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आईवीएफ उपचार की प्रक्रिया – शुरू से लेकर अंत तक
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आईवीएफ यानी इन विट्रो फर्टिलाइजेशन एक कृत्रिम गर्भधान प्रक्रिया है, इसे टेस्ट ट्यूब बेबी के नाम से भी जाना जाता है। इस प्रक्रिया में डॉक्टर अंडे को महिला के अंडाशय से निकालकर, उसे स्पर्म के साथ लैब में फर्टिलाइज करते हैं, फिर भ्रूण को महिला के गर्भाशय में प्रत्यारोपित करते हैं।
जब सारे बांझपन उपचार विफल हो जाते हैं, तब डॉक्टर बच्चा पैदा करने के लिए इस मेडिकल तकनीक की सलाह देते हैं।
AIIMS के कथन अनुसार, भारत में लगभग 10 से 15 प्रतिशत जोड़े प्रजनन संबंधी विकारों से पीड़ित होते हैं। यही कारण है कि भारत में आईवीएफ उपचार कराने वाले कपल की संख्या में तेजी से वृद्धि हो रही है।
आईवीएफ उपचार कराने वाले जोड़े इसकी प्रक्रिया को विस्तार से जानने के लिए इच्छुक रहते हैं। आईवीएफ की प्रक्रिया कई चरणों में बटी हुई है। हर चरण का एक अलग महत्व और टाइमलाइन होता है। आइये सभी चरणों के बारे में विस्तार से जानते हैं।
Table of Contents
आईवीएफ प्रक्रिया से पहले
- महिला के प्रजनन अंग का अल्ट्रासाउंड किया जाता है और उनकी स्थिति का मूल्यांकन किया जाता है।
- पार्टनर के स्पर्म की गुणवत्ता का मूल्यांकन किया जाता है।
- महिला का रक्त परीक्षण होता है।
- महिला को आईवीएफ के पहले चरण के लिए तैयार करने के लिए कुछ दवाइयां दी जाती हैं।
- यदि महिला किसी अन्य दवाओं का सेवन कर रही है, जिससे आईवीएफ उपचार में बाधा उत्पन्न हो सकती है तो उससे परहेज करने को कहा जाता है। कई बार वह दवा महिला के लिए जरूरी होती है, ऐसी स्थिति में स्त्री रोग विशेषज्ञ उसकी जगह दूसरी दवाइयां दे सकते हैं।
- डॉक्टर बताएंगे कि आईवीएफ की प्रक्रिया के दौरान क्या करें और क्या न करें
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आईवीएफ उपचार की प्रक्रिया
आईवीएफ एक जटिल प्रक्रिया है, जो कई चरणों में पूरी होती है। इसकी सफलता दर हर महिला के लिए अलग-अलग होती है और कई बार महिला को एक से अधिक आईवीएफ साइकिल की जरूरत पड़ती है।
इसलिए आईवीएफ उपचार शुरू करने से पहले डॉक्टर महिला को इससे जुड़े दुष्प्रभाव, लागत, सफलता दर आदि के बारे में बताते हैं।
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इसके बाद ब्लड सैंपल लिया जाता है और महिला के स्वास्थ्य की जांच की जाती है। इस दौरान पुरुष के वीर्य का भी मूल्यांकन किया जाता है और यदि आवश्यकता पड़ती है तो डोनर स्पर्म की भी मदद ली जा सकती है।
जब महिला मानसिक, शारीरिक और आर्थिक रूप से दुरुस्त होती है तो आईवीएफ ट्रीटमेंट शुरू किया जाता है। एक आईवीएफ साइकिल में मुख्य रूप से 6 चरण होते हैं-
चरण 1 - ओवेरियन स्टिमुलेशन
आमतौर पर महिला का अंडाशय हर महीने एक अंडे का उत्पादन करता है। आईवीएफ की प्रक्रिया को सफल बनाने के लिए एक से अधिक अंडे की आवश्यकता होती है।
इसलिए डॉक्टर महिला के अंडाशय को उत्तेजित करने के लिए कुछ हार्मोनल इंजेक्शन और दवाइयां देंगे। इन दवाइयों के उपयोग से अंडों की संख्या बढ़ जाएगी। अंडे फॉलिकल में पाए जाते हैं।
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नोट- फॉलिकल तरल पदार्थ से भरी एक एक पतली थैली है, जो अंडाशय में पाई जाती है।
ओवेरियन स्टिमुलेशन दो तरह से किया जा सकता है-
- लॉन्ग-प्रोटोकॉल स्टिमुलेशन - ओवरी को उत्तेजित करने वाले हार्मोनल इंजेक्शन और दवाइयां 4 से 5 सप्ताह तक दिए जाएंगे।
- शार्ट-प्रोटोकॉल स्टिमुलेशन - ओवरी को उत्तेजित करने वाले हार्मोनल इंजेक्शन और दवाइयां 5 से 9 दिन तक दिए जाएंगे।
डॉक्टर किस प्रक्रिया का चयन करेंगे यह महिला के प्रजनन स्वास्थ्य और उम्र पर निर्भर करता है। इस प्रक्रिया के दौरान डॉक्टर समय-समय पर अल्ट्रासाउंड और ब्लड चेकअप करते रहेंगे।
चरण 2 - ट्रिगर इंजेक्शन
जब फॉलिकल की संख्या और आकार बढ़ जाएगा, तब ओवेरियन स्टिमुलेशन के लिए दी जाने वाली दवाइयां रोक दी जाएंगी और महिला को एग रिट्रीवल के लिए तैयार करने के लिए ट्रिगर इंजेक्शन (ह्यूमन कोरियोनिक गोनाडोट्रोपिन ) दिया जाएगा।
यह इंजेक्शन अंडों को मेच्योर बनाकर, उन्हें फॉलिकल वाल से ढीला करेगा। ट्रिगर इंजेक्शन देने के 34 से 36 घंटे बाद एग रिट्रीवल की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
नोट- ट्रिगर इंजेक्शन देने के 36 घंटे बाद अंडे ओवुलेशन के लिए तैयार हो जाएंगे, इसलिए इंजेक्शन लेने का सही समय नोट कर लें और एग रिट्रीवल के लिए क्लीनिक पर सही समय पर पहुंच जाएं।
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चरण 3 - एग रिट्रीवल और सीमेन कलेक्शन
आपके आईवीएफ स्पेशलिस्ट डॉक्टर एग रिट्रीवल की प्रक्रिया शुरू करेंगे, इसमें अंडे को अंडाशय से बाहर निकाला जाएगा। यह प्रक्रिया नीचे दिए गए स्टेप्स में पूरी होगी-
- आपको हल्का बेहोश किया जाएगा और दर्द की दवा दी जाएगी
- एक अल्ट्रासाउंड प्रोब (डिवाइस) को योनि के अंदर डाला जाएगा, इससे फॉलिकल को पहचानने में मदद मिलेगी
- अब एक पतली सुई को योनि के रास्ते फॉलिकल तक ले जाएंगे
- सुई की मदद से एक-एक करके सभी अंडे फॉलिकल से बाहर निकाल लिए जाएंगे
- पूरी प्रक्रिया में 20 से 30 मिनट लगेगा
एग रिट्रीवल के बाद महिला को हल्का फुल्का दर्द और ऐंठन हो सकता है, इसलिए डॉक्टर उसे एक घंटे तक अस्पताल में रहने को कहेंगे। यदि महिला कोई जॉब करती है तो उसे एक दिन की छुट्टी लेकर आराम करने को कहा जाएगा।
एग रिट्रीवल वाले दिन ही पुरुष को सीमेन निकालकर देना पड़ेगा। इसके लिए फर्टिलिटी क्लीनिक में एक अलग कमरा होगा जहां पुरुष हस्तमैथुन करके अपने सीमेन को एक डिब्बी में भरकर दे देगा।
कई मामलों में पुरुष के वृषण से वीर्य निकालने के लिए टेस्टिकुलर एस्पिरेशन तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है। इस तकनीक में सीमेन को निकालने के लिए डॉक्टर नीडल और सिरिंज की सहायता लेते हैं।
पढ़ें - आईवीएफ और आईयूआई में क्या अंतर है?
चरण 4 - फर्टिलाइजेशन या इन्सिमिनेशन
सीमेन सैम्पल प्राप्त करने के बाद डॉक्टर उसे धोकर, उसमें मौजूद सारी अशुद्धियाँ दूर करेंगे, इससे फर्टिलाइजेशन की संभावना बढ़ जाती है। अब अण्डों और स्पर्म को इनक्यूबेटर में रखकर अण्डों को फर्टिलाइज करेंगे।
आमतौर पर यदि स्पर्म की गुणवत्ता अच्छी है तो लगभग 60 से 70 प्रतिशत अंडे फर्टिलाइज हो जाएंगे। यदि स्पर्म क्वालिटी अच्छी नहीं है तो डॉक्टर आईसीएसआई तकनीक की मदद लेंगे। इस प्रक्रिया में हर एक अंडे को हर एक स्पर्म के साथ फर्टिलाइज किया जाता है।
कई मामलों में सीमेन क्वालिटी अच्छी नहीं होने पर, डोनर स्पर्म की जरूरत पड़ सकती है।
उर्वरित (fertilise) हो चुके अंडे को 48 घंटे के लिए इनक्यूबेटर में रखा जाएगा और डॉक्टर महिला को फर्टिलाइजेशन के परिणाम के बारे में सूचित करेंगे।
चरण 5 - एम्ब्र्यो सेलेकशन
वैसे तो आईवीएफ का प्रत्येक चरण महत्वपूर्ण है, लेकिन यह चरण कुछ अधिक महत्वपूर्ण है।
आमतौर पर मिसकैरेज से बचने के लिए एक स्वस्थ भ्रूण का चयन करना बहुत आवश्यक है। एम्ब्र्योलॉजीस्ट भ्रूण का चयन दो तरह से कर सकते हैं-
- विजुअल असेसमेंट - भ्रूण में कोशिकाओं के विकास और ब्लास्टोमेरेस को माइक्रोस्कोप की मदद से देखा जाता है।
- जेनेटिक एनालिसिस - इसमें क्रोमोसोम मेकअप को ट्रैक किया जाता है।
भ्रूण में किसी भी क्रोमोसोम के असंतुलन से गर्भपात का खतरा बढ़ जाता है और इससे गर्भधारण संबंधी जटिलताएं हो सकती हैं। इसके अलावा यदि महिला बच्चे को सफलतापूर्वक जन्म दे भी देती है तो बच्चे में असामान्यताएं हो सकती हैं।
एम्ब्र्यो सिलेक्शन के बाद नर्स महिला को फोन लगाकर एम्ब्र्यो ट्रांसफर के लिए क्लीनिक में बुलाएंगे।
चरण 6 - एम्ब्र्यो ट्रांसफर
यह आईवीएफ प्रक्रिया का अंतिम चरण है,जो निम्नलिखित स्टेप्स में पूरा होता है:
- महिला लिथोटॉमी पोजीशन में लेट जाती है।
- अब कैथेटर को योनि मार्ग से गर्भाशय में ले जाते हैं (कैथेटर एक पतली ट्यूब है)
- अब सिरेन्ज की मदद से डॉक्टर भ्रूण को गर्भाशय में स्थानांतरित कर देते हैं।
मल्टीपल प्रेगनेंसी और जटिलताओं से बचने के लिए एक भ्रूण स्थानांतरण काफी होता है, लेकिन कई मामलों में यदि महिला की आईवीएफ साइकिल फेल हो चुकी है या गर्भवती होने की संभावना कम है तो दो गर्भाशय में दो भ्रूण भेजे जा सकते हैं।
एम्ब्र्यो ट्रांसफर के बाद डॉक्टर महिला को कुछ देर तक क्लीनिक में रहने को कहेंगे, फिर घर भेज देंगे।
आईवीएफ की प्रक्रिया के बाद
- कुछ दवाइयां दी जाएंगी, जो एग इम्प्लांटेशन और भ्रूण विकास में मदद करेंगी।
- भ्रूण विकास के लिए दी जाने वाली प्रोजेस्टेरोन दवाओं के कारण महिला को थकान, मतली, ऐंठन और सूजन के लक्षण महसूस हो सकते हैं। यदि कोई अनचाहे लक्षण नजर आते हैं तो अपने डॉक्टर से बात करें।
- दवाइयों का सेवन समय अनुसार करें और डॉक्टर ने जिन चीजों को करने से मना किया है उसे न करें।
- एम्ब्र्यो ट्रांसफर के बाद किसी भी तरह का चिंता या अवसाद न लें, इससे आईवीएफ के सक्सेस रेट पर बुरा परिणाम देखने को मिल सकता है।
- एम्ब्र्यो ट्रांसफर के 14 दिन बाद डॉक्टर/नर्स महिला को क्लीनिक बुलाएंगे और ब्लड प्रेगनेंसी टेस्ट करेंगे।
आईवीएफ का सक्सेस रेट
आईवीएफ का सक्सेस रेट कई बातों पर निर्भर करता है, जैसे - क्लीनिक का सक्सेस रेट, डॉक्टर का अनुभव, महिला की उम्र, वजन, स्वास्थ्य, बांझपन, आईवीएफ साइकिल आदि।
प्रिस्टीन केयर में अच्छी सफलता दर के साथ कराएं आईवीएफ उपचार
आईवीएफ एक जटिल प्रक्रिया है, इसलिए इसका उपचार करवाने से पहले डॉक्टर का अनुभव, क्लीनिक का सक्सेस रेट आदि का मूल्यांकन करना बहुत जरूरी है। अन्यथा, आपके लिए इसकी सफलता दर कम हो जाएगी।
यदि आप पहले किसी दूसरे क्लीनिक में आईवीएफ उपचार करा चुकी हैं, लेकिन फिर भी गर्भवती नहीं हो पाई हैं अथवा आप इस प्रक्रिया से पहली बार गुजरने वाली हैं तो हम आपके लिए अच्छा विकल्प हो सकते हैं, क्योंकि-
- हमारी क्लीनिक का सक्सेस रेट बहुत अधिक है।
- हमारे आईवीएफ स्पेशलिस्ट डॉक्टर को 20 से अधिक वर्षों का अनुभव है और वे कई महिलाओं को संतान सुख प्राप्त करने में मदद कर चुके हैं।
- इलाज के दौरान महिला के स्वास्थ्य की नियमित जांच की जाती है, जिससे सक्सेस रेट में कमी नहीं आती है।
- यदि किसी महिला का आईवीएफ उपचार असफल हो गया है तो उसके उपचार के लिए असफलता के कारण पर गौर किया जाता है और कारण को ख़त्म करके इलाज की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाता है।
इसके अलावा भी बहुत सी ऐसी चीजें हैं जो आईवीएफ उपचार के लिए प्रिस्टीन केयर को भारत की नंबर 1 क्लीनिक बनाते हैं , ज्यादा जानने के लिए पढ़ें - आईवीएफ का सक्सेस रेट किन बातों पर निर्भर करता है, Pristyn Care में आईवीएफ का सक्सेस रेट कितना है
निष्कर्ष - भारत में 10 से 15 प्रतिशत जोड़े फर्टिलिटी से संबंधित समस्याओं से जूझते हैं। जब सारे इनफर्टिलिटी उपचार फेल हो जाते हैं तब आईवीएफ की सहायता ली जाती है। एक आईवीएफ साइकल कई चरणों में पूरी होती है। आईवीएफ की प्रक्रिया शुरू करने से पहले और बाद में डॉक्टर महिला को कुछ सावधानियों का अनुसरण कहने को कहते हैं। आईवीएफ का सक्सेस रेट कई बातों पर निर्भर करता है। एक अच्छे सक्सेस रेट के लिए अनुभवी डॉक्टर और अच्छी क्लीनिक का चयन करना बहुत जरूरी है।
डिस्क्लेमर: यह ब्लॉग सामान्य जानकारी के लिए लिखा गया है| अगर आप किसी बीमारी से ग्रसित हैं तो कृपया डॉक्टर से परामर्श जरूर लें और डॉक्टर के सुझावों के आधार पर ही कोई निर्णय लें|