ऐसा कहा जाता है कि आंखें इंसान के शरीर का सबसे खास अंग हैं, क्योंकि आंखों कि मदद से ही इंसान इस दुनिया की खूबसूरती को देखता और महसूस करता है। हर इंसान अपने आंखों की पूरी देखभाल करता है लेकिन फिर भी उम्र बढ़ने, आंखों में चोट लगने, पूरे दिन मोबाइल या लैपटॉप का इस्तेमाल करने के कारण आंखों में ढेरों बीमारियां होती हैं। कभी आपकी पास की नजर तो कभी दूर की नजर कमजोर हो जाती है। कभी आपको एस्टिग्मेटिज्म तो कभी मोतियाबिंद कि समस्या हो जाती है। इतना ही नहीं, आंखों से संबंधित और भी ढेरों बीमारियां है जिससे पीड़ित होने कि स्थिति में आपको कॉन्टेक्ट लेंस या चश्मे का इस्तेमाल करना पड़ता है।
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इन सभी बीमारियों का इलाज करने के लिए ढेरों दवाएं, आई ड्रॉप्स और एक्सरसाइज मौजूद हैं। लेकिन जब इन सभी उपायों के इस्तेमाल के बाद भी आराम नहीं मिलता है तो आंखों का ऑपरेशन ही एक मात्र इलाज बचता है। आंखों से चश्मा हटाने या आंखों से संबंधित समस्याओं को ठीक करने के लिए कई तरह से सर्जरी कि जाती है और लेसिक सर्जरी भी इन्हीं में से एक है। अगर आपको लेसिक सर्जरी के बारे में जानकारी नहीं है तो प्रिस्टीन केयर का यह खास ब्लॉग बिलकुल आपके लिए है।
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लेसिक सर्जरी क्या है?
लेसिक सर्जरी को अंग्रेजी में लेजर इन सीटू किरेटोमिल्युसिस (Laser-assisted in Situ Keratomileusis – LASIK) कहा जाता है। यह एक प्रकार कि सर्जिकल प्रक्रिया है जिसकी मदद से डॉक्टर आपकी आंखों से चश्मा हटाते या आंखों में होने वाली बीमारियां जैसे कि मायोपिया, हाइपरोपिया आदि को ठीक करते हैं। जब दवा, आई ड्रॉप्स या इलाज के दूसरे तरीकों से आपकी समस्या ठीक नहीं होती है तो डॉक्टर आपको लेसिक सर्जरी का सुझाव देते हैं। इस सर्जरी की मदद से कॉर्निया को सही आकार दिया जाता है ताकि रेटिना पर रौशनी पड़ने पर वह सही तरीके से काम कर सके।
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लेसिक सर्जरी की प्रक्रिया
आंखें शरीर का बहुत संवेदनशील अंग हैं इसलिए लेसिक सर्जरी बहुत ही सावधानी के साथ किया जाता है। क्योंकि जरा सी भी लापरवाही मरीज के अंधेपन का कारण बन सकती है। लेसिक सर्जरी की प्रक्रिया को शुरू करने से पहले डॉक्टर आपके आंखों की अच्छी तरह से जांच करते हैं। जिसमें कॉर्निया की वास्तविक स्थिति का पता लगाना शामिल है। आंखों की जांच करने के बाद वे कुछ टेस्ट भी किया जाता है जिसमें कॉर्निया की मोटाई की जांच करना, आंखों के दबाव की जांच करना और पुतली के फैलाव की जांच करना आदि शामिल हैं।
अगर आप कॉन्टेक्ट लेंस पहनते हैं तो डॉक्टर आपको लेसिक सर्जरी से पहले कॉन्टेक्ट लेंस न पहनने की सलाह देते हैं। अगर आप महिला हैं तो सर्जरी से पहले डॉक्टर आपको अपनी आंखों पर किसी भी तरह का मेकअप नहीं करने का सुझाव देते हैं, क्योंकि ऐसा करने से आपकी आंखों पर बुरा असर पड़ सकता है।
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इन सबके बाद, डॉक्टर सर्जरी की प्रक्रिया को शुरू करते हैं। सर्जरी की इस प्रक्रिया को पूरा होने में लगभग 10-15 मिनट का समय लगता है। साथ ही, इस पूरी प्रक्रिया को लेजर के माध्यम से किया जाता है, इसलिए इसमें जरा भी चिर फाड़ नहीं होता है। सर्जरी शुरू करने से पहले डॉक्टर आपकी आंख में एनेस्थेटिक आई ड्रॉप डालते हैं जिससे आपकी आंखें पूरी तरह से सुन्न हो जाती है। आंखें सुन्न हो जाने की वजह से सर्जरी के दौरान आपको जरा भी दर्द या किसी तरह की कोई परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता है और डॉक्टर को कोई भी असुविधा नहीं होती है। एनास्थेटिक आई ड्रॉप देने के बाद डॉक्टर आपको कुछ दवाइयां भी देते हैं।
इसके बाद, वे आपके आंखों की पलकों पर लिड स्पेकुलम नाम के उपकरण को लगाते हैं जो पलकों को झपकने से रोकता है। फिर डॉक्टर आंख के कॉर्निया में एक पतला फ्लैब बनाते हैं जिसे अस्थायी रूप से मोड़ा जा सके। फिर डॉक्टर एकसिमर लेजर नामक उपकरण का इस्तेमाल कर कॉर्निया में मौजूद लेयर को बाहर निकालकर कॉर्निया को एक नया आकार दे देते हैं। इसके बाद, लेसिक सर्जरी की प्रक्रिया समाप्त हो जाती है। सर्जरी समाप्त हो जाने के बाद आपको वोटिंग रूम में ले जाया जाता है जहां आप लगभग एक घंटे तक आराम करते हैं।
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लेसिक सर्जरी सही तरह से हुआ है या नहीं इस बात को सुनिश्चित करने के लिए डॉक्टर वोटिंग रूम में दोबारा फिर से एकबार आपके आंख की जांच करते हैं। आमतौर पर सर्जरी के बाद मरीज की आंखों में कुछ समस्याएं होती हैं जिसमें जलन होना, आंखों से पानी होना, और खुजली होना आदि शामिल हैं। अगर सर्जरी के बाद आपको भी ऐसी कोई परेशानी होती है तो डॉक्टर आपको आई ड्रॉप इस्तेमाल करने का सुझाव दे सकते हैं। सभी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद हॉस्पिटल से डिस्चार्ज करने से पहले डॉक्टर आपको एक विशेष तरह का चश्मा देते हैं जो आपकी आंखों को सूरज की तेज रौशनी, तेज हवा और धूल मिट्टी से बचाने का काम करता है।
लेसिक सर्जरी के फायदे
लेसिक सर्जरी के ढेरों फायदे हैं जिसके कारण आज हर कोई अपने आंखों से संबंधित परेशानियों का इलाज कराने के लिए इस सर्जरी का चुनाव कर रहा है। इस सर्जरी के निम्नलिखित फायदे हैं:-
- एक दिन की सर्जिकल प्रक्रिया है।
- 10-15 मिनट का समय लगता है।
- दर्द और परेशानी नहीं नहीं होती है।
- हॉस्पिटल में रुकने की जरूरत नहीं।
- सरल और संक्षिप्त सर्जिकल प्रक्रिया है।
- रिकवरी में कम से कम समय लगता है।
- उसी दिन हॉस्पिटल में एडमिशन, जांच और सर्जरी।
इन सबके अलावा भी लेसिक सर्जरी के ढेरों फायदे हैं। अगर आप भी आंख से संबंधित किसी प्रकार की समस्या से परेशान हैं तो एक अनुभवी और कुशल डॉक्टर से परामर्श करने के बाद लेसिक सर्जरी का चुनाव कर सकते हैं।
लेसिक सर्जरी के नुकसान
लेसिक सर्जरी के ढेरों फायदे होने के साथ साथ इसके कुछ नुकसान भी हैं। लेसिक सर्जरी का सबसे बड़ा जोखिम यह है कि अगर यह सर्जरी एक बार असफल हो गया तो फिर आपकी आंखों का इलाज नहीं किया जा सकता है। प्रेगनेंसी के दौरान लेसिक सर्जरी नहीं कराना चाहिए क्योंकि गर्भ में पल रहे शिशु पर इस सर्जरी का गलत प्रभाव पड़ सकता है। जैसा कि हमने पहले ही बताया कि लेसिक सर्जरी बहुत ही सावधानीपूर्वक कि जाती है, अगर सर्जरी के दौरान जरा सी भी लापरवाही हुई तो आपके आंखों कि रौशनी हमेशा के लिए जा सकती है। इसलिए यह आवश्यक है कि आप लेसिक सर्जरी से कराने के लिए एक बेहतरीन डॉक्टर की टीम का चुनाव करें।
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डिस्क्लेमर: यह ब्लॉग सामान्य जानकारी के लिए लिखा गया है| अगर आप किसी बीमारी से ग्रसित हैं तो कृपया डॉक्टर से परामर्श जरूर लें और डॉक्टर के सुझावों के आधार पर ही कोई निर्णय लें|