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पीसीओडी क्या है (What is PCOD in Hindi)
आज हर एक इंसान का जीवन बहुत ही स्पीड से आगे बढ़ रहा है। सुबह से लेकर रात तक इंसान एक से दूसरी जगह भागता ही रहता है। इस भाग दौड़ की जिंदगी में वह खुद के लिए समय निकाल ही नहीं पाता है और इस चक्कर में वह अपने हेल्थ (Health) से समझौता (Compromise) कर बैठता है। इसका हर्जाना उसे आगे तब भरना पड़ता है जब उसकी हेल्थ ही उसका साथ नहीं देती है।
पुरुषों की तुलना में महिलाओं का जीवन ज्यादा भाग दौड़ से भरा हुआ है क्योंकि इन्हे अपने घर पर भी काम करने होते हैं और साथ ही साथ अपने ऑफिस में भी। एक समय के बाद घर और ऑफिस के बीच ये इतना बीजी (Busy) हो जाती हैं कि ना ही वे सही से खाना खा पाती हैं, ना प्रॉपर नींद सो पाती हैं और ना ही अपने हेल्थ का ख्याल रख पाती हैं। ऐसे में तनाव (Tension) बढ़ जाता है और फिर बीमारियों का सिलसिला शुरू हो जाता है।
इन सभी कारणों (Reasons) की वजह से कितनी तरह की बीमारियां होती हैं और पॉलीसिस्टिक ओवेरियन डिसऑर्डर भी इनमें से एक है। पॉलीसिस्टिक ओवरियन डिसऑर्डर (PCOD) को पॉलिसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (Polycystic Ovary Syndrome) के नाम से भी जाना जाता है।
यह एक मेडिकल कंडीशन (Situation) है जो आमतौर पर रिप्रोडक्टिव (Reproductive) उम्र की महिलाओं में हार्मोनल असंतुलन (Hormonal Imbalance) की वजह से होती है। इस स्थिति में महिला के शरीर में मेल हार्मोन (Androgen) का लेवल (Level) बढ़ जाता है और ओवरी (Ovary) पर एक से ज्यादा सिस्ट (Cyst) बनने लगते हैं। ज्यादा मात्रा होने की वजह से एग्स (Eggs) के विकास (Development) और ओव्यूलेशन (Ovulation) के दौरान शरीर से बाहर निकलने की प्रक्रिया पर असर पड़ता है।
यह बीमारी आज Common हो चुकी है जो महिलाओं और लड़कियों में होती है। इस बीमारी से पीड़ित महिलाओं को दूसरी भी कई बीमारियां होने का खतरा बना रहता है। कुछ साल पहले तक यह बीमारी ज्यादातर 30-35 साल की महिलाओं में पायी जाती थी लेकिन एक वक्त के बाद यह स्कुल जा रही लड़कियों को भी होने लगी। जिन लड़कियों को पीरियड्स (Periods) से जुड़ी समस्या होती है उन लड़कियों को यह बीमारी होने के चांसेस (Chances) ज्यादा होते हैं।
पीसीओडी के कारण (Causes of PCOD in Hindi)
किसी भी बीमारी की कोई एक खास ठोस वजह नहीं (No One Single Solid Reason) होती है। जैसे कई सारे कारण मिलकर किसी एक बीमारी की जड़ (Root) बन जाते हैं वैसे ही पीसीओएस का भी कोई एक कारण नहीं है। इस बीमारी के अनेकों कारण (Various Reasons) हैं लेकिन नीचे दिए हुए कारण सबसे ठोस कारण माने जाते हैं।
- खराब लाइफस्टाइल (Bad Lifestyle)
- खानपान में लापरवाही (Negligence in Foods)
- शारीरिक गतिविधि नहीं करना (Doing No Physical Activities / No Exercise)
- पोषण तत्व ना लेना (Not Taking Nutritious Foods)
- वजन का तेजी बढ़ना-मोटापा (Sudden Weight Gain )
- असंतुलित पीरियड (Unbalanced Periods)
- अनुवांशिकी के कारण (Due to Genetics )
- अधिक इन्सुलिन के कारण (Due to More Insulin in Body)
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पीसीओडी के लक्षण (Symptoms of PCOD in Hindi)
पीसीओडी के बहुत से लक्षण हैं जिन्हें समय पर देखकर इस बीमारी को रोका जा सकता है। ज्यादातर लक्षण यौवन के तुरंत बाद शुरू होते हैं और देर से बच्चों और शुरूआती वयस्कता (Early Adulthood) में भी विकसित (Develop) हो सकते हैं।
- वजन बढ़ना (Weight Gain)
- अनियमित पीरियड्स (Irregular Periods)
- शरीर पर एक्स्ट्रा बाल बढ़ना (Extra Hair Growth on Face)
- मुहांसे होना (Growth of Acne on Face)
- स्किन का ऑयली होना (Oily Skin)
- बालों का झड़ना (Hair Fall)
- पेल्विक दर्द होना (Pelvic Pain)
- हाई ब्लड प्रेशर (High Blood Pressure)
- दूसरे हार्मोन में असंतुलन (Imbalance in Other Hormones)
- थकान (Tiredness)
- बाल पतले होना (Thin Hair)
- बांझपन (Infertility)
- सर दर्द (Headache)
- नींद ना आना (Sleeplessness)
- मूड़ का बदलते रहना (Mood Swing)
- कंसीव करने में समस्या आना (Problem in Conceiving)
पीसीओडी का घरेलू उपचार (PCOD Ka Gharelu Upchar in Hindi)
सेब के सिरके के जरिए (Apple Cider Vinegar For PCOD)
इसका इस्तेमाल सबसे फायदेमंद होता है क्योंकि ये ब्लड शुगर को बैलेंस (Balanced) रखता है जिसकी वजह से इंसुलिन कम बनता है हार्मोनल असंतुलन (Hormonal Imbalance) भी नहीं होता है। साथ ही साथ यह वजन भी कम करने में मदद करता है। सेब के सिरके का इस्तेमाल करने के लिए एक ग्लास पानी में दो चम्मच सिरका मिलाकर रोजाना खाली पेट सुबह में नाश्ता से पहले, दोपहर में लंच से पहले और डिनर से पहले कुछ दिनों तक पिएं।
दालचीनी के जरिए (Cinnamon For PCOD)
ये अनियमित पीरियड (Irregular Period) से जुड़ी परेशानियों (Troubles) को दूर करने में मदद करती है। इसका इस्तेमाल करने के लिए एक चम्मच दालचीनी के पावडर को गरम पानी में मिलाकर तब तक पिएं जब तक कि आपको रिजल्ट ना मिल जाएं। पानी के अलावा भी आप चाहें तो इसे चाय (Tea), दही (Curd), सेरेलेक (Cerelac) या ओटमील (Oatmeal) में मिलाकर खा सकती हैं।
पुदीने की चाय के जरिए (Mint Tea For PCOD)
एक रिसर्च (Research) के अनुसार यह बात सामने आई है कि पुदीने की चाय एंटी-एंड्रोजन (Anti-androgen) का काम करती है। यह पीसीओएस की स्थिति में राहत देने में मदद करती है। इसका इस्तेमाल करने के लिए सबसे पहले पुदीने की पत्तियों को गर्म पानी में उबालें और फिर उसे छानकर पिएं।
मुलेठी के जरिए (Mulethi for PCOD)
यह एंड्रोजन (Androgen) को कम, कोलेस्ट्रॉल (Cholesterol) को कंट्रोल (Control) और मेटाबॉलिज्म (Metabolism) को बेहतर बनाती है। इसका इस्तेमाल करने के लिए सुखी मुलेठी को एक कप गर्म पानी में डालकर उबालें और फिर उसे रोजाना पिएं।
अलसी के जरिए (Flaxseed For PCOD)
अलसी शरीर में एंड्रोजेन (Androgen), बीपी (Blood Pressure) और कोलेस्ट्रॉल (Cholesterol) को कम करती है और साथ ही साथ दिल की बीमारियों को होने से रोकती (Prevents Heart Diseases) है। रोजाना एक से दो चम्मच ताज़ी पीसी हुई अलसी को पानी में मिलाकर पिएं।
मेथीदाना के जरिए (Fenugreek for PCOD)
ये हार्मोन को बैलेंस (Balance) रखने और कोलेस्ट्रॉल (Cholesterol) और वजन (Weight) को कम करने में मदद करता है। इसका इस्तेमाल करने के लिए पहले दो से तीन चम्मन मेथीदाने को रात में सोने से पहले पानी में भिगो दें। फिर अगले दिन सुबह में नाश्ता से पहले एक चम्मच मेथीदाने को शहद (Honey) में मिलाकर खाएं। और ऐसे ही लंच से दस मिनट पहले एक चम्मच और डिनर से पहले एक चम्मच खाएं। कुछ महीनों तक इसी तरह से इसका सेवन करें।
बीमारी चाहे जो कोई भी हो सबसे पहले हमें डॉक्टर से मिलकर उनसे बात करनी चाहिए और फिर किसी भी प्रकार के इलाज को फॉलो करने के लिए आगे बढना चाहिए। यहां भी इसी चीज को ध्यान में रखने की जरूरत है। अगर आप पॉलीसिस्टिक ओवेरियन डिसऑर्डर के मरीज हैं और इसका इलाज घरेलु उपचार के जरिए करना चाहते हैं तो एक बार जरूर डॉक्टर से मिलकर, उनकी राय लें और फिर इन घरेलू उपचारों का बेझिझक इस्तेमाल करें।
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डिस्क्लेमर: यह ब्लॉग सामान्य जानकारी के लिए लिखा गया है| अगर आप किसी बीमारी से ग्रसित हैं तो कृपया डॉक्टर से परामर्श जरूर लें और डॉक्टर के सुझावों के आधार पर ही कोई निर्णय लें|