरान एक छोटा सा कट लगता है। इसलिए सर्जरी के दौरान ब्लीडिंग का खतरा कम से कम होता है। अगर आप अपने शरीर के किसी जोड़ के दर्द, सूजन या अकड़न से परेशान हैं और दर्द या ब्लीडिंग का सामना किए बिना उसका बेस्ट इलाज चाहते हैं तो आर्थ्रोस्कोपी आपके लिए एक बेहतर विकल्प है।
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03. एक दिन की प्रक्रिया है
आर्थ्रोस्कोपी एक दिन की सर्जिकल प्रक्रिया है, इसलिए इस सर्जरी के बाद मरीज को हॉस्पिटलाइजेशन की आवश्यकता नहीं पड़ती है। आमतौर पर सर्जरी खत्म होने के कुछ ही घंटों बाद डॉक्टर आवश्यक दवाएं निर्धारित करके मरीज को हॉस्पिटल से डिस्चार्ज कर देते हैं। लेकिन कुछ मामलों में स्थिति की गंभीरता और मरीज की सेहत को ध्यान में रखते हुए डॉक्टर 1-2 दिन के लिए हॉस्पिटलाइजेशन का सुझाव दे सकते हैं।
04. रिकवरी जल्दी होती है
पारंपरिक सर्जरी की तुलना में आर्थ्रोस्कोपी सर्जरी के बाद मरीज की रिकवरी बहुत जल्दी होती है। क्योंकि इस सर्जरी के दौरान लगाया गए चीरे का आकार छोटा है और सर्जरी के दौरान ब्लडिंग नहीं होती है एवं साइड इफेक्ट्स या जटिलताओं का खतरा भी लगभग शून्य होता है।
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05. जख्म और दाग नहीं होते हैं
आर्थ्रोस्कोपी सर्जरी के बाद जख्म बनने या दाग आने का खतरा लगभग न के बराबर होता है। यही कारण है कि जोड़ों से संबंधित स्थितियों से राहत पाने के लिए अधिकतर लोग इस सर्जरी का चुनाव करते हैं। यह एक सरल और सफल प्रक्रिया है।
06. रिजल्ट बेहतर आता है
आर्थ्रोस्कोपी सर्जरी का रिजल्ट बेहतर आता है। लेकिन आपको एक बात का खास ध्यान रखना चाहिए कि आप इस सर्जरी के लिए एक अनुभवी और विश्वसनीय हड्डी रोग विशेषज्ञ का चयन करें। क्योंकि जब एक अविश्वसनीय डॉक्टर इस सर्जरी को करता है तो जटिलताओं का खतरा बढ़ जाता है। लेकिन जब इस सर्जरी को एक अनुभवी और विश्वसनीय डॉक्टर के द्वारा पूरा किया जाता है तो इसके सफल होने की संभावना अधिक से अधिक और जटिलताओं का खतरा कम से कम हो जाता है।
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अगर आप कूल्हे, घुटने, कोहनी, कलाई या शरीर के दूसरे जोड़ों के दर्द, अकड़न या सूजन से परेशान हैं और कम से कम समय में बिना किसी तरह की परेशानी का सामना किए अपनी परेशानी से छुटकारा पाना चाहते हैं तो आर्थ्रोस्कोपी सर्जरी आपके लिए सबसे बेहतर विकल्प है।
अपने शहर के बेस्ट हॉस्पिटल में कॉस्ट इफेक्टिव आर्थ्रोस्कोपी सर्जरी कराएं
अगर आप कार्पल टनल सिंड्रोम या एसीएल इंजरी से पीड़ित हैं या अपने घुटने या कूल्हे के दर्द से हमेशा के लिए छुटकारा पाना चाहते हैं तो अपने शहर में या उसके आसपास स्थित प्रिस्टीन केयर से संपर्क करें। हमारे सभी हॉस्पिटल और क्लिनिक टॉप रेटेड एवं लोगों के प्रति विश्वसनीय हैं। हमारे हॉस्पिटल और क्लिनिक में आर्थ्रोस्कोपी सर्जरी से हड्डी और जोड़ों से संबंधित ढेरों स्थितियों और बीमारियों का प्रभावशाली इलाज किया जाता है।
आगे पढ़ें: हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी कराने के क्या फायदे हैं?
हमारे हॉस्पिटल में आर्थ्रोस्कोपी सर्जरी को एक अनुभवी, कुशल और विश्वसनीय आर्थोपेडिक सर्जन के द्वारा पूरा किया जाता है। इन सर्जन को हाड़ियों और जोड़ों की गहरी समझ और आर्थ्रोस्कोपी सर्जरी में सालों का उत्कृष्ट अनुभव प्राप्त है। ये सर्जन अबतक अनेकों सफल आर्थ्रोस्कोपी सर्जरी कर चुके हैं। हम भारत के अनेकों शहरों में कॉस्ट इफेक्टिव आर्थ्रोस्कोपी सर्जरी करने के साथ-साथ अपने मरीजों को ढेरों सुविधाएं भी प्रदान करते हैं।
इसे पढ़ें: नी रिप्लेसमेंट सर्जरी कराने के क्या फायदे है?
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