हाइपरोपिया आंखों में होने वाली एक सामान्य बीमारी है। इससे पीड़ित होने पर आंखों में जानी वाली रौशनी रेटिना पर केंद्रित होने के बजाय रेटिना के पीछे केंद्रित होती है, जिसके कारण मरीज को पास की वस्तुएं साफ-साफ दिखाई नहीं देती हैं।
हाइपोरिया का इलाज कई तरह से किया जाता है। इसमें चश्मा, कॉन्टेक्ट लेंस और लेसिक सर्जरी शामिल हैं। लेसिक सर्जरी को इसका बेस्ट इलाज माना जाता है। इस सर्जरी से हाइपरोपिया का परमानेंट इलाज मात्र एक दिन में किया जा सकता है। लेसिक सर्जरी का पूरा नाम लेजर इन सीटू किरेटोमिल्युसिस (Laser-assisted in Situ Keratomileusis) है।
अगर आप अपने घर से बाहर निकलें तो हर 10 में से एक इंसान के चेहरे पर चश्मा दिखाई देगा। बेशक कुछ लोग स्टाइल के लिए चश्मा पहनते हैं। लेकिन ऐसे लोगों की संख्या कितनी है? काफी कम है। कुछ लोग धूल या हवा से बचने के लिए चश्मा पहनते हैं। लेकिन अधिकतर लोगों को दृष्टि से संबधित समस्याएं होती हैं। इसलिए उन्हें चश्मा पहनना पड़ता है।
जहां एक तरफ टीवी, मोबाइल और लैपटॉप के आने से जीवन काफी आसान हो गया है। वहीं दूसरी तरह इनके अति प्रयोग से आंखों में कई तरह की बीमारियां पैदा हो रही हैं। मायोपिया, एस्टिग्मेटिज्म और हाइपरोपिया का नाम भी उन्ही में शामिल है। ये तीनों बीमारियां आंखों को प्रभावित करने वाली सबसे आम बीमारियां हैं, जो मोबाईल, लैपटॉप या टेलीविजन के स्क्रीन के सामने लंबा समय बिताने और उनके तथा खुद के बीच पर्याप्त दूरी न करने के कारण होते हैं।
हाइपरोपिया आंखों की रौशनी को प्रभावित करने वाले एक सामान्य बीमारी है। आमतौर पर यह बीमारी वयस्कों में सबसे अधिक देखने को मिलती है। लेकिन यह किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकता है। इस बीमारी से पीड़ित होने पर आपको दूर की चीजें साफ दिखाई देती हैं। लेकिन नजदीक की वस्तुओं को देखने में परेशानी होती है।
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एक दिन में हाइपरोपिया का इलाज कैसे किया जाता है?
एक दिन में हाइपरोपिया का इलाज लेसिक सर्जरी से किया जाता है। इस सर्जरी को एक नेत्र रोग विशेषज्ञ के द्वारा पूरा किया जाता है। सर्जरी को शुरू करने से पहले नेत्र सर्जन मरीज की आंख में एनेस्थेटिक ड्रॉप डालते हैं। फिर आंख की पलकों पर लिड स्पेकुलम को लगाते हैं। लिड स्पेकुलम एक मेडिकल उपकरण है, जो आंख को खुला और पलकों को झपकने से रोकता है।
उसके बाद, सर्जन लेजर बीम की मदद से कॉर्निया को एक नया शेप देते हैं। नया शेप देने के बाद आंख में जाने वाली रौशनी रेटिना के पीछे केंद्रित होने के बजाए रेटिना पर केंद्रित होती है। नतीजतन मरीज को चीजें साफ-साफ दिखाई देने लगती हैं। सर्जरी खत्म होने के बाद मरीज को रिकवरी रूम में शिफ्ट कर दिया जाता है।
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रिकवरी रूम में डॉक्टर मरीज के स्वास्थ्य को मॉनिटर करते हैं। फिर सभी चीजें नॉर्मल होने पर डॉक्टर आवश्यक दवाओं और आई ड्रॉप निर्धारित करते हैं। उसके बाद, मरीज को हॉस्पिटल से डिस्चार्ज कर देते हैं। इस सर्जरी को पूरा होने में मात्र 10-20 मिनट का समय लगता है।
एक दिन में हाइपरोपिया का इलाज कराने के फायदे
एक दिन में हाइपरोपिया का इलाज कराने के ढेरों फायदे हैं। यही कारण है कि मात्र एक दिन में हाइपरोपिया का परमानेंट इलाज पाने के लिए पूरी दुनिया में लेसिक सर्जरी का चुनाव किया जाता है। इस सर्जरी के निम्नलिखित फायदे हैं।
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उसी दिन इलाज और डिस्चार्ज
हाइपरोपिया की लेसिक सर्जरी एक दिन की प्रक्रिया है। इस सर्जरी के बाद मरीज को पूरे दिन या रात के लिए हॉस्पिटल में रुकने कि आवश्यकता नहीं पड़ती है। सर्जरी खत्म होने के कुछ ही घंटों के बाद मरीज को हॉस्पिटल से डिस्चार्ज कर दिया जाता है।
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दर्द और ब्लीडिंग नहीं होती है
इस सर्जरी के दौरान एक बहुत ही छोटा सा कट लगता है। सर्जरी के दौरान दर्द और ब्लीडिंग नहीं होती है। हाइपरोपिया की लेसिक सर्जरी को शुरू करने से पहले सर्जन मरीज की आंख में एनेस्थेटिक ड्रॉप डाल देते हैं, जिससे सर्जरी के दौरान होने वाले दर्द का खतरा खत्म हो जाता है।
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संक्षिप्त और सरल प्रक्रिया
यह एक संक्षिप्त, सरल और सफल प्रक्रिया है। इस सर्जरी के दौरान या बाद में जटिलताओं का खतरा लगभग शून्य होता है। अगर आप दर्द, ब्लीडिंग या दूसरी किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना किए बिना हाइपरोपिया का परमानेंट इलाज मात्र एक दिन में पाना चाहते हैं तो लेसिक सर्जरी आपके लिए बेस्ट विकल्प है।
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बेस्ट रिजल्ट आता है
इस सर्जरी का रिजल्ट बेस्ट और परमानेंट आता है। आमतौर पर सर्जरी खत्म होने के कुछ ही घंटों के बाद मरीज को तेज और साफ दृष्टि मिल जाती है। फिर मरीज को दूर के साथ-साथ नजदीक की वस्तुएं भी साफ-साफ दिखाई देने लगती हैं।
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रिकवरी जल्दी होती है
लेसिक सर्जरी हाइपरोपिया का मॉडर्न और एडवांस सर्जिकल इलाज है। इस सर्जरी के बाद मरीज की रिकवरी बहुत तेजी से होती है। सर्जरी के मात्र 1-2 दिन के बाद से मरीज अपने दैनिक जीवन के कामों को फिर से शुरू कर सकते हैं। हालांकि, इस सर्जरी के बाद मरीज को पूर्ण रूप से ठीक होने में लगभग 1-2 सप्ताह का समय लगता है।
हम एक दिन में हाइपरोपिया का लेजर इलाज करते हैं
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हमारे डॉक्टर को दृष्टि संबंधित बीमारियां जैसे कि ग्लूकोमा, हाइपरोपिया, मायोपिया, एस्टिग्मेटज्म और मोतियाबिंद की गहरी समझ और लेजर सर्जरी में सालों का अनुभव प्राप्त है। ये डॉक्टर अब तक इन बीमारियों की 2000 से भी अधिक सफल सर्जरी कर चुके हैं।
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