एनल फिशर क्या है? जानें कारण, लक्षण और इलाज

एनल फिशर क्या है? (Fissure in Hindi)

गुदा में जब कोई कट या दरार बन जाता है तो इस स्थिति को एनल फिशर कहते हैं। यह एक गंभीर शारीरिक बीमारी है जिसकी वजह से मरीज को शौंच के दौरान बहुत परेशानियों का सामना करना पड़ता है। पेट में कब्ज होने की वजह से मल कठोर हो जाता है और जब मरीज इसे पास करता है तब इसके कारण एनल के अंदर की स्किन पर प्रेशर पड़ता है और गुदा के आंतरिक त्वचा में दरारें आ जाती हैं।

Anal Fissure Meaning in Hindi – एनल फिशर को हिंदी में गुदा विदर कहते हैं। 

फिशर होने पर मल निकास के समय मरीज को गुदा में दर्द महसूस होता है और कभी-कभी मल के साथ खून भी आता है। यह बीमारी छोटे बच्चों में बहुत कॉमन है, लेकिन यह किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकती है। लेजर ट्रीटमेंट को फिशर के इलाज का सबसे बेहतर माध्यम माना जाता है। क्योंकि लेजर के जरिए इस बीमारी को हमेशा के लिए खत्म किया का सकता है।

एनल फिशर के प्रकार (Types of Anal Fissure in Hindi)

अवस्था के आधार पर एनल फिशर को दो भागों में वर्गीकृत किया गया है-

  1. तीव्र फिशर- फिशर के इस प्रकार में दरार गहरा नहीं होता है। तीव्र फिशर कुछ दवाइयों और घरेलू उपचार की मदद से ठीक हो जाता है।
  2. क्रोनिक फिशर- इसमें गहरा दरार होता है, जब तीव्र फिशर को लाइलाज छोड़ दिया जाता है तब यह क्रोनिक फिशर में तब्दील हो जाता है। फिशर के इस प्रकार से छुटकारा पाने के लिए सर्जरी की जाती है।

एनल फिशर के कारण (Causes of Fissure in Hindi)

हर बीमारी की तरह फिशर होने के भी कुछ कारण हैं। अगर समय पर इन कारणों पर ध्यान दिया जाए और कुछ सावधानियां बरती जाएं तो इस बीमारी को होने से रोका जा सकता है। नीचे फिशर के कुछ खास कारण दिए गए हैं जिन पर अंकुश लगाना बहुत जरूरी है:

  • पुराना कब्ज होना
  • पेट में गैस होना
  • दवाई का साइड इफेक्ट
  • फास्ट फूड खाना
  • मिर्च और तीखी चीज खाना
  • ज्यादा मसालेदार पदार्थ खाना
  • मैदा से बनी हुई चीज खाना
  • कम पानी पीना
  • लंबे समय तक एक जगह बैठना
  • प्रेगनेंसी के दौरान कब्ज होना
  • अल्सरेटिव कोलाइटिस होना
  • इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज होना
  • लगातार डायरिया रहना
  • एनल स्फिंटर मसल्स का टाइट होना
  • यौन संचारित बीमारी
  • दाद होना

एनल फिशर के लक्षण (Symptoms of Fissure in Hindi)

फिशर में मरीज को मल त्याग के समय बहुत तेज दर्द होता है। कई बार दर्द मरीज के सहनशक्ति से बाहर होता है। अगर आपको नीचे दिए गए लक्षणों में से कोई भी लक्षण खुद में दिखाई दें तो तुरंत ही डॉक्टर से मिलना चाहिए। फिशर के ढेरों लक्षण हैं, लेकिन हम नीचे कुछ खास लक्षणों के बारे में बता रहे हैं जिसकी मदद से आपको इस बीमारी का सही समय पर उचित उपचार करवाने में मदद मिलेगी।

  • एनल में सूजन होना 
  • स्टूल (मल) पास करते समय दर्द होना
  • मल में खून आना
  • कभी-कभी तेज दर्द होना
  • गुदा के आस-पास खुजली और जलन होना 
  • एनल से पस निकलना
  • एनल के आस-पास की त्वचा में दरार दिखाई देना
  • एनल फिशर के पास की स्किन पर गांठ दिखाई देना

एनल फिशर का निदान

डॉक्टर आपकी मेडिकल हिस्ट्री जानने के साथ-साथ गुदा के त्वचा की जाँच करेंगे, इस दौरान वे मैग्नीफाइंग लेंस का भी इस्तेमाल कर सकते हैं और अपनी ल्युब्रिकेटेड फिंगर को गुदा मार्ग के अंदर प्रवेश कर सकते हैं। तीव्र एनल फिशर में ताजा कट दिखाई देता है, जबकि क्रोनिक एनल फिशर में गहरा दरार होता है। कई बार डॉक्टर को निदान करने के लिए कई तरह के टेस्ट करने की आवश्यकता पड़ सकती है। फिशर का निदान करने के लिए निम्नलिखित जाँच किए जा सकते हैं-

  • एनोस्कोपी – एनोस्स्कोप ट्यूब की तरह दिखने वाला एक उपकरण है जिसे गुदा के भीतर प्रवेश करके आंतरिक स्थिति का जायजा लिया जाता है।
  • फ्लेक्सिबल सिग्मोइडोस्कोपी- एक पतली लचीली ट्यूब (जिसके अंत में कैमरा लगा होता है) को गुदा के भीतर डालकर आंतरिक कंडीशन को कंप्यूटर स्क्रीन पर देखा जाता है। यह ट्यूब बृहदान्त्र के नीचे तक जाएगी और उसके आस-पास के स्थिति का जायजा करेगी।
  • कोलोनोस्कोपी – इस नैदानिक प्रक्रिया में लचीली ट्यूब के जरिए पूरे बृहदान्त्र के तस्वीर को कंप्यूटर स्क्रीन पर देखा जाता है।

एनल फिशर के जोखिम कारक – Risk Factors

एनल फिशर किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकता है, लेकिन 20 वर्ष से 40 वर्ष तक की उम्र के लोगों में इसके होने की संभावना बहुत अधिक होती है।

कई ऐसी मेडिकल अवस्थाएं हैं जिनके कारण एनल फिशर हो सकता है-

  • गुदा कैंसर
  • ल्यूकेमिया
  • एसटीडी और एच.आई.वी.
  • अन्य स्थितियाँ, जैसे- क्रोहन या अल्सरेटिव कोलाइटिस
  • कब्ज

हालांकि, इन सब में एनल फिशर होने के पीछे कब्ज का बहुत बड़ा हाथ होता है। इसलिए, कब्ज को नियंत्रित करें और एक जगह पर ज्यादा देर तक बैठे रहने से परहेज करें।

पढ़ें- कब्ज का घरेलू उपचार कैसे करें

एनल फिशर का उपचार (Treatment of Fissure in Hindi)

आमतौर पर फिशर खुद ही हील हो जाता है, परन्तु यदि यह एक सप्ताह से अधिक का हो गया है और  स्थिति में कोई सुधार देखने को नहीं मिलता है तो उपचार के लिए डॉक्टर से सलाह लेना चाहिए।

फिशर को तीन तरीकों से ठीक किया जा सकता है-

घरेलू इलाज

प्रारंभिक चरण के फिशर को नीचे दिए गए कुछ घरेलू उपचार की मदद से ठीक किया जा सकता है-

  • मल कोमल करने के लिए खूब पानी पिएं, इससे दरार का आकार नहीं बढ़ेगा।
  • एलोवेरा के लेप को एनल फिशर से प्रभावित क्षेत्र में लगाएं, इससे दर्द और जलन कम होगा।
  • कब्ज को नियंत्रित करने के लिए आप डॉक्टर से किसी अच्छे लेक्सेटिव की सलाह भी ले सकते हैं।
  • कब्ज और पाचन संबंधी विकार पैदा करने वाले खाद्य पदार्थों (जैसे- तैलीय, जंक फूड, तली-भुनी चीजें आदि) से संपर्क न करें और फाइबर का भरपूर सेवन करें।
  • मल को कभी न रोकें, इससे यह कड़ा हो जाता है और मलत्याग के दौरान गुदा क्षेत्र में दरार आने के बहुत अधिक चांसेस होते हैं।
  • पाचन सही रखने के लिए आप सोने से पहले काला नमक और आजवाइन का सेवन कर सकते हैं।
  • एनल फिशर के लिए स्मूथ क्रीम का उपयोग किया जा सकता है।

अधिक पढ़ें – फिशर का घरेलू इलाज

दवाइयाँ एवं क्रीम

यदि डॉक्टर के निदान से यह पता चलता है कि एनल फिस्टुला क्रोनिक नहीं है तो डॉक्टर कुछ दवाइयाँ और क्रीम लिखेंगे। फिशर होने पर नीचे दी गई कुछ आम क्रीम और टेबलेट उपयोग में लाए जा सकते हैं।

क्रीम

  • एस्कोट क्रीम (Escot Cream)
  • स्मूथ क्रीम (Smuth Cream)
  • नागार्जुन पिलोरिड मरहम (Nagarjuna Pilorid Ointment)

गोली

  • नाइट्रोकांटिन (nitrocontin)
  • जीटीएन सॉर्बिट्रेट सीआर (GTN Sorbitrate CR)
  • श्वबे रतनहिया सीएच (Schwabe Ratanhia CH)

सर्जरी

यदि एनल फिशर की अवधि 8 सप्ताह से अधिक हो गई है और कोई उपचार इसे ठीक कर पाने में सफल नहीं हुए हैं तो इलाज के लिए डॉक्टर सर्जरी की सलाह देते हैं। एनल फिशर का उपचार के लिए दो प्रकार की सर्जरी की जा सकती हैं-

  • ओपन सर्जरी – इसमें सर्जिकल उपकरण की मदद से स्फिन्क्टर मसल्स में एक कट किया जाता है और उसे हील करने के लिए खुला छोड़ दिया जाता है। इस प्रक्रिया को ओपन स्फिंक्टेरोटोमी कहते हैं। क्लोज्ड स्फिंक्टेरोटॉमी में सर्जन, स्फिंक्टर मांसपेशी तक पहुंचने के लिए त्वचा के नीचे ब्लेड चलाते हैं।
  • लेजर सर्जरी – इस प्रक्रिया में आंतरिक स्फिंक्टरोटॉमी करने के लिए लेज़र किरण का उपयोग होता है। यह प्रक्रिया रक्तरहित होती है और रोगी को कोई दर्द नहीं होता है। लेजर बीम की एक निश्चित फ्रीक्वेंसी को दरार वाले स्थान पर डाला जाता है और दरार हमेशा के लिए ख़तम हो जाते हैं। फिशर के इलाज की यह प्रक्रिया बिलकुल दर्दरहित है। यह 30 मिनट की एक सर्जिकल प्रक्रिया है जिसमें मरीज को कोई कट या टांकें नहीं आते हैं। साथ ही सर्जरी के 24 घंटे के भीतर मरीज को डिस्चार्ज कर दिया जाता है और मरीज सर्जरी के 48 घंटे के बाद पूरी तरह से फिट हो जाता है। इलाज के दूसरे माध्यम की तुलना में लेजर सर्जरी इलाज का सबसे प्रभावशाली माध्यम माना जाता है।

Pristyn Care से कराएं फिशर की लेजर सर्जरी

प्रिस्टीन केयर आपके शहर में फिशर का इलाज लेजर सर्जरी के द्वारा करता है जिसके बाद इस बीमारी के पुनः होना का बिल्कुल खतरा नहीं होता है। फिशर की लेजर सर्जरी Pristyn Care के बहुत ही अनुभवी डॉक्टर द्वारा की जाती है, इन डॉक्टर को लेजर सर्जरी और फिशर की बहुत ही गहन जानकारी है। सर्जरी से पहले बीमारी और उसकी स्थित को जानने के लिए डॉक्टर मरीज की जांच करते हैं, जिसमें शारीरिक जांच, एनल के आस पास के क्षेत्र का जेंटल इंस्पेक्शन किया जाता है।

Pristyn Care मरीजों की असुविधाओं को कम करने के लिए निम्न सुविधाएँ प्रदान करता है-

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निष्कर्ष

एनल फिशर के लिए लेजर सर्जरी सबसे उत्तम विकल्प है, जिसमें रोगी उपचार के दो दिन बाद आसानी से अपने ऑफिस में जा सकता है और एक से डेढ़ सप्ताह के भीतर जख्म से पूर्ण राहत मिल जाती है। कोई कट नहीं होता है और कोई निशान नहीं बनता है।

समय पर फिशर का इलाज नहीं किया गया तो क्रोनिक एनल फिशर, एनल फिस्टुला और एनल एस्टेनोसिस होने का खतरा बढ़ जाता है।

डिस्क्लेमर: यह ब्लॉग सामान्य जानकारी के लिए लिखा गया है| अगर आप किसी बीमारी से ग्रसित हैं तो कृपया डॉक्टर से परामर्श जरूर लें और डॉक्टर के सुझावों के आधार पर ही कोई निर्णय लें|

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Updated on 1st January 2026

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