irregular periods

ब्लीडिंग के पहले दिन से लेकर अगले महीने की ब्लीडिंग के एक दिन पहले तक का समय मासिक धर्म चक्र (Menstrual Cycle) कहलाता है। औसतन यह चक्र 28 दिनों का होता है। लेकिन कई बार इस चक्र का समय 28 दिन से कम या ज्यादा हो सकता है। हर महिला के जीवन में मासिक धर्म चक्र में अनियमितता होती है। मासिक धर्म चक्र 21 दिनों से लेकर 35 दिन तक का होता है। जब इस अंतराल से पहले या बाद पीरियड्स आते हैं तो मासिक धर्म चक्र में अनियमितता हो जाती है। इसे हम अनियमित माहवारी या इर्रेगुलर पीरियड्स (Irregular Periods) के नाम से जानते हैं। पीरियड्स का नहीं आना भी अनियमितता ही कहलाता है। 

पीरियड्स के एक बार अनियमित होने के बाद, आने वाले पीरियड्स भी प्रभावित हो सकते है। ऐसे में कुछ तरीकों को अपनाकर इर्रेगुलर पीरियड्स से बचा जा सकता है।

Table of Contents

अनियमित माहवारी के कारण — Causes of Irregular Periods in Hindi

  • अधिक व्यायाम या दौड़-कूद करना
  • वजन का अचानक से बढ़ना या घटना।
  • तनाव होने पर या ज्यादा थक जाने पर।
  • प्रेग्नेंट होने पर पीरियड्स मिस हो जाते है।
  • गर्भ निरोधक (बर्थ कंट्रोल) दवाइयों के सेवन से भी हार्मोन पर असर पड़ता है।

अनियमित माहवारी के अन्य कारण Other Causes of Irregular Periods

पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम — Polycystic Ovary Syndrome (PCOS)

PCOS या PCOD होने पर शरीर में मेल हार्मोन लगातार बढ़ते है। मेल हार्मोन के असाधारण रूप से बढ़ने पर अंडा सही समय पर नहीं बन पाता है। जिसके कारण पीरियड्स अनियमित हो जाते है। पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) से पीड़ित होने की स्थिति में महिला के शरीर पर बाल और मुहांसे आने लगते हैं तथा उनका वजन बढ़ने लगता है।

गर्भाशय (यूटेरिन) के फाइब्रॉइड — Uterus Fibroid in Hindi

फाइब्रॉइड गर्भाशय यानी यूटेरस (Uterus) में होने वाले गांठ हैं। ये ट्यूमर की तरह होते हैं लेकिन इससे कैंसर का खतरा नहीं होता है। यूटेरस में फाइब्रॉइड्स होने पर पीरियड्स प्रभावित होते है।

ओवेरियन सिस्ट का निर्माण — Production of Ovarian Cyst in Hindi

ओवेरियन सिस्ट तरल पदार्थों से बनी हुई एक थैली है। ये सिस्ट महिला के दोनों अंडाशय में भी बन सकता है| इस तरह के सिस्ट में कुछ खास लक्षण नहीं दिखते लेकिन इनसे पीरियड्स अनियमित हो सकते हैं।

हाइपोथायरायडिज्म विकार — Hypothyroidism Disorder in Hindi

हमारे शरीर में थायराइड ग्रंथि होती है, जो थायराइड बनाती है। जब ग्रंथि जरूरी मात्रा में थायराइड नहीं बना पाती तो इसे हाइपोथायरायडिज्म कहते है। यह भी मासिक धर्म में अनियमितता का एक कारण हो सकता है। 

शुगर का ज्यादा बढ़ जाना — Increased Sugar Level in Hindi

जब डायबिटीज का लेवल बढ़ता है तो इसका असर पीरियड्स पर भी पड़ सकता है। 

अंडाशय का नष्ट हो जाना — Ruptured Ovary in Hindi

अंडाशय जब अंडे बनाना बंद कर देते हैं तब यह धीरे-धीरे खत्म होने लगते हैं। ऐसा 40 वर्ष से कम उम्र की महिलाओं में भी हो सकता है। इसे प्रीमैच्योर ओवेरियन फेलियर (Premature Ovarian Failure) कहा जाता है।

अनियमित माहवारी के लक्षण — Symptom of Irregular Periods in Hindi

  • पीरियड्स का सही अंतराल में न होना। 21 दिन के पहले हो जाना या 35 दिन के बाद होना।
  • पीरियड्स मिस (Miss) होना। लगातार 2 से 3 पीरियड्स मिस होना अनियमित पीरियड्स के ही लक्षण हैं। 
  • बहुत ज्यादा या कम ब्लीडिंग होना भी अनियमितता है।
  • पीरियड्स के साथ उल्टी, दस्त, दर्द या ऐंठन होने पर इन्हें सामान्य नहीं कहा जा सकता है| 
  • पीरियड्स खत्म हो जाने के बावजूद हल्का स्पॉटिंग होना भी इसका एक लक्षण है। 

डॉक्टर को कब दिखाएं — When to See Doctor

ज्यादा खून या सात दिन से ज्यादा समय तक ब्लीडिंग होने पर डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। 2 से 3 महीने तक पीरियड्स मिस होना भी चिंता का विषय है।

अनियमित माहवारी का इलाज — Treatment of Irregular Periods in Hindi

हार्मोन थेरेपी — Hormonal Therapy in Hindi

हाइपोथैलमिक पिट्यूटरी गोनाडल (Hypothalamic Pituitary Gonadal Axis) को हम एक सर्किट (Circuit) कह सकते हैं जो हमारे दिमाग और अंडाशय को जोड़ती है। हार्मोनल थेरेपी की मदद से इस सर्किट में बदलाव कर सकते हैं। शरीर में हार्मोन की अस्थिरता (Hormonal Instability) और एनोव्युलेशन (Anovulation) से जुड़ी परेशानियों को हार्मोनल थेरेपी की मदद से दूर किया जा सकता है। मासिक धर्म चक्र में लगातार अनियमितता होने पर आप डॉक्टर से हार्मोन थेरेपी से जुड़े सवाल कर सकते हैं। हार्मोनल थेरेपी में निम्नलिखित इलाज शामिल हैं:-

  1. गर्भ निरोधक गोलियां (Contraceptive Pills)
  2. आईयूडी यानी गर्भनिरोधक उपकरण (Intrauterine Device (IUD))
  3. बर्थ कंट्रोल पैच (Birth Control Patch) यह एस्ट्रोजन (Estrogen) और प्रोजेस्टेरोन (Progesterone) हार्मोन्स से बना होता है। इसे स्किन (पेट, पीठ का ऊपरी हिस्सा) में लगाना होता है जिससे शरीर पैच से हार्मोन को अवशोषित (Absorb) कर ‘अंडा अंडाशय तक नहीं पहुंचने देता है। यह प्रेग्नेंसी से बचने का एक उपकरण है जो शुक्राणुओं (Sperm) को यूटेरस तक नहीं पहुंचने देता है। बर्थ कंट्रोल पैच का असर एक हफ्ते में दिखाई देना शुरू हो जाता है। अनियमित माहवारी से निपटने में यह मददगार मददगार साबित होता है।
  4. बर्थ कंट्रोल शॉट (Birth Control Shot) – यह एक इंजेक्शन है, जिसमें प्रोजेस्टेरोन हार्मोन होता है। इसे महिला के बॉडी में इंजेक्ट करने के बाद अंडे का निर्माण होना बंद हो जाता है। Birth Control Shot का इस्तेमाल प्रेग्नेंसी रोकने के लिए किया जाता है लेकिन यह अनियमित मासिक धर्म से भी छुटकारा दिला सकता है। बर्थ कंट्रोल शॉट लेने के 3 महीने तक प्रेग्नेंट होने की संभावना खत्म हो जाती है। इसमें एस्ट्रोजन हार्मोन नहीं होता है। ऐसे में इसका इस्तेमाल वे महिलाएं भी कर सकती हैं जो स्तनपान कराती हैं। इसका इस्तेमाल डॉक्टर की देखरेख में ही करना चाहिए।

ओरल गर्भनिरोधक गोलियां — Oral Contraceptive Pills in Hindi

‘गर्भ निरोधक ओरल पिल्स’ हार्मोन्स को संतुलित करने का कार्य करते हैं। मासिक धर्म चक्र की अनियमितता को समाप्त करने के लिए ये सबसे आसान उपाय है। ये गोलियां समूह (Set or Group) में आती हैं, जिनका सेवन हर दिन एक ही समय करना चाहिए। गर्भ निरोधक गोलियों का दो समूह होता है| एक समूह में हार्मोन होते हैं और दूसरे में प्लेसीबो (Placebo) का सेट होता है। ये गोलियां तीन तरह के पैक में उपलब्ध होती हैं। 

  1. 21 दिन का पैक
  2. 28 दिन का पैक 
  3. 91 दिन का पैक

डॉक्टर के बताए गए समय और तरीके से ही इनका सेवन करें। अगर किसी ब्रांड की गर्भ निरोधक पिल्स से मासिक धर्म की अनियमितता दूर नहीं होती है तो दूसरे ब्रांड्स की गोलियां इस्तेमाल की जा सकती हैं। ऐसा सिर्फ डॉक्टर से पूछने से बाद ही करें। क्योंकि इनके कई तरह के साइड इफेक्ट्स भी हो सकते हैं।

गर्भ निरोधक पिल्स कई प्रकार के होते हैं। इसमें ट्राईफेसिक (Triphasic), मोनोफेसिक (Monophasic) आदि शामिल हैं। ट्राई फैसिक में हार्मोन का डोज तीन अलग-अलग मात्रा में होता है। वही मोनोफैसिक गोलियों में हर तरह के हार्मोन बराबर मात्रा में होते हैं। यह हार्मोन प्रोजेस्टेरोन और एस्ट्रोजन होते हैं। ऐसी भी कई गर्भ निरोधक गोलियां हैं जिनमें सिर्फ एक हार्मोन (प्रोजेस्टेरोन या एस्ट्रोजन) होता है। यह गोलियां आपके शरीर में सीधा प्रभाव डालती हैं। इसलिए डॉक्टर से बिना पूछे किसी भी टेबलेट का सेवन करना खतरे से खाली नहीं है। 

मासिक धर्म की अनियमितता को दूर करने के लिए सिर्फ बर्थ कंट्रोल पिल्स ही नहीं बल्कि बर्थ कंट्रोल पैच र बर्थ कंट्रोल शॉट, वजाइनल रिंग जैसे और भी दूसरे उपाय मौजूद हैं। 

दूसरी बीमारियों का इलाज जिससे पीरियड्स अनियमित होते हैं — Treatment of Other Diseases That Cause Irregular Periods in Hindi

हाइपोथायरायडिज्म का इलाज

थायराइड ग्रंथि भी शरीर में हार्मोन बनाती है। इससे ही शरीर का मेटाबॉलिज्म घटता या बढ़ता है। हाइपोथायरायडिज्म की समस्या होने से माहवारी आने का समय अधिक हो सकता है। थायराइड ग्रंथि (Thyroid Gland) के Tissues का इलाज करके हाइपोथायरायडिज्म से छुटकारा पाया जा सकता है। 

इसके इलाज के लिए एंटी-थायराइड (Anti-thyroid) दवाइयां दी जाती है। एंटी-थायराइड दवाइयों में मैथिमाजोल (Methimazole) भी शामिल है। हाइपोथायरायडिज्म से छुटकारा पाने के लिए डॉक्टर मैथिमाजोल की ही सलाह देते हैं। इसके साइड इफेक्ट्स कम होते हैं और इसका सेवन कुछ ही मात्रा में करने से अनियमित मासिक धर्म से छुटकारा मिल जाता है। 

पॉलीसिस्टिक ओवरी डिसऑर्डर का इलाज 

पॉलीसिस्टिक ओवरी डिसऑर्डर होने पर ज्यादातर ओव्यूलेशन नहीं होने की शिकायत होती है। तब हार्मोन संतुलन बनाए रखने के लिए गर्भनिरोधक दवाई लेना चाहिए। पीसीओडी के इलाज का यह पहला कदम है। अगर आपको पॉलीसिस्टिक ओवरी डिसऑर्डर है और वजन भी ज्यादा है तो सबसे पहले वजन कम करना होगा।

माहवारी से निपटने के अन्य उपचार — Other Treatments to Deal With Menstruation in Hindi

शराब से दूरी बनाएं

मासिक धर्म में अनियमितता का कारण ज्यादा शराब या कैफीन (Caffeine) युक्त पदार्थ का सेवन भी है। सिगरेट, शराब, कैफीन आदि का सेवन इम्यूनिटी को कमजोर कर देता है। इससे हार्मोन असंतुलन और ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है। अनियमित पीरियड्स से छुटकारा पाने के लिए शराब और कैफीन युक्त चीजों का कम से कम मात्रा में सेवन करना चाहिए और अगर संभव है तो नहीं करना चाहिए। ज्यादा कार्बोहाइड्रेट या प्रोसेस्ड फूड (Processed Food) के सेवन से भी पीरियड्स प्रभावित होते है। इनके सेवन से खून में शुगर बढ़ जाती है। 

व्यायाम करें 

नियमित रूप से व्यायाम करने से शरीर स्वस्थ और हार्मोन संतुलित रहते हैं। एक स्वस्थ व्यक्ति को हफ्ते में पांच दिन व्यायाम करना चाहिए। ऐसी महिलाएं जिनका समय खेल-कूद में व्यतीत होता है या जो एथेलीट हैं, उनमें मासिक धर्म की अनियमितता बार-बार देखी जाती है। इसलिए डॉक्टर से जरूर सलाह लें।  

क्या अनियमित पीरियड्स गर्भधारण में परेशान करते है Do Irregular Periods Disturb Pregnancy in Hindi

अनियमित पीरियड्स बांझपन का कारण बन सकते है। ‘असामान्य ओव्यूलेशन (Abnormal Ovulation)’ बांझपन के 40 प्रतिशत मामले में जिम्मेदार होता हैं। मासिक धर्म में देरी और असाधारण ब्लीडिंग का मतलब है की अंडे का उत्सर्जन ठीक तरह से नहीं हो पा रहा है। इसे एनोव्युलेशन (Anovulation) कहते हैं। एनोव्युलेशन कंसीव की प्रक्रिया को प्रभावित करता है। इसलिए जांच करा कर उचित इलाज कराना  जरूरी है।

निष्कर्ष — Conclusion

पीरियड्स का अनियमित होना कोई आम परेशानी नहीं है। यह आंतरिक रोगों की वजह से भी हो सकता है। इसलिए अगर आपको अनियमित पीरियड्स के कोई भी लक्षण नजर आते हैं तो देरी न करते हुए किसी अच्छे  Gynecologist से संपर्क करें। इसमें लापरवाही बरतने पर कई मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।

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