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लिगामेंट इंजरी का बेस्ट इलाज 

लिगामेंट इंजरी के बारे में जानने से पहले आपको घुटने और लिगामेंट की संरचना (ligament injury meaning in hindi) के बारे में जानना आवश्यक है। लिगामेंट टिशूज के लोचदार रस्सीनुमा समूह होते हैं जिनका काम हड्डियों को जोड़कर रखना है। घुटनों का जोड़ शरीर के सबसे मजबूत जोड़ में से एक है। लेकिन जब घुटने में किसी तरह की कोई समस्या पैदा होती है तो नी रिप्लेसमेंट सर्जरी से उसका इलाज किया जाता है।

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आपके शरीर के ऊपरी हिस्से का सारा वजन आपके घुटनों पर पड़ता है। दैनिक जीवन के सभी गतिविधियां जैसे कि उठने, बैठने, खड़े होने, चलने आदि में घुटने एक अहम भूमिका निभाते हैं। घुटने का जोड़ ऊपर से फीमर और नीचे से टिबिया नाम की हड्डियों से बनता है तथा पैटीला नामक एक तीसरी हड्डी फीमर के अगले हिस्से में होती है।

लिगामेंट्स क्या हैं - What Is Ligament Injury In Hindi

लिगामेंट्स घुटनों को अपनी जगह पर स्थिर बनाए रखने में मदद करते हैं। लिगामेंट्स का काम घुटनों की गति को नियंत्रित और संतुलित करना है। क्रूशिएट लिगामेंट्स घुटनों के अंदर पाए जाते हैं, इनमें से इंटीरियर लिगामेंट आगे की तरफ होता है और पोस्टीरियर लिगामेंट नीचे की तरफ होता है। इनका काम घुटनों को आगे-पीछे मोड़ने में मदद करना है।

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लिगामेंट्स सॉफ्ट टिशूज होते हैं और इन्ही लिगामेंट्स के कारण हड्डियां एक दूसरे से जुड़ी होती हैं। लेकिन जब कभी अचानक से चोट लग जाने, गिरने, ऊंचाई से कूदने या दबाव पड़ने के कारण लिगामेंट्स टूट जाते हैं तो आपको घुटनों को मोड़ने में बहुत दर्द और तकलीफ होती है।

विशेषज्ञ का कहना है कि उम्र बढ़ने पर Ligament Tear in Hindi का खतरा भी बढ़ जाता है। कई बार चोट लगने के कारण वहां की हड्डी टूटती तो नहीं है, लेकिन वहां पर चोट बेशक काफी तेज पहुंचती है। चोट के कारण आप उस हिस्से और उसके आस-पास दर्द महसूस करते हैं तथा वह जगह हल्की नीली भी पड़ जाती है। इसी चोट को मेडिकल कि भाषा में लिगामेंट इंजरी और सामान्य भाषा में मोच (ligament injury in hindi) कहा जाता है।

घुटने की हड्डियों को चार लिगामेंट्स आपस में जोड़कर रखते हैं। एंटीरियर क्रूसिएट लिगामेंट फीमर और टिबिया को जोड़ता है। पोस्टीरियर क्रूसिएट लिगामेंट 'एंटीरियर क्रूसिएट लिगामेंट' की तरह ही फीमर और टिबिया को जोड़ता है। पोस्टीरियर क्रूसिएट लिगामेंट 'एंटीरियर क्रूसिएट लिगामेंट' से बड़ा और मजबूत होता है।

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लेकिन इस लिगामेंट में भी चोट लग सकती है। लेटरल कोलेटरल लिगामेंट घुटने के बगल में होता है। यह फीमर को फिबुला से जोड़ता है। फीमुला घुटने के निचले हिस्से में मौजूद एक हड्डी है। मीडियल कोलेटरल लिगामेंट घुटने के अंदरूनी हिस्से में मौजूद होता है। इसका काम एंटीरियर क्रूसिएट लिगामेंट की तरह ही फीमर को टिबिया से जोड़कर रखना है।

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लिगामेंट इंजरी का बेस्ट इलाज - Best Treatment For Ligaments (ACL) Injury In Hindi

लिगामेंट इंजरी किसी को भी हो सकती है, इसका उम्र से कोई लेना देना नहीं है। लिगामेंट इंजरी के कई कारण हो सकते हैं। घर या मैदान में खेलते समय आपके घुटने पर घुमावदार जोर पड़ने से घुटने के एक या एक से ज्यादा लिगामेंट्स पर चोट (ligament fracture in hindi) आती है।

ज्यादातर मामलों में यह समस्या फुटबॉल, क्रिकेट, वॉलीबॉल, बास्केटबॉल खेलने वाले खिलाड़ियों और दौड़ने या दूसरी शारीरिक गतिविधियां करने वालों में देखने को मिलती है। घुटना आपके शरीर का एक ऐसा हिस्सा है जहां हल्की चोट लगने पर भी काफी तेज दर्द होता है।

लिगामेंट इंजरी का इलाज करने के ढ़ेरों तरीके मौजूद हैं जिनकी मदद से डॉक्टर आपकी इस दर्द भरी समस्या को बड़ी आसानी से दूर कर सकते हैं। अगर आपके लिगामेंट में चोट आई है तो आपको उस जगह पर मालिश नहीं करना चाहिए तथा उसे गर्म पानी से धोना भी नहीं चाहिए। ऐसा करने से आपकी प्रॉब्लम और बढ़ सकती है।

लिगामेंट में चोट लगने की स्थिति में आपको उस जगह पर बर्फ लगाना चाहिए और अपने घुटनों को हल्का ऊंचाई पर रखना चाहिए। जब तक इलाज संपूर्ण नहीं हो जाता, आपको उन सभी खेल कूद में हिस्से लेने से बचना चाहिए जिससे आपके घुटनों पर प्रेशर पड़ सकता है।

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लिगामेंट इंजरी होने पर सीधा डॉक्टर के पास जाएं। वे आपके लिगामेंट की स्थिति को देखने के बाद इलाज की प्रक्रिया का चुनाव करते हैं। इलाज की पहली प्रक्रिया के तौर पर वे आपको कुछ दवाओं का सेवन करने की सलाह दे सकते हैं। अगर दवा से फायदा नहीं हुआ तो फिर प्लास्टर बांध सकते हैं तथा गंभीर चोट होने पर एसीएल सर्जरी करने का भी सुझाव दे सकते हैं।

सर्जरी की मदद से लिगामेंट इंजरी को (knee ligament injury in hind) काफी कम समय में बहुत आसानी से ठीक किया जा सकता है। मेडिकल साइंस में विकास होने के कारण आज सर्जरी के ढेरों ऐसे उपाय मौजूद हैं जिनकी मदद से बिना चिर-फाड़ किए ही लिगामेंट इंजरी का इलाज आसानी से सफलतापूर्वक पूरा किया जा सकता है। एसीएल रिकंस्ट्रक्शन को एसीएल इंजरी का बेस्ट इलाज माना जाता है।

लिगामेंट से बचने के लिए खासकर खिलाड़ियों को अच्छे फुटवियर्स का चुनाव करना चाहिए। साथ ही साथ उन्हें एक्सरसाइज की मदद से अपने पैरों की मांसपेशियों को मजबूत और लचीला बनाए रखना चाहिए। क्योंकि इससे लिगामेंट इंजरी और उससे होने वाली तकलीफ की संभावना काफी कम हो जाती है।

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प्रिस्टीन केयर में एसीएल रिकंस्ट्रक्शन सर्जरी कराएं

अगर आपके लिगामेंट में चोट है और आप एसीएल रिकंस्ट्रक्शन सर्जरी से अपना इलाज करना चाहते हैं तो प्रिस्टीन केयर से संपर्क कर सकते हैं। हमारे क्लिनिक में मॉडर्न और एडवांस सर्जरी से लिगामेंट का बेस्ट इलाज किया जाता है। इस सर्जरी को एक अनुभवी, कुशल और विश्वसनीय हड्डी रोग विशेषज्ञ के द्वारा पूरा किया जाता है। हमारे क्लिनिक में लिगामेंट की सर्जरी कराने के निम्नलिखित फायदे हैं:-

01. अनुभवी और विश्वसनीय सर्जन

हमारे क्लिनिक में देश के बेहतरीन आर्थोपेडिक सर्जन हैं। इन्हें जोड़ों की गहरी समझ और एसीएल रिकंस्ट्रक्शन में महारत हासिल है। ये सर्जन अब तक लिगमेंट की अनेकों सफल सर्जरी कर चुके हैं। ये अपने सालों के अनुभव और मॉडर्न मेडिकल टेक्नोलॉजी से आपकी परेशानी को बहुत आसानी से दूर कर सकते हैं।

आगे पढ़ें:- आर्थ्रोस्कोपी सर्जरी में कितना खर्च आता है?

02. एक दिन की प्रक्रिया है

हमारे क्लिनिक में एसीएल रिकंस्ट्रक्शन एक दिन की सर्जिकल है जिसे पूरा होने में लगभग 30 मिनट का समय लगता है। सर्जरी खत्म होने के कुछ ही घंटों बाद डॉक्टर आवश्यक दवाएं निर्धारित करके मरीज को क्लिनिक से डिस्चार्ज कर देते हैं। आप मात्र एक दिन में अपनी सर्जरी कराकर वापस अपने घर जा सकते हैं। इससे आपका समय और पैसा दोनों ही बचता है।

03. जटिलताओं का खतरा कम से कम होता है

हमारे क्लिनिक में एसीएल रिकंस्ट्रक्शन सर्जरी को मॉडर्न और एडवांस आर्थ्रोस्कोपी से किया जाता है। इसलिए इस प्रक्रिया के दौरान और बाद में साइड इफेक्ट्स या जटिलताओं का खतरा कम से कम होता है। इस सर्जरी के दौरान बहुत ही छोटा सा कट लगाया जाता है जिसके कारण ब्लीडिंग होने का खतरा लगभग खत्म हो जाता है।

04. सर्जरी वाले दिन फ्री कैब फैसिलिटी

एसीएल रिकंस्ट्रक्शन सर्जरी वाले दिन हम मरीजों को फ्री कैब फैसिलिटी देते हैं जिसमें सर्जरी से पहले मरीज को हॉस्पिटल लाना और सर्जरी खत्म होने के बाद हॉस्पिटल से वापस घर छोड़ना शामिल है। इस सुविधा से हम यह सुनुश्चित करते हैं कि मरीजों को सर्जरी वाले दिन यात्रा या यात्रा के दौरान सेफ्टी को लेकर किसी तरह की कोई चिंता न करनी पड़े।

05. सभी इंश्योरेंस कवर किए जाते हैं

इन सबके अलावा, हमारे क्लिनिक में सभी इंश्योरेंस को कवर किया जाता है। अगर आपके पास इंश्योरेंस है तो उसकी मदद से आप अपने पॉकेट से होने वाले खर्च को काफी हद तक कम कर सकते हैं। क्योंकि आपकी सर्जरी के खर्च का कुछ प्रतिशत आपके इंश्योरेंस से कवर किया जा सकता है। साथ ही, आप 100% भी इंश्योरेंस क्लेम कर सकते हैं।

इसे पढ़ें:- रूमेटाइड आर्थराइटिस का कारण, लक्षण और इलाज

06. केयर बड्डी की सुविधा है

आपके हॉस्पिटल पहुंचने से पहले हमारी तरफ से एक केयर बड्डी वहां पहले से ही मौजूद रहता है जो आपके बदले हॉस्पिटल के सभी पेपरवर्क को पूरा करता है। साथ ही, आप जब तक हॉस्पिटल में रुकते हैं वह आपके जरूरतों का ध्यान रखता है। केयर बड्डी आपके हॉस्पिटल एडमिशन से लेकर डिस्चार्ज की प्रक्रिया तक साथ रहता है। इसलिए आपको किसी भी चीज के बारे में ज्यादा टेंशन लेने की जरूरत नहीं पड़ती है।

अगर आप बिना किसी परेशानी का सामना किए अपने शहर या उसके आस पास के टॉप रेटेड क्लिनिक में कॉस्ट इफेक्टिव एसीएल रिकंस्ट्रक्शन सर्जरी कराना चाहते हैं तो हमसे संपर्क कर सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एसीएल इंजरी का इलाज कैसे किया जाता है?

एसीएल का इलाज कई तरह से किया जाता है जिसमें दवाओं, क्रीम और तेल का इस्तेमाल और सर्जरी शामिल हैं। डॉक्टर इलाज के कौन से माध्यम का चुनाव करते हैं यह पूरी तरह से आपकी स्थिति और उसकी गंभीरता पर निर्भर करता है।

एसीएल सर्जरी में कितना खर्च आता है?

एसीएल इंजरी की सर्जरी को एसीएल रिकंस्ट्रक्शन के नाम से जाना जाता है। एसीएल सर्जरी का खर्च लगभग 120000 रुपए से लेकर 150000 रुपए तक आता है। लेकिन यह एसीएल रिकंस्ट्रक्शन का फाइनल कॉस्ट नहीं है। क्योंकि इस सर्जरी का खर्च काफी चीजों पर निर्भर करता है जैसे कि:-

  • एसीएल चोट की गंभीरता
  • मरीज का ओवरऑल हेल्थ
  • डॉक्टर की फीस
  • क्लिनिक की छवि
  • हॉस्पिटलाइजेशन
  • सर्जरी के बाद फॉलो-अप्स मीटिंग

एसीएल सर्जरी के बाद ठीक होने में कितना समय लगता है?

एसीएल सर्जरी के 2-4 सप्ताह के बाद मरीज आराम से चलना-फिरना शुरू कर सकते हैं। हालांकि, सर्जरी के बाद पूरी तरह से ठीक होने में लगभग 6-12 महीने तक का समय लगता है।

एसीएल सर्जरी को पूरा होने में कितना समय लगता है?

एसीएल सर्जरी को पूरा होने में लगभग 1-3 घंटे का समय लगता है। यह एक दिन की सर्जिकल प्रक्रिया है जिसके बाद मरीज को हॉस्पिटलाइजेशन की जरूरत नहीं पड़ती है। सर्जरी खत्म होने के कुछ ही घंटों के बाद मरीज को डिस्चार्ज कर दिया जाता है।

क्या लिगामेंट की सर्जरी के दौरान दर्द होता है?

नहीं, लिगामेंट की सर्जरी के दौरान मरीज को जरा भी दर्द या दूसरी किसी तरह की कोई परेशानी नहीं होती है। इस सर्जरी को एनेस्थीसिया के प्रभाव में किया जाता है जिसके कारण सर्जरी के दौरान होने वाले दर्द का खतरा खत्म हो जाता है। अगर आप दर्द या ब्लीडिंग का सामना किए बिना अपने टूटे लिगामेंट्स का बेस्ट इलाज पाना चाहते हैं तो एसीएल रिकंस्ट्रक्शन आपके लिए सबसे बेहतर विकल्प है।

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डिस्क्लेमर: यह ब्लॉग सामान्य जानकारी के लिए लिखा गया है| अगर आप किसी बीमारी से ग्रसित हैं तो कृपया डॉक्टर से परामर्श जरूर लें और डॉक्टर के सुझावों के आधार पर ही कोई निर्णय लें|

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