एंटीरियर क्रूसिएट लिगामेंट इंजरी को आमतौर पर एसीएल चोट या एसीएल चोट के नाम से जाना जाता है। एसीएल चोट किसी भी आ सकती है, लेकिन अधिकतर मामलों में यह खिलाड़ियों में देखने को मिलता है। फुटबॉल, क्रिकेट, बास्केटबॉल, सॉकर, हॉकी या दूसरे खेल के दौरान अक्सर खिलाड़ियों के घुटनों में चोट आ जाती है।
इतना ही नहीं, कई बार चलते, दौड़ते, ऊंचाई से कूदते, पैरों के मुड़ने या अचानक से गिरने के कारण भी घुटने में चोट आ जाती है। इसी घुटने की चोट को मेडिकल की भाषा में एंटीरियर क्रूसिएट लिगामेंट (एसीएल) चोट कहा जाता है।
एसीएल चोट का इलाज कई तरह से किया जाता है। लेकिन सर्जरी को इसका बेस्ट इलाज माना जाता है।
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सर्जरी के बिना एसीएल चोट का इलाज कैसे किया जाता है?
एसीएल चोट सामान्य या गंभीर हो सकता है। आमतौर पर जब एसीएल चोट सामान्य यानी माइल्ड होता है तो इसका इलाज करने के लिए डॉक्टर कुछ खास प्रकार की दवाओं और क्रीम के इस्तेमाल की सलाह देते हैं। कुछ मामलों में प्लास्टर लगाने की भी आवश्यकता पड़ सकती है। लिगामेंट्स में हल्की चोट आने पर इन तीनों माध्यमों का उपयोग किया जा सकता है।
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लेकिन चोट गंभीर होने या लिगामेंट्स टूट जाने पर डॉक्टर सर्जरी करने का सुझाव देते हैं। क्योंकि सर्जरी से एसीएल चोट को बहुत ही कम समय में काफी आसानी ठीक किया जा सकता है। सर्जरी को एसीएल चोट का सबसे प्रभावशाली इलाज माना जाता है।
गंभीर एसीएल चोट होने पर मरीज को जल्द से जल्द सर्जरी का चुनाव करना चाहिए, ताकि घुटने के अंदर मौजूद मिनिस्कस और कार्टिलेज को खराब होने से बचाया जा सके।
एसीएल चोट का सर्जिकल इलाज — Surgical Treatment For Anterior Cruciate Ligament (ACL) Injury In Hindi
एसीएल सर्जरी इलाज की एक प्रक्रिया है, जिसके दौरान घुटने के सबसे बड़े लिगामेंट यानी इंटीरियर क्रूसिएट लिगामेंट को ठीक किया जाता है या फिर लिगामेंट के ठीक नहीं होने पर उसे हटाकर, उसकी जगह पर एक सही लिगामेंट को लगा दिया जाता है। यह सर्जरी बहुत ही आसान, सरल, सफल और बिलकुल सुरक्षित प्रक्रिया है।
इस सर्जिकल प्रक्रिया को पूरा होने में लगभग आधा से एक घंटा का समय लगता है। सर्जरी ख़त्म होने के कुछ ही घंटों के बाद मरीज अपने घर जाने के लिए तैयार हो जाते हैं तथा काफी कम समय में आप पूरी तरह से ठीक भी हो जाते हैं।
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लिगामेंट की सर्जरी की शुरुआत में डॉक्टर मरीज के घुटने में लोकल एनेस्थीसिया देते हैं, जिसके कारण सर्जरी वाला क्षेत्र पूरी तरह से सुन्न हो जाता है। नतीजतन सर्जरी के दौरान मरीज को जरा भी दर्द या दूसरी किसी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता है।
उसके बाद, डॉक्टर मरीज के घुटने में एक छोटा सा कट यानी चीरा लगाते हैं और फिर इस चीरे के माध्यम से एक सर्जिकल उपकरण को शरीर के अंदर डालते हैं। डॉक्टर फटे हुए लिगामेंट को घुटने से बाहर निकालकर उस जगह को अच्छी तरह से साफ करते हैं। उसके बाद, पुराने लिगामेंट की जगह पर एक नया लिगामेंट सेट कर देते हैं।
लिगामेंट को लगाने के बाद, कट को बंद कर दिया जाता है। सर्जरी ख़त्म होने के बाद मरीज को कुछ समय के लिए रिकवरी रूम में रखा जाता है, जहां डॉक्टर उनके स्वास्थ्य को मॉनिटर करते हैं। अंतत: सभी चीजें नॉर्मल होने पर डॉक्टर मरीज को हॉस्पिटल से डिस्चार्ज कर देते हैं।
अपने शहर में एसीएल चोट का बेस्ट इलाज पाएं
अगर चलते, दौड़ते, ऊंचाई से कूदते या किसी प्रकार का खेल खेलते समय आपके घुटने में चोट आ गयी है और आपको चलने-फिरने, उठने-बैठने या पैरों को मोड़ने या इससे संबंधित किसी भी प्रकार के काम को करते समय घुटने में तेज दर्द होता है तो इसका मतलब यह हुआ कि आपको एसीएल चोट आई है।
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एसीएल में चोट आने पर तुरंत एक अनुभवी हड्डी रोग विशेषज्ञ से परामर्श करना चाहिए। अगर आप अपने शहर में एसीएल चोट का बेस्ट सर्जिकल इलाज पाना चाहते हैं तो प्रिस्टीन केयर से संपर्क कर सकते हैं। हमारे क्लिनिक में मॉडर्न और एडवांस कार्पल टनल रीलिज सर्जरी से इस समस्या का बेहतर इलाज किया जाता है।
निष्कर्ष
इंसान के शरीर में चार तरह के लिगामेंट्स होते हैं, जिसमें दो लिगामेंट्स कोलेटेरल और दो क्रूसिएट होते हैं। एक कोलेटरल लिगामेंट घुटने के अंदर और दूसरा घुटने के बाहर होता है। इन दोनों ही लिगामेंट्स का काम घुटनों की गति को नियंत्रित और संतुलित रखना है।
क्रूसिएट लिगामेंट्स घुटनों के अंदर पाए जाते हैं, जिसमें एंटीरियर लिगामेंट्स घुटने के आगे की तरफ होता है और पोस्टीरियर लिगामेंट घुटने के नीचे की तरफ होता है। इन दोनों लिगामेंट्स की मदद से घुटने बहुत आसानी से आगे पीछे मुड़ते हैं। लिगामेंट्स का काम घुटनों को अपनी जगह पर स्थित बनाकर रखना है।
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लेकिन लिगामेंट्स में किसी प्रकार का चोट लग जाने के कारण मरीज को चलने फिरने में काफी दर्द और परेशानियों का सामना करना पड़ता है। एंटीरियर क्रूसिएट लिगामेंट होने पर मरीज को जल्द से जल्द एक विशेषज्ञ डॉक्टर से मिलकर इस बारे में बात करनी चाहिए।
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डिस्क्लेमर: यह ब्लॉग सामान्य जानकारी के लिए लिखा गया है| अगर आप किसी बीमारी से ग्रसित हैं तो कृपया डॉक्टर से परामर्श जरूर लें और डॉक्टर के सुझावों के आधार पर ही कोई निर्णय लें|