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चीरा नहीं लगता है, दर्द और ब्लीडिंग नहीं होती हैचीरा नहीं लगता है, दर्द और ब्लीडिंग नहीं होती है
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उसी दिन इलाज और डिस्चार्जउसी दिन इलाज और डिस्चार्ज

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वैरीकोसेल क्या है?

अंडकोष की थैली (Scrotum) में नसों के आकार बढ़ने की स्थिति को मेडिकल की भाषा में वैरीकोसेल कहा जाता है। नसों में वॉल्व मौजूद होते हैं जिनका काम खून को अंडकोष की थैली से दिल तक ले जाना है। लेकिन वॉल्व में किसी प्रकार की खराबी होने या वॉल्व के सही से काम नहीं करने पर खून दिल तक जाने के बजाय नसों में ही एक जगह इकट्ठा होने लगता है। खून के एक जगह जमा होने के कारण अंडकोष की थैली और उसके आसपास सूजन होने लगता है। यही सूजन आगे जाकर वैरीकोसेल में बदल जाता है। वैरीकोसेल स्पर्म की क्वालिटी, क्वांटिटी और दूसरे उन सभी फंक्शन को प्रभावित करता है जो आगे जाकर पुरुष में बांझपन का कारण बन सकते हैं।

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उपचार

जांच

वैरीकोसेल का इलाज शुरू करने से पहले डॉक्टर मरीज की जांच करते हैं ताकि वे उसके वैरीकोसेल के ग्रेड और गंभीरता को अच्छी तरह से समझ सकें। सबसे पहले, डॉक्टर मरीज की मेडिकल हिस्ट्री के बारे में जानते हैं और वैरीकोसेल के लक्षणों तथा यह समस्या उन्हें कितनों दिनों से है आदि से संबंधित कुछ प्रश्न पूछते हैं। उसके बाद, सर्जन मरीज की शारीरिक जांच करते हैं। अंडकोष की थैली में पानी है या नहीं - इस बात की पुष्टि करने के लिए डॉक्टर ब्लड टेस्ट और एक्स-रे करते हैं। साथ ही, अल्ट्रासाउंड की मदद से अंडकोष की थैली के सूजन की जांच करते हैं। शारीरिक परीक्षण के दौरान डॉक्टर कोमलता की जांच करते हैं। वीर्य विश्लेषण (Semen Analysis Test) और हार्मोन परीक्षण (Hormone Test) की मदद से डॉक्टर कूप उत्तेजक हार्मोन (Follicle Stimulating Hormone) और कम टेस्टोस्टेरोन (Low Testosterone) का पता लगाते हैं। साथ ही, वैरीकोसेल के लक्षणों की पुष्टि करने के लिए डॉक्टर अल्ट्रासाउंड भी करते हैं।

सर्जरी

परक्यूटेनियस इम्बोलिजेशन यह एक दिन की सर्जिकल प्रक्रिया है जो वैरीकोसेल का इलाज करने के बाद स्पर्म की क्वालिटी और क्वांटिटी को बेहतर बनाने में मुख्य भूमिका निभाता है। इलाज खत्म होने के बाद मरीज को कुछ घंटों के लिए हॉस्पिटल में रुकने की आवश्यकता पड़ती है। फिर मरीज अपने घर जाने और सर्जरी के दो दिन बाद अपने दैनिक जीवन के कामों को दोबारा शुरू करने के लिए पूरी तरह से फिट हो जाते हैं। परक्यूटेनियस इम्बोलिजेशन की प्रक्रिया को शुरू करने से पहले रेडियोलॉजिस्ट मरीज को एनेस्थीसिया देते हैं और फिर उसके बाद उनके पेट के निचले हिस्से में एक बहुत ही छोटा सा कट लगाते हैं। कट लगाने के बाद, रेडियोलॉजिस्ट एक्स-रे की मदद से एक कैथिटर को मरीज के शरीर में डालते हैं और खराब नस से खून के प्रवाह को बंद करके उसे दूसरे स्वस्थ और अप्रभावित नस से जोड़ देते हैं।

लेप्रोस्कोपिक वैरिकोसेलेक्टॉमी जब परक्यूटेनियस इम्बोलिजेशन या इलाज की दूसरी प्रक्रियाओं का इस्तेमाल करने के बाद भी वैरीकोसेल में किसी प्रकार का सकारात्मक बदलाव नहीं आता है तो विशेषज्ञ डॉक्टर लेप्रोस्कोपिक सर्जरी यानी लेप्रोस्कोपिक वैरिकोसेलेक्टॉमी का सुझाव देते हैं। यह वैरीकोसेल का सबसे सटीक, सफल और परमानेंट इलाज है। इस सर्जरी के बाद दोबारा वैरीकोसेल होने का खतरा लगभग खत्म हो जाता है। वैरीकोसेल की लेप्रोस्कोपिक सर्जरी की प्रक्रिया को शुरू करने से पहले सर्जन मरीज को एनेस्थीसिया देते हैं और फिर उसके बाद उनके पेट या ऊपरी जांघ में एक बहुत ही छोटा सा कट लगाते हैं। कट लगाने के बाद, सर्जन अल्ट्रासाउंड की मदद से लेप्रोस्कोप नामक उपकरण को मरीज के शरीर में डालते हैं और खराब नस से खून के प्रवाह को बंद करके उसे दूसरे स्वस्थ नस से जोड़ देते हैं। उसके बाद, सर्जन कट वाली जगह पर ड्रेसिंग कर देते हैं। इस पूरी सर्जिकल प्रक्रिया को पूरा होने में लगभग 30 मिनट का समय लगता है।

वैरीकोसेल की लेप्रोस्कोपिक सर्जरी के दौरान मरीज को जरा भी दर्द या ब्लीडिंग नहीं होती है। सर्जरी के दौरान या बाद में इंफेक्शन या दूसरे किसी भी प्रकार के साइड इफेक्ट्स का खतरा लगभग न के बराबर होता है। लेपरसोकोपिक सर्जरी एक दिन की प्रक्रिया है। इसलिए सर्जरी के बाद मरीज को हॉस्पिटल में रुकने की जरूरत भी नहीं पड़ती है। सर्जरी खत्म होने के कुछ ही घंटों के बाद मरीज अपने घर जाने के लिए पूरी तरह से फिट हो जाते हैं। साथ ही, सर्जरी के 48 घंटों या दो दिन के बाद वे अपने दैनिक जीवन के कामों को बिना किसी परेशानियों का सामना किए दोबारा शुरू भी कर सकते हैं। लेप्रोस्कोपिक सर्जरी के बाद मरीज को ठीक होने में काफी कम समय लगता है। यही कारण है कि हर कोई वैरीकोसेल का परमानेंट इलाज कराने के लिए लेप्रोस्कोपिक सर्जरी का चुनाव कर रहा है। लेप्रोस्कोपिक वैरिकोसेलेक्टॉमी के निम्नलिखित फायदे हैं।

दर्द नहीं होता है,रिकवरी बहुत तेजी से होती है,उसी दिन इलाज और डिस्चार्ज,इंफेक्शन का खतरा शून्य होता है,हॉस्पिटल में रुकने की जरूरत नहीं,ब्लीडिंग लगभग न के बराबर होती है,दर्द से बचने के लिए पेन किलर लेने की जरूरत नहीं पड़ती है,इंफेक्शन से बचने के लिए एंटी बायोटिक दवाओं की जरूरत नहीं पड़ती है,लेप्रोस्कोपिक सर्जरी वैरीकोसेल का सबसे संक्षिप्त, सटीक, सुरक्षित और सफल इलाज है

Pristyn Care क्यों चुनें?

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Pristyn Care कोविड-फ्री है

हमारी क्लीनिक में मरीज की सेहत और सुरक्षा का खास ध्यान रखा जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की गाइडलाइन को ध्यान में रखते हुए हमारी सभी क्लिनिक और हॉस्पिटल को नियमित रूप से सैनेटाइज किया जाता है।

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मेडिकल सहायता

सर्जरी से पहले होने वाली सभी चिकित्सीय जाँच में रोगी को मेडिकल सहायता दी जाती है। हमारी क्लीनिक में बीमारियों का उपचार के लिए लेजर एवं लेप्रोस्कोपिक प्रक्रियाओं का उपयोग होता है, जो USFDA द्वारा प्रमाणित हैं।

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सर्जरी के दौरान सहायता

हम हर मरीज को एक केयर बड्डी उपलब्ध कराते हैं जो एडमिशन से लेकर डिस्चार्ज की प्रक्रिया तक हॉस्पिटल से जुड़े सभी पेपरवर्क को पूरा करता है। साथ ही, मरीज की जरूरतों का खास ध्यान रखता है।

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सर्जरी के बाद देखभाल

सर्जरी के बाद फ्री फॉलो-अप मीटिंग की सुविधा उपलब्ध है। साथ ही, मरीज को डाइट चार्ट और आफ्टरकेयर टिप्स दी जाती है ताकि उनकी रिकवरी जल्दी हो।

Pristyn Care के आँकड़े

60k+संतुष्ट मरीज
90+क्लीनिक
30+शहर
20k+सर्जरी
300+डॉक्टर
400+अस्पताल

अधिकतर पूछे जाने वाले प्रश्न

नोएडा में वैरीकोसेल का बेस्ट इलाज क्या है?

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वैरीकोसेल एक गंभीर बीमारी है जो आगे जाकर पुरुषों में बांझपन का कारण बन सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि 15-30 वर्ष की उम्र के लगभग 15% पुरुष वैरीकोसेल से पीड़ित होते हैं। नोएडा में वैरीकोसेल का इलाज कई तरह से किया जाता है। लेकिन लेप्रोस्कोपिक सर्जरी यानि लेप्रोस्कोपिक वैरिकोसेलेक्टॉमी को इसका बेस्ट इलाज माना जाता है। लेप्रोस्कोपिक सर्जरी वैरीकोसेल का मॉडर्न और एडवांस इलाज है, जिससे किसी भी ग्रेड के वैरीकोसेल का परमानेंट इलाज किया जा सकता है। नोएडा में स्थित हमारे प्रिस्टीन केयर क्लिनिक में लेप्रोस्कोपिक सर्जरी से वैरीकोसेल का परमानेंट इलाज किया जाता है। अगर आप नोएडा में वैरीकोसेल का बेस्ट इलाज पाना चाहते हैं तो प्रिस्टीन केयर से संपर्क करें। हमारे विश्वसनीय यूरोलॉजिस्ट अपने सालों के अनुभव और मॉडर्न एवं एडवांस मेडिकल टेक्नोलॉजी की मदद से आपकी बीमारी को कम से कम समय में बहुत ही आसानी से हमेशा के लिए ठीक कर सकते हैं।

क्या वैरीकोसेल की लेप्रोस्कोपिक सर्जरी में दर्द होता है?

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प्रिस्टीन केयर क्लिनिक में मॉडर्न और एडवांस लेप्रोस्कोपिक सर्जरी से वैरीकोसेल का इलाज किया जाता है। इस सर्जरी को शुरू करने से पहले हमारे विश्वसनीय सर्जन मरीज को एनेस्थीसिया देते हैं, जिससे सर्जरी के दौरान होने वाले दर्द का खतरा खत्म हो जाता है। वैरीकोसेल की लेप्रोस्कोपिक सर्जरी एक दर्द रहित प्रक्रिया है जिसके दौरान मरीज को जरा भी दर्द या दूसरी किसी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता है। यह एक दिन की सर्जिकल प्रक्रिया है जिसे पूरा होने में मात्र आधे घंटे का समय लगता है। सर्जरी खत्म होने के बाद मरीज को हॉस्पिटलाइजेशन की आवश्यकता भी नहीं पड़ती है। सर्जरी खत्म होने के कुछ ही घंटों के बाद मरीज अपने घर जाने के किए फिट हो जाते हैं। इतना ही नहीं, लेप्रोस्कोपिक वैरिकोसेलेक्टॉमी के मात्र दो दिन बाद से मरीज अपने दैनिक जीवन के कामों को फिर से शुरू भी कर सकते हैं। नोएडा में स्थित हमारे प्रिस्टीन केयर क्लिनिक से संपर्क कर आप बिना किसी परेशानी का सामना किए अपने वैरीकोसेल से हमेशा के लिए छुटकारा पा सकते हैं।

नोएडा में वैरीकोसेल की सर्जरी में कितना खर्च आता है?

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नोएडा में वैरीकोसेल की सर्जरी का खर्च काफी चीजों पर निर्भर करता है जैसे कि वैरीकोसेल का ग्रेड और गंभीरता, यूरोलॉजिस्ट का अनुभव और विश्वसनीयता, क्लिनिक या हॉस्पिटल का लोकेशन और वैरीकोसेल की सर्जरी में उनका ट्रैक रिकॉर्ड, हॉस्पिटलाइजेशन और सर्जरी के बाद फॉलो-अप्स आदि। लेकिन आपको घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि नोएडा के दूसरे क्लिनिक या हॉस्पिटल की तुलना में हमारे प्रिस्टीन केयर क्लिनिक में कम से कम खर्च में मॉडर्न और एडवांस लेप्रोस्कोपिक सर्जरी से वैरीकोसेल का परमानेंट इलाज किया जाता है। इतना ही नहीं, हम नोएडा में कम से कम खर्च में वैरीकोसेल की बेस्ट सर्जरी करने के साथ-साथ अपने मरीजों को और भी ढेरों सुविधाएं प्रदान करते हैं जिसमें सर्जरी वाले दिन फ्री पिकअप और ड्रॉप की सुविधा, सभी डायग्नोस्टिक टेस्ट पर 30% तक छूट और सर्जरी के बाद फ्री फॉलो-अप्स आदि शामिल हैं। अगर आप कम से कम खर्च में नोएडा में वैरीकोसेल का परमानेंट इलाज कराना चाहते हैं तो अभी हमसे संपर्क करें।

क्या वैरीकोसेल फर्टिलिटी को प्रभावित करता है?

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हां. विशेषज्ञ का कहना है कि वैरीकोसेल स्पर्म की क्वालिटी और क्वांटिटी के साथ-साथ दूसरे भी उन फंक्शन को बुरी तरह से प्रभावित करता है जो आगे जाकर इनफर्टिलिटी का कारण बन सकते हैं। अगर आप वैरीकोसेल के लक्षणों को खुद में अनुभव करते हैं या इस बीमारी से पीड़ित हैं तो विशेषज्ञ डॉक्टर से मिलकर इसका उचित जांच और इलाज कराना चाहिए। वैरीकोसेल का इलाज कई तरह से किया जाता है। लेकिन लेप्रोस्कोपिक सर्जरी यानि लेप्रोस्कोपिक वैरिकोसेलेक्टॉमी को इसका बेस्ट इलाज माना जाता है। लेप्रोस्कोपिक सर्जरी से किसी भी ग्रेड के वैरीकोसेल का परमानेंट इलाज किया जा सकता है। नोएडा में स्थित हमारे प्रिस्टीन केयर क्लिनिक में मॉडर्न और एडवांस लेप्रोस्कोपिक सर्जरी से वैरीकोसेल का इलाज किया जाता है। अगर आप नोएडा में वैरीकोसेल का बेस्ट और परमानेंट इलाज पाना चाहते हैं तो बिना देरी किए प्रिस्टीन केयर से संपर्क करें।

क्या वैरीकोसेल का इलाज आवश्यक है?

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वैरीकोसेल एक गंभीर बीमारी है जिसका समय पर जांच और उचित इलाज आवश्यक है। लंबे समय तक वैरीकोसेल के लक्षणों को नजरअंदाज करने या समय पर इसका सटीक इलाज नहीं कराने पर यह आगे जाकर पुरुष में बांझपन का कारण बन सकता है। साथ ही साथ टेस्टिकुलर के फंक्शन को भी बुरी तरह से प्रभावित कर सकता है। अगर आप खुद में वैरीकोसेल के लक्षण जैसे कि अंडकोष की थैली में गांठ, अंडकोष के आकार का बढ़ना, शारीरिक काम के समय तेज दर्द, अंडकोष की थैली में दर्द और सूजन, नसों का बाहर की तरफ दिखाई पड़ना, नसों का मुड़ना और एक जगह जमा होना या दिन के समय अधिक दर्द और बेचैनी आदि अनुभव करते हैं तो बिना देरी किए यूरोलॉजिस्ट से मिलकर अपना जांच और इलाज कराएं।

हम निम्नलिखित बीमारियों का भी इलाज करते हैं

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नोएडा के करीबी शहर, जहाँ हम वैरीकोसेल का उपचार प्रदान करते हैं

नोएडा में वैरीकोसेल का बेस्ट इलाज

वैरीकोसेल एक गंभीर समस्या है जिससे पीड़ित होने पर आपको जल्द से जल्द डॉक्टर से मिलकर अपना उचित जांच और इलाज करवाना चाहिए। अंडकोष की थैली की नसों में वॉल्व होते हैं जिनका काम खून को दिल तक ले जाना है। लेकिन वॉल्व खराब होने या उनमें किसी प्रकार की समस्या होने पर वे खून को अंडकोष की थैली से दिल तक नहीं ले पाते हैं। नतीजतन, खून दिल तक जाने के बजाय नसों में एक ही जगह जमा होने लगता है। जिसके कारण अंडकोष के आसपास सूजन होने लगता है जो आगे जाकर वैरीकोसेल में बदल जाता है। वैरीकोसेल स्पर्म की क्वालिटी और क्वांटिटी को बुरी तरह से प्रभावित करता है और पुरुष में बांझपन का कारण भी बन सकता है। नोएडा में वैरीकोसेल का इलाज कई तरह से किया जाता है। लेकिन लेप्रोस्कोपिक सर्जरी यानी लेप्रोस्कोपिक वैरिकोसेलेक्टॉमी को वैरीकोसेल का सबसे बेस्ट इलाज माना जाता है। इस मॉडर्न और एडवांस सर्जरी से किसी भी ग्रेड के वैरीकोसेल का परमानेंट इलाज किया जा सकता है। नोएडा में स्थित हमारे प्रिस्टीन केयर क्लिनिक में वैरीकोसेल का इलाज करने के लिए लेप्रोस्कोपिक सर्जरी से इस्तेमाल किया जाता है। इस सर्जरी को बहुत ही अनुभवी और कुशल यूरोलॉजिस्ट की टीम की देखरेख में पूरा किया जाता है। अगर आप वैरीकोसेल के लक्षणों को खुद में देख रहे हैं या फिर इससे पीड़ित हैं और नोएडा में इसका बेस्ट इलाज पाना चाहते हैं तो प्रिस्टीन केयर आपके लिए परफेक्ट है।

नोएडा में वैरीकोसेल का दर्द रहित इलाज

नोएडा में स्थित प्रिस्टीन केयर क्लिनिक में मॉडर्न और एडवांस लेप्रोस्कोपिक सर्जरी से वैरीकोसेल का इलाज किया जाता है। लेप्रोस्कोपिक सर्जरी एक दर्द रहित सर्जिकल प्रक्रिया है जिसके दौरान मरीज को जरा भी दर्द नहीं होता है। हमारे क्लिनिक में लेप्रोस्कोपिक सर्जरी की प्रक्रिया को शुरू करने से पहले सर्जन मरीज को एनेस्थीसिया देते हैं जिससे सर्जरी के दौरान होने वाले दर्द का खतरा खत्म हो जाता है। एनेस्थीसिया देने के बाद सर्जन खराब नस को काटकर बाहर निकाल देते हैं या उससे खून के प्रवाह को बंद करके खून के प्रवाह के प्रवाह को दूसरे स्वस्थ यानि अप्रभावित नस से जोड़ देते हैं। इस पूरी सर्जिकल प्रक्रिया के दौरान खून के प्रवाह में किसी प्रकार की कोई दिक्कत नहीं आती है। यह एक दिन की सर्जिकल प्रक्रिया है, इसलिए सर्जरी के बाद मरीज को हॉस्पिटलाइजेशन की जरूरत भी नहीं पड़ती है। सर्जरी खत्म होने के कुछ ही घंटों के बाद मरीज को क्लिनिक से डिस्चार्ज कर दिया जाता है। सर्जरी खत्म होने के मात्र दो दिन बाद से मरीज अपने दैनिक जीवन के कामों को फिर से शुरू कर सकते हैं। लेकिन उन्हें सर्जन द्वारा बताए गए कुछ खास बातों का ध्यान रखना भी आवश्यक है। अगर आप भी वैरीकोसेल से परेशान हैं और नोएडा में इसका दर्द रहित तथा बेस्ट इलाज चाहते हैं तो हमसे अभी संपर्क करें।

नोएडा में वैरीकोसेल का परमानेंट इलाज

लेप्रोस्कोपिक सर्जरी से नोएडा में वैरीकोसेल का परमानेंट इलाज संभव है। लेप्रोस्कोपिक सर्जरी वैरीकोसेल का मॉडर्न और एडवांस इलाज है। इस सर्जरी से किसी भी ग्रेड के वैरीकोसेल का परमानेंट इलाज किया जा सकता है। लेप्रोस्कोपिक सर्जरी यानी लेप्रोस्कोपिक वैरिकोसेलेक्टॉमी के बाद इरेक्टाइल डिस्फंक्शन या इनफर्टिलिटी का खतरा खत्म हो जाता है। नोएडा में स्थित हमारे प्रिस्टीन केयर क्लिनिक में मॉडर्न और एडवांस लेप्रोस्कोपिक सर्जरी से वैरीकोसेल का परमानेंट इलाज किया जाता है। हमारे क्लिनिक में लेप्रोस्कोपिक वैरिकोसेलेक्टॉमी को अनुभवी और कुशल यूरोलॉजिस्ट की टीम की देखरेख में पूरा किया जाता है। इस सर्जरी के दौरान मरीज को जरा भी दर्द नहीं होता है और सर्जरी के दौरान या बाद में साइड इफेक्ट्स का खतरा भी लगभग शून्य होता है। लेप्रोस्कोपिक वैरिकोसेलेक्टॉमी के बाद दोबारा वैरीकोसेल होने का खतरा लगभग खत्म हो जाता है। इस सर्जरी के दौरान हमारे विश्वसनीय सर्जन बहुत ही आसानी से खराब नस को काटकर बाहर निकाल देते हैं या उससे खून के प्रवाह को बंद करके स्वस्थ और अप्रभावित नस से जोड़ देते हैं। इस पूरी सर्जिकल प्रक्रिया को पूरा होने में लगभग आधे घंटे का समय लगता है। इस पूरी सर्जरी के दौरान खून के प्रवाह पर किसी भी प्रकार का गलत प्रभाव नहीं पड़ता है। सर्जरी खत्म होने के कुछ ही घंटों के बाद मरीज अपने घर जाने के लिए पूरी तरह से फिट हो जाते हैं। अगर आप भी नोएडा में वैरीकोसेल का परमानेंट इलाज चाहते हैं तो तुरंत प्रिस्टीन केयर से संपर्क करें।

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