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टॉन्सिल्लेक्टोमी क्या है?

टॉन्सिल गले के दोनों तरफ स्थित, टिशू से बना एक जोड़ा है। यह लसिका प्रणाली का एक आवश्यक हिस्सा है जिसका काम बाहरी संक्रमण को गले के माध्यम से शरीर में जाने से रोकना है। यह शरीर की रक्षा-तंत्र में एक अहम भूमिका निभाता है। लेकिन जब किसी कारण से टॉन्सिल खुद संक्रमित हो जाता है तो इस स्थिति को मेडिकल की भाषा में टॉन्सिलाइटिस कहा जाता है। टॉन्सिलाइटिस होने पर टॉन्सिल में सूजन हो जाता है और उसके आकार में बदलाव आ जाता है। टॉन्सिलाइटिस किसी भी उम्र के इंसान को हो सकता है, लेकिन अधिकतर मामलों में यह 5-15 वर्ष के बच्चों में पाया जाता है।

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जोखिम

पेरिटॉन्सिलर एब्सेस

सांस लेने में परेशानी

टॉन्सिल्लर सेल्युलाइटिस

ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एप्निया

दर्द रहित इलाज क्यों?

दर्द नहीं होता है

टांके नहीं आते हैं

दाग नहीं बनते हैं

30 मिनट की प्रक्रिया

24 घंटे के लिए हॉस्पिटलाइजेशन

मॉडर्न इलाज में देरी न करें

रिकवरी तेजी से होती है

जटिलताओं की संभावना लगभग शून्य

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Pristyn Care टीम द्वारा सभी प्रकार के पेपरवर्क(on behalf of patient)

इंश्योरेंस के लिए कहीं भटकने की कोई जरूरत नहीं

कोई अग्रिम भुगतान नहीं

उपचार

Female having sore throat due to tonsillitis

जांच

टॉन्सिलेक्टोमी सर्जरी करने से पहले डॉक्टर मरीज का शारीरिक जांच करते हैं और टॉन्सिलाइटिस के लक्षणों से संबंधित कुछ प्रश्न करते हैं। टॉन्सिल्स में संक्रमण के सटीक कारणों का पता लगाने के लिए डॉक्टर स्वैब टेस्ट का सुझाव देते हैं। साथ ही, टॉन्सिलाइटिस बैक्टीरियल है या वारयल – इस बात का पता लगाने के लिए कंप्लीट ब्लड टेस्ट करने को कहते हैं। इस टेस्ट के दौरान डॉक्टर शरीर में रक्त कोशिकाओं की मौजूदगी और उनकी संख्या की पुष्टि भी करते हैं। इन सभी जांचों के परिणामों से डॉक्टर को टॉन्सिलाइटिस के कारण, प्रकार और गंभीरता को समझने में मदद मिलती है जिसके बाद डॉक्टर मेडिकल उपचार या फिर सर्जिकल उपचार की सलाह देते हैं।

सर्जरी

आमतौर पर टॉन्सिलाइटिस के लिए सर्जरी की आवश्यकता नहीं पड़ती है। सामान्य या एक्यूट टॉन्सिलाइटिस का इलाज करने के लिए डॉक्टर कुछ खास तरह की दवाओं का सेवन करने का सुझाव देते हैं जिससे यह परेशानी दूर हो जाती है। लेकिन जब दवाओं या नॉन-सर्जिकल इलाज से कोई फायदा नहीं होता है, टॉन्सिलाइटिस की समस्या बार-बार होती है या क्रोनिक टॉन्सिलाइटिस है तो डॉक्टर सर्जरी करने का सुझाव देते हैं। टॉन्सिलाइटिस की सर्जरी को टॉन्सिलेक्टोमी कहा जाता है। इस सर्जरी की शुरुआत में डॉक्टर सबसे पहले मरीज को एनेस्थीसिया देते हैं, जिससे मरीज बेहोश हो जाते हैं। उसके बाद, डॉक्टर सर्जरी करके टॉन्सिल्स को बाहर निकाल देते हैं। इस सर्जरी को पूरा होने में लगभग 30 मिनट का समय लगता है। टॉन्सिलेक्टोमी सर्जरी को कई प्रकार से किया जाता है जिसमें मुख्य रूप से इलेक्ट्रोकॉटरी, हार्मोनिक स्केलपेल और कोल्ड नाइफ डिसेक्शन शामिल हैं।

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अधिकतर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या टॉन्सिलेक्टोमी को एनेस्थीसिया के प्रभाव किया जाता है?

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अधिकतर मामलों में टॉन्सिलाइटिस किन लोगों में देखने को मिलता है?

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टॉन्सिलेक्टोमी सर्जरी को पूरा होने में कितना समय लगता है?

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गुड़गांव में टॉन्सिलेक्टोमी सर्जरी का कितना खर्च आता है?

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मुझे डॉक्टर के पास कब जाना चाहिए?

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क्या टॉन्सिलेक्टोमी सर्जरी के दौरान दर्द होता है?

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टॉन्सिलेक्टोमी सर्जरी के बाद मुझे ठीक होने में कितना समय लगेगा?

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टॉन्सिलेक्टोमी सर्जरी के बाद क्या सावधानियां बरतनी चाहिए?

टॉन्सिलेक्टोमी सर्जरी के बाद कुछ सावधानियां बरतकर आप खुद को जल्द से जल्द रिकवर कर सकते हैं। इस सर्जरी के बाद डॉक्टर निम्नलिखित बातों का ध्यान रखने की सलाह देते हैं:-

  • अपने शरीर को डिहाइड्रेट होने से बचाएं। इसके लिए आपको भरपूर मात्रा में तरल पदार्थों का सेवन करना चाहिए।
  • डॉक्टर द्वारा दी गई दवाइयों का समय-समय पर सेवन करें। दवाओं के कोर्स को पूरा करें। साथ ही, किसी भी दूसरी दवा का सेवन करने से पहले अपने डॉक्टर से अवश्य परामर्श करें।
  • टॉन्सिलेक्टोमी के बाद लगभग 3-4 सप्ताह तक खुद को शारीरिक खेल-कूद या हेवी एक्सरसाइज से दूर रखें।
  • सर्जरी के बाद खान-पान की उन चीजों को अपनी डाइट में शामिल करें जिन्हें निगलने में परेशानी न हो।
  • ज्यादा से ज्यादा आराम करें, क्योंकि इससे आपके शरीर को ऊर्जा मिलती है।
  • प्रदूषण वाली जगहों में जाने से बचें, क्योंकि इससे आपको एलर्जी और सर्दी हो सकती है जिससे आपकी रिकवरी प्रभावित हो सकती है।

इन सबके अलावा, अगर रिकवरी के दौरान आपको किसी तरह की कोई परेशानी हो तो बिना देरी किए अपने डॉक्टर से मिलें और उन्हें इस बारे में बताएं।

टॉन्सिलेक्टोमी सर्जरी के क्या फायदे हैं?

टॉन्सिलाइटिस के शुरूआती इलाज के तौर पर डॉक्टर पहले कुछ खास तरह की दवाओं का सेवन करने और लाइफस्टाइल में बदलाव लाने का सुझाव देते हैं। लेकिन जब इलाज के सभी नॉन सर्जिकल माधयम फेल हो जाते हैं तो डॉक्टर सर्जरी का सुझाव देते हैं। टॉन्सिलाइटिस की सर्जरी को टॉन्सिलेक्टोमी कहा जाता है।

गुड़गांव में मॉडर्न और एडवांस तकनीक से टॉन्सिलेक्टोमी सर्जरी की सुविधा उपलब्ध है। इस सर्जरी के अनेकों फायदे हैं और यही कारण है कि आपको भी टॉन्सिलाइटिस से छुटकारा पाने के लिए इस सर्जरी का चुनाव करना चाहिए। इस सर्जरी के निम्नलिखित फायदे हैं:-

01. दर्द नहीं होता है टॉन्सिलेक्टोमी सर्जरी को एनेस्थीसिया के प्रभाव में किया जाता है जिससे सर्जरी के दौरना होने वाले दर्द का खतरा खत्म हो जाता है। इसलिए इस सर्जरी के दौरान मरीज को जरा भी दर्द या दूसरी किसी तरह की परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ता है। यह एक दर्द रहित सर्जिकल प्रक्रिया है।

02. ब्लीडिंग नहीं होती है टॉन्सिलेक्टोमी सर्जरी के दौरान ब्लीडिंग को हीट या अल्ट्रासोनिक वाइब्रेशन की मदद से बंद कर दिया जाता है। इसलिए इस प्रक्रिया के दौरान ब्लीडिंग का ख़तरा नहीं रहता है। अगर आप दर्द या ब्लीडिंग का सामना किए बिना गुड़गांव में टॉन्सिलाइटिस का बेस्ट इलाज पाना चाहते हैं तो टॉन्सिलेक्टोमी सर्जरी आपके लिए परफेक्ट विकल्प है।

03. टांके नहीं आते हैं जब डॉक्टर टॉन्सिलेक्टोमी सर्जरी के लिए कोल्ड नाइफ डिसेक्शन तकनीक का इस्तेमाल करते हैं तो ब्लीडिंग को रोकने के लिए टांकों का इस्तेमाल करते हैं। अन्यथा इस सर्जरी के बाद टांकों की आवश्यकता भी नहीं पड़ती है।

04. साइड इफेक्ट्स और जटिलताओं का खतरा शून्य होता है टॉन्सिलेक्टोमी सर्जरी के दौरान और बाद में साइड इफेट्स या जटिलताओं का खतरा लगभग शून्य होता है। इतना ही नहीं, इस सर्जरी के बाद जख्म होने या दाग बनने की संभावना भी लगभग न के बराबर होती है। यह एक संक्षिप्त, सुरक्षित और सफल प्रक्रिया है।

04. रिकवरी जल्दी होती है टॉन्सिलेक्टोमी सर्जरी के बाद मरीज की रिकवरी बहुत तेजी से होती है। इस सर्जरी के मात्र 2-3 दिनों के बाद से मरीज अपने दैनिक जीवन को शुरू कर सकते हैं। हालांकि, मरीज को पूर्ण रूप से ठीक होने में लगभग 2-3 सप्ताह का समय लगता है।

अगर आप टॉन्सिलाइटिस से परेशान हैं और कम से कम समय में बिना किसी परेशानी का सामना किए गुड़गांव में इसका बेस्ट इलाज पाना चाहते हैं तो अभी हमारे अनुभवी, कुशल और विश्वसनीय ईएनटी सर्जन से संपर्क कर सकते हैं।

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