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बच्चेदानी में गांठ का ऑपरेशन कैसे होता है? – Uterine Fibroids Surgery in Hindi

bacchedaani me gaanth ka operation kaise hota hai

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बच्चेदानी में गांठ को गर्भाशय फाइब्रॉएड (यूटेरिन फाइब्रॉएड) कहा जाता है. यह एक प्रकार का ट्यूमर है जो महिला के गर्भाशय में विकसित होता है। यह गैर कैंसरयुक्त होते हैं। लगभग हर महिला अपने जीवन में यूटेरिन फाइब्रॉएड से पीड़ित होती है जिसमे से अधिकाँश महिलाओं को इसका पता ही नहीं चलता है।

बच्चेदानी में गांठ की सर्जरी होनी चाहिए या नहीं यह आप पर निर्भर है क्योंकि ज्यादातर यह दर्द या अन्य लक्षण उत्पन्न नहीं करता है।

पढ़ें- ओवेरियन सिस्ट क्या है? कारण, लक्षण और उपचार

हालांकि, अगर महिला माँ बनना चाहती है तो इसका इलाज अवश्य करवाना चाहिए। यह कई तरीकों से फर्टिलिटी को प्रभावित कर सकता है, जैसे-

  • शुक्राणु और अंडा का मिलन
  • भ्रूण प्रत्यारोपण
  • बच्चे की ग्रोथ भी प्रभावित होती है
  • गर्भपात

बच्चेदानी में गांठ का ऑपरेशन

यूटेरिन फाइब्रॉएड (गांठ) की दो मुख्य सर्जिकल प्रक्रियाएं हैं, आपके साथ कौन सी प्रक्रिया की जाएगी यह इन बातों पर निर्भर करता है:

  • गांठ का आकार
  • फाइब्रॉएड की संख्या
  • गर्भाशय में फाइब्रॉएड की पोजीशन
  • महिला अगर माँ बनना चाहती है

हिस्टरेक्टॉमी

बच्चेदानी में गांठ का इलाज के लिए हिस्टरेक्टॉमी की जा सकती है। इसमें गर्भाशय के एक विशेष हिस्से या पूरे गर्भाशय को हटाया जा सकता है।

पढ़ें- हिस्टरेक्टॉमी कैसे की जाती है?

अगर फाइब्रॉएड का आकार बड़ा है और महिला बच्चे पैदा करना नहीं चाहती, तो हिस्टरेक्टॉमी एक अच्छा विकल्प हो सकता है।

हिस्टरेक्टॉमी निम्न तरीकों से की जा सकती है:

  • एब्डोमिनल हिस्टरेक्टॉमी- सर्जन पेट के निचले हिस्से में कट लगाकर गर्भाशय को निकालता है।
  • वजाइनल हिस्टरेक्टॉमी- योनि के माध्यम से गर्भाशय को हटाया जाता है। अगर फाइब्रॉएड का आकार बड़ा है तो यह तरीका उपयुक्त नहीं है।
  • लेप्रोस्कोपिक हिस्टरेक्टॉमी- सर्जन नाभि के पास कुछ छोटे चीरे लगाकर लेप्रोस्कोप को शरीर में डालता है और गर्भाशय निकाल लेता है।

यह प्रक्रिया बहुत पापुलर है। इसका एक रोबोटिक मेथड भी मौजूद है।

फाइब्रॉएड का इलाज के लिए अगर हिस्टरेक्टॉमी की जाती है, तो अधिकतर, सर्जन केवल गर्भाशय को निकालते हैं। गर्भाशय ग्रीवा और अंडाशय को छोड़ दिया जाता है। इससे शरीर में फीमेल हारमोंस का उत्पादन जारी रहता है।

एब्डोमिनल हिस्टरेक्टॉमी से रिकवर होने में 8 हफ्ते लग सकते हैं। वजाइनल और लेप्रोस्कोपिक हिस्टरेक्टॉमी में रिकवरी तेज होती है, जटिलताएं भी कम नजर आती हैं।

पढ़ें - क्या ओवेरियन सिस्ट में प्रेगनेंसी हो सकती है?

हिस्टरेक्टॉमी की सफल प्रक्रिया के बाद बच्चेदानी में गांठ से हमेशा के लिए खत्म हो जाती है लेकिन महिला कभी माँ नहीं बन पाती है।

मायोमेक्टोमी

मायोमेक्टोमी गर्भाशय फाइब्रॉएड के साथ असामान्य रक्तस्त्राव की समस्या को भी दूर कर सकता है। अगर महिला फाइब्रॉएड से छुटकारा पाना चाहती है और माँ भी बन्न चाहती है तो यह एक अच्छा विकल्प है।

मायोमेक्टोमी के बाद लगभग 90 प्रतिशत महिलाएं बच्चेदानी में गांठ से छुटकारा पा लेती हैं। एक बार सर्जरी हो जाने के बाद गांठ की ग्रोथ रुक जाती है, लेकिन नए फाइब्रॉएड (गांठ) विकसित हो सकते हैं।

पढ़ें- गर्भाशय की गाँठ का इलाज के लिए मायोमेक्टोमी की पूरी विधि

आंकड़ो के अनुसार मायोमेक्टोमी कराने वाली लगभग 33 प्रतिशत महिलाओं को 5 साल के भीतर दोबारा सर्जरी करानी पड़ती है क्योंकि उनमें नए फाइब्रॉएड विकसित हो जाते हैं।

फाइब्रॉएड के आकार और पोजीशन के हिसाब से मायोमेक्टोमी निम्न तीन तरीकों से की जा सकती है:

1. हिस्टेरोस्कोपी

संख्या में कम और छोटे आकार के गांठ को हटाने के लिए हिस्टेरोस्कोपी सबसे अच्छा विकल्प माना जाता है। यह गर्भाशय के भीतर मौजूद गांठ को भी हटा सकता है।

इसकी प्रक्रिया के दौरान सर्जन हिस्टेरोस्कोप को योनि और गर्भाशय ग्रीवा के रास्ते गर्भाशय तक पहुंचाते हैं। गर्भाशय के भीतर एक विशेष लिक्विड इंजेक्ट किया जाता है। इससे गर्भाशय के भीतर देखने में आसानी होती है।

इसके बाद एक उपकरण की मदद से सर्जन गांठ को काट देते हैं। बच्चेदानी की गांठ के कटे हुए टुकड़ों को लिक्विड के साथ बाहर निकाल लिया जाता है।

यह एक मिनिमल इनवेसिव प्रक्रिया है। सर्जरी वाली दिन ही आप हॉस्पिटल से घर प्रस्थान कर सकते हैं।

2. लेप्रोस्कोपी

यह प्रक्रिया भी छोटे आकार के गांठ को हटाने के लिए की जाती है। पेट के निचले हिस्से में दो कट लगाया जाता है, एक से टेलिस्कोप डालते हैं और दूसरे से सर्जिकल उपकरण को।

टेलिस्कोप की मदद से श्रोणि और गर्भाशय क्षेत्र को देखा जाता है और सर्जिकल उपकरण की मदद से गांठ को काटा जाता है। टुकड़ों में काटकर इन्हें बाहर निकाल लिया जाता है।

इसका एक और मेथड रोबोटिक-लेप्रोस्कोपी है जिसमें सर्जन रोबोटिक उपकरणों की मदद से गांठ को काटते हैं।

इस प्रक्रिया के कुछ घंटा बाद रोगी को हॉस्पिटल से छुट्टी मिल जाती है। रिकवरी भी तेज होती है।

3. एब्डोमिनल मायोमेक्टोमी

इस प्रक्रिया को लैपरोटॉमी के नाम से भी जाना जाता है। यह बड़े आकर के गांठ  को निकालने के लिए एक अच्छा विकल्प है।

एब्डोमिनल मायोमेक्टोमी ऑपरेशन में जनरल एनेस्थीसिया का उपयोग होता है। सर्जन रोगी के पेट के निचले हिस्से में कट लगाता है और गांठ निकाल लेता है। यह प्रक्रिया आसान है लेकिन सर्जरी के बाद एक लंबा निशान छोड़ती है।

पढ़ें- PCOS in hindi

मायोमेक्टोमी के अन्य तरीकों के मुकाबले एब्डोमिनल मायोमेक्टोमी अधिक जटिलताएं उत्पन्न करती है। सर्जरी के बाद 2-3 दिन तक हॉस्पिटल में रुकना पड़ता है। पूर्ण रिकवरी में 6 सप्ताह का समय लग सकता है।

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एंडोमेट्रियल एब्लेशन

एंडोमेट्रियल एब्लेशन कोई ऑपरेशन नहीं, बल्कि एक न्यूनतम इनवेसिव प्रक्रिया है। यह प्रक्रिया गर्भाशय की परत को नष्ट करने का कार्य करती है। यदि बच्चेदानी में गांठ का आकार छोटा है तो करने की यह प्रक्रिया लाभदायक हो सकती है।

फाइब्रॉएड की वजह से अकसर महिलाओं को आसामान्य वजाइनल स्त्राव का सामना करना पड़ता है। यह प्रक्रिया फाइब्रॉएड को नष्ट नहीं करती है, लेकिन फाइब्रॉएड की वजह से हो रही एब्नार्मल ब्लीडिंग को दूर कर सकती है।

एंडोमेट्रियल एब्लेशन की प्रक्रिया को डॉक्टर की क्लीनिक या हॉस्पिटल में किया जाता है। प्रक्रिया के लिए महिला को जनरल एनेस्थीसिया दिया जा सकता है।

पढ़ें- PCOD in hindi

जनरल एनेस्थीसिया के अलावा डॉक्टर रोगी को स्पाइनल या एपिड्यूरल एनेस्थीसिया (Spinal or Epidural anesthesia) दे सकते हैं। स्पाइनल या एपिड्यूरल एनेस्थीसिया कमर के नीचे के भाग को सुन्न कर देते हैं।

ऑपरेशन को अंजाम देने के लिए डॉक्टर महिला के गर्भाशय तक एक उपकरण ले जाता है। उपकरण की सहायता से, निम्न तरीकों में से किसी एक की मदद से, प्रक्रिया को संपन्न किया जाता है:

  • इलेक्ट्रिक करंट
  • माइक्रोवेव एनर्जी
  • गरम द्रव्य पदार्थ
  • उच्च ऊर्जा युक्त रेडियो तरंगे
  • गरम द्रव्य से भरा हुआ गुब्बारा
  • कोल्ड प्रोब

एंडोमेट्रियल एब्लेशन की प्रक्रिया सफल होने के बाद रोगी को उसी दिन घर भेज दिया जाता है। रिकवरी का समय अलग-अलग हो सकता है (निर्भर करता है कि किस मेथड से प्रक्रिया की गई है)। फाइब्रॉएड की वजह से हो रही ब्लीडिंग को दूर करने की यह सबसे असरदार प्रक्रिया है।

बच्चेदानी में गांठ का ऑपरेशन के नुकसान

बच्चेदानी में गांठ का ऑपरेशन के लिए ऊपर बताई गई सभी प्रक्रियाएं और सर्जरी सुरक्षित हैं, लेकिन कुछ स्थितियों में निम्न जोखिम नजर आ सकते हैं:

  • संक्रमण
  • ब्लीडिंग
  • प्रक्रिया के बाद चीरे का निशान
  • आंत या मूत्र संबंधी समस्याएँ
  • प्रेगनेंसी प्रॉब्लम्स
  • प्रजनन संबंधी समस्याएँ

उपर्युक्त प्रक्रियाओं के बाद हिस्तेरेक्टोमी करानी पड़ सकती है। हालांकि, यह बहुत ज्यादा दुर्लभ है। लेप्रोस्कोपिक मयोमेक्टोमी के मुकाबले एब्डोमिनल मयोमेक्टोमी अधिक दुष्प्रभाव उत्पन्न करता है।

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बच्चेदानी में गांठ का ऑपरेशन प्रजनन क्षमता को कैसे प्रभावित करता है?

फाइब्रॉएड रिमूवल ऑपरेशन का महिला के प्रजनन क्षमता पर क्या असर होगा, यह सर्जरी के प्रकार और तरीकों पर निर्भर करता है।

हिस्टरेक्टॉमी की प्रक्रिया में पूरा गर्भाशय निकाल दिया जाता है। इसके बाद महिला कभी माँ नहीं बन सकती है।

एंडोमेट्रियल एब्लेशन के बाद भी गर्भधारण बहुत मुश्किल हो जाता है। इस प्रक्रिया में एंडोमेट्रियल लाइनिंग को हटा दिया जाता है। एंडोमेट्रियल लाइनिंग में ही अंडा प्रत्यारोपित होता है। इस प्रक्रिया के बाद अगर महिला गर्भधारण करने का प्रयत्न करती है तो गर्भपात की संभावना बढ़ जाती है। गर्भपात के अलावा अन्य गंभीर जटिलताएं भी नजर आ सकती हैं।

मायोमेक्टॉमी की प्रक्रिया का महिला की प्रजनन क्षमताओं पर कोई विशेष प्रभाव नहीं पड़ता है। मायोमेक्टॉमी के बाद महिला गर्भधारण करने में सक्षम होती है।

यदि कोई महिला ऐसी प्रक्रिया से गुजरती है जिसके बाद भविष्य में गर्भधारण संभव हो, तो महिला को गर्भधारण की कोशिस करने से पहले डॉक्टर की राय लेनी चाहिए। फाइब्रॉएड की सर्जरी के बाद गर्भाशय को पूरी तरह से ठीक होने का समय देना आवश्यक है। सर्जरी के तुरंत बाद गर्भधारण नहीं करना चाहिए। 2-3 महीने इंतजार करना चाहिए।

डिस्क्लेमर: यह ब्लॉग सामान्य जानकारी के लिए लिखा गया है| अगर आप किसी बीमारी से ग्रसित हैं तो कृपया डॉक्टर से परामर्श जरूर लें और डॉक्टर के सुझावों के आधार पर ही कोई निर्णय लें|

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