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थायराइड क्या है (What Is Thyroid In Hindi)

थायराइड गर्दन के निचले हिस्से में स्थित एक तितली नुमा ग्रंथि है। यह ग्रंथि ट्राईआयोडोथायरोनिन (टी3) और थायरोक्सिन (टी4) हार्मोन स्रावित करती है, जिसे हम थायराइड हार्मोन भी कहते हैं। ये हार्मोन शरीर की कई गतिविधियों को नियंत्रित करते हैं जैसे कि आपके हार्ट बीट रेट और कैलोरी की खपत को नियंत्रित करना आदि।

थायराइड हार्मोन क्या काम करता है?

थायराइड हार्मोन शरीर के प्रत्येक सेल्स और अंगों को नियंत्रित करते हैं, इनके निम्न कार्य होते हैं:-

  • कैलोरी के खपत की दर को नियंत्रित करते हैं। इस तरह से ये वजन घटने या बढ़ने के लिए जिम्मेदार होते हैं।
  • हृदय गति नियंत्रित करने में योगदान निभाते हैं। यह हृदय की गति को तीव्र या धीमा कर सकते हैं।
  • शरीर के तापमान को नियंत्रित करते हैं। ये तापमान को बढ़ा और घटा सकते हैं।
  • मांसपेशियों के सिकुड़ने की गतिविधि को नियंत्रित करते हैं।

थायराइड से जुड़ी कुछ सामान्य समस्याएं हैं जो नीचे दी गई हैं:

जब थायराइड ग्रंथि शरीर की जरूरत से ज्यादा या कम मात्रा में हार्मोन बनाता है तब थायराइड से जुड़ी कुछ समस्याओं का जन्म हो जाता है। क्योंकि इससे पूरे शरीर के काम करने का संतुलन बिगड़ जाता है।

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साथ ही, थायराइड ग्रंथि में कैंसर युक्त कोशिकाओं (Cancerous cells) के बनने या सूजन होने के कारण हार्मोन्स असंतुलित हो जाते हैं। रिसर्च के मुताबिक संसार में पुरुषों की तुलना में महिलाएं थायरराइड से जुड़े रोगों का अधिक शिकार होती हैं। 0.5% पुरुषों की तुलना में 5% महिलाएं थायरोइड के रोगों की मरीज होती हैं।

हाइपरथायराइडिज्म (Hyperthyroidism In Hindi)

इस स्थिति में थायराइड ग्रंथि ज्यादा एक्टिव हो जाता है, जिसकी वजह से थायराइड हार्मोन जरूरत से जयादा डिस्चार्ज होने लगता है।

हाइपोथायराइडिज्म (Hypothyroidism In Hindi)

इस स्थिति में थायराइड ग्रंथि जरूरत से कम मात्रा में थायराइड हार्मोन को डिस्चार्ज करती है।

थायराइड कैंसर (Thyroid Cancer In Hindi)

ये स्थिति एंडोक्राइम कैंसर का सबसे खतरनाक रूप है। टिश्यू के आधार पर थायराइड कैंसर को दो वर्गों में बांटा जा सकता है।

  • डिफ्रेंशियल थायराइड कैंसर (Differential Thyroid Cancer In Hindi): पैपिलरी थायराइड कैंसर और फॉलिक्युलर थायराइड कैंसर के एक साथ होने पर डिफरेंशियल थायराइड कैंसर होता है। इस तरह का कैंसर उपकला या एपिथिलियमी कोशिकाओं के कारण होता है और यह थायराइड कैंसर का सबसे सामान्य रूप है।
  • एनाप्लास्टिक थायराइड कैंसर (Anaplastic Thyroid Cancer In Hindi): यह एक दुर्लभ और बहुत ही तेजी से बढ़ने वाला कैंसर है। केवल 2% कैंसर ही एनाप्लास्टिक थायराइड कैंसर होता है। इसका इलाज बहुत ही मुश्किल है। इस बीमारी में नई तरह की कोशिकाएं विकसित हो जाती हैं, जो थायराइड टिश्यू से बिलकुल अलग होती हैं। आमतौर पर यह कैंसर 60 या उससे अधिक उम्र के लोगों को होता है।

थायराइड रोग होने के कारण (Causes Of Thyroid Disease In Hindi)

थायराइड से जुड़े रोग होने के काफी कारण हैं, जिन्हें ध्यान में रखकर इस बीमारी से शुरूआती दौर में ही बचा जा सकता है।  

  • जरूरत से ज्यादा सोया प्रोटीन, कैप्सूल और पाउडर का सेवन करना।
  • दवाओं के साइड इफेक्ट के कारण भी थायराइड हो सकता है।
  • अधिक तनाव लेना।
  • आयोडीन की कमी या अधिकता।
  • धूम्रपान करना।
  • यह आनुवंशिक हो सकता है। अगर आपके परिवार में किसी को थायराइड रोग है तो आपको भी यह बीमारी होने के ज्यादा चांसेस हैं।
  • गर्भावस्था के समय औरत के शरीर में बड़े पैमाने पर हार्मोनल बदलाव होते हैं, जिसकी वजह से थायराइड हार्मोन प्रभावित हो सकते हैं।
  • हाशिमोटो रोग, ग्रेव्स रोग, ग्वाइटर जैसे कुछ ख़ास रोग भी इस बीमारी के लिए जिम्मेदार हो सकते हैं।

अन्य कारण

  • जब पिट्यूटरी ग्लैंड टीएसएच हार्मोन का अधिक उत्पादन करने लगता है तो थायरोइड हार्मोन का उत्पादन अधिक होने लगता है।
  • कैंसर का इलाज करते समय गर्दन के आसपास रेडिएशन थेरेपी होने के कारण थायराइड होने के अधिक चांसेस होते हैं।
  • ओवरएक्टिव थायरॉयड ग्रंथि का इलाज करने में रेडियोएक्टिव आयोडीन का इस्तेमाल किया जाता है, जिसकी वजह से थायराइड ग्लैंड की कोशिकाएं नष्ट हो जाती है और हाइपोथायराइडिज्म हो जाता है।
  • कैंसर, दिल और मनोरोग संबंधी समस्याओं के इलाज में इस्तेमाल की जाने वाली कुछ दवाएं, जैसे कि कोरडारोन (cordarone), लिथियम (lithium), इंटरफेरॉन अल्फा (interferon alfa) और इंटरल्यूकीन-2 (interleukin2) आदि थायराइड हार्मोन के उत्पादन को कम कर देती हैं या फिर रोक देती है, जिसकी वजह से थायराइड से जुड़ी कई समस्याएं हो सकती हैं।  
  • सभी हार्मोन आपस में एक दूसरे से जुड़े होते हैं। अगर किसी भी एक हार्मोन में किसी तरह की दिक्कत आई तो वह थायराइड को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकता है। कम एस्ट्रोजन, इन्सुलिन रेसिस्टेंस और कम टेस्टोस्टेरोन थायराइड के फंक्शन में बाधा डालते हैं।

थायराइड रोग के लक्षण (Symptoms Of Thyroid In Hindi)

काम न करने के बावजूद भी थकान महसूस करना, खान पान पर ध्यान देने के बाद भी वजन का तेजी से बढ़ना या घटना जैसे कितने ही बदलाव शरीर में होते हैं। लेकिन शुरुआत में हम इसे हल्के में ले लेते हैं, जो बाद में गंभीर बीमारी का संकेत निकलते हैं, थायरोइड की समस्या भी कुछ ऐसी ही है।

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व्यक्ति का मूड़, इम्यूनिटी, एनर्जी लेवल, पाचन क्रिया, यौन शक्ति और मेटाबॉलिज्म आदि सभी चीजें थायराइड के नियंत्रण में होती हैं। यही कारण है कि जब आपका थायराइड सही तरीके से काम नही करता है तो सेहत बिगड़ जाती है और आपको इसके काफी लक्षण नजर आते हैं।

हाइपरथायराइडिज्म के लक्षण

जब थायराइड हर्मोन ज्यादा हो जाते हैं तो निम्न लक्षण दिखाई देते हैं:-

  • चयापचय का दर अधिक हो जाता है। फलस्वरूप, व्यक्ति के शरीर का वजन कम होने लगता है और भूख अधिक लगती है।
  • घबराहट
  • हर बात में चिड़चिड़ाहट होना
  • जरूरत से अधिक पसीना आना
  • हाथों में कंपन।
  • बालों का पतला होना झड़ना
  • नींद नहीं आती है
  • दस्त
  • मांसपेशियों में कमजोरी महसूस होती है और दर्द होता है
  • हार्ट रेट बढ़ जाता है
  • महिलाओं में मासिक धर्म की अनियमितता देखी जाती है
  • ऑस्टियोपोरोसिस (Osteoporosis) हो जाता है, इस रोग में हड्डियाँ कमजोर और नाजुक हो जाती हैं

हाइपोथायरायडिज्म के लक्षण

जब थायराइड हार्मोन कम हो जाते हैं तो निम्न लक्षण दिखाई देते हैं:-

  • हार्ट बीट रेट कम हो जाता है
  • व्यक्ति हमेशा थकान महसूस करता है
  • अवसाद (Depression)
  • थोड़े से ही बदलाव में सर्दी हो जाना
  • मेटाबोलिज्म रेट कम हो जाने के कारण वजन बढ़ना
  • नाखून पतले हो जाते हैं और टूटने लगते हैं
  • सामान्य से कम पसीना आना
  • त्वचा में सूखापन आना और खुजली होना
  • माँसपेशियों में अकड़न और जोड़ों में दर्द होना (इसे पढ़ें: जोड़ों के दर्द का इलाज)
  • बालों का  सामान्य से अधिक झड़ना
  • कब्ज
  • आँखों में सूजन
  • कोई भी चीज बार-बार भूलना
  • हमेशा कन्फ्यूजन में रहना
  • सोचने-समझने में असमर्थ होना
  • पीरियड साइकिल का अनियमित होना
  • चेहरे और आँखों में सूजन।
  • रक्त में कोलेस्ट्रॉल (Cholestrol) का स्तर बढ़ जाना
  • महिलाओं में बांझपन आ सकता है

थायराइड रोग से बचाव – Prevention From Thyroid In Hindi

थायराइड रोग होने के कारणों को नियंत्रित करके आप थायराइड रोग से बचाव कर सकते हैं।

  • तनाव थायराइड के फंक्शन को बिगाड़ने में बहुत बड़ा रोल प्ले करता है। डॉक्टर के मुताबिक बहुत सारे मरीजों का ऐसा मानना है कि उन्हें थायराइड की समस्या उनके जीवन में तनाव आने के बाद से ही शुरू हुई है। इसलिए तनाव से बचें।
  • पैक्ड और प्रोसेस्ड फूड का सेवन न करें
  • सोया उत्पाद न खाएं
  • स्मोकिंग न करें
  • मैडिटेशन करें
  • विटामिन ए की कमी होने की वजह से थायराइड के फंक्शन में परेशानी हो सकती है। क्योंकि यह वसा में घुलने वाली विटामिन टी3 के लेवल को बढ़ाती है
  • लो सेलेनियम, लिवर में टी3 को टी4  में बदलने का काम करता है। यह हमें सेलेनियम ऑटोइम्यून थायराइड (Selenium autoimmune thyroid) समस्याओं से भी बचाता है।
  • आयोडीन थायराइड हार्मोन को बनाने में मददगार होता है। इसकी मात्रा कम या अधिक होने की वजह से थायराइड रोग पैदा हो सकता है।

थायराइड रोग का परीक्षण (Diagnosis Of Thyroid In Hindi)

थायराइड का निदान करने के लिए निम्न जाँच प्रक्रियाएं की जा सकती हैं:-

  • ब्लड टेस्ट 
  • इमेजिंग टेस्ट
  • फिजिकल एग्जाम
  • थायराइड बायोप्सी
  • ब्लड टेस्ट

ब्लड टेस्ट की मदद से थायराइड हार्मोन के स्तर और हार्मोन को प्रभावित करने वाले कारणों का पता लगाया जा सकता है। इसमें थायराइड स्टिमुलेटिंग हार्मोन (टीएसएच) की जाँच की जाती है। यह हार्मोन थायराइड को ट्राईआयोडोथायरोनिन (टी3) और थायरोक्सिन (टी4) के उत्पादन का संकेत देता है।

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टीएसएच की अधिक या कम मात्रा हाइपरथायरायडिज्म या हाइपोथायरायडिज्म होने का फैसला करती है।

इसके अलावा, थायराइड एंटीबॉडीज ब्लड टेस्ट किया जा सकता है। इससे थायराइड ऑटोइम्यून डिजीज (एक ऑटोइम्यून रोग जिसमें इम्यूनिटी सिस्टम थायराइड को क्षति पहुंचाने लगता है ) का निदान किया जाएगा।

कैल्सीटोनिन और थायरोग्लोबुलीन ब्लड टेस्ट के जरिए थायराइड कैंसर का पता लगाया जा सकता है।

  • इमेजिंग टेस्ट

थायराइड में सूजन और टिश्यू के आकार में वृद्धि की जाँच करने के लिए थायराइड स्कैन किया जा सकता है।

इसके अलावा, अल्ट्रासाउंड टेस्ट भी किया जा सकता है, जिसमें हाई फ्रीक्वेंसी साउंड वेब्स की मदद से थायराइड की संरचना का पता लगाया जाता है।

  • थायराइड बायोप्सी

यदि थायराइड में सूजन है या डॉक्टर को लगता है कि आपको थायराइड कैंसर है तो उसकी जांच के लिए थायराइड बायोप्सी की जा सकती है। इसमें डॉक्टर थायराइड के टिश्यू के एक छोटे से सैंपल को जाँच के लिए लैब में भेजते हैं।

  • फिजिकल एग्जाम

इसमें डॉक्टर बाहर से ही आपके थायराइड के क्षेत्र के उभार को देख लेते हैं। डॉक्टर अपने क्लीनिक/ऑफिस में अपने हाथों से गर्दन के निचले हिस्से की जाँच करते हैं।

थायराइड का इलाज (Treatment Of Thyroid In Hindi)

Thyroid Ka Ilaj के लिए निम्नलिखित उपचार पद्धतियां अपनाई जा सकती हैं:-

  • एंटी-थायराइड गोलियों के जरिए (Anti-thyroid Tablets For Thyroids In Hindi)

हाइपरथायरायडिज्म के केस में डॉक्टर एंटी-थायराइड दवाइयों का सेवन करने की सलाह दे सकते हैं। ये दवाइयाँ हार्मोन के उत्पादन को कम करती हैं।

  • लेवोथायरोक्सिन (Levothyroxine For Thyroids In Hindi)

ये दवा थायराइड हार्मोन के उत्पादन को बढ़ाकर हाइपोरथायरायडिज्म का उपचार करती है।

  • रेडियोएक्टिव आयोडीन उपचार (Radioactive Iodine Treatment For Thyroids In Hindi)

रेडियोएक्टिव आयोडीन एक दवा है, जिसे रोगी एक बार लेता है। इसे निगलने के बाद, यह थायराइड ग्लैंड में अवशोषित हो जाती है। डोज के अनुसार आयोडीन में मौजूद रेडियोएक्टिविटी थायराइड ग्लैंड के टिश्यू को खत्म कर देती है। इससे हाइपरथायराइडिज्म में आराम मिलता है। यह उपचार थायराइड कैंसर होने पर भी इस्तेमाल किया जाता है।

  • सर्जरी के जरिए (Surgery For Thyroid In Hindi)

थायराइड रोग के लिए सर्जरी को सबसे बेहतर उपचार माना जाता है। यह  बहुत ही आसान प्रक्रिया है। इसकी मदद से ग्रंथि के उन ऊतकों को आंशिक रूप से शरीर से बाहर निकाल दिया जाता है, जो हार्मोन का अधिक उत्पादन करते हैं।

सर्जरी की वजह से थायराइड के आसपास के दूसरे ऊतकों पर भी प्रभाव पड़ता है। साथ ही, साथ मुंह की नसें और पैराथायराइड ग्रंथि भी प्रभावित होती हैं, जिसका काम शरीर के कैल्शियम को कंट्रोल करना है।

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सर्जरी उन लोगों के लिए बेस्ट है, जिन्हे सांस लेने और खाना निगलने में परेशानी होती है। साथ ही साथ प्रेग्नेंट महिलाएं और छोटे बच्चे जो थायराइड की दवाइयां नही खा सकते, उनके लिए भी सर्जरी एक बेहतर ऑप्शन है।

थायराइड रोग में आहार (Diet For Thyroid In Hindi)

थायराइड की समस्या अभी आम हो गयी है और लोगों के बीच यह डिस्कशन छिड़ गयी है कि इससे पीड़ित होने पर क्या खाना चाहिए और किस चीज से बचना चाहिए।

  • हाइपोथायराइड में आहार

यह बीमारी खासकर 30 से 60 साल की महिलाओं में पायी जाती है। इस स्थिति में थायराइड ग्लैंड एक्टिव नहीं होती है, जिसकी वजह से शरीर में जरूरत के मुताबिक टी3 और टी4 हार्मोन नही पहुंच पाते हैं और अचानक से शरीर का वजन बढ़ जाता है एवं सुस्ती महसूस होने लगती है। साथ ही साथ शरीर में बीमारियों से लड़ने की क्षमता भी कम हो जाती है। इसकी वजह से अनियमित पीरियड, कब्ज की शिकायत, चेहरे और आंखों में सूजन आ जाती है।

क्या खाएं – अगर आप इस बीमारी से पीड़ित हैं तो आपको आयोडीन से भरपूर चीजें, आयोडीन नमक, सी फूड, चिकेन, अंडा, संतरा, केला, टमाटर, मशरूम, टोंड दूध और इससे बनी दूसरी चीजें जैसे दही और पनीर आदि खानी चाहिए। साथ ही, फिजिशियन की सलाह पर विटामिन, मिनिरल्स, आयरन और सप्लीमेंट्स भी ले सकते हैं।

क्या नहीं खाएंसोया प्रोडक्ट, सोया, रेड मीट, पैक किया हुआ भोजन, स्वीट पोटैटो, नाशपाती, स्ट्रॉबेरी, मूंगफली, शलजम, फूल गोभी, पत्ता गोभी, ब्रोकली, बाजरा और ज्यादा क्रीम वाली चीजें जैसे केक और पेस्ट्री नहीं खाना चाहिए।

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  • हाइपरथायराइड में आहार

इस स्थिति में थायराइड ग्लैंड बहुत ही ज़्यादा एक्टिव हो जाती है, जिसकी वजह से टी3 और टी4 हार्मोन जरूरत से ज्यादा मात्रा में निकलकर खून में घुलने लगते हैं। इससे अचानक शरीर का वजन कम जाता है, मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं, भूख ज्यादा लगने लगती है, स्वभाव में चिड़चिड़ापन आ जाता है, अधिक ब्लीडिंग होना, पीरियड्स में अनियमितता और साथ ही गर्भपात का खतरा भी बन जाता है।

क्या खाएं – अगर आप इस बीमारी से पीड़ित हैं तो हरी सब्जियां, गाजर, हरी मिर्च, नींबू, ब्राउन ब्रेड, ओलिव तेल, हर्बल, साबुत अनाज, शहद खानी चाहिए और ग्रीन टी पीना चाहिए।

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क्या नहीं खाएं – सॉफ्ट ड्रिंक, अल्कोहल, कैफीन, मीठी चीजें जैसे मिठाई या चॉकलेट, मैदा से बने प्रोडक्ट जैसे वाइट ब्रेड, मैगी, या पास्ता और रेड मीट नहीं खाना चाहिए।    

थायराइड रोग के लिए योग (Yoga For Thyroid In Hindi)

थायराइड रोग से मुक्ति पाने के लिए बहुत सारे इलाज हैं। इसमें आयुर्वेदिक से लेकर यूनानी, अंग्रेजी और होमियोपैथी शामिल हैं। हम घर बैठे कुछ योग आसनों को फॉलो करके इस बीमारी से छुटकारा पा सकते हैं। 

  • मांजरासन: चौपाया की तरह होकर अपने गर्दन और कमर को 10 बार ऊपर नीचे करें। 
  • उष्ट्राषन: घुटनों के बल खड़े होकर पीछे झुकते हुए अपनी एड़ियों को दोनों हाथों से पकड़कर गर्दन को पीछे झुका कर पेट को आगे की तरफ करें।
  • शशकासन: वज्रासन की पॉजिशन में बैठने के बाद सामने की तरफ झुककर 10-15 बार श्वास और प्रश्वास करें। 
  • सर्वांगासन: पेट के बल लेटने के बाद हाथों की मदद से शरीर को उठाते हुए कंधों पर रोकें और 10-15 बार श्वास-प्रश्वास करें।
  • भुजंगासन: पीठ के बल लेटने के बाद हथेलियां कंधों के नीचे जमाकर नाभि तक उठाकर 10-15 बार श्वास-प्रश्वास करें।
  • धनुरासन: पेट के बल लेटने के बाद दोनों टखनों को पकड़कर गर्दन, सिर, छाती और घुटनों को ऊपर उठाकर 10-15 बार श्वास-प्रश्वास करें।
  • शवासन: पीठ के बल लेटने के बाद शरीर को ढीला छोड़ दे और आंखें बंद किए हुए 10-15 बार लंबी श्वास-प्रश्वास करें।
  • ब्रम्हामुद्रा: कमर सीधी रखकर बैठने के बाद अपने गर्दन को 10-15 बार पहले ऊपर-नीचे, फिर दाएं-बाएं और तब सीधे-उल्टे घुमाएं।

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यदि आप थायराइड रोग के लक्षणों का अनुभव करते हैं तो इसके निदान और उचित उपचार के लिए हमें फोन कर सकते हैं या अपॉइंटमेंट बुक कर सकते हैं। हमारे पास अनुभवी डॉक्टर हैं जो उचित निदान करेंगे। कई बार यह थायराइड कैंसर हो सकता है और यदि शुरुआत में निदान नहीं हुआ तो इसका उपचार कर पाना मुश्किल हो जाता है। इसलिए जैसे ही लक्षण दिखाई दें डॉक्टर से निदान कराएं।

और पढ़े:

डिस्क्लेमर: यह ब्लॉग सामान्य जानकारी के लिए लिखा गया है| अगर आप किसी बीमारी से ग्रसित हैं तो कृपया डॉक्टर से परामर्श जरूर लें और डॉक्टर के सुझावों के आधार पर ही कोई निर्णय लें|

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