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फाइमोसिस (फिमोसिस – Phimosis Meaning) एक सामान्य बीमारी है जिसकी स्थिति में फोरस्किन (लिंग की ऊपरी स्किन) काफी ज्यादा टाइट हो जाती है। टाइट होने के कारण वह पीछे नहीं जा पाती है जिसकी वजह से उसमें गंदगी, इंफेक्शन और सूजन होने शुरू हो जाते हैं जो आगे जाकर फाइमोसिस का कारण बनते हैं। यह समस्या अधिकतर उन बच्चों और वयस्कों में पाई जाती है जिनका खतना नहीं हुआ होता है। Ayurvedic Oil For Phimosis in Hindi इसका इलाज कई तरह से किया जाता है। (आगे पढ़ें: इरेक्टाइल डिसफंक्शन का घरेलू इलाज)

फाइमोसिस के क्या कारण हैं — What Are The Causes of Phimosis in Hindi

अगर आप पहले ही फाइमोसिस के कारणों का पता लगा लेते हैं तो आप इस समस्या की आसानी से रोकथाम कर खुद को इससे दूर रख सकते हैं। इसके निम्न कारण हैं।   

  • उम्र बढ़ने पर फिमोसिस की समस्या सामने आ सकती है। 
  • प्राइवेट पार्ट में पियर्सिंग करवाने से भी यह समस्या हो सकती है। 
  • बार बार यूरिन इंफेक्शन होने के कारण भी फिमोसिस हो सकता है। 
  • एक्जिमा से पीड़ित होने की स्थिति में फाइमोसिस की संभावना बढ़ जाती है। 
  • ज्यादा देर तक डायपर पहनने से बच्चों को फाइमोसिस का खतरा रहता है। 
  • प्राइवेट पार्ट में साफ सफाई न होने के कारण भी इस बीमारी की संभावना बढ़ती है। 
  • डायबिटीज के कारण लिंग के मुंड पर इंफेक्शन हो जाने से इस बीमारी का खतरा बढ़ जाता है। 
  • सेक्स के दौरान स्किन लंबे समय तक पीछे रह जाता है, इससे भी फिमोसिस की संभावना बढ़ जाती है। 
  • बिना प्रोटेक्शन के सेक्सुअल एक्टिविटी करने से इंफेक्शन का होने का खतरा रहता है जो फाइमोसिस का कारण बन सकता है। 
  • इंफेक्शन होने के कारण स्किन पर घाव के निशान पड़ जाते हैं जिसकी वजह से स्किन खिंच कर टाइट हो जाती है जो आगे जाकर फाइमोसिस का कारण बन सकती है। 

फाइमोसिस के क्या लक्षण हैं — What Are The Symptoms of Phimosis in Hindi

फाइमोसिस के ढेरों लक्षण हैं जिनकी मदद से आप या आपके डॉक्टर इस बात का काफी आसानी से अंदाजा लगा सकते हैं की आप फाइमोसिस से पीड़ित हैं। फाइमोसिस कोई गंभीर समस्या नहीं है लेकिन लंबे समय तक इसे नजरअंदाज करने से दूसरी खतरनाक बीमारियां होने की संभावना बढ़ जाती है। Ayurvedic Oil For Phimosis in Hindi इसलिए यह आवश्यक है की इसके किसी भी लक्षण को खुद में महसूस करने पर तुरंत डॉक्टर से मिलकर इसकी जांच और Phimosis Ka Ayurvedic Ilja इलाज करवानी चाहिए। नीचे हम कुछ खास लक्षणों के बारे में बता रहे हैं।  

इसे भी पढ़ें: हाइड्रोसील के प्रकार, कारण, लक्षण और इलाज

  • लिंग में सूजन होना
  • पेशाब से बदबू आना
  • पेशाब का गाढ़ा होना 
  • लिंग पर लाल धब्बे बनना 
  • लिंग की स्किन में इंफेक्शन होना 
  • पेशाब के दौरान दर्द और जलन होना 
  • पेशाब के दौरान फोरस्किन का फुलना 
  • सेक्स या यूरिन पास करते समय दर्द होना
  • लिंग की स्किन की सफाई करने में परेशानी होती है 
  • फिमोसिस होने के कारण उत्तेजना में कमी हो जाती है  
  • यूटीआई और फिमोसिस के कुछ लक्षण एक जैसे होते हैं, जांच द्वारा इनकी पुष्टि करानी चाहिए  

अगर आप ऊपर बताए गए किसी भी लक्षण को खुद में अनुभव करते हैं तो तुरंत डॉक्टर से मिलकर जांच की मदद से इसके पीछे के कारण का पता लगाना चाहिए।  

फाइमोसिस का आयुर्वेदिक इलाज — Best Ayurvedic Treatment For Phimosis in Hindi 

आमतौर पर बच्चों में फाइमोसिस के इलाज की जरुरत नहीं पड़ती है क्योंकि कुछ समय के बाद यह अपने आप ही ठीक हो जाता है। इसके अलावा, बहुत सारे Steroid Cream For Phimosis स्टेरॉयड क्रीम और स्किन पर लगाने वाले जेल भी मौजूद हैं जिसे दिन में दो बार लिंग पर लगातार दो या तीन सप्ताह तक लगाने से फाइमोसिस से राहत मिलती है। जब इनके इस्तेमाल से फायदा नहीं होता है तब डॉक्टर सर्जरी की सलाह देते हैं। 

बहुत से लोग सर्जरी से डरते हैं या फिर किसी दूसरे कारण से सर्जरी नहीं कराना चाहते हैं। ऐसे में उनके पास Phimosis Ka Ayurvedic Ilja आयुर्वेदिक उपचार सबसे बेहतरीन विकल्प बचता है क्योंकि इसकी मदद से वे अपनी इस समस्या को बिना सर्जरी के ही ठीक कर सकते हैं। 

इसे भी पढ़ें: 30 मिनट में फाइमोसिस जड़ से खत्म

फाइमोसिस के लिए नारियल तेल का इस्तेमाल — Coconut Oil is Best For Phimosis in Hindi

नारियल तेल Ayurvedic Medicine For Phimosis in Hindi फिमोसिस की समस्या को दूर करने का एक बढ़िया इलाज है। इसका इस्तेमाल करने से पहले हल्के गर्म पानी में अपने लिंग को भिगो कर उसकी स्किन को हल्का आगे पीछे करने की कोशिश करें। फिर उसे साफ करने के बाद लिंग में नारियल का तेल लगाएं, जब लिंग की स्किन तेल को अब्जॉर्ब कर ले तब उसे लगभग पांच मिनट तक आगे पीछे करने की कोशिश करें। 

कुछ दिनों तक लगातार ऐसा करने से Ling Ki Chamdi Nahi Khulti Gharelu Upay आपके लिंग की स्किन फ्री होकर आराम से आगे पीछे होनी शुरू हो जाती है और फाइमोसिस की समस्या खत्म हो जाती है। ध्यान रहे की आप अधिक मात्रा में तेल लगाकर लंबे समय तक लिंग की स्किन को आगे पीछे करने की कोशिश न करें। स्किन को प्यार से आगे पीछे करना है, जबरदस्ती करने पर आपको परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। किसी तरह की कोई दिक्कत या परेशानी होने पर आप डॉक्टर से मिलकर बात करनी चाहिए। (इसे भी पढ़ें: बैलेनाइटिस ट्रीटमेंट)

कैलेंडुला क्रीम फाइमोसिस का बेहतरीन इलाज है — Calendula Cream is Good For Treating Phimosis in Hindi

कैलेंडुला क्रीम फाइमोसीस की समस्या को बहुत ही प्रभावशाली रूप से खत्म करता है। यह गेंदे के फूल से तैयार किया जाता है। इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं Ling Ki Chamdi Me Sujan Ka ilaj जो लिंग के इंफेक्शन, सूजन और डर्मेटाइटिस जैसी अन्य ढेरों समस्याओं को दूर करने में बड़ी भूमिका निभाते हैं। अगर आप फाइमोसिस से पीड़ित हैं तो सबसे पहले इस क्रीम को फोरस्किन के ऊपर लगाएं और फिर उसे धीरे धीरे आगे पीछे करने की कोशिश करें। नियमित रूप से कुछ दिनों तक इस क्रीम का इस्तेमाल करने से आपकी फोरस्किन ढीली हो जाती है। 

स्किन ढीली होने की वजह से उसे साफ करना आसान हो जाता है। सफाई होने के कारण इंफेक्शन और सूजन खत्म हो जाते हैं जिसकी वजह से Ling Ki Chamdi Nahi Khulti Gharelu Upay आपको फाइमोसिस से छुटकारा मिल जाता है। इस क्रीम के इस्तेमाल की विधि को लेकर किसी तरह की कोई दिक्कत हो तो आप डॉक्टर से इस बारे में जानकारी ले सकते हैं साथ ही साथ यूटृब पर भी ढेरों ऐसे वीडियो हैं जिसमें इस क्रीम के इस्तेमाल के बारे में विस्तार से बताया गया है, आप उन वीडियो की मदद भी ले सकते हैं। (इसे भी पढ़ें: पेनिस फोरस्किन प्रॉब्लम)

कैमोमाइल क्रीम फाइमोसिस को ठीक करता है — Chamomile Cream For Treating Phimosis in Hindi

यह क्रीम ढेरों आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों से बना एक बहुत ही सफल, सुरक्षित और प्रभावशाली उपचार है। यह क्रीम उन लोगों के लिए सबसे बेस्ट है जो स्टेरॉयड क्रीम का इस्तेमाल नहीं करना चाहते हैं। कैमोमाइल क्रीम में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं जो हाइड्रोकार्टिसोन की तरह प्रभावी रूप से काम करते हैं। Ayurvedic Oil For Phimosis in Hindi अगर आप अपने फाइमोसिस की समस्या को आयुर्वेदिक दवाओं और जड़ी बूटियों की मदद से दूर करना चाहते हैं तो यह क्रीम एक बेहतर विकल्प है। 

कुछ दिनों तक लगातार इस क्रीम का इस्तेमाल करने से टाइट फोरस्किन धीरे धीरे खुलने और ढीली होने लगती है जिससे सेक्स या यूरिन पास करते समय आपको दर्द या परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ता है। Ayurvedic Treatment For Phimosis in Hindi आप इस क्रीम का इस्तेमाल बेझिझक कर सकते हैं। बाकी, किसी तरह की कोई शंका या इसके इस्तेमाल की मात्रा और स्पष्ट विधि के बारे में जानने के लिए आप डॉक्टर से संपर्क कर सकते हैं। वे आपके फाइमोसिस की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए इसको इस्तेमाल करने का सही तरीका बताएंगे। 

फाइमोसिस का बढ़िया इलाज है कैस्टर ऑयल — Caster Oil Cures Phimosis in Hindi 

कैस्टर ऑयल एक बढ़िया आयुर्वेदिक औषधि है। यह बींस यानी की अरंडी के बीजों से निकाला जाता है। इसका वैज्ञानिक नाम रिसिनस कम्युनिस है और इसे हिंदी में अरंडी का तेल कहते हैं। इस तेल के अंदर फैटी एसिड के गुण पाए जाते हैं जिसके कारण इसका Ayurvedic Medicine For Phimosis in Hindi इस्तेमाल एक औषधि के रूप में किया जाता है। लिंग की फोरस्किन पर इस तेल की हल्की मालिश करने से टाइट फोरस्किन ढीली होकर आगे पीछे होने लगती है जिससे फाइमोसीस की समस्या आसानी से खत्म हो जाती है। इसका इस्तेमाल गैर-औषधीय यानी की एक प्रेज़रवेटिव और फ्लेवरिंग एजेंट के रूप में भी किया जाता है। 

इसका इस्तेमाल स्किन संबंधी प्रोडक्ट्स जैसे की साबुन, शैंपू, क्रीम, डाई, प्लास्टिक, पेंट और दूसरी भी काफी चीजों को बनाने में किया जाता है। कैस्टर ऑयल का इस्तेमाल ढेरों परेशानियों को दूर करने के लिए किया जाता है, जिसमें पेट दर्द, पीठ दर्द, सिर दर्द, गैस, कब्ज, स्किन प्रोब्लेम्स, दर्द, सूजन और दूसरी भी काफी समस्याएं शामिल हैं। Ayurvedic Treatment For Phimosis in Hindi अगर आप इस तेल का इस्तेमाल फाइमोसिस से छुटकारा पाने की नियत से करना चाहते हैं तो किसी आयुर्वेद डॉक्टर से इसके बारे में अवश्य परामर्श करें। यह आपकी समस्या को बहुत ही आसानी से खत्म कर देगा। (इसे भी पढ़ें: खतना क्यों जरूरी है?

फाइमोसिस की रोकथाम — What Are The Precautions of Phimosis in Hindi

फाइमोसीस होने के कई कारण हैं लेकिन इन सबमें सबसे बड़ा कारण है आपके प्राइवेट पार्ट्स में गंदगी होना। Ayurvedic Oil For Phimosis in Hindi अगर आप अपने प्राइवेट पार्ट्स की साफ सफाई का समय समय पर ध्यान रखें तो आप खुद को इस समस्या से दूर रख सकते हैं। इनके अलावा भी काफी चीजें है जिनको ध्यान में रखने के बाद इस बीमारी की रोकथाम की जा सकती है। 

  • अपने खान पान पर खास ध्यान दें
  • हेल्दी चीजों को अपनी डाइट में शामिल करें 
  • अपने लिंग और उसके आस पास के क्षेत्र को साफ रखें
  • अगर फोरस्किन टाइट है तो उसे जबरदस्ती पीछे नहीं करना चाहिए 
  • अपने लिंग में टैल्कम पाउडर या किसी परफ्यूम का इस्तेमाल न करें 
  • लिंग साफ रखने से इंफेक्शन और सूजन होने का खतरा नहीं होता है  
  • खुद को बैक्टीरिया और संक्रमण से दूर रखें क्योंकि इससे फाइमोसिस होने का खतरा रहता है 
  • नियमित रूप से रोजाना हल्का फूलका व्यायाम करें क्योंकि इससे आप स्वस्थ और बीमारियों से सुरक्षित रहते हैं 
  • अगर आपने हाल ही में पैराफाइमोसिस सर्जरी कराई है तो तबतक डॉक्टर के संपर्क में रहें जबतक आप पूरी तरह से ठीक नहीं हो जाते  
  • अगर आपका खतना नहीं हुआ है तो रोजाना नहाते समय अपने फोरस्किन को पीछे करके उसके नीचे वाले हिस्से को साफ करें 
  • बच्चों के फोरस्किन को तभी पीछे हटाएं जब स्किन तैयार है, जबरदस्ती उसे पीछे हटाने पर स्किन डैमेज और साथ में तेज दर्द भी हो सकता है 

इन सबके अलावा भी अगर फोरस्किन में प्रॉब्लम है तो डॉक्टर से मिलकर इस बारे में बात करनी चाहिए। खुद ही डॉक्टर बनने की कोशिश नहीं करनी चाहिए क्योंकि ऐसा करने से आपके सामने ढेरों समस्याएं पैदा हो सकती हैं। (इसे भी पढ़ें: पैराफिमोसिस के इलाज की प्रक्रिया)

निष्कर्ष — Conclusion 

फाइमोसिस एक सामान्य समस्या है। समय पर सही इलाज के जरिए इससे छुटकारा पाया जा सकता है। अगर थोड़ी बहुत सावधानी बरती जाए तो इसका रोकथाम भी संभव है। फाइमोसिस की स्थिति में आपको पेशाब या सेक्स के दौरान लिंग में दर्द और जलन हो सकती है। विशेषज्ञ का मानना है की लंबे समय तक इसे नजरअंदाज करने पर यौन संचारित रोग होने का खतरा रहता है। इसलिए जैसे ही आप खुद में फाइमोसीस  के लक्षण को अनुभव करें, तुरंत डॉक्टर से मिलकर इसकी जांच और इलाज करानी चाहिए। 

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डिस्क्लेमर: यह ब्लॉग सामान्य जानकारी के लिए लिखा गया है| अगर आप किसी बीमारी से ग्रसित हैं तो कृपया डॉक्टर से परामर्श जरूर लें और डॉक्टर के सुझावों के आधार पर ही कोई निर्णय लें|

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